नौकरी दिलाने और बड़े अधिकारियों से करीबी का झांसा देकर करता था ठगी, पुलिस ने मोबाइल व दस्तावेज किए बरामद
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सरकारी नौकरी दिलाने तथा उच्च अधिकारियों से करीबी संबंध होने का झूठा दावा कर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को ठूठीबारी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपी के विरुद्ध करीब 63 लाख रुपये की धोखा-धड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने उसके कब्जे से कई पहचान संबंधी दस्तावेज और मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में जनपद में वांछित एवं फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी निचलौल के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष ठूठीबारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी स्वयं को विभिन्न विभागों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लेता था। वह सरकारी नौकरी दिलाने, बड़े अधिकारियों से सीधा संपर्क होने तथा विभिन्न सरकारी कार्यों को कराने का भरोसा देकर लोगों से मोटी रकम ऐंठता था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने कई लोगों को झांसे में लेकर उनसे धनराशि प्राप्त की और करीब 63 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मुकदमा संख्या 77/2026, धारा 419, 420 एवं 467 भादवि के तहत दर्ज मामले में आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इसी बीच मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसे ठूठीबारी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से तीन आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस तथा दो वन प्लस मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन का उपयोग वह लोगों को भ्रमित करने तथा अपने प्रभाव का झूठा प्रदर्शन करने के लिए करता था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनीत कुमार सिंह पुत्र चंद्रिका सिंह निवासी बासपार कोठी, थाना श्यामदेंउरवा, जनपद महराजगंज के रूप में हुई है। उसकी आयु लगभग 30 वर्ष बताई जा रही है तथा वह एम.कॉम तक शिक्षित है।
पुलिस ने आरोपी से आवश्यक पूछ-ताछ के बाद उसे महराजगंज न्यायालय में पेश कर दिया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
