नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। देश की राजधानी दिल्ली में रेलवे ट्रैक अब मौत का जाल बनते जा रहे हैं। हर दिन औसतन चार लोग रेल हादसों का शिकार होकर जान गंवा रहे हैं। रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच दिल्ली में 947 लोगों की मौत और 211 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा हादसे दिल्ली–शाहदरा और दिल्ली–रोहतक रूट पर दर्ज किए गए हैं।
छह साल में 7,517 मौतें
रेलवे रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले छह वर्षों (2020 से अगस्त 2025 तक) में 7,517 लोग रेल हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। बावजूद इसके, रेलवे और सुरक्षा बलों के प्रयासों से दुर्घटनाओं में कोई बड़ी कमी नहीं आई है।
आंकड़े बताते हैं भयावह तस्वीर
वर्ष दुर्घटनाएं घायल मृतक
| वर्ष | दुर्घटनाएं | घायल | मृतक |
| 2020 | 801 | 112 | 689 |
| 2021 | 1373 | 195 | 1180 |
| 2022 | 1893 | 301 | 1592 |
| 2023 | 1871 | 326 | 1559 |
| 2024 | 1867 | 351 | 1550 |
| 2025 (जनवरी से अगस्त तक) | 1134 | 211 | 947 |
क्यों हो रहे हैं इतने हादसे?
लोग फुट ओवरब्रिज या अंडरपास की बजाय सीधे ट्रैक पार करते हैं।
कई लोग हेडफोन लगाकर चलते हैं, जिससे ट्रेन की आवाज़ सुनाई नहीं देती।
नशे की हालत में लोग रेलवे ट्रैक पर सो जाते हैं।
बस्तियों में रहने वाले लोग ट्रैक के पास रहकर अनजाने में हादसे का शिकार हो जाते हैं।
बचाव के उपाय
हमेशा फुट ओवरब्रिज या अंडरपास का उपयोग करें।
ट्रैक पार करते समय हेडफोन न लगाएं।
नशे में रेलवे ट्रैक से दूर रहें।
रेलवे द्वारा लगाए गए चेतावनी बोर्ड और सिग्नल का पालन करें।
स्कूल, कॉलेज और बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) समय-समय पर कार्रवाई तो करता है, लेकिन जब तक लोग अपनी आदतें नहीं बदलेंगे, हादसों का सिलसिला थमना मुश्किल है।
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