Friday, July 17, 2026
Home Blog Page 763

हरतालिका तीज पर महिलाओं का निर्जल व्रत, शिव-पार्वती की पूजा से मांगी पति की लंबी उम्र

जिले में आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया पर्व, रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन से गूंजे मंदिर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भादो मास की शुक्ल तृतीया पर मंगलवार को जनपद में श्रद्धा और आस्था के साथ हरतालिका तीज का पर्व मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल रहकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की तथा पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना किया।
सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों, लाल-पीली साड़ियों, चुनरियों और संपूर्ण श्रृंगार के साथ व्रत रखा। हाथों में लगी मेहंदी और चूड़ियों की खनक ने उत्सव का उल्लास और बढ़ा दिया। मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और पूजा-पाठ का दौर चलता रहा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का नाम माता पार्वती की तपस्या से जुड़ा है। कहा जाता है कि शिवजी को पति रूप में पाने की कठोर साधना के दौरान उनकी सहेलियों ने उनका अपहरण कर लिया था। ‘हरत’ का अर्थ है अपहरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ है सहेली। इसी कारण इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाता है।
व्रत के दौरान दिनभर महिलाएं उपवास करती हैं और रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं। मंदिरों में देवी-देवताओं की स्तुति और लोकगीतों की स्वर-लहरियों से देर रात तक श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा।

13 सितम्बर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों पर मंथन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा की अध्यक्षता में न्यायिक अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी 13 सितम्बर 2025 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों पर चर्चा हुई।
जिला न्यायाधीश ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार 13 सितम्बर (द्वितीय शनिवार) को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सभी न्यायिक अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में अधिक से अधिक वादों और प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पक्षकारों की अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए नोटिस तामील करवाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न प्रकार के शिविर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा पराविधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग लोक अदालत में प्रतिभाग कर सकें।
जिला न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि लोक अदालत में लंबित वादों का अधिकतम निस्तारण प्राथमिकता से किया जाए।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय नासिर अहमद, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी, अपर जिला जज प्रथम रमेश दूबे, अपर जिला जज (एससी-एसटी) भूपेंद्र राय, नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज (पॉस्को) कृष्ण कुमार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) संजय राज पांडेय, सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) सुनील कुमार सिंह, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मिमोह यादव, प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्यायालय अशोक कुमार कसौधन, अतिरिक्त सिविल जज (जूनियर डिवीजन) नरेंद्र कुमार यादव, ग्राम न्यायालय मेहदावल के न्यायाधिकारी चंदन सिंह तथा सिविल जज (जूनियर डिवीजन एफटीसी) अभिनव त्रिपाठी मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने सुनी रोजगार सेवकों की समस्याएं, जल्द समाधान का भरोसा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में रोजगार सेवकों की समस्याओं के समाधान हेतु एक बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में संबंधित विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में रोजगार सेवकों ने अपनी समस्याएं रखीं। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश तथा मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने रोजगार सेवकों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी सभी समस्याओं का निस्तारण नियमानुसार प्राथमिकता से किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ समयबद्ध ढंग से संपन्न किया जाए, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने रोजगार सेवकों को भी निर्देशित किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तत्परता के साथ निभाएं और शासकीय कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
इस अवसर पर उपायुक्त मनरेगा प्रभात द्विवेदी, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में रोजगार सेवक और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

आरएसएस शताब्दी समारोह : मोहन भागवत बोले – “भारत विश्वगुरु बनने की राह पर”

नागपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह में संघ प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत ने संगठन की अब तक की यात्रा और आने वाले समय की दिशा पर विस्तार से विचार रखे।

भागवत ने कहा कि आरएसएस का सार उसकी दैनिक प्रार्थना की अंतिम पंक्ति ‘भारत माता की जय’ में निहित है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि संगठन के अस्तित्व और कार्य का मूल है। उन्होंने कहा— “यह हमारा देश है, हमें इसकी प्रशंसा करनी चाहिए और इसे दुनिया में नंबर एक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। आज दुनिया करीब आ गई है, इसलिए हमें वैश्विक स्तर पर सोचने की ज़रूरत है।”

विवेकानंद और भारत का मिशन अपने संबोधन में मोहन भागवत ने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र का एक विशेष मिशन होता है। भारत का भी अपना योगदान है और यही समय है जब भारत विश्व में नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी देश को नेता तभी बनना चाहिए जब उसका नेतृत्व दुनिया की व्यवस्था में नई गति और संतुलन ला सके।

भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस की स्थापना का उद्देश्य भारत के लिए है और इसका महत्व भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने में निहित है।

क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम का संदर्भ भागवत ने स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1857 की क्रांति के बाद कई विचारधाराएँ जन्मीं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी इन्हीं प्रयासों से निकली और उसने आज़ादी का लक्ष्य हासिल किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद यदि यह आंदोलन अपने उद्देश्य की रोशनी फैलाता रहता तो आज भारत की तस्वीर और भी अलग होती।

उन्होंने वीर सावरकर को उस क्रांतिकारी लहर का “दैदीप्यमान रत्न” बताते हुए कहा कि उनका योगदान आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है।

1925 से पहले ही आकार ले चुका था विचार संघ प्रमुख ने याद दिलाया कि आरएसएस का विचार संस्थापक डॉ. हेडगेवार के मन में 1925 से कई साल पहले ही आकार ले चुका था। विजयदशमी के दिन इसकी औपचारिक घोषणा की गई। यह संगठन पूरे हिंदू समाज के लिए था और है।

भागवत ने कहा— “जो कोई भी हिंदू के रूप में पहचाना जाना चाहता है, उसे देश का जिम्मेदार नागरिक होना होगा। हिंदू समाज एक जिम्मेदार समुदाय है, क्योंकि इसे यह पहचान सबसे पहले मिली थी।”

विश्व पटल पर भारत की भूमिका अपने भाषण के अंत में मोहन भागवत ने जोर दिया कि अब समय आ गया है जब भारत विश्व में अपनी सशक्त भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि भारत का उदय केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए होना चाहिए। यही आरएसएस के 100 वर्षों की साधना का सार है।

अयोध्या में दीपोत्सव 2025 पर खुलेगा भव्य वैक्स म्यूजियम

रामायण के 50 से अधिक पात्रों की जीवंत झलक देख सकेंगे श्रद्धालु व पर्यटक

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) दीपोत्सव 2025 इस बार अयोध्या के लिए और भी खास होने वाला है। रामनगरी में पहली बार एक भव्य वैक्स म्यूजियम श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। परिक्रमा पथ पर लगभग 10,000 वर्गफीट क्षेत्रफल में बनने जा रहा यह म्यूजियम धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम देगा।

करीब 7.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह संग्रहालय रामायण युग की झलकियों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा। इसमें भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान समेत रामायण के लगभग 50 प्रमुख पात्रों की मोम की प्रतिमाएँ स्थापित की जाएंगी।

विशेषता यह होगी कि आधुनिक तकनीक, ऑडियो-वीडियो इफेक्ट्स और सजीव प्रस्तुति से आगंतुकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग ऐसे महसूस होंगे मानो वे स्वयं उस युग में उपस्थित हों।

प्रतिमाओं के निर्माण का कार्य महाराष्ट्र की एक प्रतिष्ठित संस्था और केरल के विशेषज्ञ कलाकारों की देखरेख में किया जा रहा है। कलाकारों का उद्देश्य है कि प्रतिमाओं को पात्रों की वास्तविक भाव-भंगिमा और ऐतिहासिक संदर्भों के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक उन्हें देखकर उस कालखंड का अनुभव कर सकें।

अयोध्या में दीपोत्सव पहले ही विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। अब यह वैक्स म्यूजियम न केवल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगा।

सीएम योगी के सख्त रुख से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, मरीज माफिया पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

गोरखपुर/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बाहर लंबे समय से सक्रिय मरीज माफिया और उनके नेटवर्क पर अब प्रशासन शिकंजा कसने जा रहा है।

दरअसल, जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास लगातार अव्यवस्था और मरीजों से लूट-खसोट की शिकायतें सामने आ रही थीं। गंभीर बीमारी या सड़क हादसे जैसी स्थिति में पीड़ितों को गुमराह कर निजी अस्पतालों और फर्जी मेडिकल स्टोर्स तक खींचने वाले माफिया अब नकेल कसने की जद में हैं। ये माफिया न केवल एंबुलेंस ऑपरेटरों से जुड़े हैं, बल्कि कई छोटे-बड़े फर्जी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स तक इनका नेटवर्क फैला हुआ है।

मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर मरीजों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि माफिया ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले तत्वों की भी पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रशासन ने भी मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीम गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अस्पतालों के आसपास सक्रिय दलालों, फर्जी मेडिकल स्टोर्स और संदिग्ध एंबुलेंस संचालकों की लिस्ट बनाई जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर छापेमारी और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई देखने को मिलेगी। इसके साथ ही अस्पतालों के आसपास सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सतर्कता बढ़ाई जाएगी, ताकि मरीजों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो सके।

सरकार की इस सख्ती से जहां मरीज और उनके परिजन राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं लंबे समय से सक्रिय मरीज माफिया और उनके संरक्षक अब दहशत में हैं।

गौतमबुद्ध नगर को पहली बार महिला जिलाधिकारी, मेधा रूपम ने संभाली कमान

गौतमबुद्ध नगर(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिले के इतिहास में पहली बार किसी महिला आईएएस अधिकारी को जिलाधिकारी (डीएम) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तेजतर्रार और काबिल अफसर के तौर पर पहचानी जाने वाली आईएएस मेधा रूपम ने नोएडा का नया डीएम पदभार संभाल लिया है। इससे पहले यहां कार्यरत मनीष कुमार वर्मा का स्थानांतरण प्रयागराज कर दिया गया है।

प्रशासनिक पृष्ठभूमि मेधा रूपम 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वे कासगंज की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। साथ ही ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी के तौर पर भी उनकी कार्यशैली की काफी सराहना हुई थी।

जन्म और शिक्षा मेधा रूपम का जन्म 21 अक्टूबर को आगरा में हुआ। उनके पिता सरकारी नौकरी में थे, जिसकी वजह से प्रारंभिक पढ़ाई आगरा और बाद में केरल में हुई। उन्होंने नेवल पब्लिक स्कूल, एर्नाकुलम और सेंट थॉमस स्कूल, तिरुवनंतपुरम से शिक्षा प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र (Economics) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

खेलों में भी शानदार उपलब्धियां स्कूल के दिनों से ही मेधा रूपम को शूटिंग खेल में गहरी रुचि रही। वर्ष 2008 में, जब वे 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में स्टेट रिकॉर्ड बनाया। यही नहीं, केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

प्रशासनिक सेवा की राह हालांकि खेलों में मेधा की उपलब्धियां शानदार रहीं, लेकिन उनका सपना हमेशा से प्रशासनिक सेवा में जाने का था। यही वजह रही कि उन्होंने आईएएस परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल की।

जिले की जनता को उम्मीदें गौतमबुद्ध नगर के लोग पहली बार किसी महिला डीएम को नेतृत्व में देख रहे हैं। मेधा रूपम के अब तक के प्रशासनिक कार्यों और तेज़-तर्रार छवि को देखते हुए जिलेवासियों को उनसे विकास कार्यों की गति तेज होने और सुशासन की नई उम्मीदें हैं।

यूपी सरकार की पहल: SC/ST और OBC युवाओं को IAS-PCS की मुफ्त कोचिंग

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़े और वंचित वर्गों के युवाओं को सफलता दिलाने के लिए बड़ी पहल शुरू की है। समाज कल्याण विभाग की पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र योजना (Pre-Examination Training Scheme) के तहत SC/ST और OBC वर्ग के विद्यार्थियों को IAS, PCS समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराई जा रही है।

अब तक 701 उम्मीदवारों का चयन इस योजना के अंतर्गत हो चुका है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 11.24 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, ताकि और अधिक युवाओं को लाभ मिल सके।

कोचिंग से लेकर इंटरव्यू तक पूरी तैयारी यह योजना केवल कोचिंग क्लास तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की संपूर्ण तैयारी कराई जाती है। विषय विशेषज्ञ नए सिलेबस और आधुनिक तकनीकों की मदद से युवाओं को मार्गदर्शन देते हैं। इससे छात्रों को प्रतियोगी माहौल में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल रही है।

लड़कियों के लिए खास पहल महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए लखनऊ में महिला पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित है। यहां दलित और आदिवासी वर्ग की बेटियों को प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ाने की विशेष तैयारी कराई जाती है। इस पहल से न केवल बेटियों को उच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, बल्कि समाज में समानता और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य गरीब और पिछड़े वर्ग के उन होनहार युवाओं को आगे लाना है, जिनके पास निजी कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये खर्च करने की क्षमता नहीं है।

📰 69वां जन्मदिन: मेनका गांधी–राजनीति, पशु-अधिकार और संघर्ष की मिसाल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी आज अपना 69वां जन्मदिन मना रही हैं। भारतीय राजनीति में गांधी परिवार का नाम आते ही इंदिरा गांधी, राजीव गांधी या सोनिया गांधी के साथ-साथ मेनका गांधी का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। लेकिन उनकी पहचान केवल “गांधी परिवार” तक सीमित नहीं रही—उन्होंने अपने संघर्ष, स्पष्टवादिता और पशु-अधिकारों के प्रति समर्पण से अलग मुकाम बनाया।
🌿 जन्म और शिक्षा
मेनका गांधी (जन्म नाम: मेनका आनंद) का जन्म 26 अगस्त 1956 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल तरलोचन सिंह आनंद भारतीय सेना में अधिकारी थे और माता अमृतेश्वर आनंद एक सुसंस्कृत परिवार से थीं। बचपन से ही अनुशासन और दृढ़ता उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहे।
शिक्षा उन्होंने लॉरेंस स्कूल, सनावर (हिमाचल प्रदेश) से शुरू की और आगे लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली में पढ़ाई की। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में उन्होंने जर्मन भाषा का अध्ययन किया।
राजनीति में प्रवेश और संघर्ष
मॉडलिंग के दिनों में बंबई डाइंग के एक विज्ञापन शूट ने उनकी जिंदगी बदल दी—वहीं से उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई। एक साल बाद, 23 सितंबर 1974 को दोनों का विवाह हुआ।
लेकिन 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मतभेद के चलते उन्हें प्रधानमंत्री आवास छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने स्वतंत्र राजनीतिक राह बनाई और अप्रैल 1983 में ‘राष्ट्रीय संजय मंच’ (Rashtriya Sanjay Manch) की स्थापना की।
1984 में उन्होंने अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
🏛 राजनीतिक सफलता
1988 में वे जनता दल में शामिल हुईं और 1989 में पिलिभित से पहली बार लोकसभा सांसद बनीं। इसके बाद उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
विभिन्न सरकारों में वे पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय जैसे अहम मंत्रालयों की मंत्री रहीं। 2004 में वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुईं और 2014-2019 तक मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं।
🐾 पशु-अधिकार और सामाजिक योगदान
मेनका गांधी को देशभर में पशु-अधिकार कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। वे लंबे समय तक People for Animals संगठन की अध्यक्ष रहीं। पशु संरक्षण के लिए उन्होंने लगातार आवाज उठाई और कानूनों में बदलाव करवाए।
उनकी पहल पर “Prevention of Cruelty to Animals Act” जैसे कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।
📚 लेखन और अन्य उपलब्धियाँ
वे एक लेखिका भी हैं। उन्होंने शब्द-व्युत्पत्ति, कानून और पशु-अधिकार विषयों पर कई पुस्तकें लिखीं।
उनकी राजनीतिक और सामाजिक यात्रा ने उन्हें एक स्वतंत्र, मजबूत और स्पष्टवादी नेता के रूप में स्थापित किया।
हाल की स्थिति
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सुलतानपुर सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में भाग लिया, हालांकि इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
📊 सारांश तालिका
विषय विवरण
जन्म और शिक्षा 26 अगस्त 1956, नई दिल्ली; सैन्य परिवार; शिक्षा – सनावर, LSR, JNU
राजनीति की शुरुआत 1983 – राष्ट्रीय संजय मंच; 1984 – अमेठी से चुनाव
पहली सफलता 1989 – पिलिभित से लोकसभा सांसद
मंत्री पद पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय
पशु-अधिकार People for Animals; पशु-कल्याण कानूनों में योगदान
लेखन कई पुस्तकें और लेख; समाजकल्याण में सक्रियता
हाल की स्थिति 2024 में सुलतानपुर से चुनाव लड़ा, पराजित

मेनका गांधी का जीवन भारतीय राजनीति और समाजसेवा की एक अनोखी कहानी है—जहाँ पारिवारिक पहचान से आगे बढ़कर उन्होंने अपने संघर्ष, निष्ठा और कार्यों से अलग पहचान बनाई।

आचार्य रविकांत उपाध्याय को भारत सरकार से 10 पेटेंट

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के आचार्य रविकांत उपाध्याय को भारत सरकार द्वारा एक साथ 10 भारतीय पेटेंट प्रदान किए गए हैं। ये पेटेंट उनके शोधार्थियों द्वारा किए गए उत्कृष्ट अनुसंधान पर आधारित हैं। अनुसंधान कार्य जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे जैव-चिकित्सा, जीव-रसायन, जैव-कीटनाशी निर्माण एवं उपयोग से संबंधित हैं।
आचार्य उपाध्याय के निर्देशन में डॉ. मुकेश चौबे को काले बिच्छू की विष ग्रंथियों से वेनम टॉक्सिन के पृथक्करण एवं शुद्धिकरण की विधि पर पेटेंट प्राप्त हुआ है। इस विष से तैयार एंटी-सीरम को चूहों पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इसी प्रकार डॉ. शोएब अहमद को मधुमक्खी विष पर किए गए अनुसंधान के लिए दो पेटेंट प्राप्त हुए हैं। मधुमक्खी विष से तैयार एंटीबॉडी ने चूहों में विष के प्रभाव को निष्क्रिय कर दिया और यह शोध एंटी-वेनम चिकित्सा में उपयोगी सिद्ध हुआ।
डॉ. कृष्ण कुमार प्रजापति को ततैया के विष पर तथा डॉ. रवि कुमार गुप्ता को मकड़ी के विष पर अनुसंधान के लिए पेटेंट मिले हैं। दोनों ही अनुसंधानों से तैयार एंटीबॉडी ने विष के दुष्प्रभावों को समाप्त करने में सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में डॉ. निधि यादव को टिक की लार ग्रंथि से एंटीजन पृथक्करण एवं एंटीबॉडी निर्माण पर दो पेटेंट प्रदान किए गए हैं। यह शोध पशुओं में टिक-जनित रोगों की रोकथाम और दुग्ध उत्पादन को सुरक्षित करने में सहायक होगा।
डॉ. सिमरन शर्मा को राक्रीडिया मार्जिनेटर ततैया के विषैले तत्वों पर किए गए शोध के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ है। इस शोध से ततैया के विष को निष्क्रिय करने हेतु प्रभावी एंटीबॉडी विकसित की गई। इसके अतिरिक्त डॉ. लोकप्रिय पांडे को दीमक नियंत्रण पर अनुसंधान के लिए पेटेंट प्रदान किया गया है। इसमें चकोतरा के छिलके का तेल, सल्फर एवं अन्य प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर एंटी-टरमाइट उपचार विकसित किया गया, जो फसलों एवं पेड़ों को दीमक से बचाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
आचार्य रविकांत उपाध्याय और उनके शोधार्थियों द्वारा किए गए ये अनुसंधान न केवल वैज्ञानिक जगत को नई दिशा प्रदान करेंगे, बल्कि कृषि, पशुपालन और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान साबित होंगे।

रोजगार संगम पोर्टल पर कराएं पंजीकरण : सेवायोजन अधिकारी


बेरोजगार युवक-युवतियों और नियोजकों के लिए आसान सुविधा उपलब्ध

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला सेवायोजन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित रोजगार संगम पोर्टल पर जनपद के बेरोजगार युवक-युवतियां, कुशल श्रमिक, औद्योगिक संस्थान एवं अन्य नियोजकों का पंजीकरण क्रमशः जॉबसीकर एवं नियोजक के रूप में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगार अभ्यर्थी एवं नियोजक स्वयं किसी भी निकटवर्ती जन सुविधा केन्द्र अथवा साइबर कैफे से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। जॉबसीकर के रूप में पंजीकरण के लिए अभ्यर्थी को पोर्टल (https://rojgaarsangam.up.gov.in) पर साइनअप/लॉगइन कर अपनी बुनियादी जानकारी, शैक्षिक योग्यता, तकनीकी कौशल एवं अनुभव आदि विवरण भरने होंगे। सत्यापन के बाद वे पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों को देख सकेंगे और अपनी योग्यता अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार, नियोजक/कम्पनी पंजीकरण हेतु पोर्टल पर जाकर कम्पनी का प्रकार, नाम, जनपद, मोबाइल नंबर एवं ईमेल आईडी भरने के बाद ओटीपी सत्यापन करना होगा। इसके उपरांत कम्पनी के पैन, टैन, जीएसटी नंबर इत्यादि विवरण अपलोड कर सकते हैं। पंजीकरण पूर्ण होने के बाद नियोजक अपनी आवश्यकतानुसार रिक्तियों की जानकारी पोर्टल पर डाल सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के विवरण सीधे कम्पनी के डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेंगे, जिनमें से योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जा सकता है। जिला सेवायोजन अधिकारी ने बताया कि पंजीकरण संबंधी किसी भी असुविधा के लिए सेवायोजन विभाग के टोल फ्री नम्बर 155330 पर सम्पर्क किया जा सकता है। साथ ही अभ्यर्थी व नियोजक आवश्यक दस्तावेजों (फोटोग्राफ, आधार कार्ड, शैक्षिक प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, कम्पनी पंजीकरण नम्बर, लोगो, टैन व जीएसटी नम्बर आदि) के साथ जिला सेवायोजन कार्यालय, रविन्द्रनगर धूस, कुशीनगर में भी पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए किसी भी प्रकार का मार्ग व्यय देय नहीं होगा।

कुशीनगर में डीएम की बड़ी कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट व गुंडा एक्ट में आदेश जारी

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने विपक्षी ऋषिकेश सिंह उर्फ अजीत सिंह व सत्येंद्र पटेल द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को खारिज कर उनकी पत्रावली विचारण हेतु गैंगस्टर न्यायालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में विपक्षी सुरजीत पुत्र हरिओम को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत गुंडा घोषित कर 6 माह के लिए जनपद से निष्कासित कर दिया गया है। निष्कासन अवधि में सुरजीत को जनपद सीमा से बाहर रुकने की सूचना स्थानीय थाने को देनी होगी और बिना अनुमति जिले में प्रवेश वर्जित रहेगा।

बलिया में महिलाओं पर बढ़ रहा अत्याचार, मारपीट और धमकी के दो बड़े मामले दर्ज

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद बलिया में महिलाओं के साथ मारपीट और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताज़ा प्रकरण थाना खेजुरी क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां पीड़ित महिलाओं ने दबंगों की करतूतों से परेशान होकर पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। पहला मामला – ग्राम कल्याण डेहरा ग्राम कल्याण डेहरा निवासी हिमांशी और मुन्नी ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि 08 अगस्त 2025 की शाम करीब 6 बजे गांव के ही पांच दबंग—सत्येंद्र यादव, मुन्ना यादव, दिनेश यादव, धर्मेंद्र यादव और बैजनाथ यादव—घर में घुस आए। आरोप है कि दबंगों ने महिलाओं के साथ मारपीट की, लाठी-डंडों से दौड़ाया, कपड़े फाड़े और जान से मारने की धमकी दी। घटना के समय घर के पुरुष सदस्य इलाज के सिलसिले में वाराणसी गए थे। परिजनों के अनुसार पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ सिकंदरपुर ने थाना खेजुरी पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर सुसंगत धाराओं में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दूसरा मामला – ग्राम जनुवान
ग्राम जनुवान निवासी मेहरुन निशा पत्नी अमिनुद्दीन ने आरोप लगाया कि 24 अगस्त 2025 की सुबह 7 बजे गांव के अफरोज, मंसफ और महताब ने रास्ता और छज्जा विवाद को लेकर उन पर और उनके बेटे शाहिद पर हमला कर दिया। मारपीट में दोनों घायल हो गए। पीड़िता का कहना है कि दबंगों ने उन्हें गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया। क्षेत्र में बढ़ा तनाव लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों से क्षेत्र में तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है और दबंगों के हौसले बुलंद हैं। पीड़ित परिवारों ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।

डीएम ने की विकास निधि परियोजनाओं की समीक्षा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विकास निधि से संचालित परियोजनाओं की स्वीकृति एवं प्रगति की समीक्षा हेतु बैठक सम्पन्न हुई। डीएम ने निर्देश दिए कि योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी, समयबद्ध व गुणवत्तापरक ढंग से किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी ने नियमित प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने व स्थल निरीक्षण करने पर जोर दिया। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीडीयूजीयू के डॉ. राजेश के शोध से खुला विशालकाय तारों के जीवन का नया रहस्य

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मानव सभ्यता के आरंभ से ही तारों और ब्रह्मांड से जुड़े रहस्य वैज्ञानिकों और चिंतकों को आकर्षित करते रहे हैं। विशेषकर यह प्रश्न कि किसी विशालकाय तारे का जीवन अपने अंतिम दौर में पहुँचने के बाद कैसे समाप्त होता है, वैज्ञानिकों के लिए अब तक एक जटिल पहेली बना हुआ था। तारे के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उसके भीतर ढहने की प्रक्रिया—यानी गुरुत्वीय पतन—का अंतिम परिणाम क्या होता है, यह प्रश्न 20वीं सदी से ही खगोल-भौतिकी के सबसे बड़े शोध विषयों में शामिल है।
1939 में दो अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पहली बार यह सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट किया कि यदि तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुँचकर पूरी तरह ढह जाए तो उसका अंत ब्लैक-होल के रूप में होता है। इसके बाद से ही ब्लैक-होल खगोल विज्ञान का प्रमुख शोध विषय बन गया। 1986 में भारतीय वैज्ञानिक पंकज एस. जोशी ने अपने शोध में यह संभावना जताई कि किसी तारे का अंतिम चरण नग्न-सिंगुलरिटी भी हो सकता है, जहाँ गुरुत्वाकर्षण अनंत तो होता है लेकिन ब्लैक-होल जैसी सीमा उपस्थित नहीं होती। वहीं 1998 में भारतीय वैज्ञानिक अभास मित्रा ने ब्लैक-होल के विकल्प के रूप में चुम्बकीय गुरुत्वीय-पतन का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राजेश कुमार के हालिया शोध ने इस बहस को एक बिल्कुल नया दृष्टिकोण दिया है। उनके अनुसार, तारे का पतन वास्तव में किसी निश्चित सीमित बिंदु पर समाप्त ही नहीं होता। न तो ब्लैक-होल बनता है, न नग्न-सिंगुलरिटी और न ही चुम्बकीय गुरुत्वीय-पतन।
डॉ. कुमार के निष्कर्ष बताते हैं कि समानरूपी गुरुत्वीय पतन प्रणालियाँ कभी भी सीमित सिंगुलरिटी तक नहीं पहुँचतीं। बल्कि विशालकाय तारे अनिश्चितकाल तक लगातार सिकुड़ते रहते हैं। इस प्रक्रिया को उन्होंने नाम दिया है—
“इटरनल कोलैप्स फिनॉमिना” (सतत गुरुत्वीय पतन)।
डॉ. कुमार का यह मॉडल सिंगुलरिटी-रहित है। इसका अर्थ है कि यह न केवल तारों की नियति को समझने में सहायक सिद्ध होगा बल्कि भविष्य में वर्म-होल तथा समय-यात्रा जैसे गूढ़ और रोमांचक क्षेत्रों में अनुसंधान की नई संभावनाओं को भी जन्म देगा। खगोल विज्ञान और सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में इस विचार को एक नई दिशा देने वाली खोज के रूप में देखा जा रहा है।
हाल ही में भारत सरकार के प्रतिलिप्याधिकार कार्यालय ने डॉ. राजेश कुमार के इस शोध को कॉपीराइट प्रदान किया है। उनका कहना है कि कुछ और खगोल-भौतिकीय आँकड़ों का विश्लेषण पूर्ण होने के बाद यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशन हेतु भेजा जाएगा।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने डॉ. कुमार को बधाई दी और कहा कि यह शोध न केवल विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है बल्कि भारत की वैज्ञानिक विरासत को भी सशक्त करेगा। विभागीय सहयोगियों और विश्वविद्यालय परिवार ने भी इस खोज के लिए डॉ. कुमार को शुभकामनाएँ दीं।