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पैंक्रियाटिक कैंसर के शुरुआती लक्षण: पैरों में दिखें ये 4 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान की आदतों के चलते कैंसर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक माना जाता है पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer), जिसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में घर बना लेती है और शुरुआती चरण में पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है।

हाल के शोध बताते हैं कि पेट के अलावा पैरों में दिखने वाले कुछ लक्षण इस जानलेवा बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर इन संकेतों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो पैंक्रियाटिक कैंसर का समय पर निदान और इलाज संभव है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के 4 शुरुआती लक्षण जो पैरों में दिखते हैं

  1. लगातार दर्द या भारीपन का अहसास
    अगर पैरों में बिना किसी कारण के लगातार दर्द या सूजन महसूस हो रही है, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नसों में खून का थक्का जमने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति पैंक्रियाटिक कैंसर से जुड़ी होती है, क्योंकि कैंसर शरीर की ब्लड क्लॉटिंग प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
  2. अचानक सूजन आना
    एक या दोनों पैरों में अचानक और बिना वजह सूजन आना भी खून के थक्के या ट्यूमर के दबाव के कारण हो सकता है। अगर यह सूजन दर्द, लालिमा या गर्माहट के साथ हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  3. पैरों में लालिमा और गर्माहट
    पैरों का रंग गहरा लाल या बैंगनी दिखना और उनमें असामान्य गर्माहट महसूस होना रक्त प्रवाह में रुकावट या कैंसर सेल्स की गतिविधि का परिणाम हो सकता है।
  4. नसों में दबाव या झनझनाहट
    पैरों में बार-बार झनझनाहट, भारीपन या जलन का अहसास भी शरीर में टॉक्सिन्स और ब्लड फ्लो रुकने का संकेत हो सकता है, जो पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरुआती अवस्था में देखा गया है।

क्यों जरूरी है इन लक्षणों को पहचानना

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, पैंक्रियाटिक कैंसर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह अक्सर देर से पहचाना जाता है, जब तक यह शरीर में फैल चुका होता है। ऐसे में अगर पैरों में दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें हल्के में न लें। समय पर डॉक्टर से जांच कराने पर बीमारी का प्रारंभिक निदान और सफल उपचार संभव है।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज़ और मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी लक्षण के दिखने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

Karan Pandey

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