गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सात शोधार्थियों ने भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के प्रतिष्ठित शोध अनुदान के लिए चयनित होकर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। यह अनुदान लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की दो चरणों वाली चयन प्रक्रिया के बाद प्रदान किया जाता है, जिससे इसकी प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ जाती हैं।
इस वर्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थी शुभांगी मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव, सत्या निषाद, कुमारी संजू और अनन्या त्रिपाठी चयनित हुए हैं। वहीं प्राचीन इतिहास विभाग की दो शोधार्थी मनीषा कुमारी और रोशनी वर्मा ने भी सफलता प्राप्त की है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों का इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चयन हुआ था।
मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी तथा प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने सभी चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए इसे विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध संस्कृति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विभाग में विकसित सकारात्मक अकादमिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य का परिणाम है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सभी सफल शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि ये शोधार्थी इतिहास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगे और विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचा करेंगे।
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