डॉ. तूलिका मिश्रा की एआई तकनीक को यूके से पेटेंट, पौधों से औषधीय तत्व पहचानने में मिलेगी नई दिशा

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तूलिका मिश्रा ने एक ऐसी अत्याधुनिक एआई तकनीक विकसित की है, जो पौधों को स्कैन कर उनमें मौजूद औषधीय तत्वों की पहचान कर सकती है। इस अभिनव रिसर्च और डिजाइन को यूनाइटेड किंगडम से पेटेंट प्राप्त हुआ है, जिससे दवा खोजने की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और किफायती बनने की उम्मीद है।
इस शोध कार्य में डॉ. तूलिका मिश्रा के साथ देश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने लगभग दो वर्षों तक गहन अध्ययन किया। इस दौरान करीब 50 औषधीय पौधों की स्क्रीनिंग कर उनके जैव-सक्रिय यौगिकों का विश्लेषण किया गया। सकारात्मक और प्रभावी परिणाम मिलने के बाद इस तकनीक के लिए पेटेंट आवेदन किया गया, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।
यह रिसर्च औषधीय पौधों में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स की एआई आधारित त्वरित पहचान पर केंद्रित है। विकसित तकनीक एक उन्नत प्रणाली के रूप में कार्य करती है, जो पौधों के विभिन्न यौगिकों की तेजी से स्क्रीनिंग कर उनकी संभावित औषधीय उपयोगिता का आकलन करती है। यह पारंपरिक वनस्पति ज्ञान और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में औषधीय अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में नई दिशा प्रदान करेगा।
डॉ. तूलिका मिश्रा के अनुसार यह एक डिजाइन पेटेंट है, जिसमें एआई तकनीक के माध्यम से पौधों में मौजूद बायो-ऑब्जेक्टिव केमिकल्स जैसे अल्कालॉयड, स्टेरॉयड, फिनॉल और टैनिन्स की पहचान संभव है।
गौरतलब है कि यह डॉ. तूलिका मिश्रा का पांचवां पेटेंट है, जिसमें एक कॉपीराइट भी शामिल है। इस शोध में डॉ. सीमा मंडल, डॉ. परशावेनी बालाराजू, राज्यलक्ष्मी मिश्रा, डॉ. सीमा नारखेड़े, डॉ. थोडूर मनोहरन विजयलक्ष्मी और डॉ. रुचिका श्रीवास्तव ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता न केवल संस्थान बल्कि देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है। एआई आधारित यह नवाचार भविष्य में अनुसंधान के नए आयाम स्थापित करेगा।

rkpNavneet Mishra

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