प्रथम से लेकर अंतिम साँस तक,
मानव जीवन की वास्तविकता है,
इन साँसों को जी भर कर जियो,
और जब मरो तो मर कर जियो।
जन्म के समय सब नग्न होते हैं,
मृत्यु के समय भी बेवस्त्र होते हैं,
जन्म लेकर भी असहाय होते हैं,
मृत्यु के वक्त भी असहाय होते हैं।
ख़ाली हाथ आये थे हम सभी,
और ख़ाली हाथ जाएँगे सभी,
धन दौलत न लेकर आये थे कोई,
जाने के वक्त न ले जाएँगे कोई।
वास्तविकता तो है जीवन की,
पहला स्नान किसी ने करवाया,
अंतिम स्नान कोई और करवाएगा,
अकेले आया था, अकेले जाएगा।
आदित्य अहंकार फिर क्यों करना,
किसके लिये लड़ना व क्यों लड़ना,
चार दिन का यह जीवन होता है,
इसे प्रेम प्यार से जी भर जीना है।
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