गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “राइट्स. जस्टिस. एक्शन. फॉर ऑल वीमेन एंड गर्ल्स.” थीम के अंतर्गत “लीगल अवेयरनेस एंड लीगल हेल्थ” विषय पर गुव्वा हॉल में एक व्यापक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय महिला कल्याण संघ (गुव्वा) एवं महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसमें विभिन्न संकायों की छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम की संरक्षिका कुलपति प्रो. पूनम टंडन रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में महिलाओं के कानूनी अधिकारों की जानकारी को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि कानून महिलाओं को हर प्रकार की हिंसा से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने विशाखा गाइडलाइन के तहत गठित कैंपस की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की भूमिका को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम का संयोजन महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने किया, जबकि गुव्वा की अध्यक्ष प्रो. नंदिता सिंह कार्यक्रम की संयोजक रहीं।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता यशपाल सिंह (पूर्व डीजीसी, क्रिमिनल, गोरखपुर) ने महिलाओं के संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013, दहेज निषेध अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी उत्पीड़न की स्थिति में महिला को प्राथमिकी दर्ज कराने, महिला हेल्पलाइन 1090/181 पर संपर्क करने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
साइबर सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल, मॉर्फिंग, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल वित्तीय ठगी तथा डेटा चोरी जैसे अपराधों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। छात्राओं को मजबूत एवं गोपनीय पासवर्ड का उपयोग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखने, अनजान लिंक, कॉल या संदेशों से सावधान रहने तथा सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में संयम बरतने का सुझाव दिया गया। किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या निकटतम थाने में शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई।
कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. कल्पना, डॉ. तुलिका मिश्रा, डॉ. अफरोजा, डॉ. प्रतिमा जायसवाल एवं डॉ. विस्मिता पालिवाल सहित अनेक प्राध्यापिकाएं उपस्थित रहीं। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने कार्यस्थल सुरक्षा, साइबर अपराध में साक्ष्य संकलन, शिकायत प्रक्रिया, कानूनी परामर्श एवं आत्मरक्षा से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने सरल भाषा में समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यशाला महिला सशक्तिकरण, विधिक साक्षरता एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में विधिक जागरूकता कार्यशाला आयोजित
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