Friday, July 17, 2026
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अस्पताल से जिन्दा कैसे लौटे “बीमारी से बड़ी बन चुकी है इलाज की लूट”

आज अस्पताल जीवनदान से ज़्यादा भय और लूट का केंद्र बन गए हैं। नॉर्मल केस को वेंटिलेटर तक पहुँचाना, अनावश्यक टेस्ट कराना और दवा कंपनियों से कमीशन लेना आम हो गया है। मरीज और परिजन मानसिक, आर्थिक और शारीरिक कष्ट झेलते हैं। डॉक्टरों की छवि भगवान से कसाई जैसी होती जा रही है। समाधान यही है कि सरकारी अस्पतालों को मज़बूत किया जाए, मेडिकल शिक्षा में सुधार हो और गलत इलाज पर कठोर कानून बने। इंसानियत और सेवा की भावना लौटे, तभी अस्पताल फिर से विश्वास का प्रतीक बन पाएंगे।
अस्पताल का नाम सुनते ही मन में उम्मीद जगती है। लगता है कि यहाँ पहुँचने के बाद जीवन सुरक्षित हो जाएगा, बीमारी दूर होगी और पीड़ा का अंत होगा। लेकिन जब यही अस्पताल भय, चिंता और शोषण का केंद्र बन जाए, तो सवाल उठता है कि आखिर मरीज और परिजनों के लिए अस्पताल जाना वरदान है या अभिशाप?

मेरे साथ घटित यह अनुभव केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द है। एक नन्ही सी जान, जो केवल थोड़ी देखभाल और सच्चे उपचार से स्वस्थ हो सकती थी, उसे डॉक्टरों ने लालच और व्यावसायिक मानसिकता के चलते वेंटिलेटर तक पहुँचा दिया। नॉर्मल केस को भी वेंटिलेटर पर डाल दिया गया, क्योंकि कमरे का एक दिन का किराया बढ़ाना ज़रूरी समझा गया। इसने हमें मानसिक रूप से तोड़ दिया, आर्थिक रूप से निचोड़ दिया और शारीरिक रूप से थका दिया। उस समय ऐसा लगा मानो सांसें गले में अटकी हों और भगवान भी कहीं दूर खड़े केवल तमाशा देख रहे हों।

हमारे समाज में डॉक्टरों को “भगवान” का दर्जा दिया जाता रहा है। लोग विश्वास करते थे कि डॉक्टर जीवनदाता है। लेकिन आज हालात बदल गए हैं। आज का डॉक्टर अक्सर पैसों का सौदागर लगता है। कई बार ऐसा लगता है कि डॉक्टर इलाज से पहले फीस, दवा कंपनी और मुनाफ़े का हिसाब लगाता है। डॉक्टर और कसाई में फर्क यही था कि कसाई को देखकर हमें पता होता है कि वह काटेगा, लेकिन डॉक्टर के पास जाते समय यह भरोसा होता था कि वह जीवन देगा। जब वही भरोसा टूटता है तो पीड़ा असहनीय हो जाती है।

आज अस्पतालों की दुनिया एक “मेडिकल माफ़िया” की तरह काम करती है। दवाइयाँ कई गुना दामों पर बेची जाती हैं। अनावश्यक टेस्ट कराए जाते हैं ताकि बिल मोटा हो। मामूली बुखार या संक्रमण को गंभीर बीमारी बनाकर मरीज को भर्ती किया जाता है। और अगर भर्ती हो गया तो आईसीयू और वेंटिलेटर तक का रास्ता दिखाना आम बात हो गई है। दवा कंपनियाँ, अस्पताल मालिक और डॉक्टरों का यह त्रिकोणीय गठजोड़ मरीज की मजबूरी का सबसे बड़ा सौदागर बन गया है। दवा वही लिखी जाती है जिस पर सबसे बड़ा कमीशन मिलता है। मरीज की जेब खाली होना डॉक्टर की सफलता बन गया है।

भारत जैसे देश में जहाँ लाखों लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं, वहाँ अस्पताल के बिल परिवार को सड़क पर ला सकते हैं। लोग मकान, गहने, ज़मीन तक बेच देते हैं ताकि प्रियजन का इलाज हो सके। लेकिन जब इतनी क़ीमत चुकाने के बाद भी अस्पताल से शव ही घर आए, तो उस परिवार की मानसिक पीड़ा की कल्पना करना मुश्किल है। आज इलाज से ज़्यादा महंगा वह डर है जो हर परिवार को अस्पताल की ओर कदम बढ़ाते समय घेर लेता है। लोग यह प्रार्थना करते हैं कि वे अस्पताल से “जिन्दा” लौट आएँ, वरना लुटकर लौटना लगभग तय है।

यह केवल अस्पताल या डॉक्टर का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे समाज की नैतिकता का संकट है। जब शिक्षा को व्यवसाय बना दिया गया, तो डॉक्टर फैक्टरी से निकलने लगे। मेडिकल शिक्षा में भारी खर्च होता है, और वही खर्च बाद में मरीजों से वसूला जाता है। इस चक्र ने सेवा की भावना को कुचल दिया है। डॉक्टरों को याद रखना चाहिए कि उनका पेशा सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा का संकल्प है। यदि यह संकल्प टूट गया, तो समाज में विश्वास और संबंध दोनों ही खत्म हो जाएंगे।

इस भयावह स्थिति से निकलने के लिए केवल शिकायत करना पर्याप्त नहीं है। कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। सरकारी अस्पतालों को मजबूत करना जरूरी है ताकि आम आदमी महंगे निजी अस्पतालों का शिकार न बने। दवाइयों और टेस्ट पर सख्त नियंत्रण हो ताकि अनावश्यक बोझ मरीज पर न डाला जा सके। मेडिकल शिक्षा में सुधार जरूरी है जिससे केवल पैसा कमाने वाले नहीं, बल्कि सेवा भाव रखने वाले युवा डॉक्टर तैयार हों। हर गलत इलाज, अनावश्यक भर्ती और लापरवाही पर कठोर दंड देने वाले कानून बनाए जाएँ। साथ ही मरीजों और परिवारों को उनके अधिकारों और विकल्पों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

सच है कि आज हालात भयावह हैं। डॉक्टरों की छवि कसाई जैसी हो गई है। लेकिन फिर भी यह नहीं भूलना चाहिए कि आज भी हजारों ऐसे डॉक्टर हैं जो सेवा को धर्म मानते हैं और ईमानदारी से मरीजों का इलाज करते हैं। हमें उन डॉक्टरों को सम्मान देना होगा और बाकी व्यवस्था को बदलने के लिए आवाज़ उठानी होगी।
अस्पताल जाना किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं होना चाहिए। मरीज और उसके परिवार की पीड़ा को पैसा कमाने का साधन बनाना सबसे बड़ा पाप है। डॉक्टर तभी फिर से भगवान कहलाएंगे जब वे सेवा और मानवता को अपने पेशे का आधार बनाएँगे। जब तक व्यवस्था में पारदर्शिता और इंसानियत नहीं लौटती, तब तक हर परिवार यही सवाल पूछता रहेगा—

“अस्पताल से जिन्दा कैसे लौटे?”

डॉ. सत्यवान ‘सौरभ’

ग्राम प्रधान संगठन की उठी मांग

पंचायतों में आरक्षण सांसद-विधायक की तर्ज पर स्थिर किया जाए

भागलपुर/देवरिया राष्ट्र की परम्परा ) ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने एक वार्ता में बताया कि, हर पाँच साल में आरक्षण बदलने से रुकता है ग्राम सभाओं का विकास प्रदेश अध्यक्ष लखनऊ।
ग्राम प्रधान संगठन ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि ग्राम प्रधान, मुखिया और सरपंच पदों के आरक्षण को सांसद और विधायकों की तरह स्थिर किया जाए। संगठन का कहना है कि हर पाँच साल बाद आरक्षण बदलने से ग्राम सभाओं का विकास बाधित हो रहा है।
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने कहा कि सांसद और विधायक पद पर आरक्षण लगातार नहीं बदलता, जबकि ग्राम प्रधान पद के लिए यह हर कार्यकाल के बाद बदल जाता है। इसका सीधा असर ग्रामीण जनता और विकास कार्यों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कई बार मेहनती, लोकप्रिय और जनता का विश्वास जीत चुके प्रधान केवल आरक्षण बदल जाने के कारण दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाते। इससे ग्रामीण जनता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को फिर से चुनने से वंचित रह जाती है।
संगठन ने निर्वाचन आयोग से निवेदन किया है कि ग्राम प्रधान/मुखिया/सरपंच पदों के लिए आरक्षित सीटों की अवधि सांसद और विधायकों की तरह दीर्घकालीन की जाए। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों का अनुभव और समर्पण ग्राम सभा तक पहुँचेगा, बल्कि ग्रामीण विकास की गति भी तेज़ होगी।

भाजपा की चुनावी तैयारियों को लेकर गुवाहाटी में अमित शाह की बैठक, पीएम मोदी का असम दौरा स्थगित

गुवाहाटी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर 29 अगस्त, गुरुवार को गुवाहाटी पहुंच रहे हैं। यहाँ वे प्रदेश भाजपा संगठन और वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों एवं रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

मुख्यमंत्री सरमा ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 8 सितंबर को प्रस्तावित असम दौरा अब स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम इसलिए स्थगित हुआ है क्योंकि 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री का असम दौरा आगे किसी नई तिथि पर तय किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व राज्य में संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर गंभीर है। अमित शाह की बैठक इसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में अमित शाह की इस बैठक को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में उम्मीदवार चयन की रूपरेखा, क्षेत्रवार प्राथमिकताओं और चुनाव प्रचार की दिशा पर भी चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री सरमा ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही असम का दौरा करेंगे और प्रदेश की जनता को विकास की नई सौगात देंगे।

विरार में बड़ा हादसा: इमारत ढहने से मौत का आंकड़ा 15 तक पहुँचा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

सांकेतिक फोटो

पालघर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र। पालघर जिले के विरार इलाके में हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बचाव दल ने बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात मलबे से तीन और शव बरामद किए।

जानकारी के अनुसार, लगभग 50 फ्लैटों वाली यह अनधिकृत चार मंजिला इमारत बुधवार रात करीब 12:05 बजे विजय नगर क्षेत्र में अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत पास स्थित एक खाली पड़े मकान पर गिरी, जिससे बड़ा हादसा हुआ।

घटना के तुरंत बाद दमकल विभाग, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अब तक कई घायलों को मलबे से निकाला गया है और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

स्थानीय प्रशासन ने इमारत के निर्माण को गैरकानूनी (अनधिकृत) बताया है। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि निर्माण में लापरवाही और जिम्मेदारी किसकी थी।

रेस्क्यू टीम का कहना है कि मलबे में अभी और लोगों के फंसे होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

कटसहरा–मगहर मार्ग पर पेड़ों-पौधों के अतिक्रमण से बढ़ा खतरा

विशुनपुर व परमेश्वरपुर मोड़ों पर सबसे ज्यादा संकट

गोरखपुर/संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर और संतकबीरनगर को जोड़ने वाला कटसहरा–मगहर मार्ग इन दिनों ग्रामीणों और राहगीरों के लिए संकट का कारण बना हुआ है। सड़क के दोनों ओर उगे पेड़-पौधों और झाड़ियों की टहनियां आधी सड़क तक फैल चुकी हैं। इसकी वजह से सामने से आ रही गाड़ियों का पता नहीं चल पाता और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
विशुनपुर, परमेश्वरपुर समेत अन्य गांवों के मोड़ों के पास स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक हो गई है। यहां सड़क के किनारे फैले पेड़-पौधों की घनी शाखाओं के कारण वाहन चालकों को सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता। बरसात के मौसम में झाड़ियां और बेलें तेजी से फैलकर मार्ग को और संकरा बना देती हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आमना-सामना होने पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग पर पेड़ों की छंटाई नहीं कराई गई है। जबकि यह सड़क दोनों जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है और रोजाना भारी संख्या में वाहन यहां से गुजरते हैं। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन और वन विभाग तुरंत कार्रवाई करते हुए सड़क किनारे पेड़-पौधों की छंटाई कराए, ताकि आवागमन सुचारु और सुरक्षित हो सके।

ट्रंप का आर्थिक हथियार “50 पर्सेंट टैरिफ” बनाम मोदी का “प्लान 40”

केंद्र सरकार ने प्रभावित सेक्टरों की पहचान की है व उनके लिए क्रेडिट सपोर्ट, टैक्स रिबेट और एक्सपोर्ट सब्सिडी जैसी राहत योजनाएँ तैयार की जा रही हैं।

गोंदिया-वैश्विक व्यापार जगत को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर  हिला दिया है। उनके नए टैरिफ़ आदेशों ने भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। ट्रम्प का सीधा संदेश यही है कि अमेरिकी बाज़ार को अब विदेशी उत्पादों से बचाया जाएगा और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत हर उस देश पर शुल्क लगाया जाएगा, जो अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा खड़ी करता है।यह विषय बेहद अहम और गहन है क्योंकि इसमें भारत-अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ युद्ध, मोदी सरकार की रणनीति, आत्मनिर्भर भारत का आत्मविश्वास और अमेरिका की वीज़ा नीति के प्रभाव सब कुछ शामिल है।इस कदम से भारत के आईटी सेक्टर, फ़ार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यातक वर्ग पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे समय में भारतीय प्रधानमंत्री  ने जो रणनीति तैयार की है,उसे मीडिया और नीति- विश्लेषकों ने “प्लान 40” का नाम दिया है।यह योजना केवल अमेरिका की टैरिफ़ चुनौती का जवाब नहीं बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति को मज़बूत करने का खाका भी है।वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में इस समय ट्रंप का “50 पर्सेंट टैरिफ”और मोदी का “प्लान 40”सबसे चर्चित विषय बन चुका है। 27 अगस्त 2025 से अमेरिका ने भारत पर 50 पर्सेंट का टैरिफ लागू कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय टेक्सटाइल,फार्मा,ऑटोकंपोनेंट्स और आईटी सर्विसेज़ सेक्टर पर पड़ा है।अमेरिकीराष्ट्रपति ने यह कदम अचानक नहीं उठाया बल्कि पिछले कई महीनों से वे लगातार भारत को चेतावनी दे रहे थे कि अगर भारत अमेरिकी हितों की अनदेखी करेगा तो उसे आर्थिक हथियार का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत को सबक सिखाना आवश्यक है क्योंकि भारत ने रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखा और साथ ही यूरोप तथा एशिया में नए बाज़ार खोजकर अमेरिकी दबाव की अनदेखी की।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस टैरिफ का सबसे अधिक असर उन इंडस्ट्रीज़ पर पड़ा है जिनका बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। टेक्सटाइल और गारमेंट्स उद्योग,जो अपने निर्यात का लगभग 30 पर्सेंट अमेरिका भेजते हैं, अब मुश्किल में हैं। इसी तरह भारतीय फार्मा इंडस्ट्री, जो जेनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा सप्लायर है,उसे भी झटका लगा है।भारतीय आईटीकंपनियां और सॉफ्टवेयर इंजीनियर लंबे समय से अमेरिका में सेवाओं के क्षेत्र में नेतृत्व करते रहे हैं, लेकिन टैरिफ और वीज़ा नीतियों ने उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ऑटो और इंजीनियरिंग गुड्स सेक्टर भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 

साथियों बात अगर हम प्लान 40 को समझने की करें तो, भारत ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए तुरंत रणनीति बनानी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने प्रभावित सेक्टरों की पहचान की है और उनके लिए क्रेडिट सपोर्ट, टैक्स रिबेट और एक्सपोर्ट सब्सिडी जैसी राहत योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। टेक्सटाइल उद्योग के लिए यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में नए ग्राहकों की तलाश की जा रही है। फार्मा इंडस्ट्री को रूस, मध्य एशिया और अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य मिशनों के जरिए नए बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आईटी सेक्टर के लिए एशियाई देशों, गल्फ और यूरोप में डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।वहीं ऑटो सेक्टर को “मेक इन इंडिया” और घरेलू ईवी पॉलिसी के जरिए घरेलू बिक्री और उत्पादन बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारत किसी एकदेश पर निर्भर नहीं रहेगा और निर्यात का दायरा कई गुना विस्तारित किया जाएगा। इस पूरी रणनीति को “प्लान 40” कहा जा रहा हैसरकार का यह प्लान भारत को 40 देशों के साथ नए व्यापारिक गठबंधन औरसमझौते कराने पर आधारित है। इसके अंतर्गत यूरोपियन यूनियन के साथ एफटीए की रफ्तार तेज़ की जा रही है। खाड़ी देशों,विशेषकर यूएई और सऊदी अरब के साथ ऊर्जा और तकनीकी समझौते किए जा रहे हैं।अफ्रीकी महाद्वीप में हेल्थकेयर, फार्मा और टेक्सटाइल मार्केट पर कब्ज़ा जमाने की योजना है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों में ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात बढ़ाया जाएगा। साथ ही रूस और चीन के साथ ऊर्जा और रक्षा व्यापार को और मजबूत किया जाएगा। यानी अमेरिका अगर भारत के लिए दरवाजे बंद करता है तो भारत 40 और दरवाजे खोलकर अपने लिए नए रास्ते बनाएगा। 

साथियों बात अगर हम वर्तमान परिस्थितियों को हमारे मिशन आत्मनिर्भर भारत के प्रभाव की करें तो,भारत का आत्मविश्वास इस बार पहले से कहीं अधिक है क्योंकि 2019 के बाद से भारत ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के जरिए अपनी इंडस्ट्रीज़ को मजबूत किया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को लागू किया गया, एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन मिला और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया गया। सरकार का मानना है कि टैरिफ हमें चुनौती ज़रूर देंगे लेकिन यही चुनौती हमें स्वदेशी उत्पादन और नए बाजार पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी प्रदान करेगी।पीएम ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा कि भारत किसी के टैरिफ से नहीं डरता, हम आत्मनिर्भर हैं और दुनियाँ को भारत पर निर्भर रहना होगा। 

साथियों बात अगर हम अमेरिका की  एच1बी वीज़ा नीति को भी सख्त करने की योजना की करें तो अमेरिका ने केवल टैरिफ लगाकर ही भारत को चुनौती नहीं दी बल्कि उसने वैकल्पिक प्लान के तहत एच 1बी वीज़ा नीति को भी सख्त करने की योजना बनाई है। नई शर्तों के अनुसार अब केवल वही लोग एच1बी वीज़ा प्राप्त कर सकेंगे जो अमेरिका में कम से कम 50 लाख डॉलर का निवेश करेंगे। इसका सीधा असर भारतीय आईटी इंजीनियरों, छात्रों और पेशेवरों पर पड़ेगा। भारत से हर साल लाखों युवा अमेरिका जाते हैं लेकिन अब उनके लिए यह रास्ता लगभग बंद हो गया है। हालांकि इस संबंध में मेरा मानना  है कि अमेरिका यूं ही एच1बी वीजा नहीं देता वह भारतीय उच्च टैलेंट को आकर्षित करने के लिए एच1बी वीजा शुरू किया है हम जानते हैं कि भारतीय टैलेंट की अमेरिका में बहुत खास जरूरत है। मेरा तर्क है कि वहां टैलेंट की कमी है और इसलिए उच्चस्तर क़े टैलेंट की सबसे अधिक जरूरत है,एक रिपोर्ट के अनुसार एच1बी वीज़ा वाले हाईस्किल्ड भारतीय होते हैं, अमेरिकन कर्मचारियों से कहीं ज्यादा सैलरी एच1बी वीजा वालों को मिलती है,वहां एच1बी वीजा वालों को एवरेज 108000 अमेरिकन डॉलर मिलते हैं,लेकिन अमेरिकी निवासियों को 45760 अमेरिकन डॉलर मिलते हैं,अगर हाईस्किल्ड टैलेंट की जरूरत अमेरिका को नहीं होती तो क्यों इतनी ज्यादा सैलरी देकर वे भारतीयों को बुलाते? लेकिन अब  निवेश की शर्त स्पष्ट रूप से यह दिखाती है कि यह भारत पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है। 

साथियों बात अगर हम  इन कदमों से भारत- अमेरिका रिश्तों पर गहरा असर पढ़ने की करें तो,पहले से ही रूस-भारतसंबंधों को लेकर अमेरिका असहज था, और अब टैरिफ व वीज़ा पॉलिसी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।भारत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने का ऐलान किया है, वहीं अमेरिका ने भारतीय कंपनियों पर टैरिफ और वीज़ा का बोझ डाल दिया है। इसके जवाब में भारत ने 40 देशों के साथ नए व्यापारिक गठबंधन शुरू किए हैं। साफ है कि आने वाले समय में भारत- अमेरिका रिश्ते सहयोग और टकराव के मिश्रण से गुजरेंगे। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आज का भारत 1991 वाला भारत नहीं है। उस समय भारत आईएमफ पर निर्भर था लेकिन आज भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ट्रंप का 50 पर्सेंट टैरिफ भारत को चुनौती देगा लेकिन भारत ने “प्लान 40” के जरिए यह संदेश दिया है कि भारत झुकेगा नहीं बल्कि विकल्प तलाशेगा। अमेरिका चाहे एच1बी वीज़ा सख्त करे या टैरिफ बढ़ाए, भारत आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी के जरिए आगे बढ़ेगा। यह पूरा घटनाक्रम यह साबित करता है कि वैश्विक राजनीति अब केवल ताक़तवर देशों के इर्द-गिर्द नहीं घूमती बल्कि भारत जैसे उभरते देशों की रणनीति भी भविष्य तय करती है।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

देवरिया में आयोजित होगा भव्य मेकअप सेमिनार, 3 सितंबर को दिखेगा खास अंदाज़

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देवरिया की खूबसूरत शाम इस बार और भी खास होने जा रही है, क्योंकि 3 सितंबर को शहर में आयोजित होने वाला “देवरिया करंट सेमिनार” मेकअप आर्टिस्ट्री की दुनिया में एक नया आयाम जोड़ने वाला है। इस सेमिनार में शहर की जानी-मानी मेकअप आर्टिस्ट अर्चना जायसवाल (ए.जे. मेकअप स्टूडियो एंड अकैडमी, देवरिया) अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

इस विशेष आयोजन की चीफ़ गेस्ट फेमस इन्फ्लुएंसर और मॉडर्न खुशी सिंह होंगी। वहीं, कार्यक्रम का सफल आयोजन रेशमा चौहान उर्फ रेशा जी द्वारा किया जा रहा है। मेकअप आर्टिस्ट अर्चना जायसवाल ने आयोजक रेशा जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि – “उन्होंने मुझे इस मंच का हिस्सा बनने का अवसर दिया और देवरिया वासियों के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का मौका दिया, जिसके लिए मैं हृदय से धन्यवाद करती हूँ।”

इस अवसर पर अर्चना जायसवाल प्रतिभागियों को सिग्नेचर ब्राइडल मेकअप की बारीकियों को सिखाएंगी। यह सेमिनार मेकअप इंडस्ट्री से जुड़े युवाओं और ब्यूटी क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वालों के लिए बेहद खास साबित होगा।

सेमिनार में शामिल होने के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 1 सितंबर तय की गई है। इच्छुक प्रतिभागी जल्द से जल्द दिए गए संपर्क नंबरों पर कॉल करके अपनी सीट सुरक्षित कर सकते हैं।

अर्चना जायसवाल ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस “देवरिया का बिगेस्ट सेमिनार” का हिस्सा बनें और इसे सफल बनाएं।

नेपाल बॉर्डर से तीन आतंकी बिहार में घुसे, पूरे राज्य में हाई अलर्ट

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, नेपाल के रास्ते तीन आतंकी राज्य की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। ये तीनों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस सूचना के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों की पुलिस को सतर्क रहने और चौकसी बढ़ाने का निर्देश दिया है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी कड़ी पुलिस सूत्रों के अनुसार, सभी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, धार्मिक स्थल और शॉपिंग मॉल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष निगरानी की जा रही है। इसके लिए बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड को भी अलर्ट पर रखा गया है। सीसीटीवी फुटेज पर पैनी नजर रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत उच्चाधिकारियों तक पहुँचाने के निर्देश दिए गए हैं।

खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई खुफिया एजेंसियां भी स्थानीय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) के साथ मिलकर इन आतंकियों की तलाश में जुट गई हैं। नेपाल सीमा पर चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है और सीमावर्ती जिलों में सघन तलाशी चल रही है।

आमजन से अपील पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों का कहना है कि सतर्कता और सहयोग से ही इस खतरे को टाला जा सकता है।

“मोदी का युद्ध”: ट्रंप के सलाहकार नवारो का भारत पर बड़ा हमला, रियायती तेल खरीद को ठहराया रूस-यूक्रेन संघर्ष का ईंधन

वॉशिंगटन/नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने गुरुवार को भारत के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रूस-यूक्रेन युद्ध को परोक्ष रूप से बढ़ावा देने का आरोप लगाया। नवारो ने कहा कि भारत द्वारा रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीद मॉस्को को मजबूत कर रही है और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन रही है।

ब्लूमबर्ग टेलीविज़न के कार्यक्रम ‘बैलेंस ऑफ पावर’ में दिए गए साक्षात्कार में नवारो ने कहा कि “भारत व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में दोहरा खेल खेल रहा है। नई दिल्ली के ये कदम वास्तव में ‘मोदी का युद्ध’ हैं।”

ट्रंप सरकार का कड़ा कदम नवारो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने का बड़ा फैसला लिया है। यह टैरिफ बुधवार से लागू हो चुका है, जिसे व्हाइट हाउस ने भारत द्वारा रूस से लगातार तेल खरीदने पर दंडात्मक कदम बताया है।

“शांति का रास्ता नई दिल्ली से” नवारो ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की भूमिका अहम है। उनके मुताबिक, “शांति का रास्ता कुछ हद तक नई दिल्ली से होकर जाता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का झुकाव मॉस्को और बीजिंग की ओर बढ़ रहा है, जो वॉशिंगटन की रणनीति और विश्व शांति दोनों के लिए चुनौती है।

“अमेरिका को हो रहा आर्थिक नुकसान” नवारो ने दावा किया कि भारत की यह नीति अमेरिका को आर्थिक रूप से चोट पहुँचा रही है। उनके अनुसार, “रियायती तेल खरीदकर भारत रूस की मदद कर रहा है और हमें (अमेरिका को) यूक्रेन को वित्तपोषित करना पड़ रहा है। जबकि अमेरिकी जनता पहले से ही महंगाई और आर्थिक संकट झेल रही है।”

भारत पर बढ़ा दबाव अमेरिका की यह सख्ती और तीखी बयानबाज़ी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत रूस के साथ ऊर्जा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंधों में खटास और गहर सकती है।

गुरेज सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सेना ने दो आतंकवादी मार गिराए

बांदीपोरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले के गुरेज सेक्टर में गुरुवार को भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की इस सतर्कता से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की एक और साजिश को नाकाम कर दिया गया।

सेना के अनुसार, यह मुठभेड़ ऑपरेशन नौशेरा नार-IV के तहत हुई। गुरेज के नौशेरा नार इलाके में तैनात चौकस सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे आतंकवादियों के एक समूह को देखा। घुसपैठियों को चुनौती दी गई, जिसके बाद दोनों ओर से कुछ देर तक तीखी गोलीबारी हुई। इस दौरान सेना ने दो आतंकवादियों को मार गिराया।

सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इलाके में तलाशी अभियान जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और आतंकवादी छिपा न हो। बरामद हथियारों और गोला-बारूद की गिनती की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की ओर से लगातार घुसपैठ की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन भारतीय सेना की चौकसी के कारण आतंकियों के मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि आगामी त्योहारों और चुनावी माहौल को देखते हुए आतंकवादी भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने सेना की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि जवानों की सतर्कता से सीमावर्ती इलाकों में शांति और सुरक्षा बनी हुई है।

राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित हो शिवाकान्त सिंह ने जनपद का बढ़ाया मान

विकासखंड कोपागंज के ग्राम-पंचायत लैरो दोनवार के निवासी हैं अध्यापक शिवाकांत सिंह

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की चयन समिति द्वारा राज्य अध्यापक पुरस्कार 2024 के लिए शिवाकान्त सिंह सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय भरथिया कादीपुर, विकास खण्ड कोपागंज-मऊ का चयन किया गया।

शिवाकांत सिंह की नियुक्ति वर्ष 1993 मे प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर जनपद सिद्धार्थ नगर में हुई थी। इसके बाद वर्ष 1999 मे अन्तर जनपदीय स्थानांतरण के बाद मऊ आगमन हुआ। जहां दिसंबर 1999 मे कोपागंज ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय जयरामगढ़ मे पदस्थापन हुआ, उसके बाद वर्ष 2011 मे पदोन्नति के दौरान मोहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय खलिसा मे पदस्थापन हुआ। तत्पश्चात वर्ष 2012 मे कोपागंज ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय कनियारीपुर मे स्थानांतरण हुआ जहां से वर्ष 2019 मे उच्च प्राथमिक विद्यालय कनियारीपुर के कंपोजिट विद्यालय मे परिवर्तन के कारण स्थानांतरण अगस्त 2019 में कोपागंज ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय भरथिया कादीपुर में समायोजन हुआ।

उच्च प्राथमिक विद्यालय भरथिया – कादीपुर में शिवाकांत सिंह की नियुक्ति के बाद वहां नामांकित बच्चों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और छात्र संख्या 42 से बढ़कर वर्ष 2024 मे 118 हो गई। उनके प्रयास से विद्यालय के बच्चों ने राष्ट्रीय योग्यता एवं आय आधारित परीक्षा व इंस्पायर अवार्ड मे विद्यालय का नाम जनपद और प्रदेश स्तर पर रोशन किया।

पाठ सहगामी क्रिया कलापों के अंतर्गत विद्यालय के बच्चों ने बैडमिंटन प्रतियोगिता में प्रदेश स्तर की विभाग द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में मंडल का प्रतिनिधित्व किया। शुरू से ही शिवाकांत सिंह लगन शील एवं कार्य के प्रति समर्पण भाव व बच्चों के साथ सहृदय व्यवहार तथा अभिभावकों से नियमित संपर्क में रहे। चयनित होने पर अध्यापक वर्ग में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। बताते चलें कि शिवाकांत सिंह ग्राम पंचायत लैरो दोनवार विकास खण्ड-कोपागंज जनपद-मऊ के निवासी हैं।

बिहार में जमीन माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, फर्जी दस्तावेज पर होगी सख्त कार्रवाई

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार सरकार ने राज्य में जमीन माफियाओं की मनमानी और अवैध कब्जों पर नकेल कसने की तैयारी तेज कर दी है। अब फर्जी कागजातों के आधार पर की गई जमीन की खरीद-बिक्री और अवैध कब्जे को लेकर कड़ी कार्रवाई होगी।

सरकारी निर्देशों के मुताबिक, ऐसे मामलों में यदि पुलिस या प्रशासन को संदेह होगा तो संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की जाएगी। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर इसे सामान्य दीवानी विवाद न मानते हुए आपराधिक मामले के रूप में दर्ज किया जाएगा। यानी, दोषी पाए जाने पर जमीन माफियाओं के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई होगी जैसी गंभीर अपराधों में होती है।

अभी तक कई मामलों में जमीन विवाद को केवल सिविल कोर्ट का विषय मान लिया जाता था, जिसका फायदा उठाकर माफिया लोग वर्षों तक कब्जा जमाए रखते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था लागू होने से न केवल माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी, बल्कि आम लोगों को भी न्याय मिलना आसान होगा।

पुलिस प्रशासन रहेगा अलर्ट जमीन से जुड़े विवादित दस्तावेज पुलिस के संज्ञान में आते ही जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। पुलिस व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम दस्तावेजों की वैधता की जांच करेगी। फर्जीवाड़ा साबित होने पर आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का सख्त रुख सूत्रों के अनुसार, सरकार का साफ निर्देश है कि भूमि विवाद के नाम पर माफिया किसी भी तरह से गरीब, किसान या आम लोगों को प्रताड़ित न कर सकें। मुख्यमंत्री स्वयं भूमि सुधार और भूमि विवाद निपटारे की प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।

जनता को मिलेगा लाभ नई व्यवस्था से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी जमीन पर वर्षों से दबंग और माफिया कब्जा जमाए बैठे हैं। अब पुलिस सीधे हस्तक्षेप कर सकेगी और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित कब्जों को हटाया जा सकेगा।

फ़िराक़ गोरखपुरी : उर्दू शायरी के उज्ज्वल ध्रुवतारा

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जयंती पर विशेष ✍️ नवनीत मिश्र
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उर्दू साहित्य जगत में फ़िराक़ गोरखपुरी का नाम अदब और शायरी की बुलंदियों का प्रतीक है। उनका असली नाम रघुपति सहाय था और जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ। शिक्षा के दिनों से ही उनमें साहित्य और शायरी के प्रति गहरी रुचि विकसित हो गई थी। गोरखपुर की धरती ने उन्हें जन्म दिया और उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से इस माटी का नाम संपूर्ण भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में रोशन किया।
फ़िराक़ गोरखपुरी ने उर्दू को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। उनकी रचनाओं में परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम दिखाई देता है। उनकी ग़ज़लें और नज़्में केवल प्रेम और हुस्न तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि समाज, जीवन की जटिलताओं और मानवीय रिश्तों का भी संवेदनशील चित्रण करती हैं। उनकी शायरी का भावनात्मक पक्ष पाठकों को भीतर तक प्रभावित करता है। उनके शेर “मैं हूँ, दिल है, तन्हाई है, तुम भी होते अच्छा होता” जैसे भाव आज भी मोहब्बत और जुदाई की गहराइयों को छू जाते हैं।
फ़िराक़ गोरखपुरी को उनकी साहित्यिक प्रतिभा और योगदान के लिए पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मानों से अलंकृत किया गया। यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थे, बल्कि उर्दू अदब की व्यापकता और गरिमा का प्रमाण भी बने। उनकी लेखनी ने ग़ज़ल को महज़ गुनगुनाने की चीज़ नहीं रहने दिया, बल्कि उसे विचार और संवेदनाओं का गहरा दस्तावेज़ बना दिया।
उनकी शायरी का प्रभाव केवल उनके समकालीनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहा। उनकी रचनाओं में इंसान की तन्हाई, मोहब्बत की मिठास, रिश्तों की सच्चाई और समाज की विडंबनाएँ सभी जीवंत रूप में सामने आती हैं। वे मानते थे कि शायरी केवल अल्फ़ाज़ का खेल नहीं, बल्कि दिल और समाज की धड़कन है।
आज भी फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी। उनकी पंक्तियाँ वर्तमान समाज की चुनौतियों और जीवन की सच्चाइयों को उतनी ही गहराई से बयान करती हैं। वे उर्दू साहित्य के ऐसे सितारे हैं जिनकी चमक कभी कम नहीं होगी। उनका साहित्य आने वाली सदियों तक पाठकों और शोधकर्ताओं को प्रेरित करता रहेगा।
फ़िराक़ गोरखपुरी को याद करते हुए यही कहा जा सकता है कि वे केवल एक शायर नहीं बल्कि साहित्य के ध्रुवतारा थे, जिनकी रोशनी सदा मार्गदर्शन करती रहेगी। वास्तव में फ़िराक़ जैसे शायर बार-बार पैदा नहीं होते।

अमेरिकी टैरिफ का झटका: झारखंड के टेक्सटाइल उद्योग पर संकट, 80% ऑर्डर रद्द

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अमेरिका द्वारा आयातित वस्त्रों और हैंडलूम उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले का सीधा असर झारखंड के टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। राज्य के तसर सिल्क, खादी और रेडीमेड वस्त्र उद्योग इस नयी नीति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बताया जा रहा है कि झारखंड की टेक्सटाइल कंपनियों के लगभग 80 प्रतिशत ऑर्डर रद्द कर दिये गये हैं। इससे हजारों कारीगरों और बुनकरों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।

तसर और खादी उद्योग पर गहरा असर झारखंड का तसर सिल्क और खादी उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है। अमेरिका इन उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार रहा है। लेकिन अब टैरिफ बढ़ने के कारण अमेरिकी आयातक भारतीय उत्पादों को महंगा मानकर ऑर्डर रद्द कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत बुनकरों, कतिनियों और छोटे स्तर के उद्योगों की कमर टूट गई है।

रोजगार पर मंडराया खतरा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में करीब दो लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े हैं। ऑर्डर रद्द होने से मजदूरों और कारीगरों को काम नहीं मिल रहा। सिलाई, बुनाई और रंगाई से जुड़े छोटे-छोटे यूनिट्स बंद होने की कगार पर हैं।

निर्यात घटने की आशंका राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड से हर साल करोड़ों रुपये का तसर और खादी उत्पाद अमेरिका और यूरोप में निर्यात होता है। लेकिन अमेरिकी बाजार में आयात महंगा हो जाने से निर्यात में 60 से 70 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

उद्योग जगत की मांग उद्योग प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वैकल्पिक बाजार नहीं ढूंढा गया और कारीगरों को आर्थिक मदद नहीं दी गई, तो आने वाले महीनों में हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट गहराएगा। टैरिफ नीति ने झारखंड के पारंपरिक टेक्सटाइल उद्योग को झटका दिया है। अब सरकार और उद्योग जगत के बीच सामंजस्य बनाकर ही इस संकट से उबरने का रास्ता तलाशा जा सकता है।

🌟 28 अगस्त 2025 का दैनिक राशिफल 🌟

(पंडित प्रमोद कुमार मिश्र)

आज का दिन सभी राशियों के लिए नए अवसर और चुनौतियाँ लेकर आया है। कहीं धन लाभ और मान-सम्मान बढ़ेगा, तो कहीं स्वास्थ्य व खर्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
मेष राशि (Aries) आपके लिए समय अनुकूल रहेगा। किसी पुराने मित्र या रिश्तेदार से मुलाकात संभव है। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा। कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
👉 मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रीसूक्त का पाठ करें।
शुभ अंक: 9 | शुभ रंग: गुलाबी

वृषभ राशि (Taurus) यह समय आपके लिए भाग्योदय लेकर आया है। मनोनुकूल परिस्थितियों से प्रसन्नता बनी रहेगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
👉 धन-समृद्धि हेतु भगवान कुबेर की आराधना लाभकारी रहेगी।
शुभ अंक: 7 | शुभ रंग: नीला

मिथुन राशि (Gemini) भागदौड़ से राहत मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी और मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी और व्यवसाय में नए अवसर मिल सकते हैं।
👉 हनुमान चालीसा का पाठ विशेष लाभकारी रहेगा।
शुभ अंक: 8 | शुभ रंग: हरा

कर्क राशि (Cancer) घर में मांगलिक अवसर के योग हैं। संतान सुख की प्राप्ति होगी। हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए सोच-समझकर ही धन व्यय करें।
शुभ अंक: 5 | शुभ रंग: पीला

कन्या राशि (Virgo) आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे। सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहेंगे। कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
शुभ अंक: 3 | शुभ रंग: नीला

सिंह राशि (Leo) समस्याओं में कमी आएगी। आय स्थिर बनी रहेगी। विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, जिससे मानसिक शांति मिलेगी।
शुभ अंक: 3 | शुभ रंग: लाल

तुला राशि (Libra) अच्छी खबर मिलने की संभावना है। रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है। दांपत्य जीवन में मिठास आएगी।
👉 मानसिक शांति के लिए ध्यान और मेडिटेशन करें।
शुभ अंक: 4 | शुभ रंग: हरा

वृश्चिक राशि (Scorpio) समय श्रेष्ठ रहेगा। अचानक रुके हुए कार्य पूरे होंगे और मित्रों का सहयोग मिलेगा। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना होगा।
शुभ अंक: 3 | शुभ रंग: नारंगी

धनु राशि (Sagittarius) संघर्ष का दौर समाप्त होगा। भाग्य का साथ मिलेगा, लेकिन किसी भी प्रकार का लेन-देन सावधानीपूर्वक करें।
शुभ अंक: 6 | शुभ रंग: पीला

मकर राशि (Capricorn) अनावश्यक खर्च से मन अशांत रह सकता है। घर में शुभ अवसर के योग हैं, लेकिन पैसों के लेन-देन में सावधानी रखें।
शुभ अंक: 7 | शुभ रंग: पीला

कुम्भ राशि (Aquarius) आपके लिए समय बेहद शुभ है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। रुके हुए कार्यों में प्रगति होगी।
👉 हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी रहेगा।
शुभ अंक: 3 | शुभ रंग: पीला

मीन राशि (Pisces) अविवाहित जातकों के विवाह के योग बन रहे हैं। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, लेकिन चोट-चपेट से बचकर रहें।
शुभ अंक: 8 | शुभ रंग: गुलाबी