Category: लेख

पत्तों की भाषा में जीवन का मंत्र, वनस्पतियों और मानव का सनातन रिश्ता

डॉ. सतीश पाण्डेय महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जब शब्द थक जाते हैं और सभ्यता मौन हो जाती है, तब प्रकृति बोलती है। उसकी यह भाषा न किसी लिपि में बंधी…

“मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ”: राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का अमर संदेश

काकोरी ट्रेन एक्शन अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को स्मरण करते हुए नवनीत मिश्र का आलेख भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का क्रम नहीं है, वह उन…

कैंसर बनाम भारत : स्वास्थ्य संकट से न्यायिक चेतावनी तक, एक निर्णायक दौर

कैंसर बीमारी का बढ़ता प्रकोप- 21वीं सदी की वैश्विक महामारी- सुप्रीम कोर्ट की हस्तक्षेपकारी भूमिका, एक ऐतिहासिक मोड़-एक समग्र विश्लेषण कैंसर बीमारी-भारत की चुनौतियाँ और नीति सुधार की अनिवार्यता गोंदिया…

राजनीतिक व्यंग्य में सत्ता, इतिहास और राष्ट्रवाद की नई बहस

भारतीय राजनीति में राजनीतिक व्यंग्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सत्ता के चरित्र, उसके अहंकार और इतिहास के पुनर्लेखन की प्रवृत्तियों को उजागर करने का प्रभावशाली माध्यम रहा है।…

संचार साथी: खोए मोबाइल की सुरक्षा या हर नागरिक पर डिजिटल नज़र?

संचार साथी साइबर सुरक्षा या साइबर निगरानी? लेखक-प्रबीर पुरकायस्थ मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं, प्राइवेसी समूहों और मोबाइल फोन बनाने वालों के विरोध के बाद, नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने निर्देश को…

विजय दिवस: शौर्य, संकल्प और राष्ट्रगौरव का अमर अध्याय

नवनीत मिश्र 16 दिसंबर भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब पराक्रम ने अत्याचार को परास्त किया और न्याय ने इतिहास की धारा मोड़ दी। 1971 में ढाका के…

इतिहास के पन्नों में 16 दिसंबर: जब महान आत्माएँ अमर स्मृतियों में विलीन हुए

इतिहास केवल तिथियों का क्रम नहीं होता, बल्कि उन व्यक्तित्वों की जीवंत स्मृति भी होता है जिन्होंने अपने कर्म, साहस और सेवा से मानवता को दिशा दी। 16 दिसंबर ऐसी…

जन्मतिथि जो बनी प्रेरणा की पहचान

🔶 16 दिसंबर: इतिहास को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों का जन्मदिन 🔶 जब एक तारीख ने राजनीति, खेल, अध्यात्म और पुरातत्त्व को अमर नाम दिए इतिहास की कुछ तिथियाँ…

भावनाओं, संघर्ष और परिवर्तन की गूंज: 16 दिसंबर का इतिहास जो मानवता को झकझोर देता है

इतिहास केवल बीती तारीखों का संकलन नहीं होता, बल्कि वह मानव सभ्यता की चेतना, संघर्ष, उपलब्धियों और त्रासदियों का जीवंत दस्तावेज़ होता है। 16 दिसंबर का इतिहास ऐसा ही एक…

शादी के बाद प्रेमी के साथ भागने के मामले: बदलते सामाजिक मूल्यों और रिश्तों की नई परिभाषा

भारतीय समाज में विवाह को लंबे समय तक एक पवित्र, अटूट और सामाजिक दायित्व से जुड़ी संस्था माना जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में शादी के बाद प्रेमी…

“बापू के नाम पर राजनीति: हिंदू राष्ट्र परियोजना और ग्रामीण गरीबों पर प्रहार”

महात्मा अब बापू बने जिनके रूप अनेक लेखक-संजय पराते इस देश में महात्मा केवल एक है — महात्मा गांधी, रघुपति राघव राजाराम वाले महात्मा गांधी। वहीं महात्मा गांधी, जो इस…

विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 : भारत में समय-आधारित बिजली मूल्य निर्धारण की संवैधानिक और नीतिगत रूपरेखा

विज़न 2047 में टाइम-ऑफ-डे टैरिफ व्यवस्था भारत को न केवल ऊर्जा दक्ष बनाएगी, बल्कि उसे वैश्विक ऊर्जा संक्रमण की मुख्यधारा में भी स्थापित करेगी- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र…

मूर्खता के मंत्र से धूर्तता की साधना

आलेख-बादल सरोज इस सप्ताह शुरुआत राजनाथ सिंह ने की। उन्हें कुछ लोग उनकी पार्टी के रेवड़ में अलग तरह की – कम मरखनी, कम कटखनी प्रजाति — का मानते हैं।…

राजनीति में रिश्तों का टूट रहा दम—स्वार्थ की आंच में जलती मानवीय संवेदनाएं

कैलाश सिंह महराजगंज( राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय लोकतंत्र की जड़ें सामाजिक संबंधों, विश्वास और संवाद की संस्कृति पर टिकी रही हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में राजनीति एक ऐसे मोड़…

आवारा कुत्तों की गिनती से क्लासरूम तक: शिक्षक बोझ का सच

सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा स्तर के लिए कौन जिम्मेदार? शिक्षक या सरकार: ‘शिक्षक पर बढ़ता गैर-शैक्षणिक बोझ’ बना राष्ट्रीय बहस भारत में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता लगातार सवालों के…