Category: कविता

मदद करना सामाजिक दायित्व

कविता कभी कभी मैं भिक्षुक बन जाता हूँ,अपने लिये नहीं पर मैं कुछ माँगता हूँ,सबके लिये सबकी मदद के लिये,कुछ न कुछ कभी कभी माँग लेता हूँ। कभी कुछ सामूहिक…

दिव्य मिठास

“वह दिव्य मिठास जो जीभ के साथ आत्मा को भी मीठा कर गई”एक दिन मंगलवार की सुबह पूजा करके दुकान के बाहर चबूतरे पर बैठा हुआ था,हल्की हवा और सुबह…

सुखान्त मृत्यु ही मोक्ष हैं

जीवन में जन्म लेने के उद्देश्य,योनियों से मोक्ष प्राप्ति होते हैं,धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारोंपुरुषार्थ जिसके माध्यम होते हैं। जिदगी जीने के लिये हम सबकोकर्म तो करना पड़ता है,…

पतवार संभाल के चलाना पड़ता है

कविता धूप छाँव से डरने वाले कृषक कीफसल बो कर तैयार कहाँ होती है,डर डर तैराकी की कोशिश करनेवाले की नदिया पार कहाँ होती है। हवाई जहाज़ उड़ाना सीखने वालेपाइलट…

पत्थर की पूजा जीवित से डरते हैं

——*—— सफलता के ऊँचे सोपान पर कोईअपने बल पर जब पहुँच जाता है,तो पहचानने वाले नज़दीक होते हैं,पर संघर्ष के समय सब दूर रहते हैं। पत्थर के मूषक को सब…

स्मृतियों का एहसास कराती है

कविता स्मृतियों की सुखद याद बेलों कीतरह हृदय में जड़ें जमाती रहती हैं,कालान्तर में यह बेलें उपवन बन,स्मृतियों का भान कराती रहती हैं। स्मृतियाँ ये सुखद फलों की जिसमिठास की…

प्रभुता व प्रतिभा

मेरी कविता प्रभुता पाई काहि न मद होई,प्रतिभा पाई सदा यश होई,असफलता से बात न बनती,पाई सफलता आराम न होई। भाग्य से मिली सफलता कैसी,बिन गुरू ज्ञान की प्रतिभा जैसी…

अभिमान : स्वाभिमान

कविता जन्म से लेकर मृत्यु तलकका सफ़र बहुत ही लम्बा है,बचपन से वृद्धावस्था तलकजीवन का सफ़र झरोखा है। मेरा तेरा करते करते हमसबने सारी उम्र बितायी है,मेरा तेरा ना छोड़…

विश्व ह्रदय दिवस: भारत स्वच्छता दिवस

विश्व हृदय दिवस की आज बधाई है,आज ही भारत स्वच्छता दिवस भी है,आइये मिलकर सब कोशिश करें,हृदय निर्माल्य पर भी तनिक ध्यान दें‌। निन्दा, शिकवा, वैर और वैमनस्य,उच्च – नीच,…

कारवाँ बनता गया

लेखक और कवि हो जाना,क्या इतना मुश्किल होता है,जीवन में कभी न कभी हर एकव्यक्ति लेखक और कवि होता है। याद करो अपना विद्यार्थी जीवन,जब निबंध परीक्षा में लिखते थे,जितना…

याद किये जाते हैं वे लोग

याद किये जाते हैं वे लोगजो परोप कारी होते हैं,अपनी कृतियों से, सदकर्मोंसे सच्चे इंसान जो होते हैं । यद्यपि याद करना और यादआना, दो अलग अलग बातें हैं,वैसे तो…

पैसा : कितने नाम बदलता है

दादा बड़ा न भैया,सबसे बड़ा रुपैया ।सब पैसे का खेल है,और कछू ना भैया ।। मंदिर मे दिया जाऊँ तोहमें लोग चढ़ावा कहते हैं,स्कूल कालेज में शिक्षा शुल्क,शादी में दो…

मेरी कविता: मानव के क़र्म और नियति

योग्यता कर्म से ही पैदा होती है,जन्म से तो व्यक्ति शून्य होता है,जीवन के अनुभव सुख दुःख देते हैं,ज्ञान व अनुभव जीवनाधार होते हैं। जब इंसान करवट लेता हैतो दिशा…