खेतों की नापजोख अब होगी हाईटेक
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अपर आयुक्त (न्यायिक) अजय राय द्वारा मंडल की सभी तहसीलों के तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को ज़ी एन एस एस आधारित आधुनिक खेत नाप उपकरण (ट्रिम्बल कैटालिस्ट DA2) वितरित किए गए। इन उपकरणों की कुल लागत पांच लाख रुपये से अधिक है।
इस पहल का उद्देश्य खेतों की नापजोख में सटीकता लाना, भूमि विवादों को कम करना और राजस्व कार्यों को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है।
मंडल की इन तहसीलों को मिला लाभ
गोरखपुर मंडल के चारों जनपदों की तहसीलों को यह उपकरण उपलब्ध कराए गए—
गोरखपुर: सदर, बांसगांव, गोला, खजनी, सहजनवा, कैंपियरगंज
देवरिया: देवरिया सदर, बरहज, सलेमपुर, रुद्रपुर, भाटपार रानी
कुशीनगर: पडरौना, कसया, हाटा, तमकुहीराज, खड्डा
महाराजगंज: सदर, नौतनवा, फरेंदा (आनंदनगर), निचलौल
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
GNSS तकनीक उपग्रह के माध्यम से जमीन की लोकेशन को बेहद सटीक तरीके से निर्धारित करती है। इसके जरिए खेतों की नापजोख अब डिजिटल माध्यम से और वास्तविक समय (रीयल टाइम) में की जा सकेगी। इससे पारंपरिक माप प्रणाली की कमियों को दूर किया जा सकेगा।
राजस्व विभाग के इन कार्यों में होगा उपयोग
खेतों और प्लॉट की सटीक पैमाइश
जमीन की सीमा निर्धारण (डिमार्केशन)
भूमि विवादों के समाधान में तेजी
राजस्व अभिलेखों का मिलान और अपडेट
सरकारी योजनाओं के लिए भूमि चिन्हांकन
अवैध कब्जों की पहचान
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
नई तकनीक से किसानों को अब—
कम समय में सही माप उपलब्ध होगा
विवादों में कमी आएगी
बार-बार नाप कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
अपर आयुक्त (न्यायिक) ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपकरणों का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। साथ ही उनके रखरखाव और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि यह तकनीक राजस्व विभाग को आधुनिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रशासन को बेहतर परिणाम की उम्मीद
अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और भूमि संबंधी विवादों के निपटारे में उल्लेखनीय सुधार होगा।
