जिस सन्तान को पाल पोसकर बड़ाकिया वही उन्हें डांटकर चुप करवाए,स्वाभाविक है उनके मन में भी तबताड़ना, प्रताड़ना के कुभाव…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी…
हिसार(राष्ट्र की परम्परा)अगर चाहो तुम सूरज बनना,बनकर के दीप जलो।गर खिलना है फूलों-सा,काँटों पर नित चलो॥ जीवन के इस सफ़र…
कुछ मंज़िलें अकेले ही पार होती हैं,कुछ लड़ाइयाँ अकेले लड़नी पड़ती हैं,दुनिया में आते भी अकेले ही हैं हम,दुनिया से…
काव्यगोष्ठी आयोजित गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l किसानों की मार्मिक दशा का चित्रण करते हुए युवा कवि डा.सुधीर श्रीवास्तव "नीरज" ने यह…
सनातन संस्कृति की कुछ श्रेष्ठ नहीसर्वश्रेष्ठ मान्यतायें होती हैं, ग्रंथों मेंगीता प्राणियों में गोमाता, पक्षियों मेंगरुड़ की अति श्रेष्ठ महत्ता…
हाल में मैं एक शादी में गया हुआ था,रिसोर्ट में शादी का प्रबंध हुआ था,बारात में बैंड का नाम महबूब…
यह संसार आठ अरब लोगों का घर है,भारत का हिस्सा 1.41 अरब उसमें है,सब गड्डमगड्य हो गया सुरसा मुखजैसी बढ़ती…
उम्मीद का दामन थाम कर हीइंसान जीवन में आगे बढ़ता है,कोई जीत गया कोई हार गया,यह उतना महत्व नहीं रखता…