निर्माण स्थल बना मौत का जाल—लिंटर गिरने से मजदूर मलबे में दबे

निर्माणाधीन मैरिज हॉल का लिंटर ढहा, मलबे में दबे मजदूर—एक की हालत गंभीर


शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जलालाबाद थाना क्षेत्र के याकूबपुर में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। फर्रुखाबाद-जलालाबाद स्टेट हाईवे स्थित गंगा चिकित्सालय के पास बन रहे एक मैरिज हॉल का लिंटर अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मौके पर काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और तीन मजदूर मलबे में दबकर घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब निर्माणाधीन भवन में लिंटर डाला जा रहा था और नीचे शटरिंग का कार्य चल रहा था। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज आई और देखते ही देखते पूरा लिंटर नीचे गिर गया। आसपास मौजूद लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की तत्परता से मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया।

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घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इस दौरान एक नया विवाद भी सामने आया। सूत्रों का दावा है कि मैरिज हॉल का मालिक एक निजी अस्पताल से जुड़ा डॉक्टर है और उसने मामले को दबाने के प्रयास में घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय सीधे अपने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इस बात को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही अस्पताल पहुंचकर स्टाफ से पूछताछ भी की गई। थाना प्रभारी राजीव तोमर ने बताया कि तीन से चार मजदूरों के घायल होने की सूचना है, जिनका इलाज जारी है। हालांकि, एक मजदूर की हालत गंभीर बताई जा रही है और उस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
प्राथमिक जांच में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि लिंटर गिरने जैसी घटनाएं आमतौर पर कमजोर शटरिंग, घटिया सामग्री या तकनीकी लापरवाही के कारण होती हैं। यदि सुरक्षा मानकों का सही पालन नहीं किया गया, तो यह हादसा मानव जीवन के प्रति गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है।

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मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे थे, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया। इस तरह की घटनाएं न केवल मजदूरों की जान को जोखिम में डालती हैं, बल्कि निर्माण क्षेत्र में नियमों की अनदेखी को भी उजागर करती हैं।
मीडिया के मौके पर पहुंचने पर भवन मालिक ने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे संदेह और गहरा गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।

Editor CP pandey

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