हे कृष्ण गोविंद, मेरे हरे मुरारे,
हे नाथ नारायण, हे वासुदेवाय,
हे हरये गोपालाय, हे वंशीधराय,
प्रणतक्लेशनाशाय, राधेनाथाय।
आपको सिरपर मुकुट पहने हुये,
हाथों में गदा और चक्र लिये हुये,
वसुदेवपुत्र, चतुर्भुज स्वरूप में ही,
श्रीकृष्ण रूप में देखना चाहता हूँ।
हे श्रीकृष्ण तुम ही आदि देव हो,
पुरातन पुरुष हो, इस संसार के
सबसे बड़े भण्डार के मालिक हो,
तुम ही सब कुछ जानने वाले हो।
तुम ही सब कुछ जानने योग्य हो,
तुम परमधाम, अद्वितीय स्थान हो,
तुमसे मैंने सम्पूर्ण ज्ञान पाया है,
अब मुझे रास्ता भी मिल गया है।
तुम्हारी महिमा, तुम्हारा प्रताप,
जग के कण-कण में व्याप्त है,
आदित्य मैं तुम्हारा कृपापात्र हूँ,
अब मुझे रास्ता भी मिल गया है।
भाटपाररानी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी नेबुधवार को भाटपाररानी तहसील अंतर्गत आईजीआरएस के दो प्रकरणों…
मऊ (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के कोपागंज ब्लॉक स्थित प्राचीन शिव मंदिर लैरोदोनवार के प्रांगण…
शासनादेश के अनुरूप किसानों के हितों की होगी पूरी सुरक्षा,किसी का अहित नहीं होने दिया…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के सेवहा बाबू और…
बदलते शैक्षिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन करें शिक्षक : प्रो. संजीव कुमार…
मगहर बाईपास पर गौरव कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने किया अभिनंदन संत कबीर नगर…