कविता

सनातन धर्म कहता है कि

कहा गया है सत्य बोलें, प्रिय बोलें,अप्रिय हो जो वह सत्य नहीं बोलें,जो प्रिय असत्य हो वह नहीं बोलें,सनातन धर्म…

12 months ago

मित्र को मित्र से प्रमाण नहीं चाहिये

इससे अच्छा क्या होगा कि कोईछोटी छोटी बात पर करे प्रशंसा,स्वीकार करे आपको मुसीबत में,ज़रूरत के समय करे जो सहायता।…

1 year ago

सत्य और जीवन का महत्व

यह सत्य है कि सत्य कभी भीदावा नहीं करता कि मैं सत्य हूँ,लेकिन झूठ तो हमेशा ही यहीदावा करता है…

1 year ago

हिन्दी: नारे व स्वतंत्रता संग्राम

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केप्रमुख वचन व नारों में हिंदी थी,स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी के नारोंकी अत्यंत विशिष्ट भूमिका थी। स्वतंत्रता…

1 year ago

कविता अनुपस्थिति में उपस्थिति है: डॉ. सुधाकर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नागरी प्रचारिणी सभागार में मंगलवार को युग द्रष्टा जनवादी कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की जयंती पर…

1 year ago

जीवन की वास्तविकता!

प्रकृति की ख़ूबसूरती पेड़ पौधों,उनके पल्लव पुष्पों से दिखती है,इन्सानी ख़ूबसूरती वैसे ही उनकेविचार व्यवहार पर निर्भर करती है। नीचा…

1 year ago

हाथी जैसी चाल चल रहा तन्त्र

ऑफिस में आओ मिलो आकर,काम सही हो जाएगा मिलकर,बस एक इशारा वो देते हैं फिर,जेब गर्म उनकी कर दो जाकर।…

1 year ago

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम: योगेश्वर श्री कृष्ण

अच्युतम केशवम, कृष्ण दामोदरम,रामनारायणम, जानकीवल्लभम,राम जन्में थे त्रेता में दशरथ के घर,कृष्ण जन्मे थे द्वापर में कारागार में। राम का…

1 year ago

घोर कलियुग है भाई

स्थानीय समाचार पत्रों का समाचारमन को कितना विचलित कर देता है,ऐसा लगता है, घोर कलियुग है, भाईभाई, मित्र मित्र की…

1 year ago

और जब मरो तो मर कर जियो

प्रथम से लेकर अंतिम साँस तक,मानव जीवन की वास्तविकता है,इन साँसों को जी भर कर जियो,और जब मरो तो मर…

1 year ago