Categories: कविता

गिरगिट ज्यों बदल रहा है आदमी

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)
गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥

आदमी ने आदमी से,
तोड़ लिया है नाता।
भूल गया प्रेम की खेती,
स्वार्थ की फ़सल उगाता॥
मौका पाते गिरगिट ज्यों, बदल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥

आलस के रंग दे बैठा,
संघर्षी तस्वीर को।
चमत्कार की आशा करता,
देता दोष तक़दीर को॥
पानी-सी ढाल बनाकर, चल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥

मंजिल का कुछ पता नहीं,
मरे-मरे से है प्रयास।
कटकर के पंख दूर हुए,
छूए कैसे अब आकाश॥
देख के दूजे की उन्नति, जल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥

  • प्रियंका सौरभ की कलम से
Karan Pandey

Recent Posts

जागृति इन्क्यूबेशन प्रोग्राम बना पूर्वांचल के सपनों का नया मंच

हजार आवेदन, 140 सपने और पूर्वांचल की नई उड़ान: जागृति इन्क्यूबेशन कोहोर्ट 2026-27 का भव्य…

11 hours ago

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यातायात सुधार पर जोर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति…

13 hours ago

एक साथ आठ देशों के मेडिकल विश्वविद्यालयों में मिला प्रवेश, रिशांग ने बढ़ाया गोरखपुर का मान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के पादरी बाजार क्षेत्र स्थित मानस विहार कॉलोनी के छात्र…

13 hours ago

बकरीद परंपरागत तरीके से मनाएं, नई परंपरा की न हो शुरुआत: डीएम

सोशल मीडिया पर भ्रामक फोटो-वीडियो डालने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई: एसपी संत कबीर नगर…

13 hours ago

नदी में नहाते समय दो किशोर डूबे मचा कोहराम तलाश जारी

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)शुक्रवार को मोहन सेतु के पास सरयू नदी में नहाने गए तीन किशोरों…

15 hours ago

खेलते-खेलते मौत के मुंह में समाया मासूम, 11 हजार वोल्ट लाइन की चपेट में आने से दर्दनाक हादस

हाइटेंशन लाइन बनी जानलेवा, ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप महराजगंज(राष्ट्र की…

15 hours ago