हल्की बारिश ने बनाई थोड़ी प्रकृति संतुलन फिर भी जर्जर सड़क ने दिखाए अपना रूप

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)

एक तरफ जहां भीषण गर्मी एवं हिट वेब के बीच लगातार आम जन मानस के काल कवलित होने की खबर आई दिन मिल रही है वहीं 19/20 की रात हुई हल्की बारिश से मौसम के थोड़ा खुशनुमा होने से लोगों ने राहत की सांस ली है वहीं जर्जर सड़कों ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं। जिसमें भाटपार रानी तहसील के बनकटा विकास खण्ड क्षेत्र के बनकटा बजार, मुख्य सड़क, त्रिगुणानंद जनता इण्टर कालेज चौराहा, सोहनपुर बजार से सोहनपुर ग्राम में जाने वाली मुख्य मार्ग, बंजरिया ग्राम में संतोष पासवान के घर के सामने व रेलवे क्रासिंग के पास में
तथा क्षेत्र के अन्य बजार कस्बे एवं गांव की जगह जगह की अन्य सड़क भी पहली बरसात में ही पानी से लबालब भर चुकी हैं।वैसे तो मौसम के अनुसार सर्दी गर्मी एवं बरसात तीनों ही अति आवश्यक हैं। किन्तु इनमें से यदि कोई भी एक मौसम यदि विपरीत हो जाए तो जन जीवन अस्त-व्यस्त हो ही जाता है। ऐसे में प्रायः कभी गर्मी बढ़ कर तापमान अनियंत्रित होने से लोगों का जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। तो कुछ एक समय में अब हीट वेव के रूप में एक ऐसी लहर चल पड़ी है जब कि तमाम लोगों को इसके चलते तापमान के सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होने से कईयों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। जो मृत्यु दर बढ़ने का एक मुख्य कारण बना है। जब तापमान बढ़ जाता है तब ऐसे में पेड़ पौधे ही थोड़ी राहत देते हैं।पेड़ों की जड़ों से पत्ते तक पौधे पानी को अवशोषित करते हैं जो। जो प्रत्येक जीव धारी ही नहीं धरती को भी शीतलता प्रदान करने का काम करता है।पेड़ के आसपास जो नमी रहती है वो भी शीतल छाया मिलने में सहायक होती है ।पेड़ों में प्रकाश संश्लेषण की वानस्पतिक क्रिया निरंतर चलती रहती है।जो जहरीली गैसों को का अवशोषण करते हैं और प्राण वायु/ ऑक्सीजन देने का कार्य करते रहते हैं। इसके अलावा पेड़ और उनकी पत्तियों से जो वाष्प बनकर उड़ता रहता है। जो पेड़ व अन्य जलीय स्रोतों से पानी वाष्प बनकर बादलों में जाकर मिल जाता है ।वायु में मिला हुआ जलवाष्प ही शीतल पदार्थों के संपर्क में आने से संघनन के कारण ओशाक तक पहुंचता है। जब वायु का ताप ओशाक से नीचे गिर जाता है तब जल वाष्प पानी की बूँदो अथवा ओले के रूप में धरातल पर गिरने लगता है जिसे हम वर्षा कहते हैं ।पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है वर्तमान आधुनिकता की दौड़ में हम पेड़ों को काटते ही चले जा रहे हैं जिसके कारण से वर्षा में भी कमी का होना प्रकाश संश्लेषण क्रिया की कमी होना परिणाम स्वरूप तापमान में वृद्धि तथा कम वर्षा जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त होना कर रहा है। अब सभी को यह संकल्प लेना चाहिए की प्रत्येक व्यक्ति कम से कम 10 पौधे जरूर लगाएं तब जाकर पर्यावरण संतुलन होगा। जिससे सर्दी गर्मी बरसात तीनों का संतुलन बना रहेगा जो ऐसी कुलर की तरफ हम आकर्षित हो रहे हैं उसका ठहराव हो तब ही पाएगा और हम प्रकृति के वातावरण में जीने का आनंद उठा पाएंगे ।

rkpnews@desk

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