कविता

मैंने ऐसा कुछ सीखा

धरा पर नीम के वृक्ष काटे जा रहे हैंदिलों में कड़वाहट बढती जा रही है।जीभ स्वाद कड़वा होता जा रहा…

2 years ago

कर्मफल

यह संसार मनुष्य की कर्मभूमि व भोगभूमि दोनों है,मनुष्य के कर्मफल का भण्डार अक्षय सुख दुःख में है,उसे भोगने के…

2 years ago

लकीर खींची है?

कोई व्यक्ति अपने मस्तिष्क मेंबिल्कुल स्पष्ट विचार रखता है,उसका अचार व्यवहार हमेशा,पूर्ण संतुलित, सकारात्मक होता है। मस्तिष्क का कूड़ेदान सा…

2 years ago

शीलहरण की कहे कथाएँ

महाभारत हो रहा फिर से अविराम।आओ मेरे कृष्णा, आओ मेरे श्याम॥ शकुनि चालें चल रहा है,पाण्डुपुत्रों को छल रहा है।अधर्म…

2 years ago

जीवनसाथी !

हमारे माता-पिता, पति-पत्नी,पुत्र-पुत्री, मित्र, सगे सम्बन्धी,क्या वास्तव में ये जीवनसाथी हैं,नहीं, जीवनसाथी तो शरीर है । शरीर साँसे लेना बंद…

2 years ago

नई कहानी बन

हिसार (राष्ट्र की परम्परा)बस दिल से सच्चा हिंदुस्तानी बन।आये देश के काम वह जवानी बन॥ क्यों जला रहा ख़ुद से…

2 years ago

‘शब्द और स्टैंज़ा’ कविता संग्रह का कुलपति ने किया विमोचन

हीरक जयंती समारोह के अवसर पर अंग्रेजी विभाग में आयोजित हुआ कार्यक्रम गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय…

2 years ago

सैनिक

हम भारत देश के सैनिक हैं,जमीन का महत्व व फौजी कासाहस कभी कम नहीं हो सकते हैं,ये राष्ट्र की शान…

2 years ago

वादा दिवस, पतिदेव की कहानी

वादा करो कि बेलन का उपयोगचपाती बनाने के लिये ही करोगी,वादा दिवस, पति देव की कहानीसुनिये कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।…

2 years ago

निधिवन

मथुरा(राष्ट्र की परम्परा)निधिवन की लताओं में,बसते हैं श्याम मेरे lइसकी रज को माथे पर लगा,बन जाते बिगड़े काम मेरे।कदम रखते…

2 years ago