‘बीर भोग्या वसुंधरा’ का अब
शायद विचार बदल चुका है,
मेहनत का फल तो मिलता है,
धरती से सब उसको मिलता है।
मेहनत का फल मिलता है,
यह सत्य वचन सनातन है,
बीर वही होता है इस जग में,
जो मेहनत कर उपजाता है।
रावण भी बीर पराक्रमी था,
पर अहंकार में मदमस्त सदा,
सोने की लंका जल ख़ाक हुई,
उसका पराक्रम धरा रह गया।
कुंभकरण सा भाई बलशाली,
पर अक्सर सोता ही रहता था,
मेघनाथ जैसा पुत्र पराक्रमी था,
इंद्रविजयी इंद्रजीत कहलाता था।
रणकौशल चाहे कितना भी हो,
मेहनत मशक़्क़त करना होता है,
आदित्य ये धरती उसकी होती है,
जो इसका लालन पालन करता है।
शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)। खुटार थाना क्षेत्र के ग्राम मुरादपुर में रविवार देर शाम एक दर्दनाक…
राष्ट्र की परम्परा | धर्म-ज्योतिष डेस्कआज 6 जुलाई 2026, सोमवार को प्रातः 9:57 बजे चंद्रमा…
क्या यह विश्व इतिहास का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार हो सकता है? गोंदिया - वैश्विक…
कांग्रेस प्रदेश संगठन मंत्री विजय कुशवाहा का देवरिया में भव्य स्वागत, संगठन विस्तार पर हुआ…
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से…
जालंधर में चोरी, देवरिया में गिरफ्तारी; दुर्लभ सिक्के और राडो घड़ी समेत लाखों का माल…