Category: लेख

जम्मू-कश्मीर में नया विवाद: शिक्षकों को कुत्तों की पहचान का आदेश — शिक्षा की गरिमा पर सवाल

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में शिक्षक परंपरागत रूप से बच्चों के भविष्य का निर्माता,समाज का मार्गदर्शक और राष्ट्र के बौद्धिक स्तंभ माने जाते हैं। शिक्षा का कार्य केवल ज्ञान…

नारे गूंजे, नीतियां डगमगाईं: विकास की राह में क्यों उलझा शासन का असली एजेंडा?

कैलाश सिंह महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा) भारतीय लोकतंत्र में नारे अक्सर जनभावनाओं को जगाने का आसान साधन बने हैं, लेकिन जब शासन की दिशा नीतिगत मजबूती के बजाय नारेबाज़ी पर…

बाबा राघव दास: जनसेवा और करुणा के शिखर पुरुष ‘पूर्वांचल के गांधी’

जयन्ती पर विशेष नवनीत मिश्र बाबा राघव दास आधुनिक भारत के उन दुर्लभ महापुरुषों में शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने साधु जीवन को केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित न रखकर…

परंपरा, रोजगार और नवाचार का संगम है अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह

अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसंबर): भारतीय कला, कारीगरों और परंपरा का राष्ट्रीय उत्सव अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08–14 दिसंबर) भारत के शिल्पकर्मियों, कलाकारों और परंपरागत हस्तकला विरासत का राष्ट्रीय…

बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का वैश्विक संकल्प

यूनीसेफ़ दिवस (विश्व बालकोष दिवस) हर वर्ष 11 दिसंबर को दुनिया भर में यूनीसेफ़ दिवस (विश्व बालकोष दिवस) मनाया जाता है। यह दिन उन सभी बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और…

भारत के उत्कृष्ट रत्न जिन्होंने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी

11 दिसंबर की अनंत स्मृतियाँ भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक, दार्शनिक, संगीत और प्रशासनिक इतिहास में 11 दिसंबर की तिथि कई महान विभूतियों के अवसान की साक्षी रही है। आइए, उन…

बालासाहेब देवरस : संगठन, समरसता और राष्ट्रभाव के जीवंत प्रणेता

✍️ नवनीत मिश्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहेब देवरस वह व्यक्तित्व हैं जिन्होंने संघ के कार्य को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया और संगठन को राष्ट्रजीवन की…

देश की आत्मा को स्वर देने वाले जनकवि- कवि प्रदीप

✍️ पुनीत मिश्र जब भी भारत में देशभक्ति की धुनें गूंजती हैं, जब भी किसी समारोह में राष्ट्रप्रेम की भाव-लहर उठती है और जब भी लोगों की आंखें वीरों के…

शादी का बोझ या सामाजिक शान? दिखावे की दौड़ में परिवार क्यों हो रहे कर्ज़ के गुलाम

सोमनाथ मिश्रा की रिपोर्ट | राष्ट्र की परम्परा भारत में विवाह को लेकर बदलते सामाजिक परिवेश ने एक नई चिंता को जन्म दिया है—शादी का बोझ। आधुनिकता और डिजिटल युग…

दुनिया को बदल देने वाली घटनाओं की अमिट कहानी

10 दिसंबर का इतिहास 10 दिसंबर केवल तारीख नहीं, बल्कि विश्व राजनीति, विज्ञान, खेल, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक परिवर्तनों का जीवंत दर्पण है। इस दिन कई ऐसी घटनाएँ घटीं, जिन्होंने…

राजनीतिक भेदभाव की चढ़ी भेंट: लोकतंत्र की आत्मा पर गहरा आघात

डॉ. सतीश पाण्डेय महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की पहचान समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता से होती है, लेकिन आज यह मूलभूत मूल्य राजनीतिक भेदभाव की भेंट चढ़ते दिखाई दे रहे हैं।…

राष्ट्र का उत्थान–पतन तय करते हैं तीन आधार: स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा

कैलाश सिंह महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। किसी भी राष्ट्र की मजबूती ऊंची इमारतों, बड़े बजट और नारों से नहीं, बल्कि उसकी जनता के जीवन स्तर से आंकी जाती है। यह जीवन…

जो अमेरिका से करें प्यार, वे डॉलर से कैसे करें इंकार

व्यंग्य-आलेख संजय पराते डॉलर चढ़ रहा है और रुपया लुढ़क रहा है। रूपये के चढ़ने से डॉलर लुढ़के या न लुढ़के, लेकिन अर्थशास्त्र की भाषा में, डॉलर के चढ़ने का…

भारतीय व्यवस्था पर अविश्वास के कारण

स्वामी करपात्री जी महाराज भारत की शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, रक्षा, सेवा और उत्सव त्योहार जैसी व्यवस्थाएँ सदियों से समाज को संतुलित रूप में दिशा देती रही हैं। ये तंत्र केवल…

वायु प्रदूषण नियंत्रण: सरकार ने शुरू की सख्त कार्रवाई, ओपन बर्निंग पर लगेगा ₹5000 तक जुर्माना

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण को नियंत्रण में रखने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त कदमों की घोषणा की है। उन्होंने एक्स…