हिंदी का साहित्यकार हूँ,
हिंदी में कविता लिखता हूँ,
पर बैसवारी मेरी बोली है,
वह बोली मुझको प्यारी है।
अवधी, बृजभाषा, खड़ी-बोली,
भोजपुरी अति भोली बोली हूँ,
पर दुनिया जिसकी दीवानी है,
मैं वह गाकर गीत सुनाता हूँ।
लिखना, पढ़ना, प्रस्तुत करना
अब यह सब मेरी दिनचर्या हैं,
किसी को अच्छी लगें या नहीं,
मैं सबको यह सदैव भेजता हूँ।
हाँ, क्षमा प्रार्थी हूँ मैं उन सबसे,
जिन्हें न मेरी रचनायें सुहाती हैं,
विनती बस मेरी उन सबसे है कि
प्रयत्न करके देखिये ये अच्छी हैं।
कविता लिखना मेरी फनकारी है,
मैं अपने को अब कवि कहता हूँ,
सोच, कल्पना, अनुभव आधारित,
आदित्य संकल्प गीत मैं गाता हूँ।
डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
