Thursday, July 16, 2026
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बरहज सीएचसी में जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बरहज, जनपद देवरिया में PCPNDT Act (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) एवं MTP Act (Medical Termination of Pregnancy Act) पर आधारित एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य कार्मिकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन, देवरिया की जेंडर स्पेशलिस्ट मंशा सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि PCPNDT एक्ट के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध है और इसके उल्लंघन पर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू हैं। उन्होंने पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की भूमिका, उनकी निगरानी व्यवस्था तथा भ्रूण लिंगानुपात (CSR) में सुधार हेतु सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा की सुरक्षा तथा किशोरियों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के अधिकारों की जानकारी भी दी।

वन स्टॉप सेंटर, देवरिया की केंद्र प्रशासक नीतू भारती ने अपने वक्तव्य में स्वास्थ्य विभाग के साथ कन्वर्जेन्स, संयुक्त मॉनिटरिंग एवं फॉलो-अप की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने संस्थागत प्रसव, सुरक्षित मातृत्व सेवाओं को बढ़ावा देने तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का संदेश जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं, वन स्टॉप सेंटर की मनोवैज्ञानिक मीनू जायसवाल ने कहा कि लिंग चयन पर रोक और बेटियों का सम्मान करना समाज का सामूहिक दायित्व है। बेटियां ही महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं और उनके बिना समाज का संतुलित विकास संभव नहीं।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने शपथ ली कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का संदेश घर-घर पहुँचाएँगे और भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाएँगे।

🌍 ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना : भटनी ब्लॉक में पंचायत सहायकों का प्रशिक्षण सम्पन्न

भटनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पंचायती राज विभाग अन्तर्गत विकास खण्ड भटनी के ब्लॉक सभागार में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत पंचायत सहायकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ बीडीओ भटनी संतोष कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।

बीडीओ ने अपने उद्बोधन में कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके बिना मानव अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग—हर स्तर पर जल का महत्व अत्यधिक है। इसलिए सभी को जल संरक्षण और इसकी सुरक्षा के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को जल चक्र, जलग्रहण क्षेत्र और सामुदायिक स्तर पर जल के वितरण एवं पुनर्भरण की जानकारी दी।

तकनीकी प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर अजीत कुमार तिवारी ने बताया कि संस्थानों द्वारा निर्मित टंकियों का हैंडओवर पंचायती राज विभाग को किया जाएगा, जिसके लिए 18 बिंदुओं पर तकनीकी जांच अनिवार्य होगी। उन्होंने दूषित जल से होने वाली बीमारियों और हर घर तक स्वच्छ जलापूर्ति की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।

प्रशिक्षक आशुतोष दूबे ने जलापूर्ति संरचना, पाइपलाइन प्रबंधन और योजनाओं की निगरानी व संचालन पर प्रकाश डाला, ताकि निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

सहायक विकास अधिकारी पंचायत विंध्याचल सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को जल आपूर्ति योजनाओं से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा का अवसर मिला।

अजय दूबे ने डाटा फीडिंग टीएमपी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर सतीश शाही, त्रयम्बक मणि त्रिपाठी, रहमत अंसारी, अंजली जायसवाल, रितु यादव, नेहा पटेल, कामिनी शाह, मानसी कुशवाहा, कमलेश यादव, अनुराधा यादव, रोशनी राय, सोनम कुशवाहा, शैलेश गिरी सहित कई प्रतिभागी उपस्थित रहे।

बीआरएस से निलंबन के बाद कविता का इस्तीफ़ा, चचेरे भाइयों पर साजिश रचने का आरोप

हैदराबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) तेलंगाना की वरिष्ठ नेता के कविता ने बीआरएस से निलंबित होने के एक दिन बाद बुधवार को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। इस्तीफ़े के साथ ही उन्होंने अपने ही परिवार के भीतर गहरे मतभेदों और साजिश के आरोपों का खुलासा किया।

कविता ने अपने भाई केटी रामा राव (केटीआर) को चेतावनी देते हुए कहा कि वे चचेरे भाइयों हरीश राव और संतोष राव पर भरोसा न करें। उनका आरोप है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की जांच चचेरे भाइयों के भ्रष्टाचार के चलते कर रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हरीश राव ने एक साथ हवाई यात्रा करते हुए हमारे परिवार को बर्बाद करने की साज़िश की। कविता ने सवाल उठाया कि रेवंत रेड्डी ने केवल केसीआर और केटीआर के खिलाफ ही मामला दर्ज कराया, लेकिन हरीश राव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

कविता ने कहा कि जब कालेश्वरम परियोजना शुरू हुई थी, उस समय हरीश राव सिंचाई मंत्री थे, बावजूद इसके रेवंत रेड्डी ने उन पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि हरीश राव और संतोष राव ही परिवार और पार्टी को तोड़ने की योजना बना रहे हैं।

कविता ने हरीश राव को “बबल शूटर” करार देते हुए यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने विधानसभा चुनावों में केसीआर और केटीआर के खिलाफ काम करने के लिए पैसे तक दिए थे।

जसपुर में गणेश विसर्जन शोभायात्रा पर एसयूवी का कहर : तीन भक्तों की मौत, 22 घायल

जसपुर /छत्तीसगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गणपति उत्सव की खुशियां जशपुर जिले में उस समय मातम में बदल गईं, जब भगवान गणेश की शोभायात्रा में एक बेकाबू एसयूवी घुस गई। मंगलवार देर रात बगीचा थाना क्षेत्र के जुरुदंड गांव में हुई इस दर्दनाक घटना में तीन श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 22 लोग घायल हो गए।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि घटना उस समय हुई जब 100 से अधिक ग्रामीण विसर्जन यात्रा के साथ चल रहे थे। अचानक बगीचा-जशपुर मार्ग पर तेज रफ्तार एसयूवी ने भीड़ को अपनी चपेट में ले लिया। मृतकों की पहचान विपिन प्रजापति (17), अरविंद केरकेट्टा (19) और खिरोवती यादव (32) के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, 22 घायलों में से कई की हालत गंभीर है। गंभीर रूप से घायलों को सरगुजा जिले के अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जबकि अन्य को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि वाहन चालक सुखसागर वैष्णव (40) घटना के समय नशे में था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और एसयूवी को जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

गणपति उत्सव की उमंग में शामिल ग्रामीण इस घटना के बाद सदमे में हैं। खुशियों का माहौल अचानक चीख-पुकार और मातम में बदल गया।

आज़ादी से पहले बना अस्पताल अब खंडहर में तब्दील! न्यू पीएचसी की दशा पर रो रहे मरीज

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। आज़ादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत में बने बरहज के न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की तस्वीर आज किसी खंडहर से कम नहीं दिखती। कभी यह स्वास्थ्य केंद्र स्वच्छता और सुविधाओं का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आज जर्जर भवन, टूटी छत, झाड़-झंखाड़ से भरा मैदान और मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने इसकी साख पूरी तरह दांव पर लगा दी है।

जंगल में तब्दील अस्पताल परिसर

भवन की दीवारें और छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। बरसात के दिनों में फार्मासिस्ट और स्वास्थ्यकर्मी दवाइयों व रजिस्टरों को बचाने के लिए यहां-वहां भागने को मजबूर हो जाते हैं। अस्पताल का मैदान पूरी तरह जंगल में बदल चुका है। झाड़ियों के बीच हर समय सांप-बिच्छुओं का खतरा मंडराता रहता है।

पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं

स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि यहां मरीजों और डॉक्टरों के लिए न तो बैठने की ठीक व्यवस्था है, न ही पीने के पानी की। मजबूरी में हर किसी को पानी की बोतल अपने साथ लानी पड़ती है। महिला मरीजों और कर्मचारियों को शौचालय न होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे ही चलता अस्पताल

अस्पताल फिलहाल फार्मासिस्ट हेमंत शुक्ला, एलटी रामचंद्र भगत, आदित्य प्रसाद, चंद्रदेव प्रसाद और एएनएम ममता यादव के भरोसे किसी तरह चल रहा है। फार्मासिस्ट हेमंत शुक्ला ने बताया कि भवन की हालत ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

जिम्मेदार मौन, मरीज बेहाल

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी महेंद्रनाथ और डॉक्टर मूलचंद का कहना है कि यह अस्पताल अंग्रेजी हुकूमत के समय का बना हुआ है। इसके कायाकल्प के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति या धन उपलब्ध नहीं कराया गया। एक बार मरम्मत के लिए धन आया भी था, लेकिन नगर के एक व्यक्ति ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी।

गेट पर दुकानदार, मरीजों की पहुंच में बाधा

अस्पताल के मुख्य द्वार पर दिनभर दुकानदारों की दुकानें सजी रहती हैं, जिससे मरीजों का आना-जाना भी प्रभावित होता है।

सड़क न बनने से ग्रामीण परेशान, कच्चे रास्तों पर चलने को मजबूर

उतरौला /बलरामपुर, (राष्ट्र की परम्परा)। आज़ादी के बाद भी सड़क की सुविधा से वंचित ग्रामीणों को अब भी कच्चे रास्तों पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार जहाँ एक ओर स्मार्ट गाँव बनाने और ग्रामीण विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं उतरौला विकास खंड के अंतर्गत श्रृंगार जोत मार्ग से बभनी बुर्जुग डीह तक जाने वाला रास्ता आज भी बदहाल है।

बताया जा रहा है कि इस मार्ग का आंशिक डामरीकरण तो किया गया, लेकिन आगे की सड़क कच्ची रह गई, जो बरसात में किसी दलदल से कम नहीं लगती। मुख्य रूप से तीन किलोमीटर की यह दूरी यदि सीसी सड़क से पक्की कर दी जाए तो देवरिया अर्जून सहित दर्जनों गाँवों के लोगों को आवागमन में भारी राहत मिलेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होने के कारण बरसात में सड़क पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील हो जाती है। किसानों को खेतों तक मशीनरी और ट्रैक्टर ले जाने में भारी दिक्कतें आती हैं। बभनी बुर्जुग, तिलखी बढ़या, मटियारिया कर्मा और मोहनजोत गाँव के किसानों की खेती योग्य जमीन ‘गनियारी’ के नाम से जानी जाती है, लेकिन सड़क न होने से खेती का काम भी प्रभावित होता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दबंगों ने मिट्टी की इस सड़क को काटकर खेत बना लिया है। यदि शीघ्र ही इस पर कार्य न हुआ तो सड़क का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

ग्रामीण सीताराम, माधव शरण श्रीवास्तव, भगवत प्रसाद मिश्रा, वेदव्रत मिश्रा और जगराम यादव ने शासन-प्रशासन से तत्काल इस मार्ग पर सीसी सड़क निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक यह समस्या दूर नहीं होगी, तब तक ग्रामीण विकास की तस्वीर अधूरी ही रहेगी।

स्कूली बस की चपेट में आया छात्र, गंभीर रूप से घायल

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

उभांव थाना क्षेत्र के ककरासो गांव के पास बुधवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे एक बड़ा हादसा हो गया। उमरगंज मोहल्ला निवासी 18 वर्षीय आरिब बाइक से सेंट जेवियर्स इंटर कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रही स्कूली बस ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।
हादसा इतना भीषण था कि आरिब बाइक समेत बस के नीचे फंस गए और करीब 20 मीटर तक घसीटते चले गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह छात्र को बस के नीचे से निकाला और एम्बुलेंस की मदद से तत्काल सीएचसी सीयर भेजवाया। फिलहाल छात्र की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना की जानकारी पाकर परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं हादसे के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

यूपी स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला: 6.22 लाख पुराने मीटर गायब, निगम को लाखों का चूना!

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाने के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रदेश में 38.28 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कंपनियों को पुराने मीटर बिजली निगम को लौटाने थे, लेकिन इनमें से 6.22 लाख पुराने मीटर अब तक गायब हैं। इस गड़बड़ी से निगम को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों के कार्मिकों ने पुराने मीटरों की रीडिंग शून्य कर दी या उनकी स्क्रीन क्षतिग्रस्त कर दी। ऐसे में यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि इन मीटरों पर उपभोक्ताओं ने कितनी यूनिट बिजली की खपत की थी। परिणामस्वरूप निगम उन यूनिट का बिल उपभोक्ताओं से वसूल नहीं कर पा रहा है।

सीतापुर से शुरू हुआ खुलासा, प्रदेश में मचा हड़कंप

सीतापुर जिले में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होते ही यह घोटाला सुर्खियों में आ गया। इसके बाद गोंडा, बहराइच, बलरामपुर समेत प्रदेशभर से इसी तरह की शिकायतें सामने आने लगीं।

निगमों को भारी राजस्व नुकसान बिजली निगम के नियमों के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराने मीटरों को कंपनियों को वापस जमा करना अनिवार्य है ताकि ‘ब्रट-इन जांच’ की जा सके और उस मीटर में दर्ज अंतिम यूनिट को उपभोक्ता के खाते में जोड़ा जा सके। लेकिन बड़े पैमाने पर पुराने मीटरों के गायब होने और रीडिंग शून्य दिखाए जाने से निगम को अब इन यूनिट का राजस्व प्राप्त नहीं होगा।

जांच की मांग तेज उपभोक्ता संगठन और बिजली कर्मचारी संघों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह घोटाला प्रदेश की सबसे बड़ी ऊर्जा घोटालों की सूची में शामिल हो सकता है।

लखनऊ में फर्जी फर्म से 8.81 करोड़ की जीएसटी चोरी, एफआईआर दर्ज

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी में कर चोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया कि एक फर्जी फर्म ने ऑनलाइन रिकॉर्ड में कारोबार दिखाकर ₹8.81 करोड़ से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी दावा किया है। इस मामले में फर्म के मालिक रामभरोसे के खिलाफ अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

जांच के अनुसार, “श्रीराम इंटरप्राइजेज” नाम से संचालित यह फर्म वेस्ट, स्क्रैप और पैरिंग्स के व्यापार के लिए जीएसटीआईएन प्राप्त की थी। पंजीकरण कराने के लिए आरोपी ने फर्जी बिजली बिल का इस्तेमाल किया।

राज्य कर विभाग की टीम ने 26 जून 2025 को सीतापुर रोड, लखनऊ स्थित घोषित पते पर निरीक्षण किया। मौके पर न तो फर्म का कोई अस्तित्व मिला और न ही आसपास के लोगों को इसके बारे में कोई जानकारी थी। इससे स्पष्ट हुआ कि पंजीकरण पूरी तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि फर्म मालिक ने केवल कागजों पर कारोबार दिखाकर करोड़ों रुपये का आईटीसी हड़पने की कोशिश की। विभाग की शिकायत पर अलीगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस कार्रवाई के बाद राज्य कर विभाग ने स्पष्ट किया कि फर्जी फर्मों और कर चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध व्यापारिक गतिविधि की जानकारी हो तो तत्काल सूचित करें।

एमपी हाईकोर्ट में हड़कंप : जज ने BJP विधायक पर डाला बड़ा आरोप, सुनवाई से किया इन्कार

विधायक हाईकोर्ट व आदेश की फोटो

भोपाल (राष्ट्र की परम्परा) मध्यप्रदेश की राजनीति और न्यायपालिका में एक सनसनीखेज मामला सामने आया। जबलपुर हाईकोर्ट के जज जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुलासा किया कि बीजेपी विधायक संजय पाठक ने उनकी खनन कंपनियों से जुड़े एक मामले पर उनसे व्यक्तिगत चर्चा करने की कोशिश की थी। इसी कारण उन्होंने पाठक की याचिका पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।

जस्टिस मिश्रा ने अपने लिखित आदेश में साफ कहा – “विधायक संजय पाठक ने मुझसे उनकी कंपनियों से जुड़े विशेष मामले पर चर्चा करने का प्रयास किया था। न्यायिक मर्यादा के चलते मैं इस याचिका पर विचार करने को इच्छुक नहीं हूं।”

मामले के कोर्टरूम में उजागर होते ही प्रदेशभर में हलचल मच गई। संजय पाठक को मध्यप्रदेश का सबसे अमीर विधायक माना जाता है और उनके नाम से प्रदेशभर में खदानें संचालित होती हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या विधायक ने सचमुच न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश की थी या फिर मामला किसी बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा है।

विधानसभा और न्यायिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि और न्यायपालिका के बीच इस तरह का टकराव प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक साख पर गहरा असर डाल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि इसमें सत्ता, धन और न्यायपालिका तीनों के संवेदनशील आयाम जुड़े हैं।

ठेला लगाने वाले युवक की धारदार हथियार से हत्या, इलाके में मचा कोहराम

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देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
लार थाना क्षेत्र के मेहरौना गांव में मंगलवार की रात एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। शराब की दुकान के पास भूजा और चिखना बेचकर परिवार का पेट पालने वाले 25 वर्षीय राजू पाल की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई।

जानकारी के मुताबिक, भेड़िहरवा टोला निवासी राजू रोज की तरह रात करीब 10 बजे करचो जाने वाली सड़क के तीमुहानी मोड़ पर अपना ठेला लगाए हुए था। इसी दौरान कुछ अज्ञात हमलावरों ने उस पर हमला बोल दिया। गले और चेहरे पर धारदार हथियार से किए गए वार इतने गंभीर थे कि परिजन जब तक उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लार ले जाते, डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

घटनास्थल से मृतक की जेब से 700 रुपये बरामद हुए, लेकिन उसका मोबाइल फोन गायब था। आशंका है कि हमलावर मोबाइल लेकर फरार हो गए। हत्या के पीछे किसी विवाद की आशंका जताई जा रही है।

इस घटना से मृतक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी रेखा देवी, बेटे कारण और शिवम व बड़े भाई रंजीत पाल का रो-रोकर बुरा हाल है। इधर, घटना की खबर फैलते ही गांव और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

लार थाने के प्रभारी ने बताया कि आसपास के लोगों समेत लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होंगे।

लिंपी से कराह रहे पशुपालक, सरकार खामोश!

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जिले में लिंपी बीमारी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। पशु मर रहे हैं, किसान-बेचारे दर-दर की ठोकर खा रहे हैं, लेकिन प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। पशुपालन विभाग की लापरवाही ने पशुपालकों की परेशानी और बढ़ा दी है। कहीं एक, कहीं कोई भी कर्मचारी नहीं पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक मोहम्मद जिउद्दीन रिजवी ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा अब तक हर गांव में टीकाकरण हो जाना चाहिए था। मगर हकीकत यह है कि किसी भी गांव में एक भी पशु को टीका नहीं लगा। पशु चिकित्सालयों की हालत यह है कि कहीं एक कर्मचारी है तो कहीं कोई भी नहीं, जबकि नियम के मुताबिक पाँच कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। भाजपा को किसानों से नहीं, उद्योगपतियों से सरोकार रिजवी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को न किसानों की चिंता है, न गरीब-मजदूरों की और न ही छात्रों की। सरकार सिर्फ चुनिंदा उद्योगपतियों की फिक्र करती है, आमजन का दुख-दर्द इन्हें दिखाई ही नहीं देता।
विधायक ने सरकार से मांग की कि गाँव-गाँव जाकर प्रत्येक पशु का तुरंत टीकाकरण कराया जाए और संक्रमित पशुओं का अभिलंब इलाज सुनिश्चित किया जाए, तभी हालात काबू में आ सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में नायब तहसीलदारों को मिलेगा तहसीलदार का प्रभार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब उत्तर प्रदेश के नायब तहसीलदारों को तहसीलदार का दायित्व सौंपा जाएगा।

राजस्व परिषद के सचिव आईएएस एस.पी.एस. रंगाराव ने इस संबंध में सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में तहसीलदारों के 766 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 328 तहसीलदार ही कार्यरत हैं। वहीं, 16 तहसीलदार प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभागों में तैनात हैं। इस प्रकार प्रदेश में करीब 422 पद रिक्त पड़े हुए हैं।

रिक्त पदों के चलते राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश भर में एक करोड़ 17 लाख से अधिक राजस्व वाद विचाराधीन हैं। ऐसे में नायब तहसीलदारों को तहसीलदार का प्रभार देने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस निर्णय से राजस्व मामलों के निस्तारण की गति तेज होने और जनता को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

छह लाख छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर सरकार सख्त, 14 अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, एक बाबू निलंबित

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में भारी लापरवाही सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा कदम उठाया है। बीते वर्ष करीब छह लाख पात्र छात्र-छात्राओं को शुल्क भरपाई न मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, अयोध्या, बहराइच, रायबरेली, सीतापुर समेत 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। वहीं सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाए जाने पर बरेली जिले के बाबू प्रमोद जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इसके साथ ही कई विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के आठ मंडलों के संयुक्त निदेशकों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों तथा दो लाख रुपये तक सालाना आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ-साथ शुल्क की प्रतिपूर्ति करती है। इस योजना का उद्देश्य गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा में सहयोग प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि समस्त लंबित प्रकरणों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए और जिन छात्रों को बीते वर्ष छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली है, उन्हें तत्काल लाभ पहुँचाया जाए। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि भविष्य में यदि इस योजना में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या शिथिलता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

देवरिया में ओवरब्रिज के नीचे अवैध मजार निर्माण पर बवाल, SDM ने जारी किया नोटिस – 4 सितंबर तक जवाब नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के नीचे मेहड़ा पुरवा स्थित अब्दुल गनी शाह की मजार का अवैध निर्माण अब विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है। सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। उपजिलाधिकारी सदर ने मजार प्रबंधक राशिद खान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 4 सितंबर 2025 की सुबह 10 बजे तक जवाब तलब किया है।

यह मामला वाद संख्या 1137/2019 के तहत आरबीओ एक्ट की धारा 10 में दर्ज है। इससे पहले भी राशिद खान को नोटिस दिया गया था, लेकिन न तो वे न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही अनुपस्थिति का कोई प्रार्थना पत्र दाखिल किया। बार-बार की गैरहाजिरी को प्रशासन ने गंभीर लापरवाही मानते हुए इस बार सख्त रुख अपनाया है।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से मामला विचाराधीन है। पक्षकार की अनुपस्थिति के कारण निपटारे में लगातार देरी हो रही है। यदि निर्धारित तिथि तक जवाब नहीं दिया गया, तो प्रशासन एकपक्षीय कार्रवाई कर सकता है। इसमें मजार निर्माण पर रोक लगाने से लेकर अन्य कठोर कदम शामिल होंगे।

सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने बिना नक्शा पास कराए निर्माण की शिकायत एसडीएम को पत्र लिखकर की थी, जिसके बाद से ही मामले में तेजी आई है। अब सभी की निगाहें 4 सितंबर की तारीख पर टिकी हैं, जब इस मामले का अगला कदम तय होगा।