कविता

हिन्दी: नारे व स्वतंत्रता संग्राम

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केप्रमुख वचन व नारों में हिंदी थी,स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी के नारोंकी अत्यंत विशिष्ट भूमिका थी। स्वतंत्रता…

9 months ago

कविता अनुपस्थिति में उपस्थिति है: डॉ. सुधाकर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नागरी प्रचारिणी सभागार में मंगलवार को युग द्रष्टा जनवादी कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की जयंती पर…

9 months ago

जीवन की वास्तविकता!

प्रकृति की ख़ूबसूरती पेड़ पौधों,उनके पल्लव पुष्पों से दिखती है,इन्सानी ख़ूबसूरती वैसे ही उनकेविचार व्यवहार पर निर्भर करती है। नीचा…

10 months ago

हाथी जैसी चाल चल रहा तन्त्र

ऑफिस में आओ मिलो आकर,काम सही हो जाएगा मिलकर,बस एक इशारा वो देते हैं फिर,जेब गर्म उनकी कर दो जाकर।…

10 months ago

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम: योगेश्वर श्री कृष्ण

अच्युतम केशवम, कृष्ण दामोदरम,रामनारायणम, जानकीवल्लभम,राम जन्में थे त्रेता में दशरथ के घर,कृष्ण जन्मे थे द्वापर में कारागार में। राम का…

10 months ago

घोर कलियुग है भाई

स्थानीय समाचार पत्रों का समाचारमन को कितना विचलित कर देता है,ऐसा लगता है, घोर कलियुग है, भाईभाई, मित्र मित्र की…

10 months ago

और जब मरो तो मर कर जियो

प्रथम से लेकर अंतिम साँस तक,मानव जीवन की वास्तविकता है,इन साँसों को जी भर कर जियो,और जब मरो तो मर…

10 months ago

“मनीषा की अरदास”

मत रो माँ, अब मत रो,तेरी बेटी की आवाज़ हम सब हैं,न्याय की राह पर चल पड़े,अब जाग उठा हर…

10 months ago

“ना बहन रोए, ना बहू”

रिश्तों में मोहब्बत का दिया जलना चाहिए,ना बहन रोए, ना बहू को तन्हा रहना चाहिए। जिस घर में बेटियों को…

10 months ago

प्रकृति की नाराज़गी हैं भयंकर…!

नाराज़ प्रकृति की नाराज़गी हैं भयंकर,स्वार्थवश संसाधनों का 'दोहन' निरंतर।प्रकृति-मानव का संबंध सदियों पुराना,ऊपर उठाया लाभ चुरा लिया खजाना।पिघल रहे…

10 months ago