कविता

संसद में मचता गदर

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)संसद में मचता गदर, है चिंतन की बात।हँसी उड़े संविधान की, जनता पर आघात॥ भाषा पर संयम नहीं,…

1 year ago

ख़ुश दिखने से ज़्यादा अच्छा ख़ुश रहना है

ख़ुश दिखने से ज़्यादा अच्छासचमुच में ख़ुश रहना होता है,दुःख की घड़ी सामने हो, तो इसेभूल ख़ुश रहना अच्छा होता…

1 year ago

बचपन का गाँव

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन…

1 year ago

रिश्तों के सच

आखिर सच ही गूँजता, खोले सबकी पोल।झूठे मुँह से पीट ले, कोई कितने ढोल॥ जिसने सच को त्यागकर, पाला झूठ…

1 year ago

आदित्य की दो कविताएँ

1- वैदिक धर्म में सात फेरे, सात वचन यह एक विचारणीय प्रश्न है किभारतीय समाज में एक पृथा है,दूल्हा दुलहन…

1 year ago

दीमक लगे गुलाब-प्रियंका

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)लोग अपने मेंजीने लग गए है।अपने कहलाने वालेलोग कहाँ रह गए है? पराये दुख को पीना।एक-दूजे हेतु जीना॥पुराने…

1 year ago

वृद्धाश्रम: अभिशाप या विकल्प

जिस सन्तान को पाल पोसकर बड़ाकिया वही उन्हें डांटकर चुप करवाए,स्वाभाविक है उनके मन में भी तबताड़ना, प्रताड़ना के कुभाव…

1 year ago

गिरगिट ज्यों बदल रहा है आदमी

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी…

1 year ago

काँटों पर नित चलो-प्रियंका सौरभ

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)अगर चाहो तुम सूरज बनना,बनकर के दीप जलो।गर खिलना है फूलों-सा,काँटों पर नित चलो॥ जीवन के इस सफ़र…

1 year ago

वाणी तो सम्प्रति मूल्यवान गहना है

कुछ मंज़िलें अकेले ही पार होती हैं,कुछ लड़ाइयाँ अकेले लड़नी पड़ती हैं,दुनिया में आते भी अकेले ही हैं हम,दुनिया से…

1 year ago