डॉ. डी.के. पाण्डेय ने बताया देवरिया में लगेगा निःशुल्क चिकित्सा शिविर
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राघवनगर, देवरिया के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी.के. पाण्डेय ने विकलांग और लकवा ग्रसित मरीजों की देखभाल एवं उनकी रिकवरी को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि सही देखभाल, नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं और चलने-फिरने योग्य बन सकते हैं।
डॉ. पाण्डेय ने चेतावनी दी कि लगातार 8 घंटे तक बैठे रहने से नसों पर दबाव, रक्त संचार में रुकावट और बेड सोर जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने टहलने के दौरान भी सावधानी बरतने की सलाह दी। मरीजों को अचानक तेज नहीं चलना चाहिए, असमतल रास्तों से बचना चाहिए और बिना सहारे लंबे पैदल मार्ग तय करने से परहेज़ करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मरीजों के लिए परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और धैर्य सबसे बड़ी दवा है।
इसी क्रम में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 📅 दिनांक – 8 सितम्बर 2025, सोमवार 🕘 समय – सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक 📍 स्थान – देवरही मंदिर प्रांगण, देवरिया
इस शिविर में देवरिया के सभी फिजियोथेरेपिस्ट मिलकर मरीजों को परामर्श देंगे। यहाँ विशेष रूप से गर्दन व कमर दर्द, नसों का दबना, सायटिका, लकवा, जोड़ों का दर्द, पोलियो तथा फ्रैक्चर के बाद उत्पन्न समस्याओं के समाधान बताए जाएंगे।
📞 संपर्क नंबर – 9415659734, 9918459019, 9005714206, 6394568193 आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस शिविर का लाभ उठाने और ज़रूरतमंदों तक जानकारी पहुँचाने की अपील की है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के देवरिया दक्षिणी वार्ड नंबर 51 से जिला पंचायत सदस्य के रूप में अनिल यादव को अपना अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी महिलाओं ने आरती चंदन के साथ सहयोग राशि से चुनाव लड़ाने को तैयार हैं। आपको बता दे की जनपद के देवरिया दक्षिणी वार्ड नंबर 51 से पिछले तीन बार से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुके हैं ।जिसमे उन्हें काफी अच्छे वोट मिले एक बार तीसरे स्थान पर, दूसरे बार तीसरे स्थान पर तो तीसरी बार में दूसरे स्थान पर रह चुके हैं ।यह प्रत्याशी एक बार फिर अपना किस्मत आजमाने के लिए देवरिया दक्षिणी वार्ड नंबर 51 से चुनाव लड़ने का इच्छा जाहिर कर चुके हैं यह सुनते ही क्षेत्र की महिलाएं, युवक ग्राम वासी अपने खर्चे पर अनिल यादव को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए दिख रहे थे। आपको बता दें मंगलवार शाम को क्षेत्र में घूम रहे अनिल यादवU जब ग्राम परसिया मिश्र में पहुंचे तो वहां के लोगों ने उन्हें घेर लिया एवं अपने गांव में ले गए जहां पर मौजूद समस्त ग्राम वासी एवं महिलाओं ने उनका सम्मान किया उसी गांव की एक वृद्ध महिला लक्ष्मीना देवी ने पहले तो अनिल का आरती कर सम्मानित किया तत्पश्चात चंदन लगाते हुए यशस्वी भवः का आशीर्वाद दियाऔर सहयोग राशि देने की बात कही तो मौके पर मौजूद लोगों ने भी अपने पास से सहयोग राशि देकर चुनाव लड़ाने की बात कहने लगे जिस पर जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी अनिल यादव भावुक हो उठे , आंखों से आंसू छलकने लगा लोगों ने कहा इस बार किसी कीमत पर आपको विजई बनाना है चाहे हमें जो सहयोग करना पड़े।
देवरिया/सलेमपुर।(राष्ट्र की परम्परा) राजस्व विभाग की लापरवाही ने एक जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित कर दिया है। सलेमपुर तहसील क्षेत्र के मझौली राज निवासी खड़क सिंह पुत्र दशरथ लंबे समय से अपने जीवित होने के सबूतों के साथ उपजिलाधिकारी कार्यालय सहित उच्चाधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला है।
बताया जा रहा है कि रोजी-रोटी की तलाश में खड़क सिंह सालों पहले अपने परिवार के साथ असम के तिनसुकिया चले गए थे। बीच-बीच में वे अपने पैतृक घर मझौली राज भी आते रहते थे। इसी दौरान एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हुए और लंबे समय तक उनका इलाज चलता रहा। ठीक होने के बाद जब वे वापस अपने गांव पहुंचे तो उनके भाइयों ने कह दिया कि अब यहां से चले जाओ, तुम राजस्व अभिलेखों में मृत हो चुके हो।
दस्तावेजों की जांच करने पर खड़क सिंह को पता चला कि राजस्व अभिलेखों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। तभी से वे लगातार अधिकारियों से दस्तावेजों में सुधार और खुद को जीवित दर्ज कराने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन व्यवस्था की उदासीनता के चलते वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
अब वृद्ध और अशक्त खड़क सिंह अपने जीवित होने के सबूत लेकर बार-बार अधिकारियों के सामने अपनी व्यथा सुनाते हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक उन्हें इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और कौन होगा इस पूरे मामले का जिम्मेदार?
महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक, “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” संदेश का प्रसार एवं महिलाओं को विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य चिकित्साधिकारी श्रीमती पदमावती ने की। उन्होंने PCPNDT Act के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि गर्भधारण से पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का लिंग बताना तथा इस आधार पर गर्भपात कराना कानूनन पूर्णतः प्रतिबंधित है। ग्राम स्तर पर कार्यरत आशा बहुओं, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को PCPNDT Act व संचालित योजनाओं के बारे में जागरूक करेंगी। इस अवसर पर श्रीमती शांता ने समाज में बेटियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “बेटी है तो भविष्य है, उसका सम्मान और सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अंजली सिंह ने किया। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना सहित अन्य विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने बुधवार को उन राजनीतिक दलों की सुनवाई की, जो विगत छह वर्षों से किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
प्रदेश के पते पर पंजीकृत कुल 121 राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इनमें से 03 सितम्बर को 51 दलों को सुनवाई के लिए बुलाया गया, जिनमें से 17 दलों के प्रतिनिधि ही उपस्थित हुए। इस प्रकार 02 व 03 सितम्बर को हुई संयुक्त कार्यवाही में कुल 55 दलों ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों से अंशदान रिपोर्ट, वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट व निर्वाचन व्यय विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि–
प्रत्येक दल को प्रतिवर्ष 30 सितम्बर तक अंशदान रिपोर्ट और 31 अक्टूबर तक आय-व्यय का लेखा-जोखा देना अनिवार्य है।
लोकसभा चुनाव के बाद 90 दिन और विधानसभा चुनाव के बाद 75 दिन में व्यय विवरण आयोग को उपलब्ध कराना होगा।
किसी भी व्यक्ति से 20 हजार रुपए से अधिक का चंदा प्राप्त होने पर उसका विवरण दर्ज करना आवश्यक है।
श्री रिणवा ने यह भी कहा कि सभी पंजीकृत दल अपना ईमेल, मोबाइल नंबर व वर्तमान पता अपडेट रखें, जिससे आयोग के निर्देश समय पर प्राप्त हो सकें।
बुधवार को जिन दलों के प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल हुए, उनमें गदर पार्टी (प्रतापगढ़), नवचेतना पार्टी (मैनपुरी), नवीन समाजवादी दल (प्रयागराज), निस्वार्थ सेवा राष्ट्र सेवा पार्टी (प्रयागराज), पूर्वांचल क्रांति पार्टी (जौनपुर), राष्ट्रवादी इंसान पार्टी (प्रयागराज), राष्ट्रवादी समाज पार्टी (कानपुर नगर), राष्ट्रीय बंधुत्व पार्टी (प्रयागराज), आम जन क्रांति पार्टी (इटावा), राष्ट्रीय लोकतंत्र दल (हापुड़), राष्ट्रीय मानव विकास पार्टी (अमरोहा), सामूहिक एकता पार्टी (कानपुर नगर), सर्वप्रिय समाज पार्टी (इटावा), सत्य शिखर पार्टी (अयोध्या), यूथ सोशलिस्ट पार्टी (मुरादाबाद), युवा अनुभव पार्टी (गोरखपुर) और भारतीय युवा स्वाभिमान पार्टी (औरैया) शामिल हैं।
डॉक्टर राधाकृष्णन जी का जन्म 5 सितंबर 1888 को मद्रास से 64 किलोमीटर दूर तिरूतन्नी ग्राम में हुआ था। डॉ राधाकृष्णन प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। देश दुनिया में वह जाने माने शिक्षक, दार्शनिक एवं विद्वान कहलाए। शिक्षा के क्षेत्र में उनका प्रथम स्थान रहा। 1954 में उन्हें भारत रत्न सम्मान से नवाजा गया। एक शिक्षक को शिक्षक के रूप में व्यक्तित्व अपने आप नहीं मिलता है, अपितु यह उनके सतत चिंतन, मनन एवं विचारों की ऊर्जा ने उसे विराट व्यक्तित्व का स्वरूप दिया है। उनकी वाणी में मेघों की गंभीरता, हृदय में सागर सा विश्वास, विचारों में हिमालय की दृढ़ता, गति में तूफानों की गति प्रलक्षित होती है। यही शिक्षक का विराट व्यक्तित्व है। शिक्षक ही विद्यार्थियों को नई ऊंचाईयों एवं नए लक्ष्य के लिए प्रेरित करता है। इसीलिए कहा है,
“गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः” आज के कंप्यूटर, मोबाइल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में अक्सर यह प्रश्न उठाया जाता है कि क्या अब शिक्षक की आवश्यकता रह गई है? क्या विद्यार्थी केवल तकनीक के सहारे प्रगति पथ पर आगे बढ़ सकते हैं? कई अभिभावक गर्व से कहते हैं कि आज के बच्चे बहुत स्मार्ट हो गए हैं, क्योंकि उन्हें सबकुछ मोबाइल और कंप्यूटर से तुरंत मिल जाता है। लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, वह कभी भी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती। कंप्यूटर ज्ञान का भंडार तो है, पर वह केवल सूचना दे सकता है, प्रेरणा नहीं। मोबाइल पर तैयार उत्तर तो मिल सकते हैं, पर जीवन की असफलताओं से लड़ने का साहस केवल शिक्षक ही सिखा सकते हैं। आज बच्चे हाथ से लिखने को बोरियत मानते हैं और छोटी-छोटी गणनाओं के लिए भी कैलकुलेटर का सहारा लेते हैं। वे मशीन पर अधिक भरोसा करने लगे हैं, जो उनके लिए उचित नहीं है।क्योंकि मनुष्य मस्तिष्क अब जड़ होता जा रहा है। शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र, व्यक्तित्व और संस्कारों का निर्माण करते हैं। कभी प्यार से सिर पर हाथ रखकर, तो कभी हल्के से डाँट-फटकार कर, शिक्षक विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाते हैं। वे ही सिखाते हैं कि संकट के समय धैर्य कैसे रखें, असफलता से कैसे न घबराएँ और निरंतर प्रयास करते हुए सफलता की ओर कैसे बढ़ें। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला चाहिए। पालकों को अपने बच्चों की सही परवरिश के लिए मार्गदर्शन चाहिए। और समाज को ऐसे नागरिक चाहिए जो केवल बुद्धिमान ही नहीं बल्कि संस्कारी भी हों। यह सब केवल शिक्षक ही दे सकते हैं। इसलिए तकनीक चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, शिक्षक की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, बल्कि पहले से कहीं अधिक हो गई है। यही कारण है कि शिक्षक हमारे लिए सदैव सम्माननीय रहेंगे। सच्चाई तो ये है कि जीवन में शिक्षक का स्थान माता-पिता से कम नहीं है। शिक्षक और अभिभावक बच्चों के जीवन के दो पहिए होते हैं उनके बराबर होना तथा गति से चलना जरूरी है। अज्ञान को दूर हटाकर जिसने ज्ञान की ज्योत जलाई। जीवन में संस्कार दिए, जीने की रीत सिखाई। ज्ञान मिला, दिशा मिली जग में कर पाया नाम। ऋणी रहेगा जगत शिक्षक तुम्हें प्रणाम।
यदि देश को सोने की चिड़िया बनाना है, तो सरकार को शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षक के वेतन, भत्ते पेंशन इत्यादि के लिए अलग से राशि का प्रावधान किए जाने की जरूरत है। शिक्षकों का ग्रीष्म अवकाश परिवार की जिम्मेदारियां के लिए केंद्रित होना चाहिए। उन्हें जनसंख्या, इलेक्शन, प्रशिक्षण एवं अन्य कार्यों में शिक्षक को मुक्त किया जाना चाहिए। शिक्षकों को मशीन नहीं मानव ही रहने दिया जाए। माता-पिता को महापुरुषों के उदाहरण जैसे विवेकानंद, महात्मा गांधी, नेपोलियन बोनापार्ट, अब्राहम लिंकन जो कहते थे कि मेरे शब्द कोष में असंभव नाम का शब्द नहीं है, इस तरह के उदाहरण देना चाहिए। आज बच्चे भारतीय संस्कृति एवं नैतिकता से कटते जा रहे है, प्रतिभाएं विदेश में लगी हुई है। सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए। आगे कहा भी है,
मुमकिन नहीं खुश्क मिले हर ज़मीन, प्यासे चल पड़े हैं, तो दरिया जरूर मिलेगा।
हमारी स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक चुनौती है। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर सफलता का आकलन, शिक्षकों पर सदा से दबाव बना रहता है कि बच्चों का रिजल्ट अच्छा होना चाहिए। क्षमताओं का विकास अच्छे भविष्य की गारंटी है, ना की अंकसूची। इस कारण विद्यार्थी घबराहट एवं अवसाद में ट्यूशन के चक्कर में भटकते देखे गए हैं। क्षमताओं के विकास के बिना अंको का कोई महत्व नहीं है। भारत की युवा आबादी असीम संभावनाओं से भरी हुई है। बस उन्हें उचित शिक्षा अवसर मुहैया कराने की दरकार है। शिक्षकों को चाहिए की अपना शिक्षण कार्य ईमानदारी,लगन, निष्पक्षता एवं पूजा समझ कर करना चाहिए, क्योंकि शिक्षण कार्य आत्मा अभिव्यक्ति की साधना है । शिक्षा मनुष्य रचने की पाठशाला है। मैं कहना चाहूंगी की यदि विद्यार्थी को शिक्षक का स्नेह, ज्ञान एवं,विद्या पाना है तो उसे नम्र, जिज्ञासु, परिश्रमी, सेवाभावी, देशप्रेमी एवं श्रद्धाभावी होना चाहिए।
शिक्षावान लभते ज्ञानं।
शिक्षक को उदार, चेतना, प्रतिभा संपन्न अपने विषय का ज्ञाता, भेदभाव से मुक्त, वैज्ञानिक दृष्टिकोण संपन्न और शिष्य की समस्याओं का समाधान करता दूरदर्शी होना चाहिए। शिक्षक विद्यार्थी की ज़मीन है। शिक्षक, विद्यार्थी को आसमान तक पहुंचाने का हुनर रखता है। शिक्षक, फिलोस्फर है, गाइड है। शिक्षक देश का स्तंभ है। 15 अगस्त 2003 में राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने देश के 57वें स्वतंत्रता दिवस पर कहा था, “यदि राष्ट्र को भ्रष्टाचार मुक्त, संस्कारिता युक्त, भ्रष्टाचार मुक्त एवं सुंदर बनाना है ,तो शिक्षक, छात्र एवं सरकार उसमें परिवर्तन ला सकते है।”
हर दिन नई टेक्नोलॉजी आ रही है, उसका सीखना समझना और विद्यार्थी को समझाने की चुनौती शिक्षक की रहती है। शिक्षक छात्रों को सिर्फ परीक्षा में पास होने के काबिल ही नहीं बनाते बल्कि जिंदगी में हर कदम पर आने वाले इम्तिहान का सामना करने के लिए तैयार भी करते हैं। शिक्षा की ज़मीन पर शिक्षक के पसीने से ही हर छात्र का भविष्य फलदार बनता है। इसलिए मैं कहना चाहूंगी, शिक्षक का स्थान कल भी प्रथम था, आज भी प्रथम है और भविष्य में भी प्रथम एवं वंदनीय रहेगा।
शिक्षक ज्ञान का भंडार है। विद्यार्थी के भविष्य का आधार है। जीवन यहां से शुरू होता है, राह दिखाने वाला गुरु होता है।
बिछुआ/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं इन्नोवेशन एवं इनक्यूबेशन सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय बीमा सखी प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट कार्यशाला का आयोजन टैगोर हॉल में प्रातः 11 बजे से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरपी यादव के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण आयोजन समिति को शुभकामनाएं देते हुए छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रशिक्षण सत्र एलआईसी छिंदवाड़ा के डेवलपमेंट ऑफिसर दीपक कुमार सूर्यवंशी द्वारा संचालित किया गया। उन्होंने छात्राओं को बीमा सखी योजना के अंतर्गत आईसी 38 लाइफ इंश्योरेंस एजेंट एग्जाम की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने योजना से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिनका समाधानकर्ता ने संतोषजनक उत्तर दिया। इस प्रशिक्षण में महाविद्यालय की 24 छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। उल्लेखनीय है कि ये सभी छात्राएं पूर्व में बीमा सखी योजना में पंजीकृत हो चुकी हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. फरहत मंसूरी (संयोजक, करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं इनक्यूबेशन सेंटर) ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. शाहेदा बेगम मंसूरी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में को-कन्वेनर डॉ. शशि उइके, सचिव डॉ. शाहेदा बेगम मंसूरी, सह-सचिव अजीत सिंह गौतम तथा सदस्यगण डॉ. शिवानी सोनी एवं डॉ. कीर्ति डेहरिया का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय का सम्पूर्ण स्टाफ एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे और प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को रोजगार एवं करियर की नई संभावनाओं की ओर अग्रसर होने का अवसर मिला।
“बारिश केवल राहत नहीं, जिम्मेदारी की भी परीक्षा है — बिजली से सावधानी, घर में रहकर सुरक्षा और समाज में जागरूकता ही सच्चा बचाव है।” लगातार बारिश ने जनजीवन को चुनौती दी है। बिजली की लाइनें, खंभे और खुले तार मौत का जाल बन सकते हैं, वहीं पानी से भरी सड़कें और नालियां दुर्घटनाओं को न्योता देती हैं। ऐसे में नागरिकों की छोटी-सी लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बारिश के दिनों में बिना वजह घर से बाहर न निकलें और बिजली से जुड़े उपकरणों से दूरी बनाए रखें। समाज को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी। याद रखें – सुरक्षा ही बचाव है और ज़िंदगी है तो सब कुछ है। डॉ. प्रियंका सौरभ हिसार
सादुल्लानगर/बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायत जाफरपुर में दुर्गा माता मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भूमि पूजन एवं शिलान्यास कर किया गया। पूजन-पाठ का आयोजन पंडित छेदी महाराज के द्वारा संपन्न कराया गया। धार्मिक माहौल में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जिनमें वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश तिवारी, मंडल अध्यक्ष विष्णु गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता बहरैची प्रसाद गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता राम अवध शर्मा (क्षेत्र पंचायत सदस्य), गंगाराम (बीडीसी), योगेन्द्र सिंह, श्याम सिंह, प्रकाश चन्द सिंह (प्रधानाचार्य), शिव करन सिंह, प्रभाकर सिंह, विनय कुमार सिंह, राजन सिंह, दीपू सिंह, बबलू सिंह, हर्षित सिंह, राम नेवास सोनी, राम जनक यादव, पवन कुमार यादव, जगदीश जायसवाल, मनीष कुमार (कोटेदार), पवन कुमार सोनी, राजकुमार, शिव कुमार, जयराम सहित अनेक सम्मानित ग्रामवासी मौजूद रहे। ग्रामवासियों ने मंदिर निर्माण को एक ऐतिहासिक व धार्मिक कार्य बताते हुए इसे सामाजिक एकता व श्रद्धा का प्रतीक बताया।
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया विक्रान्त वीर के निर्देशन में चलाए जा रहे वारंटी एवं इनामिया अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभियान के तहत रुद्रपुर पुलिस ने बुधवार को एक वारंटी अभियुक्त को गिरफ्तार किया।जानकारी के अनुसार, थाना रुद्रपुर पुलिस ने मा0 न्यायालय देवरिया से निर्गत गैर जमानतीय वारंट इसरा वाद संख्या- 250/25 धारा 147 बीएनएसएस से संबंधित अभियुक्त अजय पुत्र सम्हारु यादव निवासी महुआपोखर, पोस्ट माहीगंज, थाना रुद्रपुर जनपद देवरिया को 3 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उ0नि0 श्रीनिवास यादव, थाना रुद्रपुर,हे0का0 रंजीत कुमार, थाना रुद्रपुर शामिल रहे।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) के मोहनी देवी गांव में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। 23 वर्षीय शिव शंकर राजभर उर्फ मनी राजभर, जो ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था, चार्जिंग के दौरान करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।
शिव शंकर परिवार का इकलौता सहारा था। छोटी सी उम्र में ही उसने जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा ली थीं। रोज़ सुबह रिक्शा लेकर निकलता और देर रात लौटकर परिवार की ज़रूरतों को पूरा करता था। लेकिन बुधवार की दोपहर एक झटके ने उसकी ज़िंदगी और परिवार दोनों की खुशियाँ छीन लीं।
गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां अपने बेटे के शव से लिपटकर बार-बार यही कह रही थी कि “अब घर कैसे चलेगा?” ग्रामीण भी ग़ुस्से और दुख में डूबे हैं। उनका कहना है कि खराब तारों और असुरक्षित चार्जिंग व्यवस्थाओं की लापरवाही का खामियाज़ा शिव शंकर जैसे निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है।
शिव शंकर की मौत ने पूरे गांव को हिला दिया है। यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं, बल्कि उस सच्चाई का चेहरा है जहाँ रोज़गार के साधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी आम लोगों की ज़िंदगियों पर भारी पड़ रही है।
काली मंदिर के पास रोता मिला नवजात, इंसानियत पर उठा सवाल
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) के घुघली नगर में काली मंदिर के समीप बुधवार की सुबह झाड़ियों में एक नवजात शिशु मिलने से सनसनी फैल गई। सब्ज़ी व्यापारी हरिश्चंद्र की मानवीय संवेदनशीलता ने उस मासूम की जान बचाई, जिसे पानी पिलाकर और वस्त्र पहनाकर सुरक्षित किया गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस घटना ने एक ओर जहां हरिश्चंद्र के नेक कार्य की सराहना दिलाई है, वहीं समाज में मासूम को त्यागने जैसी कृत्यों की कड़ी निंदा हो रही है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और यूरोप भारत से लगातार दबाव बना रहे हैं कि वह रूस से दूरी बनाए और पश्चिमी देशों के रुख का समर्थन करे। पश्चिमी शक्तियों की अपेक्षा है कि भारत खुले तौर पर यूक्रेन के पक्ष में खड़ा हो। लेकिन भारत के सामने यह कोई आसान विकल्प नहीं है।
रूस दशकों से भारत का भरोसेमंद मित्र और ऊर्जा साझेदार रहा है। आज भी भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से मिलने वाले किफायती कच्चे तेल और गैस से पूरा करता है। इसके अलावा रक्षा, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों का गहरा सहयोग है। ऐसे में रूस से रिश्तों को दरकिनार करना भारत के लिए संभव नहीं।
इसी बीच भारत की विदेश नीति की असली ताक़त सामने आती है। भारत ने हमेशा सीधे टकराव से बचते हुए अपने हितों की रक्षा करने की रणनीति अपनाई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कई बार साफ कर चुके हैं कि भारत किसी भी संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेगा और हर मसले का समाधान संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लेकर अमेरिका और यूरोप के शीर्ष नेताओं तक बार-बार यह संदेश दिया है कि “यह युद्ध का समय नहीं है।” इस रुख ने भारत को न केवल वैश्विक मंच पर एक संतुलित आवाज़ दी है बल्कि उसे संभावित मध्यस्थ के रूप में भी स्थापित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह “बीच का रास्ता” कोई दोहरी कूटनीति नहीं बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) है। यही नीति भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार भूमिका निभाने का अवसर देती है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अहम आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए अल्पसंख्यक समुदायों—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—को पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों के बिना भी भारत में रहने की अनुमति दी जाएगी। यह राहत उन लोगों को दी जाएगी, जो 31 दिसंबर, 2024 तक भारत पहुंचे हैं।
मंत्रालय का यह आदेश हाल ही में लागू हुए आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत जारी किया गया है, जो प्रभावी हो गया।
यह कदम उन समुदायों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें अब तक नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत ही सुविधा मिलती थी। सीएए केवल उन प्रवासियों पर लागू था, जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके थे और नागरिकता प्राप्त करने के पात्र थे।
गृह मंत्रालय के इस नए आदेश के बाद 2015 से 2024 के बीच धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को देश में रहने का कानूनी अधिकार मिल सकेगा।
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)पवई कला विकास मंडल द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन लगातार ५१ वर्षों से किया जा रहा है। मंडल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। पिछले वर्ष स्वर्ण महोत्सव का भव्य आयोजन मंडल की गौरवशाली परंपरा और समाजसेवा की अखंड धारा का प्रतीक बना था।
मंडल ने अब तक पवई के विद्यालयों के ६०० से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा-शुल्क सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण, अंगनवाड़ी सहयोग तथा समाज कल्याण केंद्रों के माध्यम से वंचित वर्ग के जीवन में आशा और सशक्तिकरण का संचार किया है।
इस वर्ष मंडल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राजदरबार की कलाकृति साकार की है, जिसके माध्यम से संस्कृति और परंपरा के पुनर्जागरण का संदेश दिया गया। विशेष रूप से महाराष्ट्र के बारह गढ़-किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने की ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ यह कलाकृति समाज को प्रेरित करती है कि जैसे शिवाजी महाराज ने हिंदुत्व की ज्योति प्रज्वलित रखी, वैसे ही आज भी उस चेतना को समाजजीवन में जीवित रखना आवश्यक है।