Thursday, July 16, 2026
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स्थापत्य, संस्कृति और इतिहास से सजा मध्य प्रदेश का अनमोल धरोहर नगर

बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) – नर्मदा नदी के किनारे बसा बुरहानपुर मध्य भारत का वह ऐतिहासिक नगर है, जिसने सदियों से स्थापत्य, संस्कृति, भक्ति और मुग़ल इतिहास को अपने आंचल में सहेज रखा है। यह नगर न केवल युद्धों और राजवंशों के संघर्ष का गवाह रहा है, बल्कि प्रेम और कला की अनमोल कहानियों का भी केंद्र रहा है। इत्र निर्माण की समृद्ध परंपरा ने इसे सुगंधों की नगरी भी बना दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बुरहानपुर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फारूक़ी सुल्तानों ने की थी। लेकिन इसका स्वर्णिम अध्याय शुरू हुआ मुग़ल काल में, जब इसे साम्राज्य का प्रमुख सैन्य केंद्र और शाही विश्रामगृह के रूप में विकसित किया गया। मुग़ल शासक अकबर से लेकर औरंगज़ेब तक सभी ने इस नगर का महत्व समझा।
यहीं पर शाहजहाँ की प्रिय पत्नी मुमताज़ महल ने 1631 में अंतिम सांस ली थी। ताजमहल के निर्माण से पहले शाहजहाँ ने बुरहानपुर में ही मुमताज़ का मकबरा बनवाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में वास्तुकला और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उसे आगरा ले जाया गया।
स्थापत्य और स्मारक
बुरहानपुर का स्थापत्य अपने आप में अनोखा है। यहां की इमारतें मुग़ल कला और दक्कनी शैली का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती हैं।
शाही किला – मुग़ल सम्राटों का प्रमुख किला, जहाँ से सैन्य गतिविधियों का संचालन होता था।
बादशाही किला और दीवान-ए-आम – सत्ता और प्रशासन का केंद्र।
आहुखाना – मुमताज़ महल का अस्थायी समाधि स्थल।
हमाम – शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया शाही स्नानगृह, जिसकी छत पर बनी चित्रकला आज भी अद्भुत प्रतीत होती है।
जामा मस्जिद – फारूक़ी सुल्तानों की भव्य धरोहर, जो आज भी आस्था और स्थापत्य का अद्भुत उदाहरण है।
संस्कृति और परंपरा
बुरहानपुर का सांस्कृतिक जीवन धार्मिक सहिष्णुता और विविधता का प्रतीक है। यहाँ सूफी संतों की दरगाहें और हिंदू मंदिर दोनों ही समान आस्था का केंद्र हैं।

सूफी संत शाह मौला अली दरगाह और अन्य दरगाहों ने इस नगर को आध्यात्मिक केंद्र बनाया।
नर्मदा किनारे स्थित असीरगढ़ किला इतिहासकारों और पर्यटकों दोनों के लिए विशेष आकर्षण है।
इत्र नगरी की पहचान
बुरहानपुर सदियों से इत्र (परफ्यूम) निर्माण की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर प्राकृतिक फूलों और जड़ी-बूटियों से इत्र बनाते हैं, जो दूर-दराज़ तक प्रसिद्ध हैं। बुरहानपुर का “रूह-ए-गुलाब” और “केवड़ा” विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।

पर्यटन के लिहाज़ से महत्व
आज बुरहानपुर न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि स्थापत्य कला, संस्कृति और परंपराओं को जानने वालों के लिए भी एक आदर्श पर्यटन स्थल है। यहाँ आकर पर्यटक नर्मदा किनारे की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी उठा सकते हैं।
बुरहानपुर एक ऐसा नगर है, जो सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों में सीमित नहीं है, बल्कि यह अतीत की कहानियों, मुग़ल वैभव, प्रेम की निशानियों और संस्कृति की खुशबू से महकता है। यदि आप भारत की धरोहर को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो बुरहानपुर आपके सफर की सूची में अवश्य होना चाहिए।

पित्त की पथरी : एक गंभीर समस्या जिसे न करें नज़र अंदाज़

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पित्त की पथरी (Gallstone) यानी गॉलब्लैडर में बनने वाली कठोर संरचनाएं, आजकल एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया की करीब 6 प्रतिशत आबादी इस समस्या से प्रभावित है। खासतौर पर महिलाओं में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और मोटापा इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

क्या है पित्त की पथरी?
पित्ताशय (Gallbladder) हमारे पाचन तंत्र का एक छोटा अंग है, जो यकृत (Liver) से निकलने वाले पित्त रस (Bile juice) को जमा करता है। यही पित्त रस वसा (Fat) के पाचन में मदद करता है। जब इस रस में कोलेस्ट्रॉल, पित्त लवण और अन्य तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो पथरी बनने लगती है।
पित्त की पथरी के लक्षण
कई बार पथरी बिना किसी लक्षण के भी मौजूद रहती है और धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर लेती है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं—
पेट में तेज दर्द : विशेष रूप से दाईं तरफ की ऊपरी सतह या पेट के बीच में।
भारीपन और गैस की समस्या : खाना खाने के बाद पेट फूला हुआ महसूस होना।
जी मिचलाना और उल्टी : खासकर तैलीय और भारी भोजन के बाद।
बुखार और ठंड लगना : संक्रमण की स्थिति में।
पीलिया (Jaundice) के लक्षण : यदि पथरी पित्त नली को अवरुद्ध कर दे।
किन लोगों में अधिक खतरा?
40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं
मोटापे से ग्रसित लोग
हार्मोनल बदलाव (गर्भावस्था, गर्भनिरोधक दवाओं का उपयोग)
अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन करने वाले लोग
लंबे समय तक डायबिटीज़ या कोलेस्ट्रॉल की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इलाज विशेषज्ञों के अनुसार पित्त की पथरी का एकमात्र स्थायी इलाज सर्जरी (Gallbladder Removal Surgery – Cholecystectomy) है। शुरुआती अवस्था में लक्षण हल्के हों तो कुछ दवाएं राहत पहुंचा सकती हैं, लेकिन पथरी खत्म नहीं होती। इसलिए समय रहते चिकित्सक की सलाह और उचित इलाज बेहद जरूरी है।
बचाव कैसे करें?
संतुलित और हेल्दी आहार लें, खासकर हरी सब्ज़ियां और फाइबरयुक्त भोजन।
नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
ज्यादा तैलीय, मसालेदार और जंक फूड से परहेज करें।पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

पित्त की पथरी कोई मामूली बीमारी नहीं है जिसे अनदेखा कर दिया जाए। यह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है और जीवन को खतरे में डाल सकती है। सही समय पर लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना ही सुरक्षित और सही रास्ता है।

बचपन के अनुभव और रिश्तों पर उनका असर

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बचपन हर इंसान के व्यक्तित्व की नींव रखता है। जिस वातावरण में एक बच्चा पनपता है, वही आगे चलकर उसके विचारों, व्यवहार और रिश्तों का हिस्सा बन जाता है। अगर घर में हमेशा झगड़े होते रहे हों, संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप का माहौल रहा हो, या माता-पिता के होते हुए भी बच्चा अकेलापन महसूस करता रहा हो, तो यह अनुभव उसकी भावनात्मक दुनिया पर गहरा असर डालते हैं।
बचपन का असर क्यों रहता है गहरा?
बच्चे बेहद संवेदनशील होते हैं। वे अपने आस-पास के हर व्यवहार को देखते हैं और उसे अनजाने में सीख लेते हैं।
झगड़े और तनावपूर्ण माहौल: अगर बच्चा अक्सर माता-पिता को झगड़ते देखता है, तो वह मान लेता है कि रिश्तों में यही सामान्य है। आगे चलकर वह भी अपने रिश्तों में अनावश्यक तकरार करने लगता है।

अनदेखी और अकेलापन: जब बच्चों की भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है, तो वे भीतर ही भीतर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। बड़े होकर ऐसे लोग रिश्तों में विश्वास और अपनापन बनाने में कठिनाई का सामना करते हैं।
प्रेम और संवाद की कमी: जिन बच्चों को प्यार और समझ नहीं मिलती, वे अकसर ठंडे या कठोर स्वभाव के हो जाते हैं। कई बार वे खुद से जुड़ी भावनाओं को भी दबा देते हैं।

रिश्तों में कैसे दिखता है बचपन का असर?

  1. अनावश्यक गुस्सा और आरोप-प्रत्यारोप
    ऐसे लोग रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं और बिना वजह साथी पर दोष मढ़ते हैं।
  2. भावनात्मक दूरी
    कई बार वे दिल से करीब आने से डरते हैं, ताकि फिर से वही दर्द या अकेलापन न झेलना पड़े।
  3. आत्म-संदेह और असुरक्षा
    उन्हें हमेशा यह डर रहता है कि साथी उन्हें छोड़ देगा या धोखा देगा, क्योंकि बचपन में उन्होंने स्थिरता का अनुभव नहीं किया होता।
  4. अत्यधिक नियंत्रण की प्रवृत्ति
    कुछ लोग रिश्तों में अपने साथी को नियंत्रित करने की कोशिश करने लगते हैं, ताकि सबकुछ उनके हिसाब से चले।
    समाधान और सुधार के रास्ते
    स्वीकार करना: सबसे पहला कदम यह मानना है कि बचपन का अनुभव हमारे आज के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है।
    संवाद करना सीखें: रिश्तों में खुलकर बात करना, भावनाओं को साझा करना ज़रूरी है।
    पेशेवर मदद लेना: ज़रूरत पड़ने पर काउंसलर या थेरेपिस्ट से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
    सकारात्मक माहौल बनाना: अपने बच्चों और परिवार के लिए एक स्वस्थ, संवादपूर्ण और प्यार से भरा वातावरण तैयार करें, ताकि वही गलतियाँ दोहराई न जाएँ।
    बचपन के अनुभव हमारी यादों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे हमारे व्यक्तित्व और रिश्तों का हिस्सा बन जाते हैं। अगर वे अनुभव नकारात्मक रहे हैं, तो ज़रूरी है कि हम उन्हें पहचानें और बदलने की कोशिश करें। सही दृष्टिकोण और संवाद से हम न केवल अपने रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी एक स्वस्थ और प्रेमपूर्ण वातावरण दे सकते हैं।

कॅरियर में ठहराव महसूस हो रहा? इन रणनीतियों से दूर करें तनाव

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)आज के दौर में प्रोफेशनल जीवन जितना तेज़ और प्रतिस्पर्धात्मक होता जा रहा है, उतना ही युवाओं में कॅरियर स्टैग्नेशन (Career Stagnation) यानी ठहराव महसूस करने की समस्या भी बढ़ रही है। हालिया सर्वे के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत पेशेवर अपने कॅरियर के शुरुआती या मध्य पड़ाव पर ठहराव का अनुभव करते हैं। वहीं लगभग 40 फीसदी युवा सिर्फ 2 साल के भीतर ही नौकरी बदलने का मन बना लेते हैं।

भले ही यह स्थिति आम होती जा रही है, लेकिन जब यह आपके साथ होती है तो इसे झेलना आसान नहीं होता। अच्छी खबर यह है कि यह केवल एक मानसिक स्थिति है और सही सोच व रणनीति से इससे बाहर निकला जा सकता है।

  1. खुद की पीठ थपथपाएं
    आपने अब तक अपने कॅरियर के लिए कड़ी मेहनत की है— शिक्षा में निवेश किया, अनुभव हासिल किया और नेटवर्किंग में नाम कमाया। ऐसे में खुद को कम आंकने की बजाय अपनी उपलब्धियों को याद करें और गर्व महसूस करें। अगर आपको लगता है कि वर्तमान भूमिका सिर्फ “सुरक्षा” के लिए है और संतुष्टि नहीं मिल रही है, तो नए विकल्प तलाशना बेहतर होगा। याद रखें, नौकरी में स्थायित्व की गारंटी नहीं होती, लेकिन संतुष्टि वही काम देगा जिसे आप सच में करना चाहते हैं।
  2. बदलाव का जुनून अपनाएं
    अगर आप नई दिशा में कदम रखना चाहते हैं— जैसे स्टार्टअप शुरू करना, इनोवेशन करना या नए कौशल सीखना— तो यह समय बिल्कुल सही है। युवावस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है उत्साह, जोखिम उठाने की क्षमता और नएपन का जज्बा। यही गुण कंपनियों को भी चाहिए।

नई टेक्नोलॉजी और स्किल्स सीखें
अपने विचारों को प्रोजेक्ट्स में बदलने की कोशिश करें
उद्यमिता (Entrepreneurship) के अवसर तलाशें
प्रोफेशनल नेटवर्क को मजबूत करें

  1. तनाव से बचने के उपाय
    अपनी तुलना दूसरों से करने की बजाय अपनी प्रगति पर फोकस करें
    वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखें
    छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें और उन्हें पूरा कर आत्मविश्वास बढ़ाएं
    ज़रूरत पड़ने पर मेंटर या कॅरियर काउंसलर की मदद लें

कॅरियर में ठहराव आना असामान्य नहीं है, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। सही समय पर कदम उठाकर, नए कौशल सीखकर और बदलाव का जुनून अपनाकर आप न केवल तनाव से मुक्त हो सकते हैं बल्कि अपने कॅरियर को नई ऊंचाई भी दे सकते हैं।

अब गाड़ी 20 साल पुराने वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क में बढ़ोतरी,

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 20 वर्ष से अधिक पुराने मोटर वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क में भारी वृद्धि कर दी है। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य लोगों को पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले और कम सुरक्षित वाहनों को रखने से हतोत्साहित करना है।

जारी अधिसूचना के अनुसार, 20 साल से अधिक पुराने हल्के9ओ0 मोटर वाहनों (LMV) के पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, 20 ऊसाल पुरानी मोटरसाइकिलों का शुल्क 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये हो जाएगा।

इसी तरह, तिपहिया और क्वाड्रिसाइकिल वाहनों के लिए नवीनीकरण शुल्क 3,500 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये कर दिया गया है।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह संशोधन न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि लोगों को नए एवं पर्यावरण-अनुकूल वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने वाहनों से प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और सड़क सुरक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे में, सरकार द्वारा शुल्क बढ़ाने का यह कदम लंबे समय में सार्वऊजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई फीस 20 वर्ष से अधिक पुराने सभी वाहनों पर लागू होगी और संबंधित राज्य परिवहन विभाग इसके अनुपालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

भगवान शंकर और श्रीरामकथा का आध्यात्मिक रहस्य

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिंदू धर्म की अनंत परंपराओं में एक अद्भुत प्रसंग वर्णित है—भगवान शंकर द्वारा माता पार्वती को श्रीरामकथा का श्रवण कराना। यह घटना केवल कथा-वाचन नहीं, बल्कि ईश्वर के सगुण और निर्गुण स्वरूप की गूढ़ व्याख्या है।

श्रीरामकथा का दिव्य श्रवण

जब भगवान शिव स्वयं पार्वती जी को श्रीरामकथा का प्रवचन करते हैं, तो यह केवल कथा का पाठ न होकर ईश्वर के स्वरूप की अनुभूति है। माता पार्वती अत्यंत एकाग्रता, भक्ति और श्रद्धा से कथा का रसपान करती हैं। यहाँ एक संकेत छिपा है कि ईश्वर की लीला को समझने के लिए केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि गहन श्रद्धा और आत्मसमर्पण आवश्यक है।

ईश्वर: सगुण और निर्गुण का रहस्य

सदियों से यह प्रश्न साधकों और मनीषियों के सामने खड़ा रहा है—क्या ईश्वर सगुण (गुणों से युक्त, रूपवान) है?या वह निर्गुण (गुणातीत, निराकार) है?महान तपस्वी और ऋषि भी इस प्रश्न में उलझ जाते हैं। इसका कारण यह है कि ईश्वर की विराटता असीम और अकल्पनीय है। मानव की बुद्धि, चाहे वह कितनी भी ऊँची क्यों न हो, उस अनंत सत्य को संपूर्ण रूप से पकड़ नहीं सकती।

शास्त्रीय दृष्टि

सगुण स्वरूप: भक्तों के लिए भगवान राम या कृष्ण के रूप में ईश्वर को अनुभव करना। यह भक्ति, प्रेम और आराधना का मार्ग है।निर्गुण स्वरूप: दार्शनिक चिंतन और ध्यान की दृष्टि से ईश्वर को निराकार, निरंजन और सर्वव्यापी मानना। यह ज्ञान और समाधि का मार्ग है।रामकथा में यह द्वैत मिलकर अद्वैत का बोध कराते हैं। भगवान राम लीला पुरुषोत्तम के रूप में सगुण स्वरूप हैं, जबकि उनका अंतर्निहित अस्तित्व निर्गुण ब्रह्म का ही प्रकाश है।

मानव बुद्धि की सीमा

ईश्वर की सत्ता का वर्णन करते हुए शास्त्र कहते है
जैसे नक्षत्र पृथ्वी से असीम दूरी पर हैं, वैसे ही ईश्वर का वास्तविक स्वरूप सांसारिक बुद्धि की पहुँच से परे है।

केवल भक्ति, श्रद्धा और समर्पण ही वह साधन है जिसके द्वारा साधक ईश्वर के स्वरूप का अनुभव कर सकता है।
यह प्रसंग हमें यह शिक्षा देता है कि ईश्वर के स्वरूप को केवल तर्क या बौद्धिकता से नहीं समझा जा सकता। श्रद्धा, भक्ति और विनम्रता ही उसके साक्षात्कार का मार्ग है। भगवान शंकर द्वारा पार्वती जी को श्रीरामकथा का श्रवण इसी तथ्य की ओर संकेत करता है कि जब स्वयं देवाधिदेव शिव कथा सुनाने का कार्य करते हैं, तो साधारण जीव को कितनी श्रद्धा और एकाग्रता से ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
ईश्वर सगुण भी है और निर्गुण भी। वह भक्त की भावना के अनुरूप रूप धारण करता है। इसलिए साधक का मार्ग चाहे भक्ति हो या ज्ञान, अंततः दोनों का लक्ष्य एक ही है—अनंत ब्रह्म से मिलन।

विद्यालय केवल शिक्षा नहीं, संस्कार का तीर्थ भी है

✍️नवनीत मिश्रा
“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” भारत का वह उद्घोष है जिसने पूरे विश्व को श्रेष्ठता की राह दिखाई। यह उद्घोष केवल शब्द नहीं था, बल्कि उस शिक्षा परंपरा का प्रतीक था जिसने भारत को पाणिनि, सुश्रुत, चरक, आर्यभट्ट और भास्कराचार्य जैसे महापुरुष दिए। उन्होंने अपने गुरुकुल को मात्र शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि स्वाभिमान और साधना का तीर्थ माना। इसी कारण भारत की प्राचीनता ने आधुनिकता का पोषण किया और दुनिया को बौद्धिक समृद्धि का मार्ग दिखाया।
किसी भी राष्ट्र की असली सम्पन्नता उसकी बौद्धिक संपदा होती है और इस संपदा की जननी हमारे विद्यालय और हमारे गुरु हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने 1 सितम्बर को “हमारा विद्यालय–हमारा स्वाभिमान” अभियान का आयोजन तय किया है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों और शिक्षकों के मन में विद्यालय के प्रति आत्मीयता और गौरव का भाव जगाने का प्रयास है।
इस अभियान का उद्देश्य विद्यालय को स्वच्छ, अनुशासित, हरित और प्रेरणादायी स्थल के रूप में स्थापित करना है। यह केवल भौतिक सौंदर्य का प्रश्न नहीं है, बल्कि उस भावनात्मक जुड़ाव का भी, जो विद्यार्थियों को विद्या रूपी शक्ति अर्जित करने और आत्मबल से ओतप्रोत होने की ओर प्रेरित करता है। शक्तिबोध और सौंदर्यबोध– यही दो स्तंभ हैं जिन पर यह अभियान खड़ा है।
विद्यालय को राष्ट्रधन मानते हुए उसकी संपत्ति और संसाधनों का संरक्षण, शिक्षा को चरित्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम बनाना, भेदभाव रहित वातावरण तैयार करना और विद्यालय को संस्कार तथा समर्पण का तीर्थ मानना, यही संकल्प इस अवसर पर दोहराए जाएंगे। यह सत्य है कि किसी विद्यालय का कायाकल्प एक दिन में संभव नहीं, किंतु संकल्प की यह पहल परिवर्तन की दिशा में पहला कदम अवश्य है।
अभियान का उद्घोष है, “हमारा विद्यालय–हमारा तीर्थ है, हमारी आत्मा का अभिमान है और राष्ट्र निर्माण का आधार है।” यह उद्घोष केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि उन बच्चों का भी है जिनके बिना विद्यालय का अस्तित्व अधूरा है। यही संकल्प भविष्य के भारत को नई दिशा देगा और शिक्षा को उसके वास्तविक उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण से जोड़कर खड़ा करेगा।

अब भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों का अत्याचार

लोगो ने कहा -इन बंगलादेश के अत्याचारी इस्लामिक कट्टरपंथियों क़ी अच्छी तरह से ठुकाई नहीं होंगी तबतक ये मानेगे नहीं।

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा )
अब भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचारी इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा सामूहिक बलात्कार और शरीर से गर्दन काटने क़ी हिंसा का एक खतरनाक दौर जारी है। गत वर्ष 4 अगस्त से इस वर्ष जुलाई 2025 के बीच साम्प्रदायिक हिंसा की 2500 घटनाएं हो चुकी हैं तथा इस्लामिक कट्टरवादियों ने एक वर्ष के दौरान कम से कम 179 मंदिरों में तोड़-फोड़ की और हिन्दू पुजारी-पंडितों चुन चुन के निशाना बनाया जा रहा हैं।
आतंकी बंगलादेश देश में विशेष रूप से हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की हिन्दू महिलाओं और बच्ची एवं बच्चों को शामिल किया जा रहा है, जो मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत महामारी जैसी स्थिति में पहुंच गया है।

बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए मानवाधिकार कांग्रेस ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में बेहद शर्मसार करने वाली जानकारी साझा की है। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सलीश सेंटर (एएससीई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की पहली तिमाही के दौरान तीन महीने से भी कम समय में आधिकारिक तौर पर बलात्कार के हजारों मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में से 87 प्रतिशत में पीड़ित 18 साल से कम उम्र की हिन्दू लड़कियाँ थीं। इनमें से सैकड़ों हिन्दू पीड़ित किशोर बारह से लेकर छह वर्ष की आयु के बीच के बच्चे थे, जबकि सामूहिक बलात्कार की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है।

एचडीएफसीसीबीएमजारी द्वारा एक बयान में कहा गया है, “सैकड़ों मामलों में, पुरे बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू महिलाएं और लड़कियों एवं बच्चियों के शव मिले हैं – जिनके सिर तक गायब हैं और उनकी पहचान असंभव हो गई है। यूनुस शासन के तहत बांग्लादेश हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के बारे में, मानवाधिकार संस्था ने कहा कि निराधार आंदोलन और बढ़ते जनाक्रोश के बावजूद, एक प्रमुख हिंदू नेता को आतंकवादी करार दे कर सनातनी चिन्मय कृष्ण दास नवंबर से जेल में बंद हैं। आपको पता रहे कि 5 अगस्त, 2024 को बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद उनके प्रबल विरोधी मोहम्मद यूनुस’ के नेतृत्व में बंगलादेश की अंतरिम सरकार के गठन के बाद से बंगलादेश में राजनीतिक अस्थिरता व्याप्त है। वहां हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों व अन्य गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं।

बंगलादेश की मानवाधिकार ‘अल्पसंख्यक कांग्रेस’ के अनुसार “बंगलादेश की अंतरिम सरकार का वहां की कानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। देश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा की बहुत ही खतरनाक लहर चल रही है।” बंगलादेश के मानवाधिकार संगठन की रिपोर्टों के हवाले से ‘अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस’ ने बताया है बंगलादेश में दिव्यांग लड़कियां भी सुरक्षित नहीं हैं। इसी वर्ष जून में 17 दिव्यांग हिन्दू लड़कियों से बलात्कार किया गया और महिलाओं व लड़कियों के सिर विहीन शव पाए गए हैं।
सबसे बुरी बात यह है कि अब बंगलादेश की अदालतों में मामले धार्मिक पूर्वाग्रह आधार पर तय किए जा रहे हैं जिस कारण वास्तविक दोषियों के विरुद्ध केस दर्ज नहीं होते और पीड़ितों को न्याय ही नहीं मिलता।

बंगलादेश में वर्ष 2024 और मई 2025 के बीच राजनीतिक वर्करों तथा छोटे कारोबारियों व अन्य लोगों सहित भीड़ द्वारा की गई हिंसा में 1174 से अधिक लोग मारे गए हैं व 1000 से अधिक फैक्टरियां बंद हो जाने से 1 वर्ष में 1.20 लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं। इतना ही नहीं गत मास एक ‘झूठे फेसबुक अकाऊंट’ से की गई टिप्पणियों के आधार पर ‘पंडित रंजन’ नामक एक निर्दोष हिंदू छात्र की गिरफ्तारी के बाद इस्लामिक कट्टरवादियों द्वारा ‘अलदादपुर’ गांव में स्थित उसके घर सहित 130 से अधिक पुजारी हिंदुओं के मकानों पर हमला करके लूट लिया गया। कट्टरपंथी हिन्दू पुजारी अल्पसंख्यकों को धर्म परिवर्तन करने या देश छोड़ने तथा सरकारी नौकरियों से त्यागपत्र देने के लिए विवश करने के अलावा देश के मंदिरों के प्रबंधकों को पत्र भेजकर उनसे इस्लाम अपनाने या जल्द से जल्द बंगलादेश छोड़ने का बिलकुल कश्मीरी पंडितों जैसा पैटर्न अपनाते हुए भयानक दबाव बना रहे हैं।

भारत सरकार द्वारा समय-समय पर यूनुस सरकार का ध्यान हिन्दू अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की ओर दिलाने के बावजूद हालात ज्यों के त्यों हैं। ‘शेख हसीना’ की सरकार का तख्ता पलटने के बाद 1 वर्ष के दौरान बंगलादेश की सरकार ने भारत के साथ अपने रिश्ते काफी बिगाड़ लिए हैं। एक ओर हिंदुओं पर हो रहे हमलों ने भारत और बंगलादेश के संबंधों में तनाव बढ़ाया है तथा दूसरी ओर मोहम्मद यूनुस की आतंकी पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब बंगलादेश भी आतंकी पाकिस्तान की तरह इस्लामिक कट्टरवाद की ओर बढ़ रहा है। बांग्लादेश की सरकार कट्टरपंथियों के दबाव में अपने ही अतीत और इतिहास को मिटाने पर अमादा है जो वहां बंगलादेश के जन्मदाता ‘शेख मुजीबुर्रहमान’, ‘गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर’ और फिल्मकार ‘सत्यजीत रे’ जैसी महान हस्तियों के मकानों को नष्ट करने तथा उनकी पुस्तकों जलाने से चारो ओर असुरक्षा की भावना बनी है। अब बंगलादेश क़ी यूनुस सरकार इस्लामिक चरमपंथियों के सामने घुटने टेकती है। ज़बतक पाकिस्तान के आतंकियों क़ी तरह इन बंगलादेश के अत्याचारी इस्लामिक कट्टरपंथियों क़ी अच्छी तरह से ठुकाई नहीं होंगी तबतक ये मानेगे नहीं।

राधाष्टमी : प्रेम और भक्ति का दिव्य पर्व

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान प्राप्त है। इस दिन को राधाष्टमी के रूप में मनाया जाता है, जो श्रीराधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति का महापर्व माना जाता है। यह पर्व केवल एक पावन जन्मोत्सव भर नहीं है, बल्कि प्रेम, भक्ति, शक्ति और समर्पण की पराकाष्ठा का प्रतीक है।

राधा रानी का महत्व

राधा रानी को श्रीकृष्ण की आंतरिक शक्ति, प्रेम और माधुर्य की आत्मा माना जाता है। श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और उनके माधुर्य को यदि आत्मा मिली, तो वह राधा के कारण ही संभव हुआ। यही कारण है कि भक्ति परंपरा में कहा गया है –
“राधे बिनु नहीं कृष्ण, कृष्ण बिनु नहीं राधे।”

राधा रानी केवल भक्ति की देवी नहीं, बल्कि प्रेम की उस पराकाष्ठा का प्रतीक हैं जो सांसारिक सीमाओं से ऊपर उठकर पूर्णतः आध्यात्मिक हो जाती है।

राधाष्टमी का पर्व और परंपराएँ

इस दिन भक्तजन व्रत-उपवास रखते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और राधा-कृष्ण की झांकी सजाते हैं। ब्रजभूमि—विशेषकर बरसाना—में राधाष्टमी का आयोजन भव्य रूप से किया जाता है। हजारों भक्त वहां उमड़ते हैं और झूला उत्सव, कीर्तन, रासलीला और भक्ति संकीर्तन के माध्यम से राधा-कृष्ण का स्मरण करते हैं।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश

राधाष्टमी केवल उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें यह स्मरण कराती है कि भक्ति बिना प्रेम अधूरी है और प्रेम बिना समर्पण निष्फल। राधा जी का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि जब भक्ति में समर्पण और शुद्ध प्रेम जुड़ता है, तभी वह परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग बनता है।
राधाष्टमी भारतीय आध्यात्मिकता का ऐसा पर्व है जिसमें भक्ति, प्रेम और शक्ति का अद्वितीय संगम दिखाई देता है। राधा रानी का दिव्य प्रेम और कृष्ण के साथ उनका अलौकिक मिलन मानवता के लिए यह संदेश देता है कि ईश्वर को पाने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और निस्वार्थ प्रेम है।

❤️ आज का राशिफल

मेष (Aries)

आवेगपूर्ण स्वभाव आपके रिश्ते में परेशानी ला सकता है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आपके साथी के विश्वास को हिला सकता है। अपने शब्दों और कार्यों में परिपक्वता लाएँ। यदि आप सिंगल हैं, तो किसी नए व्यक्ति को प्रभावित करने से पहले थोड़ा समय लेकर उसे समझने की कोशिश करें।

वृषभ (Taurus)

आपकी उच्च अपेक्षाएँ आपके साथी पर दबाव बना सकती हैं। रिश्ते में सामंजस्य लाने के लिए थोड़ी लचीलापन ज़रूरी है। अपनी जिद को छोड़कर यदि आप साथी की भावनाओं को महत्व देंगे तो संबंध मधुर होंगे। अविवाहित जातकों के लिए यह समय दोस्ती से प्रेम की ओर बढ़ने का हो सकता है।

मिथुन (Gemini)

रिश्ते में सम्मान सबसे ज़रूरी है। अपने साथी की भावनाओं की कद्र करें और उन्हें नज़रअंदाज़ न करें। बहस या तकरार से बचें। अविवाहित लोगों के लिए आज कोई दिलचस्प मुलाक़ात हो सकती है, लेकिन जल्दबाज़ी न करें।

कर्क (Cancer)

आप और आपका साथी एक-दूसरे को समझने और रिश्ते को पोषित करने की कोशिश करेंगे। भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। घर-परिवार के सहयोग से रिश्ते में सकारात्मकता आएगी। सिंगल लोगों को भी किसी खास इंसान से भावनात्मक जुड़ाव महसूस हो सकता है।

सिंह (Leo)

अब समय है कि आप रिश्ते को प्राथमिकता दें। साथी को यह महसूस कराएँ कि वह आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है। रिश्ते में रोमांस और गहराई बढ़ाने का सुनहरा अवसर है। अविवाहित जातक अपने आकर्षक व्यक्तित्व से किसी को प्रभावित कर सकते हैं।

कन्या (Virgo)

आपका धैर्य और सहानुभूति इस हफ्ते परखे जाएंगे। साथी का नाटकीय या भावनात्मक व्यवहार आपको परेशान कर सकता है, लेकिन धैर्य रखकर ही रिश्ते को संतुलित करें। अविवाहित जातकों को आज कोई प्रस्ताव मिल सकता है, मगर सोच-समझकर आगे बढ़ें।

तुला (Libra)

आप अपने साथी की ज़रूरतों से कुछ दूरी महसूस कर सकते हैं। रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सहयोग और जुड़ाव पर ध्यान दें। अविवाहित लोग अपने आकर्षक स्वभाव से किसी का ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन संबंध आगे बढ़ाने में जल्दबाज़ी न करें।

वृश्चिक (Scorpio)

अधिकार जताने की प्रवृत्ति आपके रिश्ते में खटास ला सकती है। साथी को स्पेस दें और उनके विचारों का सम्मान करें। यदि आप अपने गुस्से और ईर्ष्या पर काबू पाएँगे तो रिश्ता मजबूत बनेगा। अविवाहित लोगों को किसी रहस्यमयी व्यक्ति की ओर आकर्षण हो सकता है।

धनु (Sagittarius)

सिंगल लोगों को कोई नई प्रेम रुचि मिल सकती है। यह मुलाक़ात आपके जीवन में नई ऊर्जा भर सकती है। पहले से रिश्ते में रहने वाले लोगों के लिए यह समय सामान्य रहेगा। साथी के साथ बातचीत में ईमानदारी बनाए रखें।

मकर (Capricorn)

आप भावनात्मक सहारे की तलाश करेंगे। यदि आपने हाल ही में साथी को सहयोग और प्रेम दिया है तो वही बदले में मिलेगा। लेकिन यदि रिश्ते में दूरी बनाई है, तो साथी ठंडे रुख़ से जवाब दे सकते हैं। सिंगल लोगों के लिए कोई पुराना रिश्ता फिर से जुड़ सकता है।

कुंभ (Aquarius)

विश्वास के मुद्दे सामने आ सकते हैं। साथी को अपनी वफ़ादारी साबित करने की ज़रूरत पड़ सकती है। रिश्ते में पारदर्शिता और ईमानदारी ही इसे बचा सकती है। अविवाहित जातकों को किसी करीबी दोस्त से प्रेम का अहसास हो सकता है।

मीन (Pisces)

आपको रिश्ते की ज़िम्मेदारियाँ भारी लग सकती हैं। साथी से संवाद करें और साझा जिम्मेदारियों को मिलकर निभाएँ। यही आपके रिश्ते की असली मज़बूती होगी। सिंगल जातक किसी गंभीर रिश्ते के बारे में सोच सकते हैं।

युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में की आत्महत्या, परिवार में मातम

सलेमपुर (राष्ट्र की परम्परा)
सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पुरैना में शनिवार देर शाम एक युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान महेश्वर दुबे, पुत्र स्व. कैलाश दुबे उम्र लगभग 40 वर्ष के रूप में हुई है। वे खेती-बारी और पशुपालन के सहारे अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते थे।
बताया जाता है कि महेश्वर दुबे ने घर के पश्चिम दिशा में बने टिन शेड, जो कि पशुओं के लिए निर्मित है, में पाइप से रस्सी बांधकर फंसी लगा कर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
मृतक अपने पीछे 5 साल का बेटा और 3 साल की बेटी छोड़ गए हैं। वे चार भाइयों में तीसरे स्थान पर थे। घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। गांव में शोक की लहर फैल गई है और लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।
पुलिस मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर जांच-पड़ताल में जुट गई है। घटना की विस्तृत जांच जारी है ताकि आत्महत्या के असली कारणों का पता लगाया जा सके।

राजस्थान जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा 2025 का परिणाम जारी कर दिया है। लंबे समय से इस भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी खबर है। अब बोर्ड ने चयनित अभ्यर्थियों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड कर दी है।

इस भर्ती अभियान के तहत राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 968 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपने रोल नंबर पीडीएफ लिस्ट में देख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे चयनित हुए हैं या नहीं।

ऐसे देखें रिजल्ट

  1. सबसे पहले rssb.rajasthan.gov.in वेबसाइट पर जाएं।
  2. होमपेज पर नीचे मौजूद “Result” टैब पर क्लिक करें।
  3. “Rajasthan Jail Prahari Result 2025” लिंक चुनें।
  4. एक पीडीएफ फाइल खुलेगी, जिसमें चयनित उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए होंगे।
  5. पीडीएफ डाउनलोड करें और Ctrl+F दबाकर अपना रोल नंबर आसानी से खोजें।

बड़ी संख्या में युवाओं की निगाहें इस परीक्षा में राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। अब रिजल्ट आने के बाद चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर प्रदेश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

बिहार शिक्षा विभाग ने बढ़ाई BSEB 10th Scholarship 2025 आवेदन की अंतिम तिथि

सांकेतिक फोटो

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) ने इंटरमीडिएट में नामांकन लेने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत दी है। विभाग ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की ओर से संचालित मैट्रिक (10th) पास विद्यार्थियों के लिए दी जाने वाली स्कॉलरशिप एवं प्रोत्साहन योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है।

पहले इन योजनाओं के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अगस्त 2025 तय की गई थी, लेकिन अब विभाग ने विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुए अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 सितम्बर 2025 कर दिया है।

किन विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

यह स्कॉलरशिप 2025 में 10वीं पास करने वाले छात्रों के लिए है।

बिहार बोर्ड से मैट्रिक उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले सकते हैं।

पात्र छात्रों को विभागीय नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

आवेदन की प्रक्रिया

इच्छुक छात्र BSEB की आधिकारिक वेबसाइट अथवा शिक्षा विभाग की पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन करते समय छात्रों को आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो एवं अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र अपलोड करने होंगे।

शिक्षा विभाग की अपील

शिक्षा विभाग ने कहा है कि जिन विद्यार्थियों ने अभी तक स्कॉलरशिप या प्रोत्साहन योजनाओं के लिए पंजीकरण नहीं किया है, वे इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं। निर्धारित तिथि 15 सितम्बर 2025 के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा : तियानजिन में भव्य स्वागत, अमेरिका पर सख्त संदेश

नई दिल्ली/तियानजिन। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात वर्षों बाद अपनी पहली चीन यात्रा पर पहुंचे तो तियानजिन हवाई अड्डे पर उनका स्वागत अभूतपूर्व अंदाज में किया गया। रेड कॉर्पेट बिछाकर चीनी अधिकारियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इस भव्य स्वागत ने हर हिंदुस्तानी का मन प्रफुल्लित कर दिया।

जापान यात्रा समाप्त कर सीधे चीन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने पहुंचते ही एक्स पर संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा— “चीन के तियानजिन पहुंच गया हूं। एससीओ शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं से मुलाकात के लिए उत्सुक हूं।”

मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव गहराता जा रहा है। कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने से इनकार पर प्रतिक्रिया स्वरूप भारतीय निर्यात पर शुल्क दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया था। इस कदम ने दोनों देशों के बीच वर्षों से बने रणनीतिक सहयोग पर असर डाला है, जो अब तक तकनीकी साझेदारी और बीजिंग की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने की साझा सोच पर आधारित रहा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा वॉशिंगटन को सख्त संदेश है कि भारत किसी भी दबाव की राजनीति के आगे झुकेगा नहीं। मोदी की यह यात्रा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

भारत अब अपने व्यापार और रणनीतिक साझेदारी में विविधता लाने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है। चीन पहुंचते ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि भारत यदि आंख दिखाने वालों को नजरअंदाज करना जानता है तो मित्रवत देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना भी जानता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार संतुलन और बहुपक्षीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी गहन विमर्श होने की संभावना है।

प्रारंभिक अर्हता परीक्षा को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु बैठक डीएम की अध्यक्षता में संपन्न

सभी सेक्टर वं स्टेटिक मजिस्ट्रेट आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार पी.ई.टी परीक्षा को गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराए संपन्न : जिलाधिकारी

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )l जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पी.ई.टी) 2025 को सकुशल संपन्न कराने हेतु बैठक कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में संपन्न हुई। बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद मऊ में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा 2025 हेतु कुल 17 केंद्र बनाए गए हैं एवं इन 17 केंद्र पर दिनांक 6 एवं 7 सितंबर 2025 को पी.ई.टी. की परीक्षा प्रत्येक दिन दो पालियों में सकुशल संपन्न कराई जाएगी। प्रत्येक पाली में 7800 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे एवं दोनों दिनों की चारों पालियों में कुल 31200 अभ्यर्थियों की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा को ठीक ढंग से आयोजित करने हेतु सेक्टर व स्टेटिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगा दी गई है। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए सभी सेक्टर व स्टेटिक मजिस्ट्रेट को गुणवत्तापूर्ण ढंग से परीक्षा को संपन्न करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सभी केंद्र व्यवस्थापक को आयोग द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों पर कमरे में पर्याप्त मात्रा में लाइट एवं साफ सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के भी निर्देश केंद्र व्यवस्थापक को दिए। जिलाधिकारी ने सभी केंद्र व्यवस्थापक को परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए सभी कर्मचारियों को आई कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए एवं जिस व्यक्ति के पास आई कार्ड ना हो उनको परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश करने की अनुमति न देने के भी निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी कक्ष निरीक्षक को परीक्षा अवधि के दौरान अपना अपना मोबाइल बंद करके परीक्षा कक्ष से बाहर रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी में कहा कि ट्रेजरी से प्रश्न पत्र ले जाने एवं ले आने हेतु जिस अधिकारी की ड्यूटी लगाई गई है वह अधिकारी उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही ट्रेजरी से प्रश्न पत्र ले जाए एवं निर्धारित अवधि में प्रश्न पत्र ले आए। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा प्रश्न पत्र को ले जाने एवं ले आने हेतु पर्याप्त समय दिया गया है। इसलिए सभी अधिकारी समय से अपने दायित्वों का निर्वहन करें। जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति देने एवं निर्धारित समय सीमा पर परीक्षा केंद्र का गेट बंद करने तथा परीक्षा को शुरू करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने परीक्षा केंद्र में किसी भी अभ्यर्थी को मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, घड़ी सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो आयोग द्वारा प्रतिबंधित है को अपने साथ न ले जाने के निर्देश केंद्र व्यवस्थापक को दिए। उन्होंने आयोग द्वारा निर्धारित जो भी सामग्री अभ्यर्थी अपने साथ परीक्षा केंद्र में ले जा सकते हैं केवल उसको ही ले जाने की अनुमति देने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने हेतु परीक्षा ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों को निष्पक्ष ढंग से परीक्षा संपन्न कराने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य आईटीआई अरुण कुमार सहित सेक्टर एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा केंद्र व्यवस्थापक उपस्थित रहे।