नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर लोकतंत्र अस्थिर करने और विपक्षी सरकारों को गिराने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले “वोट चोरी” करती थी और अब “सत्ता चोरी” में जुट गई है।
खरगे इंदिरा भवन में हरियाणा और मध्यप्रदेश की जिला कांग्रेस समितियों (DCC) के नवनियुक्त अध्यक्षों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने, बूथ और मंडल स्तर पर वफादार कार्यकर्ताओं को शामिल करने और गुटबाजी से बचने की अपील की। खरगे ने कहा – “कांग्रेस ने अपने मजबूत संगठन के दम पर लंबे समय तक शासन किया है। अगर हमें सत्ता में वापसी करनी है तो संगठन को फिर से खड़ा करना होगा।”
लोकतंत्र पर “बुलडोज़र” चलाने का आरोप कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा पर आरोप लगाया कि संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन तीन विधेयक लाए गए, जिनमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 भी शामिल है। इस संशोधन के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन तक जेल में रहते हैं तो उन्हें पद से हटाया जा सकेगा।
खरगे ने कहा – “इन विधेयकों से भाजपा विपक्षी सरकारों को 30 दिनों में गिरा सकती है। गिरफ्तारी को हथियार बनाकर लोकतंत्र को अस्थिर किया जा रहा है। यह लोकतंत्र पर बुलडोज़र चलाने जैसा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के मामले होने के बावजूद उन्हें पार्टी में शामिल कर मंत्री बनाया जाता है, जबकि विपक्षी नेताओं को एजेंसियों के जरिए परेशान किया जाता है।
राहुल गांधी भी रहे मौजूद बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा कि यह बैठक संगठन को जनता की आवाज़ बुलंद करने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राहुल गांधी बिहार से लौटकर शाम को इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने जानकारी दी कि उनकी वोटर अधिकार यात्रा सोमवार को एक दिन के लिए रुकेगी और मंगलवार को बिहार के सुपौल से आगे बढ़ेगी।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले सात दिनों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। विभाग के अनुसार, 26 अगस्त 2025 से पश्चिमी तट पर बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: अगले 7 दिनों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार।जम्मू-कश्मीर और हरियाणा: 25 से 26 अगस्त के बीच बारिश की संभावना।राजस्थान और मध्य भारत राजस्थान: 25 से 27 अगस्त तक कई हिस्सों में बारिश।मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा: अगले 6-7 दिनों तक कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी। ओडिशा: 25 और 26 अगस्त को कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश की संभावना।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: 25, 29 और 30 अगस्त को बारिश। बिहार: 25 और 30 अगस्त को कुछ हिस्सों में बारिश। झारखंड: 25, 28 और 29 अगस्त को बारिश के आसार।
विदर्भ और पश्चिमी तट विदर्भ: 28 से 30 अगस्त के बीच बारिश की संभावना। पश्चिमी तटीय क्षेत्र: 26 अगस्त से वर्षा की गतिविधियों में तेजी।
मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन को आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी है। खासकर निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है।
कुर्ला पश्चिम प्रभाग, 168 मे मुफ्त सब्ज़ी वितरण कार्यक्रम भव्य सफलता पूर्वक संपन्न,
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा )कुर्ला पश्चिम प्रभाग 168 राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस (शरदचंद्र पवार गुट) और स्वस्तिक एजुकेशन एंड वेल्फेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मुफ्त सब्ज़ी वितरण कार्यक्रम अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य आयोजक एवं जनसेवक अजयभाई समगिर, मुंबई कार्याध्यक्ष राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस (शरदचंद्र पवार गुट) ने किया। समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम की स्थानीय नागरिकों ने सराहना की। अजयभाई समगिर की मेहनत, जनसेवा के प्रति समर्पण और लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि वार्ड 168 के सैकड़ों परिवारों को इस कार्यक्रम से सीधा लाभ मिला। उक्त कार्यक्रम में राखीताई जाधव – मुंबई अध्यक्ष, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) पूर्व विधायक मिलिंद अण्णा कांबले – उत्तर मध्य मुंबई जिलाध्यक्ष,फहाद अहमद – राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस सुहास सूर्यवंशी – मुंबई अध्यक्ष, साहित्य कला चित्रपट विभाग, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सय्यद हुसैन – मुंबई अध्यक्ष, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सेवा दल इसके अलावा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। अजय समगिर ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन और सहयोग से यह कार्यक्रम संभव हो सका “कार्यक्रम में यदि कोई त्रुटि या कमी रह गई हो तो मै क्षमाप्रार्थी हू। भविष्य में और भी भव्य, सुव्यवस्थित और जनहितकारी उपक्रमों के लिए सदैव आपका सहयोग अपेक्षित है।”
अहमदाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार से अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। दौरे की शुरुआत रविवार शाम 4:30 बजे अहमदाबाद पहुंचने के साथ होगी।
पीएम मोदी यहां नरोडा से निकोल तक लगभग तीन किलोमीटर लंबे भव्य रोड शो में शामिल होंगे। रोड शो के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। सड़कों के दोनों ओर 12 मंच बनाए गए हैं, जहां हजारों कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। पूरे निकोल इलाके को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है, ताकि स्थानीय जनता बड़े उत्साह से प्रधानमंत्री का स्वागत कर सके।
गुजरात सरकार और भारतीय जनता पार्टी संगठन ने रोड शो को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी की है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी अपने इस दौरे के दौरान राज्य को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात देंगे, जिनसे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री का यह दौरा आगामी त्योहारों और आने वाले चुनावी परिदृश्य के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
जिले में बन रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कार्यदायी संस्था ने आसपास की 50 से अधिक ग्रामीण सड़कों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। सोहांव ब्लॉक क्षेत्र में ही एनएच से जुड़ी कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। स्थिति यह है कि लोगों का चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया है, जबकि शिकायतों पर अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। जानकारी के अनुसार, एनएच 31 से टुटुवारी तक 6.55 किमी लंबी सड़क पीएमजीएसवाई योजना के तहत अराधना इंटरप्राइजेज द्वारा 11 अगस्त 2020 को बनवाई गई थी। यह पांच वर्ष तक अनुरक्षण अवधि में थी। लेकिन करीब एक वर्ष पहले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का कार्य शुरू होने के बाद कार्यदायी संस्था ने इस मार्ग पर ओवरलोड डम्परों का परिचालन तेज कर दिया। भारी वाहनों के दबाव से यह सड़क पूरी तरह उखड़ गई। ग्रामीणों के विरोध के बाद एनएचएआई ने कार्यदायी संस्था से लिखित समझौता किया कि काम पूरा होने के बाद सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। मगर विभागीय लापरवाही और उदासीनता के कारण अब तक कोई पहल नहीं हुई। एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है, पर सड़क की मरम्मत की सुध किसी को नहीं है। इस संबंध में पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुबेर तिवारी ने कई बार अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में उन्होंने सम्पूर्ण समाधान दिवस पर भी आवेदन देकर भरौली–टुटुवारी मार्ग के निर्माण की मांग दोहराई है ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर चलना आज जान जोखिम में डालने के बराबर हो गया है। विभागीय उदासीनता से नाराज़ लोग अब आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सोमवार (25 अगस्त) से मेट्रो किराए में संशोधन लागू कर दिया है। इससे दिल्ली मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को अब थोड़ी ज्यादा रकम चुकानी होगी। यह बढ़ोतरी लगभग आठ साल बाद हुई है। आखिरी बार किराए में बढ़ोतरी साल 2017 में की गई थी।
DMRC के मुताबिक, इस बार किराए में केवल मामूली बढ़ोतरी की गई है। ज्यादातर मेट्रो लाइनों पर यात्रियों को टिकट के लिए 1 रुपये से 4 रुपये तक अधिक भुगतान करना होगा। वहीं, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर बढ़ोतरी थोड़ी ज्यादा है, जहां किराए में 5 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।
यात्रियों पर असर किराए में यह बढ़ोतरी रोज़ाना मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की जेब पर असर डालेगी। दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग मेट्रो पर निर्भर हैं, ऐसे में छोटे स्तर की यह बढ़ोतरी भी उनके मासिक खर्च में इज़ाफा करेगी।
क्यों बढ़ाया गया किराया? DMRC का कहना है कि मेट्रो संचालन की बढ़ती लागत और रखरखाव के मद्देनज़र किराए में संशोधन करना ज़रूरी हो गया था। हालांकि, यह सुनिश्चित किया गया है कि यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े और बढ़ोतरी न्यूनतम रखी जाए।
दिल्ली मेट्रो में किराए की यह बढ़ोतरी छोटे स्तर पर भले ही लगे, लेकिन रोजाना सफर करने वालों के लिए यह निश्चित रूप से खर्च बढ़ाने वाली साबित होगी।
बुलंदशहर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। अरनिया बाईपास के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने तीर्थयात्रियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में दो बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 43 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में कुल 61 लोग सवार थे। सभी कासगंज जिले के रफातपुर गांव से राजस्थान के जाहरपीर में तीर्थयात्रा के लिए जा रहे थे। देर रात करीब दो बजे अचानक हरियाणा नंबर का कैंटर ट्रक तेज रफ्तार से आया और पीछे से ट्रॉली में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रॉली सड़क किनारे पलट गई।
घटना की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, 10 घायलों को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज, 10 को बुलंदशहर जिला अस्पताल और 23 को खुर्जा के कैलाश अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।
एसएसपी सिंह ने बताया कि मृतकों की पहचान ट्रैक्टर चालक ईयू बाबू (40), रामबेटी (65), चांदनी (12), घनीराम (40), मोक्षी (40), शिवांश (6), योगेश (50) और विनोद (45) के रूप में हुई है। सभी मृतक कासगंज जिले के निवासी थे।
जिलाधिकारी श्रुति, एसएसपी दिनेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और घायलों से अस्पताल में मिलकर उनका हालचाल लिया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं, पुलिस ने हरियाणा पंजीकृत ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस घटना की जानकारी होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर में शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है, अधिकारियों को शीघ्र राहत प्रदान करने और घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की है।
यह हादसा तीर्थयात्रियों के लिए मातम में बदल गया। गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बीच-बचाव करने आई महिला कन्डेक्टर को भी युवकों ने मारपीट किया घायल
मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) रविवार की रात्रि लगभग 8 बजें घोसी की तरफ से आ रही मऊ रोडवेज की बस जैसे ही कोपागंज थाना क्षेत्र के टडियाव पहुंची लाठी डंडा लिए आठ दस युवकों ने बस में बैठे एक युवक पर हमला बोल दिया। हमले के दौरान बीच बचाव करने आये यात्रियों से भी युवकों से झड़प हुई। इसी बीच बीच बचाव करने आई महिला कन्डेक्टर वर्षा कुमारी को भी युवकों ने डंडे से मारकर हाथ चोटहिल कर दिया। मारपीट के दौरान कंडक्टर द्वारा यात्रियों के लिए टिकट निकालने वाले मशीन भी तोड़ दिया। मारपीट के बाद सभी आरोपी वहां से भाग गए। उधर बस चालक ने यात्रियों से भरी बस कोपागंज थाने पर लाकर खड़ा कर दिया। बताया जाता है कि बस में बैठे युवक को आने की जानकारी पहले से थीं। जैसे ही रोडवेज बस टडियाव पहुंची। एक यात्री उतरने के लिए चालक को आवाज दिया । जैसे ही चालक ने बस को रोका अचानक आठ दस की संख्या में आये युवकों ने बैठे युवक पर हमला बोल दिया। जिसके बाद बस में अचानक भगदड़ मच गई। कुछ यात्रियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो आरोपी युवको नें उनको भी धमकाने लगे। कहने लगे तुज्ञ मत बोलों गांव का मामला है। इसी बीच बीच बचाव करने आई महिला कन्डेक्टर वर्षा कुमारी को भी युवकों ने डंडे से मारकर हाथ गम्भीर रूप से ज़ख़्मी कर दिया। उधर बस में बैठे जिस युवक पर आरोपी युवकों द्वारा हमला किया गया उससे पुलिस पूछताछ कर रही है। उधर घटना के बाद चालक बस को लाकर थाने पर खड़े करने के बाद पुलिस को तहरीर दी है।
(राष्ट्र की परम्परा के लिए एडवोकेट किशन सनमुख दास भावनानी गोंदिया )
जब तक हम युवाओं को अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपरा,ज्ञान और संस्कृति को नहीं बताएँगे, हम वैसे ही रहेंगे जैसे अंग्रेजों ने हमें दिखाए हैं-एडवोकेट किशन सनमुख दास भावनानी गोंदिया
गोंदिया – भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इसकी जड़ें हज़ारों वर्षों पुरानी परंपराओं, ज्ञान और संस्कृति में गहराई से जुड़ी हुई हैं।यहाँ वेद, उपनिषद,पुराण,महाभारत,रामा यण योग,आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, खगोलशास्त्र और गणित जैसी महान धरोहरें विकसित हुईं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र ऐसा मानता हूं कि यही वह परंपरा थी जिसने भारत को ‘विश्वगुरु’ का दर्जा दिलाया। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा प्रणाली, संस्कृति और इतिहास को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि भारतीय अपनी ही जड़ों से कटते चले गए। आजादी के इतने वर्षों बाद भी हम अपने युवाओं को अपनी वास्तविक पहचान नहीं बता पाए हैं। जब तक यह स्थिति बनी रहेगी,तब तक हम उसीमानसिक गुलामी में जीते रहेंगे,जिसे अंग्रेज हम पर थोप कर गए थे।भारत का ज्ञान-सागर अनंत है। वैदिक साहित्य केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं थे, बल्कि उनमें जीवन के प्रत्येक पहलू से जुड़ा विज्ञान समाहित था। उपनिषदों ने आत्मा, ब्रह्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों की खोज की।आयुर्वेद ने चिकित्सा को प्रकृति के साथ जोड़ा, जहाँ रोग निवारण के साथ- साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई गई। सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का पिता कहा गया, वहीं चरक ने संपूर्ण चिकित्सा शास्त्र को व्यवस्थित किया।गणित के क्षेत्र में आर्यभट, वराहमिहिर और भास्कराचार्य ने शून्य, दशमलव, ग्रहों की गति और खगोल विज्ञान पर अद्वितीय कार्य किए। योग की परंपरा ने शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने का मार्ग दिखाया। यदि यह सब हम अपने युवाओं को सिखाएँ, तो वे केवल पश्चिमी विज्ञान और संस्कृति के अनुयायी नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े हुए आत्मनिर्भर व्यक्तित्व बनेंगे। साथियों बात अगर हम भारतीय संस्कृति की विशेषताओं की करें तो,भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता और समन्वय है। यहाँ अलग- अलग धर्म, जातियाँ, भाषाएँ और परंपराएँ हैं,फिर भी यह विविधता “एकता” के सूत्र में बंधी हुई है। गंगा-जमुनी तहज़ीब से लेकर बौद्ध, जैन,सिख और संत परंपरा तक, हर युग ने भारतीय संस्कृति को और अधिक समृद्ध किया। परिवार व्यवस्था,गुरु-शिष्य परंपरा और सामूहिक जीवन की अवधारणा ने समाज को एकजुट रखा। कला, संगीत, नृत्य और साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा रहे।युवाओं को यदि यह बताया जाए कि उनकी संस्कृति कितनी व्यापक और गहन है, तो उनमें आत्मगौरव की भावना पैदा होगी और वे किसी विदेशी संस्कृति के प्रभाव में आसानी से नहीं बहेंगे। साथियों बात अगर हम अंग्रेजों द्वारा थोपी गई मानसिकता की करें तो, अंग्रेजों ने भारत को केवल राजनीतिक रूप से ही गुलाम नहीं बनाया,बल्कि मानसिक औरसांस्कृतिक गुलामी भी थोपी।“मैकॉले की शिक्षा प्रणाली”का मुख्य उद्देश्य था कि भारतीय ऐसे लोग बनें,जो रंग- रूप से भारतीय हों लेकिन सोच और मानसिकता से अंग्रेज। इसके लिए उन्होंने पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त किया और अंग्रेजी माध्यम को श्रेष्ठ बनाकर प्रस्तुत किया। भारतीय भाषाओं, साहित्य और दर्शन को पिछड़ा और अवैज्ञानिक कहकर तिरस्कृत किया गया। इतिहास को इस तरह से लिखा गया कि विदेशी आक्रांताओं को महिमा मंडित किया गया और भारतीय उपलब्धियों को या तो छोटा कर दिया गया या नकार दिया गया। इस कारण पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय युवाओं का अपनी परंपरा पर विश्वास कमजोर होता चला गया। साथियों बात अगर हम युवाओं पर पश्चिमी प्रभाव की करें तो, आज का युवा तकनीकी रूप से आधुनिक है, लेकिन मानसिक स्तर पर अक्सर पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होता है।पश्चिमी फैशन, भोजन,संगीत,सिनेमा और जीवनशैली उसे आकर्षित करते हैं। अंग्रेजों द्वारा थोपी गई मानसिकता का असर आज भी है,जहाँ कई युवा भारतीय परंपरा को पिछड़ा समझते हैं,उन्हें यह बताया ही नहीं गया कि हमारी संस्कृति कितनी महान और वैज्ञानिक है। यदि किसी युवा को यह ज्ञान न हो कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविकास का साधन है,तो वह इसे पश्चिमी जिम संस्कृति से तुलना करके ही देखेगा।इसी प्रकार, यदि उसे आयुर्वेद की शक्ति नहीं बताई जाएगी,तो वह केवल आधुनिक दवाइयों पर ही जिंदगी भर निर्भर रहेगा। साथियों बात अगर हमपरंपरा से कटाव के दुष्परिणामों की करें तो,जब युवा अपनी परंपरा और संस्कृति से कट जाते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उनकी पहचान को होता है।वेआत्मगौरव खो देते हैं और किसी विदेशी संस्कृति का अंधानुकरण करने लगते हैं।समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण होता है और परिवार व्यवस्था कमजोर पड़जाती है। उपभोक्तावाद और भौतिकवाद जीवन का अंतिमलक्ष्य बन जाता है। ऐसे में राष्ट्र की सामूहिक चेतना भी कमजोर होती है। यदि हम युवाओं को अपनी जड़ों से नहीं जोड़ पाए, तो भविष्य की पीढ़ियाँ भारतीय होने पर गर्व करना ही भूल जाएँगी और केवल वही रूप देखेंगी, जो अंग्रेज उन्हें दिखाकर गए थे। साथियों बात अगर हम युवाओं तक परंपरा पहुँचाने की आवश्यकता की करें तो,युवाओं तक परंपरा और संस्कृति पहुँचाने का कार्य केवल शिक्षा संस्थानों का ही नहीं,बल्कि परिवार, समाज और मीडिया का भी है।विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों के साथ पढ़ाया जाए।परिवार में बच्चों को कहानियों,पर्व-त्योहारों और अनुष्ठानों के माध्यम से संस्कृति का अनुभव कराया जाए। मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं को प्रस्तुत करने के लिए किया जाए। यदि यह काम व्यवस्थित ढंग से किया जाए, तो युवा अपनी संस्कृति से जुड़ेंगे और अपने भविष्य को उसी आधार पर गढ़ेंगे। साथियों बात अगर हम परंपरा और आधुनिकता का संतुलन की करें तो,युवाओं को यह समझाना होगा कि परंपरा का मतलब पुराने ढर्रे पर अटक जाना नहीं है। आधुनिकता और परंपरा में टकराव नहीं, बल्कि संतुलन आवश्यक है। हमें आधुनिक विज्ञान और तकनीक को अपनाना चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूती से थामे रहना चाहिए। योग और आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ जोड़ना,भारतीय भाषाओं को तकनीक के साथ विकसित करना,और प्राचीन दर्शन को आधुनिक समस्याओं केसमाधान से जोड़ना इसी संतुलन का उदाहरण है। यह संदेश युवाओं को देना होगा कि वे आधुनिक बनें, लेकिन अपनी पहचान और संस्कृति को भूले नहीं। साथियों बात अगर हम भविष्य की राह की करें तो भारत का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर है। यदि युवा अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़ेंगे,तो वे आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता के साथ राष्ट्र निर्माण करेंगे। यदि वे केवल पश्चिमी ढांचे में ढलेंगे, तो उनकी सोच भी पराधीन रहेगी। इसलिए अब यह समय है कि हम युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से परिचित कराएँ। स्कूलों में भारतीय इतिहास और परंपरा को सही स्वरूप में पढ़ाया जाए, विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध हो, और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाई जाए। तभी भारत पुनः विश्वगुरु की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।इसलिए“जब तक हम युवाओं को अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपरा, ज्ञान और संस्कृति को नहीं बताएँगे, हम वैसे ही रहेंगे जैसे अंग्रेजों ने हमें दिखाए हैं”,यह कथन केवल एकचेतावनी नहीं, बल्कि हमारे लिए मार्गदर्शन है। युवाओं को यदि अपनी पहचान का ज्ञान नहीं होगा, तो वे कभी भी आत्मगौरव महसूस नहीं करेंगे।आज आवश्यकता है कि हम अपनी शिक्षा प्रणाली, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक गतिविधियों में इस चेतना को जगाएँ। जब युवा अपनी जड़ों से जुड़े होंगे, तभी भारत वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनेगा। तभी हम अंग्रेजों की बनाई हुई छवि से बाहर निकलकर अपनी असली पहचान पा सकेंगे। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आज का युवा तकनीकी रूप से आधुनिक है,लेकिन मानसिक स्तरपर अक्सर पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है।भारत का ज्ञान- सागर अनंत है,वैदिक साहित्य केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं थे,बल्कि उनमें जीवन के प्रत्येक पहलू से जुड़ा विज्ञान समाहित था,जब तक हम युवाओं को अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपरा,ज्ञान और संस्कृति को नहीं बताएँगे, हम वैसे ही रहेंगे जैसे अंग्रेजों ने हमें दिखाए हैं।
–संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
दो वर्षों में रेबीज़ से किसी की मौत नहीं, जिले में एआरवी-आरआईजी का पर्याप्त स्टॉक
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिले में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन कुत्तों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में रोजाना 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 90 प्रतिशत मामले केवल कुत्ता काटने के ही होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम में बदलाव और प्रजनन काल के दौरान कुत्तों का स्वभाव आक्रामक हो जाता है, जिसके चलते काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में जिले में रेबीज़ से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण है कि सभी सरकारी अस्पतालों में समय पर एंटी रेबीज़ वैक्सीन (एआरवी) और रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन (आरआईजी) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जनवरी से 31 जुलाई तक जिलेभर में 19,420 लोगों को एआरवी लगाई गई। वर्तमान में जिले के 32 सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पताल, 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में 2,365 से अधिक एआरवी वायल स्टॉक में मौजूद हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 57 मरीज ऐसे पहुंचे, जिन्हें सामान्य जख्म पर एआरवी लगाया गया, जबकि 13 गंभीर मरीजों को आरआईजी की डोज दी गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रोजाना 50 से 60 लोग केवल आरआईजी के लिए जिला अस्पताल आते हैं। इनमें बलिया जिले के अलावा गाजीपुर और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गहरे जख्म वाले मरीजों को केवल एक बार इंजेक्शन नहीं, बल्कि हर महीने दो से तीन डोज लगानी पड़ती है। समय पर और पूरी खुराक लेने से रेबीज़ का खतरा पूरी तरह टल जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में एआरवी और आरआईजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसी भी मरीज को दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत प्रभावित जगह को साबुन-पानी से धोएं और विलंब किए बिना अस्पताल पहुंचें
मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )जनपद के हलधरपुर थाना क्षेत्र के पहदेवाजीत ग्राम पंचायत के खरका निवासी इंद्रासन राम के घर बीती रात में शौचालय के छत से उपर चढ़कर चोरों ने आंगन में लगे छड़ को काट कर घर के अंदर घुस गये। चोरों ने कमरे में रखे आलमारी से पांच लाख रुपए नकद और लगभग पंद्रह लाख रुपए का जेवरात लेकर फरार हो गए । इस चोरी से भी चोरो का मन नही भरा तो उसी ग्राम सभा के मुन्नी लाल प्रजापति के घर में भी चोरों ने आंगन के रास्ते घर में घुस कर लगभग पांच लाख रुपए के गहने लेकर फरार हो गए। इंद्रासन राम ने बताया कि मैं और पत्नी हाल में सोए हुए थे, और बहु और नतिनी घर में सोए हुए थे। भोर में जब बहु जगी तो देखी की एक आलमारी खुली हुई है, और उसमें का सामान बिखरा पड़ा है, तो और कमरे भी खुले हुए थे। तब उसने शोर मचाया। हम लोग भी अंदर गए, तो तीन कमरों का दरवाजा खुला हुआ था, और उसमें रखे आलमारी और बक्से खुले हुए थे। सारा सामान बिखरा पड़ा था ,और पिछे की खिड़की खुली हुई थी , अहाते में सारा समान बिखरा पड़ा था । मेरा पांच लाख रुपए नकद और लगभग पंद्रह लाख रुपए का गहना चोर लेकर चले गए।चोरी की सूचना पर पुलिस भी पहुंची और विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी मौके पर पहुंची, और स्थिति का जायजा लिया ।दोनों ही पीड़ितों ने अपने लिखित तहरीर थाने पर दे दी है ।चोरी की घटना से लोगों में भय व्याप्त है ।
संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के मडपौना गांव में बीती रात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। गांव निवासी उमाशंकर दूबे पुत्र कृष्णचंद्र दूबे के घर में घुसे चोर जेवरात और नगदी लेकर फरार हो गए। परिवारजन के अनुसार चोरी गए सामान और नकदी की कुल कीमत लगभग दो लाख रुपये आंकी जा रही है। घटना की जानकारी होते ही परिवारजन दहशत में आ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाने के साथ ही मामले की जांच-पड़ताल कर रही है और चोरों की तलाश तेज कर दी है।
बलिया(राष्ट्र की परम्परा) बैरिया थाना क्षेत्र के रानीगंज बाजार स्थित कोटवां हॉस्पिटल मोड़ के पास रविवार की रात कार सवार बदमाशों ने एक व्यापारी के घर को निशाना बनाते हुए फायरिंग कर दी। फायरिंग की आवाज से पूरे बाजार में हड़कम्प मच गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी।वपीड़ित घनश्याम केसरी पुत्र काशीनाथ केसरी निवासी रानीगंज बाजार ने तहरीर में बताया कि रात करीब आठ बजे वह अपने मकान की छत पर खड़े थे। उसी दौरान एक कार से आये विशाल सिंह पुत्र रामजी सिंह निवासी कोटवा, प्रियांशु वर्मा पुत्र ब्रह्म शंकर वर्मा निवासी करमानपुर व पीयूष सिंह पुत्र राकेश सिंह निवासी तालिबपुर उतरे और अवैध असलहे से उन पर जानलेवा हमला करते हुए तीन राउंड फायर झोंक दिया। गोलियां मकान की दीवार से टकरा गईं, जिससे वह बाल-बाल बच गए। इसके बाद हमलावर असलहा लहराते हुए कार से सुरेमनपुर की ओर भाग निकले। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर चार नामजद—विशाल सिंह, प्रियांशु वर्मा, पीयूष सिंह तथा कान्हा सिंह उर्फ आर्यन सिंह पुत्र अरविंद सिंह निवासी तालिबपुर—के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इन आरोपितों ने दिसंबर 2024 में घनश्याम केसरी से रंगदारी मांगी थी। इस मामले में 22 दिसंबर को बैरिया थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी विवेचना के बाद पुलिस आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है। उसी मुकदमे में सुलह कराने का दबाव बनाने के लिए ही आरोपितों द्वारा फायरिंग की गई। घटना से पूर्व कान्हा सिंह ने सुलह न करने पर घनश्याम केसरी को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा मजबूत भारत की नींव : सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान विषयक संगोष्ठी संपन्न
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग तथा आईसीएसएसआर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को हुआ। संगोष्ठी का विषय “राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा मजबूत भारत की नींव : सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान” था। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अमृता चौरसिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि “मजबूत दीवारें सीमाओं की रक्षा करती हैं और मजबूत इरादे एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत के पास सबसे बड़ी युवा शक्ति है, जिसके बल पर इसे विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है। भारत की एकता और अखंडता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है और विविधता से परिपूर्ण ऐसा राष्ट्र दुनिया में और कहीं नहीं है। मुख्य अतिथि प्रकाशमणि त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित होती है। सरदार वल्लभभाई पटेल को उन्होंने राजनीतिक दूरदर्शी और संकल्प के धनी नेतृत्वकर्ता बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता की चर्चा जब भी होगी, पटेल का नाम सर्वोपरि रहेगा। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने स्वतंत्रता के बाद भारत के राजनीतिक एकीकरण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भारत की सॉफ्ट पावर है, जो भावनात्मक एकीकरण में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही जे.पी. आंदोलन, सत्याग्रह, संविधान निर्माण तथा नागपुर झंडा आंदोलन में पटेल की भूमिका को भी याद किया। सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने की। उन्होंने कहा कि विचार और कर्म से ही किसी का व्यक्तित्व जीवंत रहता है, और सरदार पटेल इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भौगोलिक सीमाओं की सुरक्षा पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं पर शांति और विकास, राष्ट्र की मजबूती के मूल आधार हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया तथा संगोष्ठी को सफल बताया। संयोजक सचिव डॉ. आरती यादव ने आयोजन में सहयोग देने वाले विशेषज्ञों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा नेपाल से आए प्रतिभागियों सहित सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रदेशों से आए प्रतिभागी, विषय विशेषज्ञ प्रो. सतीश चंद्र पांडेय, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी, प्रो. प्रदीप कुमार यादव, प्रो. हरि सरन, डॉ. प्रवीन कुमार सिंह, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अभिषेक सिंह, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के शिक्षकगण, शोध छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में परास्नातक व स्नातक छात्र उपस्थित रहे।
161 मेधावियों को मिलेंगे पदक, 301 शोधार्थियों को प्रदान की जाएगी पी-एच.डी. उपाधि
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह आज दोपहर बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित होगा। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, आईआईटी कानपुर के इंस्टिट्यूट चेयर प्रोफेसर, मुख्य अतिथि होंगे एवं दीक्षांत व्याख्यान देंगे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में कुल 76 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए जाएंगे, जिनमें 56 छात्राएं और 20 छात्र शामिल हैं। इस वर्ष 71 विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा 90 डोनर पदक दिए जाएंगे। इस प्रकार कुल 161 मेधावी विद्यार्थियों को पदक प्राप्त होंगे। उल्लेखनीय है कि 43वें दीक्षांत समारोह में 140 पदक वितरित हुए थे। सत्र 2024-25 में कुल 73,887 उपाधियाँ प्रदान की जाएंगी। इनमें विश्वविद्यालय परिसर स्तर पर 7,711 तथा महाविद्यालय स्तर पर 66,176 उपाधियाँ शामिल हैं। इस प्रकार कुल 50,636 छात्राएं और 23,251 छात्र उपाधि प्राप्त करेंगे। इस वर्ष समारोह में 301 शोधार्थियों को पी-एच.डी. उपाधि प्रदान की जाएगी। इनमें कला संकाय के 117, विज्ञान संकाय के 99, वाणिज्य के 35, शिक्षा के 31, विधि के 11 तथा कृषि संकाय के 8 शोधार्थी शामिल हैं। यह अब तक की सर्वाधिक संख्या है। गत वर्ष 43वें दीक्षांत समारोह में 166 शोधार्थियों को ही यह उपाधि दी गई थी। समारोह की तैयारियों के अंतर्गत पूर्वाभ्यास कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस दौरान विद्वत पदयात्रा निकाली गई तथा मेडल विजेताओं को सम्मान ग्रहण की रिहर्सल कराई गई। अभ्यास में प्राध्यापकों ने कुलाधिपति, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में कंपोजिट स्कूल के बच्चों ने पर्यावरण संदेश पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। विद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में विजयी तीन छात्रों को भी सम्मानित किया गया।