परिवार नियोजन के प्रति सजग हुई आधी आबादी

साल दर साल बढ़ रही महिला नसबंदी के लाभार्थियों की संख्या

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।जिले में परिवार नियोजन के प्रति आधी आबादी सजग है । निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों के कारण जिले में महिला नसबंदी अपनाने वालों की संख्या बढ़ी है।
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि जागरूकता के जरिये परिवार कल्याण कार्यक्रम को गति दी जा रही है। सास, बहू बेटा सम्मेलन और परिवार नियोजन की नियमित योजनाओं के माध्यम से छोटा परिवार सुखी परिवार का सन्देश दिया जा रहा है। जिले में हर शुक्रवार को अंतराल दिवस और हर महीने की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस मनाए जाने के साथ ही समय-समय पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को परिवार नियोजन की महत्ता बताई जाती है। इसके साथ ही माह के एक, नौ, सोलह और चौबीस तारीख को आयोजित होने वाले पीएमएसए डे पर भी आने वाले लाभार्थियों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जाता है ।
सीएमओ ने बताया कि प्रसव पश्चात महिला नसबंदी पर लाभार्थी को तीन हजार रूपये और पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को तीन हजार रूपये की धनराशि दी जाती है। वहीं आशा कार्यकर्ता को पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित करने पर चार सौ रूपये और महिला नसबंदी के लिए प्रेरित करने पर तीन सौ रूपये की धनराशि दी जाती है। जिले में तीन सर्जन डॉ अजय शाही, डॉ मसूद आलम और डॉ अजीत सिंह गौतम द्वारा महिला और पुरुष नसबंदी की सेवा दी जा रही है। इन सभी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में महिला नसबंदी की संख्या 4307 थी जो 2021-22 में बढ़कर 4513 और इसके बाद वर्ष 2022-23 में 4584 हो गई।

नसबंदी दूरबीन विधि से आसान

    जिले में सर्वाधिक नसबंदी करने वाले चिकित्सक डॉ मसूद आलम ने बताया कि   महिला नसबंदी के लिए दो विधियां प्रमुख हैं।  यह नसबंदी लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं (दूरबीन विधि) और चीरा विधि के माध्यम से होती है।    लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में छोटा छेद कर सर्जरी की जाती है। इसके लाभार्थी तेजी से ठीक हो सकते हैं और अपनी सामान्य गतिविधियों में जल्दी लौट सकते हैं। इस विधि में न्यूनतम घाव होता है, दर्द और असुविधा को कम करता है,और जटिलताओं का जोखिम भी कम रहता है।

छोटे परिवार के फायदे जान कराई नसबंदी

    भाटपाररानी ब्लाक के कोठवलिया गांव निवासी संजू देवी (38) बताती हैं कि उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा सात वर्ष और बेटी डेढ़ वर्ष की है। उन्होंने बताया कि बेटी के जन्म के बाद आशा संगिनी रंजना कुशवाहा ने परिवार नियोजन के सभी साधनों के बारे में बताया। सबसे पहले संजू ने त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन का चुनाव किया।  इसके बाद आशा संगिनी ने घर आकर उनके पति सचिन जायसवाल और  उनकी सास को परिवार नियोजन के स्थाई साधन नसबंदी और छोटे परिवार के फायदे के बारे में बताया। यह बात जानकारी होने पर  पति सचिन ने कहा अब हमारा परिवार पूरा है।
rkpNavneet Mishra

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