लोककला से रंगमंच तक, पूर्वांचल की प्रतिभाओं को मिला स्थायी सांस्कृतिक मंच

पूर्वांचल को मिला सांस्कृतिक धरोहर का नया मंच, 300 साल पुराने बरगद की छांव में शुरू हुआ विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को नया मंच देने की दिशा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल परिसर में विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर का लोकार्पण किया गया। करीब 300 वर्ष पुराने विशाल बरगद के वृक्ष की छांव में विकसित यह ओपन एयर एम्फीथिएटर अब कलाकारों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक संस्थाओं और युवाओं की रचनात्मक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उद्घाटन के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में बजाज बिऑन्ड के चीफ सीएसआर प्रोजेक्ट्स एवं प्रिंसिपल ऑफिसर श्याम मनियार ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति से होती है। उन्होंने बताया कि संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आजीविका और सामुदायिक सशक्तीकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रही है। पूर्वांचल में इस एम्फीथिएटर की स्थापना का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक स्थायी एवं आधुनिक मंच उपलब्ध कराना है।
जागृति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि पूर्वांचल लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत और रंगमंच जैसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है। यह एम्फीथिएटर केवल एक मंच नहीं बल्कि सांस्कृतिक संवाद, कला संवर्धन और नई प्रतिभाओं को अवसर देने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि देवरिया और आसपास के जिलों में इस तरह का खुला सांस्कृतिक मंच उपलब्ध नहीं है, जिससे क्षेत्रीय कलाकारों को अब अभ्यास और प्रस्तुति के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा।
करीब 465 वर्ग फुट क्षेत्रफल में निर्मित यह मंच लगभग 300 वर्ष पुराने बरगद और सुंदर कमल कुंड के बीच आकर्षक ढंग से तैयार किया गया है। मंच के सामने लगभग 500 दर्शकों के बैठने की क्षमता वाली सीढ़ीनुमा दर्शक दीर्घा बनाई गई है। शाम के समय रंगीन प्रकाश व्यवस्था, प्राकृतिक वातावरण और बरगद की लटकती जटाएं इस पूरे परिसर को विशेष आकर्षण प्रदान करती हैं।
एम्फीथिएटर में भविष्य में लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, नाटक, साहित्यिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां तथा स्थानीय संस्थाओं के आयोजन किए जाएंगे। इसके अलावा योग, ध्यान और रचनात्मक कार्यशालाओं का आयोजन भी यहां संभव होगा। सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और युवा इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी यह स्थान एक बेहतरीन लोकेशन के रूप में विकसित होने की संभावना रखता है।
पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला यह एम्फीथिएटर आने वाले समय में कला, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है।

Editor CP pandey

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