सत्य, अहिंसा, कोमलता, त्याग,दया इंसान के सद्गुण कहलाते हैं,गीता में वर्णित गुणों में यह सभीमानव के दिव्य गुण माने जाते…
आशा व निराशा दोनों ही की सोचमानव जीवन में कभी न कभी छूटती है,आशा की ज्योति अंधेरी राहों में भीजीवन…
जमीन अच्छी हो व खाद अच्छी हो,पानी खारा हो तो फूल नहीं खिलते,भाव अच्छे हों और कर्म भी अच्छे हों,वाणी…
ईश्वर के द्रोही सतयुग से लेकरत्रेता, द्वापर, कलियुग में भी हैं,सत्य-असत्य, अच्छाई-बुराई,पहले भी थीं और आज भी हैं। वाद-विवाद, तर्क-वितर्क…
वास्तव में मेहनत करने वाले को,दो जून रोटी मुश्किल से मिलती है,भीख माँगने वालों को तो बेशुमारदौलत बिना मेहनत किए…
मज़दूर दिवस की है शुभकामना,श्रमिकों का होता यह दिन आज,मेहनत मज़दूरी करें जो जीवन भररहें वह भरपेट भोजन के मोहताज।…
कौन हिसाब रखे किसको कितनामिला और किसने कितना बचाया,माया व शरीर दोनों आनी जानी हैं,इनको क्या कोई कभी बचा पाया।…
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि,कवि तो सभी का होता है, पियक्कड़तो क्या कवि तो सारी कायनात परउत्तम कविता…
बचपन के दिन याद करूँ तो मनमें एक कसक पैदा हो जाती है,वे दिन भी क्या दिन होते थे जबकिंचित…
तुम्हें भुला पाऊँ मुमकिन नहीं तुम्हारी अर्चना मुश्किल न थी,मगर पाना तुम्हें मुमकिन नहीं,मन में समाये हो इस तरह,भुला पाऊँ…