हिसार(राष्ट्र की परम्परा)संसद में मचता गदर, है चिंतन की बात।हँसी उड़े संविधान की, जनता पर आघात॥ भाषा पर संयम नहीं,…
ख़ुश दिखने से ज़्यादा अच्छासचमुच में ख़ुश रहना होता है,दुःख की घड़ी सामने हो, तो इसेभूल ख़ुश रहना अच्छा होता…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन…
आखिर सच ही गूँजता, खोले सबकी पोल।झूठे मुँह से पीट ले, कोई कितने ढोल॥ जिसने सच को त्यागकर, पाला झूठ…
1- वैदिक धर्म में सात फेरे, सात वचन यह एक विचारणीय प्रश्न है किभारतीय समाज में एक पृथा है,दूल्हा दुलहन…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)लोग अपने मेंजीने लग गए है।अपने कहलाने वालेलोग कहाँ रह गए है? पराये दुख को पीना।एक-दूजे हेतु जीना॥पुराने…
जिस सन्तान को पाल पोसकर बड़ाकिया वही उन्हें डांटकर चुप करवाए,स्वाभाविक है उनके मन में भी तबताड़ना, प्रताड़ना के कुभाव…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)अगर चाहो तुम सूरज बनना,बनकर के दीप जलो।गर खिलना है फूलों-सा,काँटों पर नित चलो॥ जीवन के इस सफ़र…
कुछ मंज़िलें अकेले ही पार होती हैं,कुछ लड़ाइयाँ अकेले लड़नी पड़ती हैं,दुनिया में आते भी अकेले ही हैं हम,दुनिया से…