Category: कविता

कारगिल विजय दिवस : भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतवासियों के लिए गौरव और सम्मान का प्रतीक है। वर्ष 1999 में…

नियति का खेल

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) सूख गई नदी लहरों का पता नहीं।जीव जंतु बेहाल है पानी का पता नहीं।।टूटी हुई है नाव नाविक का पता नहीं।मृत पड़ी है मछलियां मछुआरों का पता…

शिव ही आदि, शिव ही अंत

शिव ही आदि, शिव ही अंत हैं,शिव ही ब्रह्म, शिव ही ब्रह्मतंत्र हैं।शिव ही बीज, शिव ही वृक्ष विशाल,शिव में छिपा संपूर्ण काल। शिव ही सृष्टि के मूल स्रोत हैं,शिव…

असम्भव कोई कार्य नहीं

स्वभाव और विचारों में अंतर हो तो,भी स्नेह में अंतर नहीं होना चाहिए,अच्छाई साबित करना जरूरी नहीं है,पर हमें अच्छा ज़रूर बनना चाहिये। जीवन में सब कुछ हासिल कर लेना,लेकिन…

असम्भव कोई कार्य नहीं

स्वभाव और विचारों में अंतर हो तो,भी स्नेह में अंतर नहीं होना चाहिए,अच्छाई साबित करना जरूरी नहीं है,पर हमें अच्छा ज़रूर बनना चाहिये। जीवन में सब कुछ हासिल कर लेना,लेकिन…

ईश्वरीय देन

काम करने वाले को कुछ न कुछपरेशानी हर रास्ते पर आ जाती है,पर हर परेशानी का कोई न कोईनिदान रास्ते में ही मिल जाता है। इरादा पक्का हो, राह के…

दुश्मन भी प्रिय मित्र बन जाता है

अक्सर रिश्तों की डोर मेंहम सभी उलझते रहते हैं,भावनाओं के मकड़जाल में,कभी न कभी हम सब बहते हैं। धैर्य के साथ सुलझाया जिसने,उसकी उलझने दूर हो जाती हैं,भावनायें नियंत्रित किया…

चार आश्रम,चार पुरुषार्थ

जीवन के तीन प्रहर बीते,बस एक प्रहर ही बाकी है,तीन आश्रम बीत चुके,सन्यासी जीवन बाक़ी है।बृह्मचर्य, गृहस्थ रहकर हीवानप्रस्थ भी भोग चुके,यूँ तो पुरुषार्थ किये होंगे,मोक्ष तो मिलना बाक़ी है।…

चिता में जलने के बाद

जीवन में निराश होकर रहना औरोंकी चमक देख ही विचलित होना है,उनकी सफलता नहीं संघर्षों से भी,हमने खुद को अवगत करवाना है। अपने सपने सच हो जायें इसलियेसिद्धान्तों पर चलना…

सबको ख़ुश रख पाना मुश्किल काम

कहते हैं कि सबको ख़ुश रख पानाबहुत ही मुश्किल भरा काम होता है,एक को ख़ुश करो दूसरा अपने आप,बरसाती मेंढक की तरह फुदकता है। संबेदनशीलता लोगों के चरित्रकी बहुमूल्य ख़ज़ाना…

जाति और धर्म भाषा के नाम पर हम लड़े और लड़ कर बिखरते रहे

गैरो ने भाप ली अपनी कमजोरियांबांटते वो रहे और हम बटते रहे।।शादियों पहले यही तो हुआहम जाति -पाती के नाम पर लड़ते और बटतेरहे ।और गैर हमारी इसी कमजोरी का…

राम-कृष्ण की जन्मभूमि

कोई नाराज़ होता है होने दो,वह भारत के मेहमान नहीं हैं,सारे संसार से वह लड़ते हैं,इनके कोई सिद्धांत नहीं हैं। राम कृष्ण की जन्मभूमि है,इसका मान तो करना होगा;यह भारत…

महाप्रभु त्रिलोकी

महासुदर्शन धर वासुदेव को नमन,श्री धन्वंतरि भगवान जी को नमन,अमृत कलश जिनके हाथों में है,महाप्रभू त्रिलोकनाथ को नमन। सर्व भय से निर्भय करने वाले,सर्व रोगों से निरोगी करने वाले,सर्व पापों…

हमारे शब्द और सोच

हमारे शब्द और हमारी सोच दोनोही अत्यंत संवेदनशील होते हैं,कभी इनसे नज़दीकियाँ बढ़ती हैं,तो कभी हमारी दूरियाँ बढ़ा देते हैं। इसीलिये कहते हैं तोल मोल के बोल,क्योंकि अपने ही शब्द…