✍️ विजय गुंजन

मानवता है संकट में
अब ईश्वर तेरी परीक्षा है
ह्रदय भरें हैं दुःख पीड़ा से
क्या ये ही तेरी इच्छा है ?

धनिकों को आशीष दिया
दरिद्र जनों को शाप
बिना वसन के भूखे बच्चे
रहे शीत में क्यों कांप

आस्तिकों की भक्ति की
भी होनी अब समीक्षा है
मानवता है संकट में
अब ईश्वर तेरी परीक्षा है

सूख गया करुणा का सागर
खाली हो गयी दया की गागर
शांन्ति पथ के अवतारों की
इस युग में अब प्रतीक्षा है

मानवता है संकट में
अब ईश्वर तेरी परीक्षा है
उत्तर चाहिए विकट प्रश्न का
आह से शोषित से हर जीवन का

प्रकृति में हो रहे असंतुलन से
लेनी सम्पूर्ण जगत को शिक्षा है
मानवता है संकट में
अब ईश्वर तेरी परीक्षा है

अगर तू अनुत्तीर्ण’ हुआ
अखिल विश्व फिर जीर्ण हुआ
ईश्वरत्व को मांगने पड़ेगी
इस मृत्यु लोक से भिक्षा है

मानवता है संकट में
अब ईश्वर तेरी परीक्षा है