मनुष्य जीवन लाखों जन्म के भोगों
के बाद ही बड़े भाग्य से मिलता है,
यह जीवन जीना आसान नहीं होता है,
परिस्थितियों से सामना करना पड़ता है।
आत्मबल, मन पर नियंत्रण की शक्ति,
परिस्थितियों पर विजय दिलाती हैं,
संकल्प शक्ति ही भावनाओं पर
मन का अवलंबन सम्बल देती हैं।
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
मन के कहे हरि मिलें मन की ही परतीत॥
जीवन यात्रा के विकार
अपना शिकार बनाते हैं।
मन के दृढ़ संकल्प मगर
बाहर निकाल ले आते हैं॥
सकारात्मक सोच, सत्साहित्य और
सत्संगति ईश्वर के पास ले जाते हैं,
सद्गुण, सदाचरण व परोपकार व्यष्टि
से समष्टि का सुंदर निर्माण कराते हैं।
मानव मन जैसे जैसे निर्मल होता है,
मानव का आत्मबल वैसा ही बढ़ता है,
आत्मशक्ति सिद्धि तक ले जाती है,
तभी आत्मा मोक्ष प्राप्त कर पाती है।
ध्यान मनन की संचित शक्ति तो
मन के भीतर ही संचित होती है,
परमात्मा का वास कण कण में है,
कहीं खोजने की ज़रूरत नहीं होती है।
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँड़े वन माहिं,
ऐसे घट घट राम है हम तुम देखें नाहिं।
सत्साहित्य, सत्संगति व परोपकार में,
ईश्वर बसते हैं अनत खोजिये नाहिं।
वह सूक्ष्म है पर सर्वव्याप्त है,
वही शक्ति व समस्त ऊर्जा है,
वही सुख समृद्धि का आगार है,
आदित्य वह तो यत्र तत्र सर्वत्र है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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