कविता

वृद्धाश्रम: अभिशाप या विकल्प

जिस सन्तान को पाल पोसकर बड़ाकिया वही उन्हें डांटकर चुप करवाए,स्वाभाविक है उनके मन में भी तबताड़ना, प्रताड़ना के कुभाव…

2 years ago

गिरगिट ज्यों बदल रहा है आदमी

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी…

2 years ago

काँटों पर नित चलो-प्रियंका सौरभ

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)अगर चाहो तुम सूरज बनना,बनकर के दीप जलो।गर खिलना है फूलों-सा,काँटों पर नित चलो॥ जीवन के इस सफ़र…

2 years ago

वाणी तो सम्प्रति मूल्यवान गहना है

कुछ मंज़िलें अकेले ही पार होती हैं,कुछ लड़ाइयाँ अकेले लड़नी पड़ती हैं,दुनिया में आते भी अकेले ही हैं हम,दुनिया से…

2 years ago

विधिना के तीर कब्बो, दुनिया से पीर मिलें छोड़ि के किसानी धइ लेबे हम मजूरियां

काव्यगोष्ठी आयोजित गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l किसानों की मार्मिक दशा का चित्रण करते हुए युवा कवि डा.सुधीर श्रीवास्तव "नीरज" ने यह…

2 years ago

नीति वचन

दीपक बनकर तम दूर करें,धरती जैसा हो सहिष्णु बने,वृक्षों जैसा परोपकारी होकरतन मन से सबका दुःख दूर करें। समय गँवाना…

2 years ago

सनातन संस्कृति में श्रेष्ठ

सनातन संस्कृति की कुछ श्रेष्ठ नहीसर्वश्रेष्ठ मान्यतायें होती हैं, ग्रंथों मेंगीता प्राणियों में गोमाता, पक्षियों मेंगरुड़ की अति श्रेष्ठ महत्ता…

2 years ago

विवाह और सामाजिक लूट

हाल में मैं एक शादी में गया हुआ था,रिसोर्ट में शादी का प्रबंध हुआ था,बारात में बैंड का नाम महबूब…

2 years ago

यह संसार आठ अरब लोगों का घर है

यह संसार आठ अरब लोगों का घर है,भारत का हिस्सा 1.41 अरब उसमें है,सब गड्डमगड्य हो गया सुरसा मुखजैसी बढ़ती…

2 years ago

तो विश्वकप में विजय हुई होती

उम्मीद का दामन थाम कर हीइंसान जीवन में आगे बढ़ता है,कोई जीत गया कोई हार गया,यह उतना महत्व नहीं रखता…

2 years ago