डाक्टर भगवान का रूप होते हैं,अब तक यह कहा जाता रहा है,पर अब ये क्लीनिक में देखते हैं,अपनी दुकान से…
सृजनकर्ता की संवेदना सृजन है,सृजनात्मक प्रक्रिया में संघर्ष है,दृश्यात्मकता स्पष्ट नहीं होती है,पर रचनात्मकता स्पष्ट होती है। लकड़ी में कील…
एक पत्थर को ख़ूब तराश करदेवता-मूर्ति का रूप दिया जाता है,दूसरे बदनसीब पत्थर पर नारियलफोड़ कर मूर्ति को चढ़ाया जाता…
नभ अच्छादित मेघों सेयह विनय मैं करता हूँ,भाग भाग कर थकते हो,ठहरो, बरसो, हल्के हो। माना कावंड ले चले सभी,शिव…
जगह जगह ठेके खुले,लगा रहे हैं जाम,पी पीकर गिरते फिरें,क्या सुबह क्या शाम,अंग्रेज़ी देशी पियेंपियें विस्की और रम,बियर बार हैं…
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)आइये आके महफिल जमा दीजिए,आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।पास उजड़े हुए इस चमन के कभी,बैठ के खुद ब…
कल तक प्रकृति नाराज़ थी,मानसून अब तक नासाज़ था,आज यहाँ भी अति वृष्टि है,बरसात का अब आगाज है। आधा सावन…
हम और आप दोनो महज यादबनकर के एक दिन रह जायेंगे,और दोनो कोशिश करके दुनियामें अच्छी यादें छोड़ कर भी…
इंदौर/मध्यप्रदेश(राष्ट्र की परम्परा)दैहिक रुप में मौजूदगी ,टिका रहता है मात्र कुछ ही सांसों परइतने विराट शरीर का अस्तित्व ।एक स्वप्न…
‘बीर भोग्या वसुंधरा’ का अबशायद विचार बदल चुका है,मेहनत का फल तो मिलता है,धरती से सब उसको मिलता है। मेहनत…