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समाजसेवियों ने उठाई आवाज
जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा)। समाजसेवी सनी कपाही, टीम “मे आई हेल्प यू” के अध्यक्ष पवन शर्मा तथा साथी क्लब की समाजसेवी मोनिका शर्मा ने प्रदेश भूमि चैनल के माध्यम से देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में कथित चोरी, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से एक सशक्त “सनातन बोर्ड” के गठन की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का संचालन, संरक्षण तथा श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान का प्रबंधन प्रतिष्ठित संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और साधु-संतों के मार्गदर्शन में होना चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत हो।
समाजसेवियों ने “श्री माता वैष्णो देवी” श्राइन बोर्ड में कथित नकली चांदी प्रकरण, अयोध्या के श्री राम मंदिर में चोरी तथा हरिद्वार स्थित माता मनसा देवी मंदिर में चोरी जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए इन मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा से भी संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।
समाजसेवियों ने वर्तमान अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हुई असुविधाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि भगवती बेस कैंप में पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कई श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। उन्होंने कानपुर निवासी श्रद्धालु अमित की सांप के काटने से हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए प्रशासन से यात्रा के दौरान आवास, सुरक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान का उपयोग धर्मार्थ कार्यों, गौसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता तथा समाज कल्याण के कार्यों में पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि कहीं भी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाजसेवियों ने केंद्र सरकार से देशभर के प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण, सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन के लिए शीघ्र “सनातन बोर्ड” गठित करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि बोर्ड में संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, अखाड़ों के प्रतिनिधियों और योग्य विशेषज्ञों को प्रमुख भूमिका दी जानी चाहिए।
अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि भगवान सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होते हैं, न कि धन-दौलत से। साथ ही धार्मिक संस्थानों में नियमित ऑडिट, जवाबदेही और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने तथा मंदिरों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की मांग की।
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