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योग से स्वस्थ मातृत्व का संदेश, महिला चिकित्सालय में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए विशेष शिविर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के तहत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र तथा जिला स्वास्थ्य समिति, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में जिला महिला चिकित्सालय सभागार में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य हेतु योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को योग के माध्यम से शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य अधीक्षक डॉ. जय कुमार, महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. दिव्या रानी सिंह, चिकित्सकगण, स्वास्थ्यकर्मी तथा बड़ी संख्या में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं ने सहभागिता की।
योग प्रशिक्षक नीलम सिंह, विंध्यवासिनी सिंह एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि में किए जाने वाले सुरक्षित एवं लाभकारी योगासनों का अभ्यास कराया। इस दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, बद्धकोणासन, वज्रासन, शशांकासन, मार्जरी-व्याघ्रासन, सुखासन तथा ध्यान का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने विभिन्न आसनों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों की जानकारी भी दी।
शिविर में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम तथा गहरी श्वास-प्रश्वास तकनीकों का भी अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योगाभ्यास गर्भावस्था के दौरान तनाव, चिंता, थकान एवं पीठ दर्द को कम करने में सहायक होता है तथा प्रसव प्रक्रिया को सहज बनाने में मदद करता है। धात्री महिलाओं के लिए योग शारीरिक पुनर्स्थापन, मानसिक संतुलन और ऊर्जा वृद्धि का प्रभावी माध्यम है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि स्वस्थ माँ एक स्वस्थ संतान को जन्म देती है, जो समाज के भावी कुशल नागरिक बनते हैं। योग और प्राणायाम से गर्भवती महिलाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि योग स्वस्थ जीवन की आधारशिला है और मातृत्व के महत्वपूर्ण चरण में महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की विशेष देखभाल आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास महिलाओं को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखने के साथ शिशु के समुचित विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि योग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है। वहीं डॉ. जय कुमार ने कहा कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किया गया योग महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है तथा मातृ एवं शिशु कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. दिव्या रानी सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन “स्वस्थ माँ-स्वस्थ, शिशु-स्वस्थ समाज” के संकल्प तथा नियमित योगाभ्यास के संदेश के साथ हुआ।

rkpNavneet Mishra

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