टीबी के खिलाफ डीडीयू की मुहिम: जागरूकता संग पोषण का संबल

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग द्वारा विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर एक व्यापक जागरूकता एवं सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिवस वर्ष 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा क्षय रोग के जीवाणु की खोज की स्मृति में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को गति देना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्ष 2026 की थीम “यस! वी कैन एंड टीबी: कमिट, इन्वेस्ट, डिलीवर” के तहत इस वर्ष यह संदेश दिया गया कि ठोस संकल्प, पर्याप्त निवेश और प्रभावी क्रियान्वयन से टीबी का उन्मूलन संभव है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मवर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित श्रृंखला के अंतर्गत सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान टीबी मरीजों को प्रोटीन युक्त पोषण पोटली वितरित की गई, जिसमें दालें, चना, सोया उत्पाद एवं अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल रही, ताकि रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जा सके और उनके उपचार को प्रभावी बनाया जा सके।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि क्षय रोग उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार और जागरूकता टीबी नियंत्रण के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने में सहायक होते हैं।
मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने स्वच्छता, पोषण और सामुदायिक भागीदारी को टीबी उन्मूलन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे दवाइयों का असर भी बेहतर होता है। साथ ही युवाओं से समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि “टीबी पूर्णतः इलाज योग्य रोग है, बशर्ते मरीज नियमित रूप से दवा लें और उपचार अधूरा न छोड़ें।” उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनसहभागिता की अहम भूमिका पर बल दिया। इस अवसर पर उनकी टीम भी उपस्थित रही।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि रोगियों को पोषण सहयोग देकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायता करना भी है। उन्होंने विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
प्रो. एस.एस. दास (सेवानिवृत्त) ने शिक्षा और स्वास्थ्य के समन्वय को आवश्यक बताते हुए विश्वविद्यालयों की भूमिका को सराहा। संतोष अग्रवाल (प्रबंध निदेशक, गैलेंट ग्रुप) ने निजी क्षेत्र की सामाजिक जिम्मेदारी पर बल दिया, जबकि अचिंत्य लाहिड़ी ने युवाओं से जागरूकता अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति, फार्मेसी विभाग के निदेशक डॉ. अमित निगम, डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. गार्गी एवं डॉ. गरिमा सहित अनेक शिक्षक, विशेषज्ञ, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को टीबी के लक्षण, जांच, उपचार एवं बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई और यह संदेश दिया गया कि समय पर जांच, नियमित दवा और उचित पोषण से इस रोग को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का सफल संचालन गृह विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें प्राध्यापिकाओं, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा।

rkpNavneet Mishra

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