Saturday, July 18, 2026
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नदियों के जलस्तर मे लगातार उतार-चढ़ाव, घाघरा व राप्ती खतरे के निशान के आसपास

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। ड्रैनेज खंड-2, संत कबीर नगर द्वारा जारी दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार उतार-चढ़ाव के साथ दर्ज किया जा रहा है। घाघरा और राप्ती नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक घाघरा नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 106.180 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान से थोड़ा ऊपर है। वहीं अयोध्या में नदी का जलस्तर 92.770 मीटर मापा गया, जो खतरे के निशान से 3 सेंटीमीटर अधिक है।
राप्ती नदी का जलस्तर काकसरघाट पर 128.740 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के स्तर से 15.2 सेंटीमीटर ऊपर है। रिगौली में नदी का जलस्तर 76.590 मीटर और ठटर (संकरणो) पर 76.000 मीटर दर्ज किया गया।
कुयानों नदी भी उफान पर है। चन्द्रदीप घाट पर इसका जलस्तर 86.190 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के स्तर से 14 सेंटीमीटर ऊपर है। इसी तरह मुखलिसपुर (संकरणो) में जलस्तर 75.180 मीटर पाया गया।
जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों के लोगों में चिंता का माहौल है। प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए संबंधित विभागों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

रंगदारी न देने पर बदमाशों ने दो दुकानों में लगाई आग, हमले में एक घायल

बरेली,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रंगदारी न देने पर बदमाशों ने बरेली जिले के देवरनिया थाना क्षेत्र अंतर्गत नैनीताल राजमार्ग पर स्थित कटरा गांव में दो दुकानों को निशाना बनाते हुए आग के हवाले कर दिया। इस दौरान बीच-बचाव करने पर एक व्यक्ति पर लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में एक राजनीतिक परिवार के सदस्यों सहित पांच लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

थाना प्रभारी नवदीप सिंह ने बताया कि आरोपियों में मयंक वर्मा, शशांक वर्मा, चेतक, मयंक (गिरवर दयाल का पुत्र) और अर्पित शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कन्फेक्शनरी की दुकान पर हमला

कटरा गांव निवासी दुकानदार राजीव कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मंगलवार रात करीब पौने 10 बजे शशांक वर्मा उसकी खाटू श्याम कन्फेक्शनरी दुकान पर आया। वहां से सामान लेने के बाद जब पैसे मांगे गए तो उसने गाली-गलौज की। अगले दिन बुधवार सुबह मयंक वर्मा, चेतक और अन्य साथियों ने दुकान में आग लगा दी।
राजीव के भाई मुकेश ने आग बुझाने और विरोध करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उस पर लाठी-डंडों और चाकुओं से हमला कर दिया। हमले में उसके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं।

मेडिकल स्टोर पर मांगी रंगदारी, चली गोली

इसी इलाके में विशाल मेडिकल स्टोर के मालिक प्रीतम सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे मयंक और शशांक वर्मा अन्य साथियों के साथ उसकी दुकान पर आए और उससे पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी।
जब प्रीतम ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो मयंक ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया, जबकि शशांक ने देसी पिस्तौल से गोली चलाई। गोली उसके सिर के पास से निकल गई और वह बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर आरोपी मौके से भाग निकले।

पुलिस की कार्रवाई

थाना प्रभारी नवदीप सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सभी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

पीएम मोदी का पश्चिम बंगाल दौरा: 5,200 करोड़ की परियोजनाओं का देंगे तोहफ़ा, रैली को भी करेंगे संबोधित

कोलकाता/नई दिल्ली। (राष्ट्र की परम्परा)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य को 5,200 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें तीन नए कोलकाता मेट्रो मार्गों के खंडों का उद्घाटन भी शामिल है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी बिहार से कोलकाता पहुंचेंगे और यहां भव्य कार्यक्रम में इन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इसके बाद वे पार्टी की एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे।

क्या है खास?

प्रधानमंत्री तीन नए मेट्रो मार्गों के उद्घाटन करेंगे, जिनसे कोलकाता में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी।

कुल 5,200 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं की शुरुआत से राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की विकास योजनाओं और आने वाले विज़न पर भी चर्चा करेंगे।

राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री का यह दौरा पश्चिम बंगाल में भाजपा की राजनीतिक सक्रियता को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच इस रैली को बेहद अहम माना जा रहा है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी राज्य में पार्टी को नई ऊर्जा देगा।

संविधान का 130 वाँ संशोधन विधेयक, 2025- मंत्रियों के स्तरपर होने वाले भ्रष्टाचार पर सख़्ती से अंकुश लगाने में मील का पत्थर साबित होगा

भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई से निवेशकों का विश्वासबढ़ेगा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भारत की छवि“जवाबदेह लोकतंत्र”की बनेगी

गोंदिया – भारतीय स्वतंत्रता के बाद से अब तक देश में 129 बार संविधान संशोधन किए गए हैं और हर बार इनका उद्देश्य लोकतंत्र को मज़बूत करना, जनकल्याण को सुनिश्चित करना और शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना रहा है।वर्ष 2025 में पेश किया गया संविधान (130 वां संशोधन विधेयक) इसी कड़ी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका मुख्य उद्देश्य मंत्रियों के स्तरपर होने वाले भ्रष्टाचार पर सख्ती से अंकुश लगाना है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र,ऐसा मानता हूं कि आज़ादी के 75 साल बाद भी यदि भ्रष्टाचार उच्च पदस्थ नेताओं और मंत्रियों तक फैला है, कि 10 पेर्सेंट 20 पेर्सेंट नामों से उनका संज्ञान लिया जाता है,जो न केवल लोकतंत्र के लिए चुनौती है बल्कि जनता के विश्वास पर भी गहरी चोट है।यही कारण है कि इस विधेयक ने राजनीतिक विमर्श में हलचल मचा दी है।भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में भ्रष्टाचार हमेशा से सबसे गंभीर समस्या रहा है।1960 और 1970 के दशक से लेकर आज तक कई बड़े घोटाले हुए,चाहे वह बोफोर्स हो,कोयला घोटाला हो, 2जी स्पेक्ट्रम,या फिर हाल के वर्षों में विभिन्न मंत्रालयों में सामने आए अनियमितताओं के मामले।अक्सर जनता यह आरोप लगाती रही है कि “कानून केवल छोटे अपराधियों के लिए है, बड़े नेताओं और मंत्रियों पर कभी हाथ नहीं डाला जाता।”यह धारणा लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करती है।संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 75 और 164 में मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की थी,परंतु उनके खिलाफ भ्रष्टाचार-रोधी तंत्र को पर्याप्त दाँत-पंजे नहीं दिए गए।मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कभी सीबीआई,कभी लोकपाल, कभी सीवीसी का सहारा लिया गया, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण “न्याय” अक्सर विलंबित हुआ। इसी पृष्ठभूमि में 130 वां संशोधन लाया गया, जो पहली बार संविधान में विशेष प्रावधानों के तहत मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर सीधी कार्रवाई की गारंटी देता है।गृह व सहकारिता मंत्री ने विधेयक पेश करने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह किया, 21 अगस्त 2025 को संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई।
साथियों बात अगर हम संविधान (130 वां संशोधन) विधेयक 2025 को समझने की करें तो,यह विधेयक 20 अगस्त 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया गया।सेक्शन वाइज वअन्य संलग्न जानकारी:-(अ) उद्देश्य और नैतिकता को संवारना: -विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरती नैतिकता को सुधारना, राजनीतिक नेतृत्व में पारदर्शिता लाना, और यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मंत्री (प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अन्य मंत्री) जेल से सरकार न चला सकें। (ब) संविधान के अनुच्छेदों में संशोधन:-यह विधेयक निम्नलिखित अनुच्छेदों में संशोधन प्रस्तावित करता है,(1) अनुच्छेद 75 (केंद्र के मंत्रिमंडल)- प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के लिए लागू।(2) अनुच्छेद 164 (राज्य के मंत्रिमंडल) -मुख्यमंत्री और राज्य मंत्रियों पर लागू। (3) अनुच्छेद 239AA (दिल्ली विधान सभा और मंत्रिमंडल)-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए लागू।संशोधन का उद्देश्य इन पदों पर बैठे नेताओं को गहन आरोपों के बीच पद में बने रहने से रोकना है (4) मुख्य प्रावधान:-यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री लगातार 30 दिनों तक गंभीर अपराधों (5 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराध) के आरोप में गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटाया जाएगा। केंद्रीय स्तर:- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे 31वें दिन पद से हटाएगा; यदि सलाह न दी जाए, तो वह स्वयं पर से अपने आप पदमुक्त हो जाएगा।राज्य स्तर:-राज्यपाल,मुख्यमंत्री की सलाह पर हटाएगा; सलाह न आने पर 31वें दिन स्वतः पद समाप्त मान लिया जाएगा।दिल्ली/केंद्रशासित प्रदेश: इसी तरह, उप-गवर्नर की ओर से हटाव का प्रावधान है। (5) पुनर्नियुक्ति की संभावना:-यह विधेयक पुनर्नियुक्ति को निषिद्ध नहीं करता। गिरफ्तारी और हिरासत समाप्त होने के बाद पुनः नियुक्ति (फिर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री बनना) संभव है। (6) कानूनी और संवैधानिक चिंताएँ:-न्याय की अधिभार: यह प्रावधान निर्दोष मान्यीकरण के सिद्धांत (प्रेन्सुम्प्शन ऑफ़ इनोसेंस) का उल्लंघन कर सकता है क्योंकि अभियोग के दौरान ही हटाव संभव है, जबकि वर्तमान व्यवस्था में केवल दोषसिद्धि पर पदावसान होता है ।राजनीतिक दुरुपयोग का खतरा: विपक्ष का दावा है कि यह विधेयक केंद्रीय एजेंसियों (जैसे सीबीआई, ईडी) के जरिए राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है ।संघीय ढांचे पर असर: यह राज्यों की स्वायत्तता और केंद्र- राज्य संबंधों के संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे संघीयता कमजोर हो सकती है। (7) संसदीय प्रक्रिया और वृहद प्रतिक्रिया:-विधेयक को संसद के दो सदनों में विशेष (2/3) बहुमत द्वारा पारित होना आवश्यक है; फिलहाल एनडीए की संख्या पर्याप्त नहीं है, इसीलिए बिना विपक्ष के समर्थन के पारित होना कठिन है।
साथियों बात अगर हम,यह विधेयक लाने कीआवश्यकता और उसकी विशेषताओं की करें तो,इस संशोधन की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि अब तक मंत्रियों के खिलाफ मामलों में राजनीतिक दबाव हावी रहता था। जांच एजेंसियाँ निष्पक्ष होकर काम नहीं कर पाती थीं। इसके अलावा, कई बार “नैतिक जिम्मेदारी” के नाम पर मंत्री इस्तीफा देते तो थे, लेकिन कानूनी प्रक्रिया से बच निकलते थे। जनता का गुस्सा और असंतोष यही दिखाता है कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी दंड और संवैधानिक बाध्यता भी ज़रूरी है।130वें संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ:-इस संशोधन में कई व्यापक प्रावधान जोड़े गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं,(1) संवैधानिक दायित्व की स्पष्टता- अब हर मंत्री को शपथ लेते समय यह लिखित घोषणा करनी होगी कि वह भ्रष्टाचार, भाई- भतीजावाद और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता में संलिप्त नहीं होगा। (2) विशेष जांच आयोग का गठन-संशोधन के तहत मंत्रियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की जाँच हेतु संसद द्वारा एक स्वतंत्र संवैधानिक आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग न तो प्रधानमंत्री और न ही किसी मुख्यमंत्री के प्रत्यक्ष नियंत्रण में होगा। (3) सीधी जवाबदेही संसद और विधानसभाओं को-यदि किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित होता है, तो उसे तुरंत पद से हटाना अनिवार्य होगा। (4) लोकपाल और न्यायपालिका से समन्वय-यह संशोधन मौजूदा लोकपाल व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाता है तथा सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट की देखरेख में जांच सुनिश्चित करता है। (5)समयबद्ध कार्रवाई-आरोप लगने के 6 महीनों के भीतर जांच पूरी करना और दोषी पाए जाने पर 1 साल के भीतर दंड प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
साथियों बातें कर हम इस विधेयकके विपक्ष और समर्थन मैं दी गई दलीलों की करें तो,इस विधेयक को लेकर संसद और समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आई हैं (अ) समर्थक दलों का तर्क है कि यह संशोधन जनता का विश्वासलौटाने का काम करेगा और मंत्रियों को “जवाबदेही” का असली एहसास कराएगा।इससे न केवल शासन व्यवस्थापारदर्शी बनेगी बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों में राजनीतिक संरक्षण भी खत्म होगा। (ब) विपक्षी दलों की चिंताएँ हैं कि इस संशोधन का दुरुपयोग हो सकता है। किसी भी मंत्री को झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत फँसाया जा सकता है। इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि जांच आयोग पर भी सत्तारूढ़ दल का अप्रत्यक्ष प्रभाव रह सकता है। आलोचनाएँ और चुनौतियाँ:-(1)भले ही उद्देश्य नेक है, लेकिन इस संशोधन के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ होंगी। (2) राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की आशंका (3) जांच आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न (4) न्यायालय में लंबित रहने वाली अपीलें (5) जनता की अपेक्षाओं और व्यावहारिक परिणामों के बीच अंतर बंनकऱ उभरा है।
साथियों बातें अगर हम इस विधेयक के दूरगामी परिणामों की करें तो (1)भ्रष्टाचार की लागत बढ़ेगी-अब मंत्री भ्रष्टाचार करने से पहले सौ बार सोचेंगे क्योंकि परिणाम सिर्फ पद से हटना नहीं बल्कि कानूनी दंड भी होगा।(2) नौकरशाही पर भी असर- जब मंत्रियों को कठोर जवाबदेही के दायरे में लाया जाएगा,तो नौकरशाही पर भी पारदर्शिता का दबाव बढ़ेगा।(3)ऐतिहासिक घोटालों का विश्लेषण(4)विपक्ष की दलीलों का गहन मूल्यांकन (5)जनता और मीडिया की भूमिका (6) भ्रष्टाचार पर रोकथाम के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव।
अतः अगर हम अपरोध पूरी विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि संविधान का 130 वां संशोधन विधेयक,2025-मंत्रियों के स्तरपर होने वाले भ्रष्टाचार पर सख़्ती से अंकुश लगाने में मील का पत्थर साबित होगा,भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई से निवेशकों का विश्वासबढ़ेगा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भारत की छवि“जवाबदेह लोकतंत्र”की बनेगी संविधान का 130 वां संशोधन विधेयक, 2025- राज्य के मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक घेरे में-भारतीय राजनीति में एक नया युग आएगा।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

युवा उद्यमिता: अवसर, साहस और सफलता

विश्व उद्यमिता दिवस पर डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग द्वारा विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर “युवा उद्यमिता: अवसर, साहस और सफलता” विषयक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच नवाचार, रचनात्मकता और ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देना तथा उद्यमशील सोच एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. पूनम टंडन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति में उद्यमिता की भूमिका पर प्रकाश डाला। मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट सेल के निदेशक प्रो. अजय शुक्ला ने करियर अवसरों और पेशेवर सफलता में नवाचार के महत्व पर विचार व्यक्त किए। विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव ने उद्यमशील प्रतिभा को प्रेरित एवं पोषित करने हेतु विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
अतिथि वक्ता किशन सहाय ने विद्यार्थियों को रचनात्मक रूप से सोचने और अपने व्यावसायिक विचारों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में संवादात्मक सत्र, विचार-प्रस्तुति गतिविधियाँ एवं ज्ञान-विनिमय चर्चाएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों ने अपने नवाचारी अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर ’सविष्कार’ टीम के सदस्य राज्यवर्धन एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के शिक्षकगण—डॉ. मोहम्मद इरफान, डॉ. सुरुचि श्रीवास्तव, डॉ. पूर्णिमा मिश्रा, डॉ. सुशील सिंह एवं डॉ. अनुभव त्रिपाठी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

साइबर कानून और सोशल प्लेटफॉर्म: एक युवा दृष्टिकोण विषयक कार्यशाला संपन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्पर)। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत महिला अध्ययन केंद्र एवं गृह विज्ञान विभाग द्वारा “साइबर कानून और सोशल प्लेटफॉर्म: एक युवा दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
गृह विज्ञान विभाग में कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य वक्ता अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता रूपल त्रिपाठी ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। तत्पश्चात महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने उन्हें अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट रूपल त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में साइबर कानून की बुनियादी समझ, उसके विकास और डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और विभिन्न ऐप्स के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में भयभीत होने के बजाय संबंधित साइबर सेल या थाने में शिकायत दर्ज कराना आवश्यक है। उन्होंने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए cybercrime.gov.in पोर्टल एवं हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से मदद प्राप्त करने की जानकारी दी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर अपराध अन्य अपराधों की तरह ही गंभीर हैं, बस इनका स्वरूप डिजिटल है। इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग करते समय गोपनीयता बनाए रखना, अनजान लिंक या ऐप्स से बचना तथा आत्म-सुरक्षा के प्रति सजग रहना बेहद आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं ने साइबर सुरक्षा, गोपनीयता और ऑनलाइन व्यवहार से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका समाधान विशेषज्ञ द्वारा सरल भाषा में किया गया। साथ ही कुछ वास्तविक साइबर अपराध एवं घरेलू हिंसा से जुड़े मामले भी साझा किए गए, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
कार्यक्रम का समापन निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। उन्होंने युवाओं से जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने और इंटरनेट का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विभाग की डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह एवं शोध छात्राएं भी उपस्थित रहीं।

“वेलकम मोदी जी इन गयाजी” : सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र का अनोखा स्वागत

बोधगया/बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गया दौरे से पहले अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी कलाकृति से उन्हें अनोखा स्वागत संदेश दिया है।
बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय प्रांगण में मधुरेंद्र ने मात्र तीन सेंटीमीटर की पीपल की पत्तियों पर भगवान बुद्ध को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर बनाई और लिखा— “वेलकम मोदी जी इन गयाजी”। इस कलाकृति को बनाने में उन्हें करीब पाँच घंटे का समय लगा।
इस अनूठी कला में गया के विष्णुपद मंदिर, बोधगया के बौद्ध मंदिर, गंगा ब्रिज, राष्ट्रीय राजमार्ग, गया-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और कोडरमा-वैशाली तक की मेमू ट्रेन को भी दर्शाया गया है। मधुरेंद्र का कहना है कि जब-जब प्रधानमंत्री बिहार की धरती पर आते हैं, तब विकास की गंगा और प्रखर गति से बहती है।
सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र पूर्व में भी कई अवसरों पर चर्चित कलाकृतियाँ बना चुके हैं। हर घर तिरंगा अभियान पर उन्होंने विशेष सैंड आर्ट बनाई थी, भागलपुर में 20 टन बालू से पीएम मोदी की विशाल प्रतिमा गढ़ी थी और पहलगाम हमले के बाद “थैंक्यू मोदी जी” लिखकर आभार व्यक्त किया था।
वर्ष 2012 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने मधुरेंद्र को सम्मानित किया था। वे स्वच्छ सर्वेक्षण 2021-22 के ब्रांड एंबेसडर रह चुके हैं। 2023 में उनका नाम बिहार की महान हस्तियां किताब में दर्ज हुआ। जून 2025 में ब्रिटिश पार्लियामेंट में लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया और हाल ही में भारतीय संसद में उन्हें भारत गौरव अवार्ड मिला।

और जब मरो तो मर कर जियो

प्रथम से लेकर अंतिम साँस तक,
मानव जीवन की वास्तविकता है,
इन साँसों को जी भर कर जियो,
और जब मरो तो मर कर जियो।

जन्म के समय सब नग्न होते हैं,
मृत्यु के समय भी बेवस्त्र होते हैं,
जन्म लेकर भी असहाय होते हैं,
मृत्यु के वक्त भी असहाय होते हैं।

ख़ाली हाथ आये थे हम सभी,
और ख़ाली हाथ जाएँगे सभी,
धन दौलत न लेकर आये थे कोई,
जाने के वक्त न ले जाएँगे कोई।

वास्तविकता तो है जीवन की,
पहला स्नान किसी ने करवाया,
अंतिम स्नान कोई और करवाएगा,
अकेले आया था, अकेले जाएगा।

आदित्य अहंकार फिर क्यों करना,
किसके लिये लड़ना व क्यों लड़ना,
चार दिन का यह जीवन होता है,
इसे प्रेम प्यार से जी भर जीना है।

  • डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

लखनऊ में 26 से 28 अगस्त तक रोजगार महाकुंभ

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला सेवायोजन अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश को श्रेष्ठ प्रदेश बनाने की दिशा में श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा 26 से 28 अगस्त 2025 तक राजधानी लखनऊ में रोजगार महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में संपन्न होगा।
रोजगार महाकुंभ में देश-विदेश की रिक्तियों हेतु लगभग 30 से अधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनियां प्रतिभाग करेंगी और साक्षात्कार के माध्यम से अभ्यर्थियों का चयन करेंगी।
इच्छुक अभ्यर्थी सेवायोजन पोर्टल rojgaarsangam.up.gov.in पर निःशुल्क ऑनलाइन पंजीकरण कराकर उक्त दिवसों में आयोजित मेले में प्रतिभाग कर सकते हैं। उम्मीदवारों को अपने सभी शैक्षिक प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो तथा बायोडाटा की चार प्रतियों के साथ प्रातः 10 बजे साक्षात्कार हेतु उपस्थित होना होगा।

डिजिटल सर्वे को लेकर रोजगार सेवकों की बैठक, सवालों के घेरे में जिम्मेदारी

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले बनकटा ब्लॉक सभागार में गुरुवार को डिजिटल सर्वे से संबंधित एक आवश्यक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता नायब तहसीलदार सुशील कुमार तिवारी और खंड विकास अधिकारी राजीव गुप्ता ने संयुक्त रूप से की। इसमें ब्लॉक क्षेत्र के सभी ग्राम रोजगार सेवकों को शासन के आदेशानुसार गांव-गांव जाकर डिजिटल सर्वे कराने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान रोजगार सेवकों ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार यह कार्य राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कराया जाना था, लेकिन अब उन्हें ही सर्वे में लगाया जा रहा है। इससे उनकी जिम्मेदारियां और खतरे दोनों बढ़ रहे हैं। कई महिला रोजगार सेवकों ने सवाल उठाया कि बरसात के इस मौसम में जब खेतों में सांप-बिच्छू निकल रहे हैं, तब वे कैसे सुरक्षित सर्वे कर पाएंगी। साथ ही, कई महिला सेवकों के छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिससे वे लगातार सर्वे कार्य में भाग नहीं ले सकतीं।
रोजगार सेवकों ने अपनी असमर्थता जताई और कहा कि यदि सर्वे कार्य के दौरान किसी भी अप्रिय घटना, दुर्घटना या सर्पदंश जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस पर पत्रकारों ने भी नायब तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी से सवाल किया। पहले दोनों अधिकारी एक-दूसरे की ओर देखते रहे, लेकिन अंततः खंड विकास अधिकारी राजीव गुप्ता ने कहा कि “ईश्वर न करे ऐसी कोई घटना घटे, लेकिन यदि सर्वे के दौरान कोई हादसा होता है तो खंड विकास कार्यालय और शासन उसकी पूरी जिम्मेदारी लेंगे।”
बैठक के अंत में अधिकारियों ने रोजगार सेवकों को आश्वासन दिया कि उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा और हर समस्या पर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। हालांकि रोजगार सेवकों के मन में अब भी सवाल बरकरार हैं कि आखिर उन्हें राजस्व विभाग के काम में क्यों झोंका जा रहा है।

रोजगार सेवकों से डिजिटल क्रॉप सर्वे कराए जाने को लेकर बैठक संपन्न

ब्लॉक सभागार में रोजगार सेवक संघ ने सौंपा ज्ञापन, सुरक्षा व जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। स्थानीय तहसील क्षेत्र के बनकटा ब्लॉक सभागार में गुरुवार को नायब तहसीलदार सुशील कुमार तिवारी एवं खंड विकास अधिकारी (बनकटा) राजीव गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में रोजगार सेवकों के साथ डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अधिकारियों ने रोजगार सेवकों को शासन की मंशा से अवगत कराते हुए सभी ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने हेतु निर्देशित किया। इस दौरान रोजगार सेवक संघ की ओर से कई समस्याओं को सामने रखा गया।

संघ के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब शासन स्तर से यह कार्य राजस्व कर्मियों द्वारा कराए जाने संबंधी पत्र निर्गत हुआ है, तो फिर इस सर्वे की जिम्मेदारी रोजगार सेवकों पर क्यों डाली जा रही है। रोजगार सेवकों ने अपनी असमर्थता भी जताई और कहा कि बरसात के मौसम में खेतों में जहरीले विषधर अक्सर बाहर निकल आते हैं, ऐसे में खासकर महिला रोजगार सेवकों के लिए यह कार्य जोखिमपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई महिला रोजगार सेवकों के छोटे-छोटे शिशु बच्चे हैं, जिससे उनके लिए खेतों में जाकर सर्वे करना और भी कठिन हो जाता है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर—कि यदि सर्वे के दौरान किसी रोजगार सेवक के साथ कोई अप्रिय घटना, दुर्घटना अथवा सर्पदंश जैसी स्थिति होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी—नायब तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी पहले तो एक-दूसरे की ओर देखने लगे। बाद में खंड विकास अधिकारी राजीव गुप्ता ने कहा—
“ईश्वर न करे ऐसा कुछ हो, किंतु यदि सर्वे के दौरान किसी भी रोजगार सेवक के साथ कोई दुर्घटना घटित होती है, तो उसकी जिम्मेदारी खंड विकास कार्यालय एवं शासन की होगी, क्योंकि यह सर्वे शासन स्तर से कराया जा रहा है।”

बैठक के अंत में अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर रोजगार सेवक सर्वे में भाग लेने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन उनके मन में उठे कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।


मासूम को गोद में लेकर डीएम कार्यालय पहुंची माँ

सिकंदरपुर में 35 से अधिक अवैध जच्चा-बच्चा केंद्र संचालित

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सहुलाई तकिया (थाना पकड़ी) की खुशबू देवी अपने दूधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के दरबार में पहुँची और झोलाछाप डॉक्टर पर जबरन ऑपरेशन कर हालत बिगाड़ने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी ने मामले की जांच सीएमओ को सौंपी है।
पीड़िता का कहना है कि डॉ. अजय यादव ने बिना जांच जबरन ऑपरेशन किया, जिससे उसकी नस कट गई और हालत गंभीर हो गई। इलाज पर 20 हजार रुपये खर्च बताए गए, लेकिन मदद की गुहार लगाने पर डॉक्टर ने गाली-गलौज कर परिजनों को भगा दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि सिकंदरपुर क्षेत्र में करीब 35 अवैध जच्चा-बच्चा केंद्र चल रहे हैं, जहां झोलाछाप खुलेआम ऑपरेशन और डिलीवरी कर रहे हैं। तीन माह पहले भी लापरवाही से एक प्रसूता की मौत हो चुकी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा या खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगा।

गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष ने किया विसरापार गो-आश्रय का निरीक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला ने अस्थायी गो-आश्रय स्थल विसरापार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी गोवंश स्वस्थ पाए गए। केवल एक गोवंश के पैर में हल्की चोट मिली, जिसका उपचार किया जा रहा है।
मौके पर दो केयरटेकर उपस्थित रहे जिन्हें समय-समय पर साफ-सफाई बनाए रखने, चारा-भूसा एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के समय हरे चारे की व्यवस्था नहीं मिली, जिस पर तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
स्थल पर आठ बंडल साइलेंज पाया गया, जिसमें से एक खुले बंडल की गुणवत्ता असंतोषजनक पाई गई। इसे उपयोग में न लाने और आपूर्तिकर्ता फर्म को वापस करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान व सचिव अनुपस्थित रहे। इस अवसर पर उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी खलीलाबाद सदर, पशुधन प्रसार अधिकारी तथा ग्रामवासी उपस्थित रहे।

जिन हॉस्पिटलों का लाइसेंस जारी वही हॉस्पिटल होंगे संचालित-डीएम

लाइसेंस जारी हॉस्पिटलों की सूची जारी करें सीएमओ-डीएम

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक करते हुए सीएमओ को निर्देशित किया कि गोरखपुर जनपद में जिन हॉस्पिटलों का लाइसेंस दिया गया है, वही हॉस्पिटल संचालित होने चाहिए। जिन-जिन हॉस्पिटलों का लाइसेंस सीएमओ द्वारा जारी किया गया है उन हॉस्पिटल की सूची जारी करें, इनके अलावा कोई भी हॉस्पिटल जनपद में संचालित नहीं होनी चाहिए। बैठक में सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी, डीएफओ विकास यादव, जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा, सीएमओ डॉ राजेश झा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

भारत-रूस रिश्तों को नई मजबूती, मॉस्को में 26वें अंतर सरकारी आयोग की बैठक

नई दिल्ली/मॉस्को(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अमेरिका और यूरोप की लगातार बढ़ती दबावपूर्ण नीतियों के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का स्पष्ट संकेत दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को मॉस्को पहुंचकर भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग (IRIGC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक को दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने कहा कि वह लगभग दस महीने बाद रूस आकर प्रसन्न हैं और इस महत्वपूर्ण अवसर पर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर खुशी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि भारत-रूस के बीच व्यापारिक संबंधों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है।

विदेश मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत-रूस वस्तु व्यापार पिछले कुछ वर्षों में पाँच गुना बढ़ा है। वर्ष 2021 में जहां द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 68 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह बढ़ोतरी पश्चिमी देशों के तमाम प्रतिबंधों और दबावों के बीच दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ऊर्जा सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स, उर्वरक, रक्षा उत्पादन, उच्च प्रौद्योगिकी, परिवहन, कृषि और शिक्षा जैसे अनेक अहम क्षेत्रों पर गहन चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों के लिए नए सहयोग तंत्र विकसित करने पर सहमति जताई।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत रूस से कच्चे तेल और उर्वरक आयात को लेकर विशेष रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे भारत को रियायती दामों पर आपूर्ति मिल सके और घरेलू बाजार स्थिर रह सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात में यह बैठक भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता को उजागर करती है। पश्चिमी दुनिया की नाराज़गी के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा।

निष्कर्ष

भारत-रूस रिश्तों की मजबूती इस बात का प्रमाण है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भी दोनों देश दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बैठक न सिर्फ व्यापार और निवेश के नए आयाम खोलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति की भी झलक पेश करती है।