हिसार(राष्ट्र की परम्परा)
गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥
आदमी ने आदमी से,
तोड़ लिया है नाता।
भूल गया प्रेम की खेती,
स्वार्थ की फ़सल उगाता॥
मौका पाते गिरगिट ज्यों, बदल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥
आलस के रंग दे बैठा,
संघर्षी तस्वीर को।
चमत्कार की आशा करता,
देता दोष तक़दीर को॥
पानी-सी ढाल बनाकर, चल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥
मंजिल का कुछ पता नहीं,
मरे-मरे से है प्रयास।
कटकर के पंख दूर हुए,
छूए कैसे अब आकाश॥
देख के दूजे की उन्नति, जल रहा है आदमी।
अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥
बलिया (राष्ट्र की परम्परा ) हुसैनपुर स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा समारोह…
भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा )विधानसभा सलेमपुर क्षेत्र के ग्राम सभा धरहरा (तकिया) निवासी बबलू प्रसाद (35)…
बलिया (राष्ट्र की परम्परा ) विकासखंड सीयर की ग्राम पंचायत पशुहारी में एक ही परिवार…
बलिया (राष्ट्र की परम्परा ) मनियर थाना क्षेत्र के निपानिया गांव में शुक्रवार सुबह दोस्तों…
स्थापना दिवस पर विशेष: पुनीत मिश्र संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। कभी जिस मगहर…
बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो…