कविता

प्रकृति सुरक्षा

वह चराचर जगत के स्वामी हैं,सारा संसार उन्हीं पर आश्रित है,वह देवों के देव हैं, महानतम हैं,शक्तिशालियों में शक्तिशाली हैं।…

2 years ago

इंसान की शक्ल सूरत का क्या

हर इंसान दूसरे इंसान के लिये शायदअच्छा भी और बुरा भी हो सकता है,पर यह निश्चित है कि हर इंसान…

2 years ago

घर – परिवार के रत्न

धरती के तीन रत्न ही होते हैं जिन्हेंसभी जल अन्न सुभाषित कहते हैं,प्रस्तर खंडों के टुकड़ों को भी कुछअज्ञानी लालची…

2 years ago

विवाह बंधन

परिणय सूत्र बंधन मांगलिक कार्य है,जिसे सीधी भाषा में विवाह कहते हैं,डीजे पर नाचना गाना, मद्यपान तथाहुल्लड़पन को विवाह नही…

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पर्यवेक्षक मौन

शब्दों की मधुरता जीवन में रिश्तोंको मज़बूती से बाँध कर रखती है,जैसे गीली मिट्टी पेड़ पौधों की जड़ोंको मज़बूती से…

2 years ago

जैसा था, वैसा ही मिलूँगा

जीवों के प्रति दया व कृतज्ञ भाव,धार्मिक प्रवृत्ति सज्जनता दिखाती है,माया और कृतघ्नता में लिप्त भावनानरक में पहुँचाने का कारण…

2 years ago

कलियाँ जो हवा पानी धूप पाती हैं

समय के संघर्ष से जीत जीवन मेंजो व्यक्ति तक़दीर बदल लेता है,कल क्या होने वाला है उससे बेफ़िक्रक़र्म करे वह…

2 years ago

उधार का दिया : उधार का लिया

उधार देने वाले जब उधार दिया हुआवापस माँगते हैं वो भिखारी हो जाते हैं,और वही उधार लेने वाले धन्नासेठ कीतरह…

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सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं

सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं हम सबको,सुभाषित ही घावों का मरहम करते हैं,भाषा ही ग़मों का कारण बनती है,कुभाषित ही…

2 years ago

यत्र तत्र सर्वत्र, ध्यान, मनन, चिंतन

मनुष्य जीवन लाखों जन्म के भोगोंके बाद ही बड़े भाग्य से मिलता है,यह जीवन जीना आसान नहीं होता है,परिस्थितियों से…

2 years ago