Friday, July 17, 2026
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बनारस –रामेश्वरम् एक्सप्रेस में लगेगा अतिरिक्त एसी कोच,

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा )रेलवे प्रशासन द्वारा यात्री जनता की सुविधा हेतु 22536/22535 बनारस-रामेश्वरम्-बनारस एक्सप्रेस में वातानुकूलित तृतीय श्रेणी एवं वातानुकूलित प्रथम श्रेणी का एक-एक अतिरिक्त कोच स्थाई रूप से निम्नवत लगाया जायेगा।
गाड़ी संख्या 22536/22535 बनारस-रामेश्वरम्-बनारस एक्सप्रेस में 31 अगस्त,2025 से बनारस से तथा 03 सितम्बर,2025 से रामेश्वरम् से संशोधित संरचना के अनुसार जनरेटर सह लगेजयान का 01, एल.एस.आर.डी. का 01, साधारण द्वितीय श्रेणी के 04, शयनयान श्रेणी के 05, वातानुकूलित इकोनॉमी तृतीय श्रेणी के 02, वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के 06, वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के 02 तथा वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के 01 कोच सहित कुल 22 आधुनिक एल.एच.बी. कोच स्थाई रूप से लगाये जायेंगे।

कमीशनखोरी के आरोप में रुकीं 85 विकास योजनाएँ ब्लॉक प्रमुख ने दी अनशन की चेतावनी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।चार साल से ठप पड़ी सेमरियावां ब्लॉक की 85 विकास परियोजनाएँ आखिर कब शुरू होंगी? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र की जनता का गुस्सा बन चुका है। ब्लॉक प्रमुख मजहरुन्निशाँ ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग (लो०नि०वि०) संतकबीरनगर ने उनके पुत्र एवं प्रतिनिधि मुस्ताक अहमद से 10 प्रतिशत कमीशन (टीएस मनी) की माँग की। कमीशन न मिलने पर विभाग ने 85 में से सिर्फ 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी, 24 पर दोबारा आपत्ति ठोक दी और 49 परियोजनाओं की फाइलें तो देखी तक नहीं। ब्लॉक प्रमुख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 17 अप्रैल, 16 जून, 30 जुलाई और 17 अगस्त 2025 को दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि जब खुद मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा तो फिर जनता किससे न्याय की उम्मीद करे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सभी 85 परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति (टीएस) देकर टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे क्षेत्र की जनता के साथ भूख हड़ताल और आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की वजह से सेमरियावां का विकास चार साल से अधर में लटका है। जबकि मुख्यमंत्री लगातार विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं, वहीं विभागीय अधिकारी आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।

बनकटा की प्रीति को मिला पीएचडी की उपाधि, बढ़ाया क्षेत्र का मान

बनकटा /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। प्रतिभा, परिश्रम और लगन का नाम है बैदौली गांव की बेटी प्रीति पाण्डेय। उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। उनके पिता जी बस्ती यूपी से कानगो पद से रिटायर्ड हुए हैं। वहीं पांच बहनों में प्रीति सबसे छोटी हैं। यह उपाधि उन्हें वर्ष 2025 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मिली है।

प्रीति पाण्डेय, जो कि बस्ती से चकबंदी विभाग से रिटायर्ड कानगो वशिष्ठ पाण्डेय की पुत्री हैं। उनकी यह शिक्षा यात्रा हमेशा से ही प्रेरणादायक रही। प्राथमिक शिक्षा उन्होंने जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद सर्वोदय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। त्रिगुणनाद जनता इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पूरी करने के बाद, स्नातक की पढ़ाई दीनदयाल विश्वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में तथा परास्नातक प्रथम श्रेणी में पूरी की। इसी कड़ी में उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय में शोध कर पीएचडी की उपाधि अर्जित की है।
प्रीति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा, “उनके सहयोग और आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं था। मैं चाहती हूं कि मेरे क्षेत्र की बेटियां शिक्षा के माध्यम से अपनी पहचान बनाएँ और समाज को दिशा दें।”
प्रीति की इस उपलब्धि से उनके गांव बैदौली और पूरे बनकटा क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि पर ग्राम प्रधान एवं स्थानीय ग्रामीणों व शुभचिंतकों ने बधाइयां दी हैं। समाज सेवी बादल सिंह का कहना है कि प्रीति की मेहनत और सफलता युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
यह आने वाले समय में इस बनकटा जैसे दुर्गम एवं उपेक्षित ग्रामीड क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण एवं प्रेरणा श्रोत बनने के साथ ही युवाओं विशेष कर क्षेत्र के युवतियों में नवचेतना जागृत करेगा।

दो दिवसीय संस्कार गीत एवं नृत्य समारोह का होगा भव्य आयोजन

भलुअनी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा )
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से सांस्कृतिक संस्था स्वर गुंजन द्वारा दो दिवसीय संस्कार गीत एवं नृत्य समारोह का आयोजन 29 एवं 30 अगस्त 2025 को दिन में, 12 बजे से 3 बजे तक भलुअनी गांधी चौक स्थित माँ भगवती पैलेस में होना सुनिश्चित है । उक्त समारोह में स्वर गुंजन की प्रस्तुति के साथ श्रीकृष्ण पब्लिक स्कूल भलुअनी एवं गर्ग इंटर कालेज के बच्चों द्वारा भी संस्कार गीत एवं नृत्य की विविध मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी।
उक्त कार्यक्रम की सूचना स्वर गुंजन के अध्यक्ष एवं अंतर्राष्ट्रीय लोकगायक राकेश उपाध्याय ने बताया है कि, संस्कृति मंत्रालय द्वारा ग्रामीण अंचल में इस प्रकार के समारोह को कराने का मुख्य उद्देश्य, संस्कार गीत एवं पारम्परिक नृत्य कला संस्कृति को सम्बर्धन एवं सरक्षण प्रदान किया जा सके एवं ग्रामीण प्रतिभाओं को मंचीय प्रस्तुति के द्वारा अधिक से अधिक अवसर प्रदान किया जा सके।
राकेश उपाध्याय ने बताया कि कार्यक्रम के प्रथम दिवस 29 अगस्त को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे विधायक दीपक मिश्र शाका ,जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीश तिवारी,ब्लाक प्रमुख भलुअनी छट्ठू यादव, विजयेश्वरी सिंह वत्स बिजौली की उपस्थिति होनी है।वहीं दूसरे सत्र में 30 अगस्त 25 को गोरखपुर की पूर्व महापौर डॉक्टर सत्या पांडेय,विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी एवं खण्ड विकास अधिकारी भलुअनी तारकेश्वर तिवारी का स्नेह मंचीय कलाकारों को मिलेगा।
उक्त समारोह में सेवानिवृत्त गुरु विक्रमा सिंह एवं धर्मराज विश्वकर्मा का सम्मान भी किया जाएगा।शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाई हासिल करने वाली भलुअनी की कुछ प्रतिभाओ का सम्मान होगा, जिनमें -कु0 पल्लवी खरवार, जोया खान,प्रियंका यादव,निवेदिता सिंह एवं कुमारी अंकिता यादव हैं।
कार्यक्रम के संचालक की जिम्मेदारी भलुअनी क्षेत्र के जाने माने गीतकार एवं रचनाकार रमेश सिंह दीपक निभाएंगे।

डेंगू एवं संक्रमक रोगों को लेकर एक आवश्यक बैठक

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा )
डेंगू एवं अन्य संक्रामक रोगों के नियंत्रण एवं रोकथाम के संबंध में मंडलायुक्त सभागार में, गुरुवार को मंडलायुक्त अनिल लिंगरा की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक किया गया। बैठक मे मंडलायुक्त आवश्यक दिशा निर्देश दिए, बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी, सीएमओ राजेश झा, एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, एसपी सिटी अभिनव त्यागी सहित संबंधित विभागों के संबंधित अधिकारी गण मौजूद रहे।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम: योगेश्वर श्री कृष्ण

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अच्युतम केशवम, कृष्ण दामोदरम,
रामनारायणम, जानकीवल्लभम,
राम जन्में थे त्रेता में दशरथ के घर,
कृष्ण जन्मे थे द्वापर में कारागार में।

राम का अवतार, प्राप्त वर से हुआ,
कृष्ण जन्मे, कंस को मिले श्राप से,
राम जीवन भर वन वन भटकते रहे,
कृष्ण महलों की शोभा बढ़ाते रहे।

लीला निराली है प्रभू की, राम अब,
तक, मंदिर महल को तरसते रहे,
मथुरा में जन्मभूमि अब भी है न्यारी,
कृष्ण पहले भी महलों में रहते रहे।

रावण भवसागर उतरने चला,
श्रीराम ने मानव अवतार लिया।
“प्राण जायँ पर वचन न जाये”
रघुकुल रीति ने बाँध लिया।

कृष्ण मर्यादा व वचन पालन,
की रीति, नीति में नहीं बँध सके।
बृज़ भूमि को छोड़, द्वारका बसे,
वापस आने का वादा निभा ना सके।

श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम बने,
श्री कृष्ण धर्म के रक्षक बने,
राम सीता वियोग में जलते रहे,
कृष्ण राधा, रुक्मिणी संग संग रहे।

कृष्ण हित में शक्तिस्वरूपा
ने बालिका रूप में जन्म लिया,
बाल कान्हा मथुरा से गोकुल गए,
बालिका ने स्वयं बलिदान दिया।

कृष्ण गोकुल में माखन खाते रहे,
गोपिकाओं संग रास रचाते रहे,
राम राक्षसों से ऋषियों को,
उनके आश्रम में जाकर बचाते रहे।

भक्त मीराजी थीं भक्त शबरी भी थी,
कृष्ण मीरा को नाच नचाते रहे,
प्रभु दर्शन को सदा तरसाते रहे,
राम शबरी के झूठे बेर खाते रहे।

कृष्ण अर्जुन के रथ सारथी बने,
उपदेश गीता के स्वयं सुनाते रहे,
आदित्य उधर राम को देखिए,
मरते रावण से गुरू ज्ञान पाते रहे।

राम से मर्यादा सीखिए सदा,
कृष्ण से राजनीति के मर्म को,
अच्युतम केशवम, कृष्णदामोदरम,
रामनारायणम, जानकी वल्लभम।

डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

नीली जींस में यूजेनिक्स के अवशेष

    कल्पना पाण्डेय

    प्रवासियों के कारण नौकरियाँ खोने का भय है। 2024 की चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन पार्टी ने ऐसा दावा किया कि, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रवासियों को चुनाव के लिए आयात कर रही है। वर्तमान अमेरिकी राजनीति रोज एक सर्कस बनती जा रही है। ट्रंप और उनकी पार्टी ने इस अभियान का समर्थन देकर अपनी असली पहचान उजागर की है। यह पार्टी अब केवल दक्षिणपंथी नीतियों की नहीं बल्कि सीधे नस्लश्रेष्ठता की प्रवक्ता बन गई है। ‘अमेरिकन ईगल’ जैसी कंपनियाँ इस विचारधारा को बाजार में चमकदार कागज में लपेटकर बेचती हैं, और दक्षिणपंथी राजनेता इसे वैचारिक वैधता देते हैं।

    यूजेनिक्स की सूक्ष्म छाया अभी भी टिकी हुई है। मीडिया और विज्ञापनों में ‘सुंदर, शुद्ध, आकर्षक’ गुणों को अभी भी “अच्छे जनुक” के रूप में दिखाया जाता है। यूजेनिक्स आज नकार दी गई है, फिर भी उसके नीचे भेदभाव की जड़ें अभी भी समाज में हैं। ‘गुड जींस’ ये आज सहज बोले जाने वाले शब्द हैं लेकिन उनके पीछे यूजेनिक्स के भयंकर वारिसे का इतिहास है। ये शब्द सहज, विनोदी या फैशनेबल मानकर स्वीकार किए गए तो वह भयंकर ऐतिहासिक वारिसा मिट जाएगा। आज भी यदि हम ऐसी भाषा को सहन करेंगे, तो कल वह फिर से भेदभाव, घृणा और हिंसा की राजनीति को समर्थन करेगी। कॉर्पोरेट लाभ और दक्षिणपंथी राजनीति मिलकर जब नस्लश्रेष्ठता की पुनर्रचना करते हैं, तो इससे उभरी भावनाएं लोगों के दिमाग पर छाप छोड़ती हैं। सौंदर्य, शुद्धता और श्रेष्ठता के मापदंडों को “जींस” के रंग से जोड़ना मतलब अतीत के अपराधों को वर्तमान फैशन में पैक करके बेचना। यह केवल बाजार की गलती नहीं—यह समाज को अतीत की सबसे घातक विचारों की ओर ले जाने वाली बात है।

    विज्ञान के नाम पर समाज को दी गई इस चालना ने नस्लवाद, विकलांगता-द्वेष, स्त्रीद्वेष, और सामाजिक अन्याय को ‘वैज्ञानिक’ ढंग से आधिकारिकता दी। करोड़ों लोगों की जबरदस्ती नसबंदी की गई, अल्पसंख्यकों पर अमानुषिक क्रूरता हुई, और इस विचार ने नाजी नरसंहार को भी दार्शनिक आधार दिया। आज भी राजनीति या मीडिया में ‘गुड जींस’ की बात आए, तो उसकी पृष्ठभूमि याद रखना आवश्यक है। विज्ञान का उपयोग मानवीय समानता के लिए होना चाहिए, भेदभाव या नस्लश्रेष्ठता के लिए नहीं। यूजेनिक्स का इतिहास इसी अतिभयानक खतरे की आभास कराता है। नीली जींस का यह विज्ञापन यूजेनिक्स के अवशेषों का उदाहरण है।

    — कल्पना पाण्डेय

    सरकार के कपास आयात निर्णय पर राजनीति गरमाई

    केजरीवाल ने पीएम मोदी पर लगाया किसानों से विश्वासघात का आरोप

    नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्र सरकार द्वारा कपड़ा व्यापारियों को राहत देते हुए शुल्क-मुक्त कपास आयात की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाने के फैसले पर अब राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस निर्णय को किसानों के साथ “विश्वासघात” करार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है।

    सरकार के आदेश के मुताबिक, कपड़ा व्यापारी अब 31 दिसंबर 2025 तक अमेरिका से बिना आयात शुल्क चुकाए कपास ला सकते हैं। इससे पहले यह छूट 19 अगस्त से 30 सितंबर तक के लिए दी गई थी। केंद्र का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के बोझ से भारतीय कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए उठाया गया है।

    हालांकि, केजरीवाल ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि देश के 90-95% किसानों को यह तक पता नहीं है कि उनके साथ क्या हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका से आने वाला कपास भारतीय कपास की तुलना में 15-20 रुपये प्रति किलो सस्ता है, जिससे देश के कपास किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

    केजरीवाल ने कहा,

    “यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, तो हमें भी अमेरिका से आने वाले कपास पर 100% टैरिफ लगाना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार उल्टा किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा रही है।”

    उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने के आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और अमेरिका से आयातित कपास पर शुल्क बहाल किया जाए ताकि भारतीय किसानों को संरक्षण मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क हटने से कपड़ा व्यापारियों और उद्योग को अल्पकालिक राहत जरूर मिलेगी, लेकिन दीर्घकाल में यह फैसला किसानों की आय पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। वहीं, विपक्ष ने इसे किसानों के साथ केंद्र सरकार का दोहरा रवैया करार दिया है।

    भारी बारिश से वैष्णो देवी यात्रा स्थगित, कटरा में फँसे सैकड़ों श्रद्धालु

    जम्मू-कश्मीर में तवी नदी उफान पर, बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़े

    जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते प्रसिद्ध वैष्णो देवी यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। यात्रा रुकने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु कटरा और आसपास के इलाकों में फँस गए हैं। कई श्रद्धालु कटरा के होटलों और धर्मशालाओं में ठहरे हुए हैं और यात्रा पुनः शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं।

    इलाके में मौजूद श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें प्रशासन की ओर से रास्ते से मलबा हटने तक इंतज़ार करने को कहा गया है। एएनआई से बातचीत में एक श्रद्धालु राजा कुमार ने कहा कि “मलबा हटने के बाद यात्रा फिर से शुरू हो जाएगी,” लेकिन उन्होंने यह भी आशंका जताई कि हालात जल्द सामान्य होना मुश्किल हो सकता है।

    बाढ़ और भूस्खलन से तबाही

    भारी बारिश के चलते जम्मू क्षेत्र में तवी नदी उफान पर है और बाढ़ के पानी ने कई घरों और दुकानों को नुकसान पहुँचाया है। सबसे बड़ा असर जम्मू शहर में देखने को मिला, जहाँ चौथे तवी पुल के साथ सड़क का एक हिस्सा बह गया।

    राज्य प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी करते हुए बचाव और निकासी अभियान तेज़ कर दिए हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा रहे हैं।

    मौसम विभाग का अनुमान

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, “आज से जम्मू-कश्मीर में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।” हालांकि, अगले 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष निगरानी

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हालात पूरी तरह से सामान्य नहीं हो जाते और यात्रा मार्ग सुरक्षित नहीं बन जाता, तब तक वैष्णो देवी यात्रा शुरू नहीं की जाएगी। यात्रियों को धैर्य बनाए रखने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

    Mercedes-Maybach GLS 600: शहर और कलर स्कीम के हिसाब से बदलती कीमतें

    नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)लक्ज़री कार सेगमेंट की शाही पहचान Mercedes-Maybach GLS 600 भारतीय बाजार में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। यह SUV अपनी भव्यता और हाई-एंड फीचर्स के कारण सुपर-लक्ज़री ग्राहकों की पहली पसंद मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इसकी ऑन-रोड कीमत शहर और वर्ज़न के हिसाब से अलग-अलग है। CarWale और CarDekho जैसे भरोसेमंद ऑटो पोर्टल्स के मुताबिक, अगस्त 2025 तक की प्रमुख शहरों की कीमतें इस प्रकार हैं।
    शहरवार ऑन-रोड कीमतें

    नई दिल्ली (बेस मॉडल) – लगभग ₹3.82 – 3.85 करोड़
    नॉएडा (बेस मॉडल) – ₹3.93 करोड़
    नॉएडा (Night Series) – ₹4.30 करोड़
    मुंबई (बेस मॉडल) – लगभग ₹4.01 करोड़
    मुंबई (पूरी रेंज) – ₹3.88 – 4.36 करोड़
    बेंगलुरु (बेस मॉडल) – ₹4.17 करोड़
    पुणे – ₹3.95 – 4.65 करोड़
    हैदराबाद – ₹4.12 – 4.57 करोड़
    चेन्नई – ₹4.19 – 4.64 करोड़
    अहमदाबाद – ₹3.72 – 4.05 करोड़
    पेंट विकल्प और अतिरिक्त चार्जेज
    Night Series (डुअल-टोन पेंट)
    Mojave Silver (ऊपर) और Onyx Black (नीचे) रंगों के साथ यह वर्ज़न ब्लैक-आउट एक्सेंट्स और रोज-गोल्ड हेडलाइट्स जैसी एक्सक्लूसिव डिटेल्स से लैस है।
    कीमत: ₹3.71 करोड़ (ex-showroom) से शुरू, यानी बेस मॉडल से लगभग ₹25 लाख महंगा।
    अन्य डुअल-टोन विकल्प
    Obsidian Black + Rubellite Red, Obsidian Black + Kalahari Gold आदि कॉम्बिनेशन उपलब्ध हैं। इनके अतिरिक्त चार्ज की स्पष्ट जानकारी आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि ये Night Series के समान प्रीमियम टैक्स कैटेगरी में आते होंगे।
    अनौपचारिक जानकारी
    बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की GLS 600 (Obsidian Black + Rubellite Red) पर लगभग ₹18.64 लाख का अतिरिक्त कलर चार्ज लगा बताया गया है। हालांकि यह तथ्य सरकारी या आधिकारिक मीडिया स्रोतों से प्रमाणित नहीं है।
    सारांश तालिका (प्रिंट हेतु)
    शहर / संस्करण ऑन-रोड कीमत (₹ करोड़)
    नई दिल्ली (बेस) ~3.82 – 3.85
    नॉएडा (बेस) ~3.93
    नॉएडा (Night Series) ~4.30
    मुंबई (बेस) ~4.01
    बेंगलुरु (बेस) ~4.17
    अन्य प्रमुख शहर (रेंज) ~3.70 – 4.60
    Night Series (पेंट एडिशन) +₹0.25 (ex-showroom)
    डुअल-टोन (अनुमानी) ~₹18.64 लाख (अनौपचारिक)

    Mercedes-Maybach GLS 600 सिर्फ एक SUV नहीं, बल्कि स्टेटस और लक्ज़री का प्रतीक बन चुकी है। शहर और कलर स्कीम के हिसाब से बदलती इसकी कीमतें दिखाती हैं कि भारतीय मार्केट में लक्ज़री पर्सनलाइजेशन की मांग कितनी बढ़ चुकी है। चाहे Night Series का प्रीमियम हो या डुअल-टोन कलर स्कीम का आकर्षण—यह SUV भारत के हाई-एंड खरीदारों के लिए शाही सवारी साबित हो रही है।

    “बिहार से 65 लाख गरीबों के वोट गायब, राहुल गांधी का बड़ा आरोप – ‘वोट चोरी’ रोकने निकली कांग्रेस की यात्रा”

    सीतामढ़ी।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि राज्य की मतदाता सूची से 65 लाख गरीब और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार की जनता अपने वोट के अधिकार से किसी भी कीमत पर वंचित नहीं होने देगी।

    ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के तहत सीतामढ़ी पहुंचे राहुल गांधी ने जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर बिहार में ‘वोट चोरी’ की कोशिश कर रहे हैं। गरीबों, दलितों, पिछड़ों और वंचित समाज के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं। लेकिन बिहार की जागरूक जनता इन्हें ‘वोट चोरी’ करने नहीं देगी।”

    राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान बचाने की जंग है। उन्होंने उपस्थित भीड़ से अपील करते हुए कहा कि लोग अपने मतदाता अधिकार के लिए संगठित हों और भाजपा की चालों को नाकाम करें।

    कांग्रेस नेता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के लिए जनता का वोट छीनने का खेल लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने चुनाव आयोग को भी चेतावनी दी कि “अगर वह निष्पक्ष संस्था है तो तुरंत कार्रवाई करे और मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम वापस दर्ज करे।”

    गांधी की इस जनसभा में भारी भीड़ उमड़ी। मंच से कांग्रेस नेताओं ने भी राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इसे व्यापक रूप दिया जाएगा।

    सुबह 5 से 8 बजे तक देवरिया पुलिस का “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान”

    देवरिया,(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक विक्रान्त वीर के निर्देशन में आज तड़के 5 से 8 बजे तक जनपद में “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया। इस दौरान थाना प्रभारियों ने आमजन से सीधा संवाद कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया और संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की तलाशी ली।
    अभियान के तहत चोरी की गाड़ियों की बरामदगी, तीन सवारी व नाबालिग चालकों पर कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर व तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों पर रोक, महिलाओं-बच्चियों से छेड़खानी करने वालों पर सख्ती, अवैध असलहा व मादक पदार्थों की रोकथाम को प्राथमिकता दी गई।
    जनपद के 26 स्थानों पर हुई इस चेकिंग में कुल 518 व्यक्तियों और 308 वाहनों की जांच की गई। आमजन ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य : अंधकार को हराकर ज्ञान और सेवा की ज्योति प्रज्वलित करने वाले संत

    मथुरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)धार्मिक जगत में हाल ही में संस्कृत ज्ञान को लेकर उठी बहस ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का नाम एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। संत प्रेमानंद महाराज और उनके बीच हुई चर्चा ने इस प्रश्न को जन्म दिया कि आखिर रामभद्राचार्य ने यह अद्भुत विद्वत्ता हासिल कैसे की।

    उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जन्मे जगद्गुरु रामभद्राचार्य महज दो माह की उम्र में ट्रेकोमा नामक बीमारी से दृष्टिहीन हो गए। आंखों की रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने का संकल्प लिया और वही संकल्प आज उन्हें संत समाज का अग्रणी स्तंभ बना चुका है।

    वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उन्होंने वेद, दर्शन और संस्कृत व्याकरण की गहन शिक्षा पाई। छात्र जीवन से ही उनका रुझान धर्म और अध्यात्म की ओर था। यही शिक्षा और साधना की नींव आगे चलकर उन्हें ‘जगद्गुरु’ की उपाधि तक ले गई।

    रामभद्राचार्य ने अपनी विद्वत्ता को समाजसेवा से जोड़ा। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए विद्यालय की स्थापना की, ताकि वे शिक्षा से वंचित न रहें। आगे चलकर उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो दुनिया का पहला विश्वविद्यालय है, जिसे किसी दृष्टिबाधित कुलाधिपति ने स्थापित और संचालित किया।

    रामकथा के माध्यम से उन्होंने धर्म का प्रचार किया और कथा से प्राप्त दक्षिणा को दिव्यांगों की शिक्षा व सेवा में लगा दिया। उनके जीवन का यह पहलू उन्हें धार्मिक जगत से आगे बढ़ाकर शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी आदर्श बना देता है।

    आज जगद्गुरु रामभद्राचार्य न केवल संत समाज में अपनी विद्वत्ता और भक्ति से सम्मानित हैं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के लिए आशा और प्रेरणा के प्रतीक भी बन चुके हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन क्यों न हों, संकल्प और साधना से हर अंधकार को प्रकाश में बदला जा सकता है।

    “सबका साथ सबका विकास” बना छलावा, बनकटा स्टेशन और ट्यूबवेल योजना उपेक्षा की भेंट

    भाटपार रानी, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
    वर्तमान डबल इंजन की भाजपा सरकार पर स्थानीय जनता और विपक्ष के नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के विकास कार्यों में उपेक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और रेलवे ठहराव समाप्त होने जैसी समस्याओं से आमजन खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

    स्थानीय स्तर पर सबसे अहम मुद्दा बनकटा रेलवे स्टेशन का है, जो कभी इस क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक तरक्की का मुख्य केंद्र था। अब स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया है। मौर्य एक्सप्रेस और बरौनी–ग्वालियर ट्रेन के न रुकने से गरीब मरीजों और उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    ट्यूबवेल योजना में भेदभाव का आरोप

    क्षेत्र के कई अहम गांवों में सिंचाई की गंभीर समस्या बनी हुई है।

    बनकटिया दुबे: सरकारी नलकूप है, लेकिन नाली मरम्मत के अभाव में उपयोग बाधित।

    प्रताप छापर व भुड़वार: आज तक एक भी सरकारी स्टेट ट्यूबवेल नहीं लगाया गया।

    सोहनपुर: ट्यूबवेल संख्या 69 खराब, सिंचाई कार्य ठप।

    बंजरिया पाण्डेय: नलकूप की नाली जाम, किसानों को दिक्कत।

    मिश्रौली व खोराबार: अब तक एक भी सरकारी ट्यूबवेल की स्थापना नहीं।

    इसके विपरीत, कुछ गांवों जैसे इंगुरी सराय और जंजिरहा में नए नलकूप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जातिगत और राजनीतिक भेदभाव के कारण कई ब्राह्मण बहुल व मिश्रित गांवों को योजनाओं से वंचित रखा गया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति

    बनकटा–भुड़वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। क्षेत्रीय लोगो समाजिक लोगो द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बाद हाल में चार डॉक्टरों की तैनाती की गई, मगर अब भी आधे से अधिक चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेज दिए गए हैं।

    जनता का आक्रोश, चुनाव में असर तय

    स्थानीय जनता का कहना है कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा सिर्फ छलावा बनकर रह गया है। विकास कार्यों की अनदेखी, रेलवे ठहराव बंद होना और स्वास्थ्य–सिंचाई संकट से आमजन में नाराजगी गहराती जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को जनता की नाराजगी का भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

    ग्राम प्रधान संगठन की उठी मांग

    पंचायतों में आरक्षण
    सांसद-विधायक की तर्ज पर स्थिर किया जाए

    भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने एक वार्ता में बताया कि, हर पाँच साल में आरक्षण बदलने से रुकता है ग्राम सभाओं का विकास प्रदेश अध्यक्ष लखनऊ।
    ग्राम प्रधान संगठन ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि ग्राम प्रधान, मुखिया और सरपंच पदों के आरक्षण को सांसद और विधायकों की तरह स्थिर किया जाए। संगठन का कहना है कि हर पाँच साल बाद आरक्षण बदलने से ग्राम सभाओं का विकास बाधित हो रहा है।
    राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने कहा कि सांसद और विधायक पद पर आरक्षण लगातार नहीं बदलता, जबकि ग्राम प्रधान पद के लिए यह हर कार्यकाल के बाद बदल जाता है। इसका सीधा असर ग्रामीण जनता और विकास कार्यों पर पड़ता है।
    उन्होंने कहा कि कई बार मेहनती, लोकप्रिय और जनता का विश्वास जीत चुके प्रधान केवल आरक्षण बदल जाने के कारण दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाते। इससे ग्रामीण जनता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को फिर से चुनने से वंचित रह जाती है।
    संगठन ने निर्वाचन आयोग से निवेदन किया है कि ग्राम प्रधान/मुखिया/सरपंच पदों के लिए आरक्षित सीटों की अवधि सांसद और विधायकों की तरह दीर्घकालीन की जाए। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों का अनुभव और समर्पण ग्राम सभा तक पहुँचेगा, बल्कि ग्रामीण विकास की गति भी तेज़ होगी।