Category: लेख

फायर सेफ्टी से लेकर बिल्डिंग बायलॉज तक—क्यों फेल हो रही है भारत की सुरक्षा व्यवस्था?

भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों में सुरक्षा संकट- भ्रष्टाचार की मिलीभगत क़ी संरचनात्मक भूमिका? गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत तेज़ी से शहरी विकास,बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनसंख्या की बढ़ती आर्थिक भागीदारी…

चाइल्ड लेबर—कानून मौजूद, फिर भी बच्चे मजदूर क्यों? भारत की सच्चाई उजागर करती विशेष रिपोर्ट

(राष्ट्र की परम्परा) भारत में चाइल्ड लेबर पर सख्त कानून मौजूद हैं, फिर भी सड़कों, ढाबों, फैक्ट्रियों और घरों में आज भी हजारों मासूम बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं।…

स्मार्ट रिवीजन रणनीति: परीक्षा में टॉप करने के लिए अपनाएँ ये वैज्ञानिक तरीके

राष्ट्र की परम्परा के लिए मिथलेश मिश्रा परीक्षा का समय आते ही अधिकतर छात्र केवल किताबें खोलकर बार-बार पढ़ने लगते हैं। लेकिन आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफल वही होता…

जब एक दिन बना विश्व इतिहास का निर्णायक मोड़

“9 दिसंबर — जब इतिहास ने करवट बदली, शौर्य, त्रासदी और राष्ट्रों की तक़दीर का दिन” 9 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि…

सुधार के दावों के बीच आम जनता क्यों झेल रही भ्रष्टाचार की मार

(राष्ट्र की परम्परा) देश में बीते कुछ वर्षों के दौरान शासन-प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, सिंगल विंडो सिस्टम और ऑनलाइन सेवाओं की शुरुआत की…

कैंसर का खतरा घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक: गाजर क्यों माना जाता है हेल्थ का सुपरफूड? जानें इसके चमत्कारी फायदे

हेल्थ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सर्दियों में खूब खाई जाने वाली गाजर सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि पोषण से भरपूर एक ऐसी जड़ वाली सब्जी है, जो पूरे शरीर…

वायरल कंटेंट का कहर: क्या सोशल मीडिया बन रहा है नई अदालत?

सोमनाथ मिश्रा की कलम से (राष्ट्र की परम्परा) आज की डिजिटल मीडिया पर राय बनाना और फैसले सुनाना आम हो गया है। कुछ सेकंड की वीडियो क्लिप, अधूरी जानकारी या…

बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर कवि और बहुआयामी साहित्यकार

हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास में बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ उन रचनाकारों में प्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी कविता, पत्रकारिता और चिंतन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक धार प्रदान…

बदलते भारत की सैन्य सोच के शिल्पकार: जनरल बिपिन रावत

पुनीत मिश्र भारत के आधुनिक सैन्य इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल अपनी पदस्थापना से नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण और निर्णायक नेतृत्व से एक युग को प्रभावित…

तेज बहादुर सप्रू: न्यायपरक विचारधारा और राष्ट्रनिर्माण का उज्ज्वल स्वर

नवनीत मिश्र भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल उन वीर सेनानियों का स्मरण नहीं करता जिन्होंने बंदूकों और नारों के साथ लड़ाई लड़ी, बल्कि उन विद्वान चिंतकों, समाज सुधारकों…

बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर कवि और बहुआयामी साहित्यकार

हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास में बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ उन रचनाकारों में प्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी कविता, पत्रकारिता और चिंतन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक धार प्रदान…

62 वर्ष की रिटायरमेंट: राहत या रोजगार संकट?

गोंदिया – भारत सरकार द्वारा कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर गंभीरता से संभावित विचार किए जाने की हालिया जानकारी ने पूरे देश क़ी मीडिया…

बेरोजगारी से अपराध तक: युवाओं का बिगड़ता संतुलन

युवाओं का भविष्य खतरे में: बढ़ती बेरोजगारी, मानसिक तनाव और अपराध की ओर बढ़ता समाज शशांक भूषण मिश्र द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए भारत आज जनसंख्या के युवा बहुल…

सशस्त्र सेना झंडा दिवस: वीरों के सम्मान और हमारे कर्तव्य का राष्ट्रीय उत्सव

✍️ नवनीत मिश्र हर वर्ष 7 दिसंबर को मनाया जाने वाला सशस्त्र सेना झंडा दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, कृतज्ञता और सैनिकों के प्रति अटूट…

अरावली की सिकुड़ती ढाल और दिल्ली का डूबता पर्यावरण

अरावली संरक्षण के दायरे को 100 मीटर की परिभाषा से सीमित कर देना दिल्ली-एनसीआर की हवा, पानी और तापमान के लिए एक गहरी पर्यावरणीय चोट डॉ. सत्यवान सौरभ भारत के…