झारखंड के महानायक शिबू सोरेन का निधन, आदिवासी आंदोलन के पुरोधा को राष्ट्र की भावभीनी श्रद्धांजलि

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और आदिवासी राजनीति के करिश्माई चेहरे शिबू सोरेन का सोमवार, 4 अगस्त की सुबह निधन हो गया। 80 वर्षीय सोरेन बीते 19 जून से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और राजधानी दिल्ली के एक अस्पताल में उपचाराधीन थे। लंबी बीमारी और लगातार संघर्ष के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिबू सोरेन, जिन्हें लोग प्यार से ‘गुरुजी’ कहकर पुकारते थे, झारखंड की अलग राज्य की पहचान और आदिवासी हक की लड़ाई के प्रतीक रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक जननायक की तरह की और धीरे-धीरे आदिवासी समाज के सर्वमान्य नेता बन गए। उनका पूरा जीवन झारखंड और यहां के आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान व विकास के लिए समर्पित रहा।

झारखंड राज्य का सपना पूरा करने वाले नेता
शिबू सोरेन का नाम झारखंड अलग राज्य आंदोलन के साथ स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उन्होंने उस दौर में आंदोलन की कमान संभाली जब यह संघर्ष बेहद कठिन और जोखिमभरा था। कई बार जेल गए, विरोध झेला, लेकिन अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। अंततः 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ, जो उनके जीवन के सबसे बड़े सपनों में से एक था।

राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए झारखंड और देश की राजनीति में अपनी छाप छोड़ी। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक के तौर पर उन्होंने आदिवासी राजनीति को एक नई दिशा दी।

जनता के बीच गहरी पैठ
साधारण जीवनशैली, स्पष्टवादिता और जनता से गहरे जुड़ाव ने शिबू सोरेन को विशेष पहचान दिलाई। वे हमेशा गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनते और उन्हें समाधान का भरोसा देते। उनके नेतृत्व में झारखंड के आदिवासी समुदाय की आवाज देश की संसद तक गूंजती रही।

राज्य और देश में शोक की लहर
शिबू सोरेन के निधन की खबर फैलते ही पूरे झारखंड समेत देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, विभिन्न दलों के नेताओं और आम जनता ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। झारखंड सरकार ने उनके सम्मान में राज्य में शोक दिवस घोषित कर तिरंगा झुकाने की घोषणा की है।

आदिवासी अस्मिता के प्रतीक
शिबू सोरेन का जीवन आदिवासी समाज की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। उन्होंने सिखाया कि संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

Editor CP pandey

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