अंधेरे से उजाले की ओर: कालीचरण घाट को मिली बड़ी सौगात

घाट पर रोशनी का वादा, गांवों पर मंडराता कटान का साया


देवरिया/भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सरयू नदी के किनारे स्थित कालीचरण घाट पर वर्षों से व्याप्त अंधेरे की समस्या अब जल्द समाप्त होने की उम्मीद जगी है। सलेमपुर के सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने घाट पर हाईमास्ट लाइट लगवाने की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत देने का आश्वासन दिया है। यह पहल समाजसेवी जगत जायसवाल के प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने इस जनसमस्या को प्रमुखता से उठाया।
यह मुद्दा धरमेर महलिया में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम में बोलते हुए समाजसेवी जगत जायसवाल ने कालीचरण घाट की गंभीर स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह घाट भले ही सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन आसपास के कई गांवों के लोग अंतिम संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और स्नान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसी स्थान पर निर्भर हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय घाट पर घना अंधेरा छाया रहता है, जिससे लोगों को मोबाइल की टॉर्च या अस्थायी रोशनी के सहारे अपने धार्मिक कार्य करने पड़ते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि कई बार दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है। लंबे समय से यह समस्या जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई जाती रही, लेकिन समाधान नहीं हो सका था।
सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र उनके संसदीय दायरे में न होने के बावजूद, मानवता के आधार पर वे अपने सांसद निधि से कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य कराएंगे। उनके इस आश्वासन से उपस्थित लोगों में संतोष और उम्मीद की भावना देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान एक और गंभीर मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। उदय प्रताप सिंह ने सरयू नदी के किनारे प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आसपास के गांवों—भागलपुर, जीरासो, छिछूपुर, इशारू और धरमेर महलिया—पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।

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उन्होंने कहा कि अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इससे नदी के किनारों पर कटान बढ़ता जा रहा है, जो ग्रामीणों की जमीन और आवास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भय और असुरक्षा का माहौल है।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने भी दोनों मुद्दों पर अपनी सहमति जताई और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि एक ओर जहां घाट पर रोशनी की व्यवस्था मानवता और सम्मान से जुड़ा विषय है, वहीं अवैध खनन रोकना पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट की घोषणा जहां एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है, वहीं सरयू किनारे अवैध खनन का मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन दोनों मुद्दों पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है।

Editor CP pandey

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