Monday, July 13, 2026
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भारत ने किया अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)गुरुवार को भारत ने रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर प्रणाली से मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम (Agni-Prime) मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिसाइल अगली पीढ़ी की उन्नत मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो लगभग 2,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखती है और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है।

🔹 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा –

यह परीक्षण विशेष रूप से तैयार की गई रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर प्रणाली से अपनी तरह का पहला प्रक्षेपण है।

इस प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि यह रेल नेटवर्क पर चलते हुए भी बेहद कम समय और कम दृश्यता में प्रतिक्रिया करने में सक्षम है।

इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है, जिन्होंने चलते-फिरते रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम विकसित किया है।

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🔹 रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ, सामरिक बल कमान (SFC) और सशस्त्र बलों को बधाई दी।

📌 इससे पहले अगस्त 2025 में ओडिशा के चांदीपुर से अग्नि-प्राइम का सफल परीक्षण किया गया था।
📌 मार्च 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत अग्नि-5 का सफल परीक्षण हुआ था, जिसमें MIRV तकनीक (एक साथ कई स्वतंत्र लक्ष्यों को साधने की क्षमता) का प्रदर्शन किया गया।

🚆 यह तकनीक भारत की स्ट्रेटेजिक डिटरेंस क्षमता को और मजबूत बनाती है।

दुर्गा पंडाल हादसा: करंट की चपेट में आए दो मासूम, खेल-खेल में चली गई जान

जबलपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में दुर्गा पूजा पंडाल में बड़ा हादसा हो गया। बरगी हिल्स इलाके के तिलवारा थाना क्षेत्र में बुधवार शाम करंट प्रवाहित होने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, 8 वर्षीय आयुष झारिया और 10 वर्षीय वेद श्रीवास्तव पंडाल के पास खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने लोहे का पाइप पकड़ लिया, जिसमें बिजली दौड़ रही थी। करंट लगते ही दोनों बच्चे गिर पड़े और मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि पंडाल के लिए तो उचित बिजली कनेक्शन लिया गया था, लेकिन बाहरी सजावट के लिए अवैध कनेक्शन जोड़ा गया था, जिसके कारण करंट फैल गया। उपसंभागीय मजिस्ट्रेट अनुराग सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आई है। वहीं, शहर के सीएसपी आशीष जैन ने बताया कि संबंधित समिति के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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घटना पर राज्य के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को मृतक बच्चों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्देश भी दिया। गुरुवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

यह दर्दनाक हादसा स्थानीय लोगों को झकझोर गया है और सवाल खड़े कर गया है कि आखिर धार्मिक आयोजनों में बिजली सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती जा सकती है।

पराली के नाम पर घोटालेबाजों पर अधिकारी मेहरबान , जलाने पर दे रहे मुकदमा का फरमान

सदर ब्लाक के सोनरा का है यह मामला

अलग-अलग बाउचर व तिथि मे हुआ 15लाख 54 हजार भुगतान

कृषि विभाग पराली निस्तारण यंत्र पर 80 प्रतिशत का दे रही अनुदान

डॉ सतीश पाण्डेय व नीरज की रिपोर्ट

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। पराली को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस तरह के समस्या को गंभीरता से लेते हुए तरह-तरह के उपाय व योजना प्रस्तुत कर रही है वही पराली के नाम पर घोटाले बाजों का रवैया उल्टा नजर आ रहा है। सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत सोंनरा मे पराली निस्तारण हेतु कृषि यंत्र खरीद के नाम पर अलग-अलग बाउचर व तिथियों मे 15 लाख 54 हजार रुपये की निकासी किया गया है, जबकि कृषि यंत्र की कीमत वर्तमान मे टैक्टर द्वारा संचालित 2 लाख से लेकर 4 लाख रुपये तक बाजार मे उपलब्ध है लेकिन ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने इस यंत्र को 5 लाख 18 हजार रुपये मे खरीदा जो विभागीय डाटा पर उपलब्ध है। लेकिन यह निकासी एक या दो बार नही बल्कि तीन बार अलग- अलग बाउचर व तिथियों पर किया गया जो चर्चा का विषय बन गया है। वहीं सरकार पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का फरमान जारी कर रही है।

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प्राप्त समाचार के अनुसार सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत सोंनरा मे पराली निस्तारण हेतु कृषि यंत्र खरीद के नाम पर लाखो रुपये का घोटाला किया गया है। यह चर्चा का विषय बना हुआ है।सरकार पराली निस्तारण हेतु कृषि यंत्र के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा 80% अनुदान देकर लोगों को पराली न जलाने का संदेश दे रही है, वही ग्राम पंचायत निधि से कृषि यंत्र के माध्यम से अनुदानित यंत्र खरीद कर किसानों की राहत का उपाय लगाने में जुटी है, जिससे पराली जैसे गंभीर समस्याओं का समाधान हो सके। लेकिन सदर ब्लाक के सोंनरा गांव में अलग-अलग बाउचर व तिथियों मे ग्राम सभा निधि के पंचम वित्त से 15 लाख 54 हजार रुपये की निकासी किया गया है। जिसका विवरण 20 नवम्बर 2021 को टैक्टर मे संचालित बेलर जूमो 1211 मशीन और टूल किट व रोटर सलेंसर पंप झंडू का पेमेंट बाउचर संख्या STH SFC/2021-22/P 11 मे 5 लाख 18 हजार का हुआ तथा 23 दिसम्बर 2021 को पराली निस्तारण हेतु मशीन कार्य पर बाउचर संख्या STHज्ञSFC/2021-22/P15 मे 5 लाख 18 हजार का तथा 4 जनवरी 2022 को पराली निस्तारण हेतु मशीन कार्य पर बाउचर संख्या STH SFC/2021-22/P 16 मे 4 लाख रूपये का 23 अगस्त 2022 को पराली निस्तारण हेतु मशीन कार्य पर बाउचर संख्या STH SFC/2022-23/P11 मे 1 लाख 18 हजार का निकासी हुआ जिसमे पराली निस्तारण हेतु 3 लाख 60 हजार की रेंडलैण्ड बेलर जूमो 1211 मशीन की कीमत को 5 लाख 18 हजार रुपये दर्शाया गया। कृषि यंत्र के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा 80% अनुदान भी मिला यानि अनुदान के नाम पर भी घोटाला किया गया जो कम कीमत की रेंडलैण्ड बेलर जूमो 1211 मशीन को अधिक बिल बाउचर बनाकर अधिक अनुदान का लाभ अर्जित किया गया।परन्तु जिले से 3 किलो मीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत में इतना बड़ा खेल हो रहा है। लेकिन मेहरबानी के अलावा किसी भी आला अधिकारियों के कानो तक जू तक नही पहुंचा। वहीं पराली जलाने को लेकर अधिकारियों द्वारा किसानों पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया जाता हैं।
इस संदर्भ में सोंनरा ग्राम प्रधान कलाम ने बताया कि ऐसा कुछ नही हुआ है। खरीदारी किया गया है और सब्सिडी भी लिया गया है यह सत्य है।
इस सम्बन्ध में मुख्य विकास अधिकारी अनुराज जैन ने कहा कि मेरे संज्ञान में नहीं है। घोटाला की बात पर कहा की शिकायत मिलने पर जांच किया जायेगा।

रामलीला में भावुक कर देने वाला ‘राम–भरत मिलन’, खड़ाऊ सौंपने के दृश्य ने भिगो दिए दर्शकों की आँखे

जसवंतनगर/इटावा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रामलीला महोत्सव का मंचन इस बार उस प्रसंग पर पहुँचा जिसने दर्शकों के दिलों को भावनाओं से भर दिया। राम–भरत मिलन की हृदयस्पर्शी लीला जब मंच पर सजीव हुई तो पंडाल में मौजूद हर कोई अश्रुपूरित हो उठा।

कथा के अनुसार, ननिहाल से लौटे भरत और शत्रुघ्न को जब यह ज्ञात होता है कि उनके अग्रज श्रीराम वनवास को प्रस्थान कर चुके हैं, तो वे अयोध्यावासियों के साथ सरयू नदी पार करते हुए दण्डक वन की ओर निकल पड़ते हैं। मार्ग में केवट और निषादराज उनकी हर संभव सहायता करते हैं।

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वन में भरत, श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का भावुक मिलन होता है। इसी दौरान महाराज दशरथ के निधन का समाचार मिलने पर राम गहन शोक में डूब जाते हैं। भरत हाथ जोड़कर उनसे निवेदन करते हैं कि वे 14 वर्षों का वनवास त्यागकर अयोध्या लौट चलें। किंतु मर्यादा पुरुषोत्तम राम पिता के वचन को धर्म मानते हुए वापस लौटने से इनकार कर देते हैं और भरत को राजधर्म निभाने का उपदेश देते हैं।

संवादों का सजीव मंचन कलाकार विकास रामकृष्ण दुबे और उमेश नारायण पांडे ने इतनी भावनात्मक शैली में किया कि दर्शक अपने आँसू रोक न सके। चरम दृश्य तब आया जब राम अपनी खड़ाऊ भरत को सौंपते हैं और भरत उन्हें सिर पर धारण कर अयोध्या लौटने का संकल्प लेते हैं।

पूरे आयोजन की व्यवस्था राजीव गुप्ता बबलू और अजेंद्र गौर ने संभाली। मंचन के अंत में उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और भावुक जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

टीम इंडिया अंडर-19 ने ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया को 51 रनों से हराकर 2-0 से किया सीरीज में दबदबा

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। ब्रिस्बेन के ऐतिहासिक गाबा स्टेडियम में खेले गए तीसरे मैच से पहले, टीम इंडिया अंडर-19 ने ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 को 51 रनों से हराकर 3 मैचों की वनडे सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने सीरीज़ में जीत की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं।

भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 300 रन बनाए, जिसमें वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार पारी सबसे खास रही। ऑस्ट्रेलियाई टीम 47.2 ओवर में 249 रन पर ऑल-आउट हो गई।

वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा युवा वनडे में छक्कों का रिकॉर्ड

इस मैच में 14 साल के बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने 68 गेंदों पर 70 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 6 छक्के शामिल थे। इस प्रदर्शन के साथ वैभव ने युवा वनडे (YODI) में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने कुल 41 छक्के लगाकर उन्मुक्त चंद के 38 छक्कों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

वैभव का कैच यश देशमुख की गेंद पर आर्यन शर्मा ने पकड़ा, जिससे उनका आउट होना भारत के लिए एक यादगार क्षण बन गया।

आगामी मुकाबला

सीरीज़ का तीसरा और आखिरी मैच 26 सितंबर को खेला जाएगा, जिसमें भारतीय अंडर-19 टीम 3-0 से क्लीन स्वीप करने के लिए मैदान में उतरेगी।

रामलीला: परंपरा, संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम- राजेश सिंह दयाल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत की पहचान उसकी संस्कृति, अध्यात्म और परंपराओं से होती है। इन्हीं में से एक जीवंत परंपरा है रामलीला, जो केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। देशभर में रामलीलाओं का आयोजन होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद स्थित रसड़ा की रामलीला अपनी अनूठी भव्यता, ऐतिहासिक महत्व और सामाजिक संदेशों के कारण विशेष पहचान रखती है।

सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप

रसड़ा की रामलीला केवल मंचन भर नहीं है, बल्कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही आस्था और विश्वास की धरोहर है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा समाज को धर्म, सत्य और न्याय की राह दिखाती रही है। यहाँ श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के चरित्रों के माध्यम से आदर्श, मर्यादा और सत्य का संदेश पूरे समाज तक पहुँचता है।

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धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

रामलीला का सबसे महत्वपूर्ण संदेश अधर्म पर धर्म की विजय है। रावण-दहन के समय जब पूरा नगर “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंजता है, तो यह समाज को याद दिलाता है कि अन्याय और असत्य चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही जीत होती है।

सांस्कृतिक धरोहर और लोककला का संरक्षण

रसड़ा की रामलीला स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों और समाज के लोगों की सहभागिता से जीवंत होती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि लोककला, अभिनय, संगीत और नृत्य की परंपराओं को भी संरक्षित करता है। यही कारण है कि यह महोत्सव सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बन चुका है।

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ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व

इतिहास के पन्नों में भी रसड़ा की रामलीला का उल्लेख मिलता है। यह केवल बलिया जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ परंपरा, इतिहास और संस्कृति का अनुपम संगम देखते हैं, जो उन्हें गहरी छाप छोड़ जाता है।

उद्घाटन समारोह का गौरव

इस वर्ष भी रसड़ा की रामलीला का शुभारंभ भव्यता और श्रद्धा के साथ हुआ। मंचन के उद्घाटन का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। इस अवसर पर श्री नाथ बाबा मठ रसड़ा के पीठाधीश्वर महंत कौशलेंद्र गिरि जी, भाजपा जिलाध्यक्ष बलिया श्री संजय मिश्रा जी, वशिष्ठ नारायण सोनी जी, राम जी स्टेट, संतोष जायसवाल जी, निर्मल पांडेय जी सहित समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में रसड़ा की जनता उपस्थित रही।

राजेश सिंह दयाल ने कहा की रसड़ा की रामलीला केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह आस्था, संस्कृति, अध्यात्म और इतिहास का संगम है। यह परंपरा न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी को मर्यादा और आदर्शों की शिक्षा देती है, बल्कि आने वाले समय के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।


📘 बोर्ड परीक्षा की तैयारी : समय प्रबंधन और रिवीजन के उपयोगी टिप्स 📘


बोर्ड परीक्षा का समय विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। सही रणनीति, समय प्रबंधन और नियमित अभ्यास से ही सफलता संभव है। यहां कुछ विस्तृत सुझाव दिए जा रहे हैं जिनसे आप परीक्षा की तैयारी को व्यवस्थित कर सकें।

  1. समय सारणी बनाएं
    सबसे पहले पढ़ाई के लिए टाइम टेबल तैयार करें। कठिन विषयों के लिए सुबह का समय चुनें क्योंकि उस समय दिमाग अधिक ताजा रहता है। शाम का समय रिवीजन और प्रश्न लिखने के अभ्यास के लिए रखें।
    सुबह 5 से 8 बजे – नया विषय या कठिन टॉपिक पढ़ें।
    दोपहर 2 से 4 बजे – मुख्य बिंदुओं की पुनरावृत्ति करें।
    शाम 7 से 9 बजे – उत्तर लिखने का अभ्यास करें।

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  1. विषयवार रिवीजन तकनीक
    गणित और विज्ञान: सूत्र, परिभाषाएं और प्रश्नों का ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करें।
    सामाजिक विज्ञान: तिथियां, घटनाएं और नक्शे का बार-बार अभ्यास करें।
    हिंदी/अंग्रेजी: व्याकरण, लेखन कार्य और पाठ्यक्रम की कहानियों/कविताओं के सारांश पर ध्यान दें।
  2. नोट्स और सारांश बनाएं
    पढ़ाई करते समय छोटे-छोटे नोट्स बनाएं। बिंदुवार लिखने से याद रखना आसान होता है। हर अध्याय का माइंड मैप या चार्ट तैयार करें।
  3. लिखने का अभ्यास
    केवल पढ़ना ही काफी नहीं है, परीक्षा लिखकर पास होती है। इसलिए रोज़ाना कम से कम 2-3 प्रश्न समयबद्ध तरीके से लिखें। लिखने से स्पीड और प्रेजेंटेशन दोनों बेहतर होते हैं।
  4. रिवीजन का सही तरीका
    पहले पूरे सिलेबस को एक बार पढ़ लें।
    उसके बाद 3-3 दिन का रिवीजन चक्र बनाएं।
    अंतिम 10 दिन केवल रिवीजन और पुराने पेपर हल करने में लगाएं।
  5. पुराने प्रश्न पत्रों का अभ्यास
    पिछले 5–10 साल के प्रश्न पत्र हल करें। इससे प्रश्न पूछने का पैटर्न समझ में आएगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
  6. स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन
    पर्याप्त नींद लें (कम से कम 7 घंटे)।
    हल्का व्यायाम या योग करें।
    परीक्षा से पहले रातभर पढ़ाई न करें, बल्कि हल्की रिवीजन करें और समय पर सोएं।
  7. परीक्षा हॉल में रणनीति
    सबसे पहले प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ें।
    आसान प्रश्न पहले हल करें, कठिन प्रश्न बाद में।
    उत्तर साफ-सुथरे और बिंदुवार लिखें।

निष्कर्ष
बोर्ड परीक्षा में सफलता केवल मेहनत पर नहीं बल्कि सही योजना और नियमित अभ्यास पर निर्भर करती है। समय का सदुपयोग करें, नोट्स बनाएं, लिखने का अभ्यास करें और आत्मविश्वास बनाए रखें। याद रखें – नियमितता ही सफलता की कुंजी है।

RPSC Recruitment 2025: असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर आवेदन फिर से शुरू

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राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 574 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर 2025 है।

शैक्षणिक योग्यता:

किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित विषय में स्नातक की डिग्री।नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य।पीएचडी डिग्री वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता।

आयु सीमा:

न्यूनतम 21 वर्ष, अधिकतम 40 वर्ष।

आरक्षित वर्ग को छूट:SC/ST: 5 साल

OBC: 3 साल

दिव्यांग / EWS: 10 साल

आवेदन प्रक्रिया:

  1. RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
  2. होमपेज पर Apply Online लिंक पर क्लिक करें।
  3. वन टाइम रजिस्ट्रेशन करें और आवश्यक जानकारी भरें।
  4. दस्तावेज़ अपलोड करें और फॉर्म सबमिट करें।
  5. भविष्य के लिए फॉर्म का प्रिंट आउट निकाल लें।

आवेदन शुल्क:

सामान्य / OBC: ₹600

SC / ST / दिव्यांग / EWS: ₹400

इस भर्ती का अवसर शिक्षण में करियर बनाने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। योग्य उम्मीदवार जल्द आवेदन करें।

धैर्य का पाठ : समाज में सफलता की कुंजी

(दिलीप पाण्डेय की राष्ट्र की परम्परा के लिए प्रस्तुति )

कहानी – “खाली गमले का रहस्य”

एक विद्यालय में प्रधानाचार्य ने बच्चों की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बुलाकर कहा –
“बच्चों! मैं तुम्हें बीज दे रहा हूँ। इसे घर ले जाओ, गमले में लगाओ और एक महीने बाद यहाँ लाओ। जिस छात्र का पौधा सबसे अच्छा होगा, उसे विशेष पुरस्कार मिलेगा।”
सभी बच्चे उत्साह से बीज लेकर चले गए। हर कोई अपने गमले में पानी डालने, खाद डालने और उसकी देखभाल करने में जुट गया।
परंतु आरव नाम का एक बच्चा रोज़ पानी डालता रहा, धूप दिखाता रहा, लेकिन बीज से कुछ भी अंकुरित नहीं हुआ। उसके गमले में सिर्फ मिट्टी ही मिट्टी थी। महीने भर मेहनत करने के बाद भी गमला खाली रहा।

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इनाम के दिन जब बच्चे विद्यालय पहुँचे, तो हर किसी के गमले में हरे-भरे पौधे थे। फूलों की महक से पूरा हॉल सज गया था। लेकिन आरव का गमला अभी भी खाली था।
प्रधानाचार्य मंच पर आए और सब गमले देखे। अचानक उन्होंने मुस्कराते हुए आरव को मंच पर बुलाया और कहा –
“आज का विजेता यही बच्चा है।”
सभी बच्चे और अभिभावक चकित हो गए। प्रधानाचार्य ने समझाया –
“दरअसल मैंने सभी बच्चों को उबले हुए बीज दिए थे, जिनसे अंकुर निकलना असंभव था। जो पौधे तुम सब लाए हो, वे किसी और बीज से उगे हैं। केवल आरव ने धैर्य और ईमानदारी दिखाई, उसने हार मानकर दूसरा बीज नहीं लगाया। यही सच्ची सफलता है।”
🌿 सीख
👉 धैर्य केवल इंतज़ार करने का नाम नहीं है, बल्कि ईमानदारी और दृढ़ता के साथ सही समय की प्रतीक्षा करना है।
👉 समाज में धैर्यवान व्यक्ति ही दूसरों के लिए विश्वसनीय बनता है।
👉 धैर्य हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर हम सही राह पर टिके रहें तो सफलता देर से ही सही लेकिन अवश्य मिलती है।

एकात्म मानवतावाद के जीवनदर्शी पंडित दीनदयाल उपाध्याय: नवनीत मिश्र

भारतीय राजनीति और समाज चिंतन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम सादगी, सेवा और विचारधारा की दृढ़ता का प्रतीक है। वे केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि ऐसे विचारक थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा को आधार बनाकर एकात्म मानववाद का दर्शन प्रस्तुत किया। उनका यह दर्शन आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गाँव में जन्मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने बाल्यकाल में माता-पिता का साया खो दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और अनुशासन, परिश्रम और सेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाया। बाल्यकाल की कठिनाइयों ने उन्हें आत्मनिर्भर और दृढ़संकल्प बनाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ से जुड़कर समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका जीवन हमेशा सादगी और नैतिकता से प्रेरित रहा। जीवन की कठिनाइयों के बावजूद उनका विश्वास और कर्म हमें यह दिखाते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, विचार और कर्म से समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दिया जा सकता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि मानव केवल भौतिक और आर्थिक प्राणी नहीं है। उनका एकात्म मानववाद व्यक्ति और समाज, भौतिक और मानसिक, आर्थिक और सांस्कृतिक, स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन पर आधारित है। वे कहते थे कि व्यक्ति केवल भौतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज और संस्कृति के कल्याण के लिए सक्रिय होता है। राष्ट्र केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और साझा मूल्यों का जीवंत स्वरूप है। उनके अनुसार विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि नैतिकता, सेवा और समरसता भी है। उन्होंने स्वयं कहा, “हमारे यहाँ सत्ता का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित करना होना चाहिए।” उनके इस विचार से स्पष्ट होता है कि समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास तभी संभव है जब व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास संतुलित रूप से हो। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं माना। उनके अनुसार, राजनीति का असली उद्देश्य जनकल्याण और सामाजिक न्याय होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह भी सिखाया कि राजनीति में सिद्धांत और नैतिकता का पालन अनिवार्य है। वे मानते थे कि शासन और नीति केवल नियम और कानून तक सीमित नहीं होने चाहिए; मानवीय मूल्य और नैतिकता का पालन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, “राजनीति का असली उद्देश्य समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाना है, न कि केवल सत्ता का साधन बनना।” उनके इस दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि नीति और प्रशासन केवल औपचारिक रूप से नहीं बल्कि मूल्यों और नैतिकता के आधार पर किए जाने चाहिए। आज का युग उपभोक्तावाद, असमानता और पर्यावरण संकट से जूझ रहा है। ऐसे समय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उनकी शिक्षा नीति यह बताती है कि शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न हो, बल्कि नैतिकता और जिम्मेदारी भी शिक्षा का हिस्सा हो। उन्होंने कहा, “व्यक्ति और समाज का विकास तभी संभव है जब हम समग्र दृष्टि अपनाएँ – भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के साथ।” उनके अनुसार आर्थिक विकास समाज की मूलभूत जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण को विकास का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन संदेश सरल लेकिन गहरा है। सादगी, अनुशासन, सेवा और नैतिकता उनके जीवन के मूल आधार थे। उन्होंने यह साबित किया कि व्यक्ति की महानता उसके पद या दौलत से नहीं, बल्कि विचार, कर्म और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी से मापी जाती है। वे कहते थे, “सच्चा विकास वह है जो समाज और राष्ट्र दोनों के लिए लाभकारी हो।” उनकी सोच और जीवनशैली आज भी युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरक हैं। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र और समाज केवल प्रशासन और कानून से नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्य आधारित जीवन से विकसित होते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और उनका एकात्म मानववाद आज भी भारतीय समाज और राष्ट्र के लिए प्रासंगिक हैं। उनके दर्शन से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति और समाज, अर्थ और संस्कृति, भौतिक और मानसिक विकास एक-दूसरे से अलग नहीं बल्कि पूरक हैं। उनकी जयंती पर यह संकल्प लेना आवश्यक है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज को संतुलन, समरसता और समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ाएँ। जैसा उन्होंने स्वयं कहा, “हमारा देश तभी सशक्त होगा जब हम समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, शिक्षा और अवसर देंगे।”

🌺 पंचम नवरात्र : स्कन्द माता की आराधना, कथा, पूजा विधि और प्रसिद्ध मंदिर 🌺

🔹 देवी स्वरूप एवं महत्व नवरात्रि का पाँचवाँ दिन देवी दुर्गा के पाँचवें स्वरूप स्कन्द माता की उपासना के लिए समर्पित है। स्कन्द माता, भगवान शिव और माता पार्वती की संतान तथा देवसेनापति भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की जननी हैं। इन्हें ममता, सौम्यता और वीरता का संगम माना जाता है।

देवी का स्वरूप अत्यंत मनोहर है। वे गोरी वर्ण की, चार भुजाओं वाली और कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। उनके दो हाथों में कमल पुष्प, एक में पुत्र कार्तिकेय और चौथा हाथ भक्तों को वरद Mudra में रहता है। इन्हें प्रायः सिंह वाहन पर सवार दर्शाया जाता है। इसी कारण इन्हें “पद्मासना देवी” भी कहा जाता है।

भक्तों की मान्यता है कि स्कन्द माता की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति, संतान सुख और आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह माता भक्तों की सारी विपत्तियों को हरकर उन्हें तेज, पराक्रम और आत्मबल प्रदान करती हैं।
🔹 देवी कथा
पुराणों के अनुसार देवासुर संग्राम के समय देवताओं को असुरों पर विजय पाने के लिए एक शक्तिशाली सेनापति की आवश्यकता हुई। तब भगवान शिव और पार्वती से एक तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ, जो आगे चलकर कार्तिकेय या स्कन्द कहलाए।
देवताओं को त्रस्त करने वाले असुर तारकासुर का वध करने का सामर्थ्य केवल भगवान शिव के पुत्र में ही था। बाल्यावस्था में ही स्कन्द ने युद्धभूमि में प्रवेश कर तारकासुर का वध कर दिया और देवताओं को विजय दिलाई। इस कारण माता पार्वती को स्कन्द माता कहा जाने लगा।
भक्त मानते हैं कि जैसे कार्तिकेय ने देवताओं को संकट से मुक्ति दिलाई, वैसे ही स्कन्द माता की उपासना करने से साधक भी जीवन की बाधाओं और दुखों से मुक्त होकर सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
🔹 पूजा विधि
नवरात्रि के पाँचवे दिन स्कन्द माता की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। पूजा की सरल और पारंपरिक विधि इस प्रकार है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ और पवित्र वस्त्र धारण करें। पूजन स्थल को शुद्ध करके स्कन्द माता की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर आसन पर स्थापित करें।अक्षत, पुष्प, चन्दन, धूप-दीप, रोली, सुपारी और नारियल अर्पित करें।माता को पीले और लाल रंग के फूल विशेष प्रिय हैं। केले और गुड़ का भोग अवश्य लगाएँ।दुर्गा सप्तशती के पंचम अध्याय का पाठ या “देवी कवच” का पाठ करना उत्तम है।अंत में स्कन्द माता की आरती कर “ॐ स्कन्दमातर्यै नमः” मंत्र का जाप करें।भक्तों का विश्वास है कि इस दिन विधिवत पूजा करने से माँ स्कन्द माता साधक को संतान सुख के साथ-साथ, निरोगी शरीर और शुभ बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
🔹 उपासना का महत्व
स्कन्द माता की कृपा से अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। संतान की इच्छा रखने वाले दंपति को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। परिवार में कलह और अशांति समाप्त होती है।
साधक को आत्मबल, धैर्य और पराक्रम की प्राप्ति होती है।
🔹 स्कन्द माता के प्रसिद्ध मंदिर
भारतवर्ष में स्कन्द माता की आराधना विभिन्न रूपों में की जाती है। कुछ प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर इस प्रकार हैं:कार्तिकेय मंदिर, कांचीपुरम (तमिलनाडु) – यहाँ कार्तिकेय के साथ माता की विशेष पूजा होती है।

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  1. त्रिपुरारि मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – मान्यता है कि यहाँ स्कन्द माता की उपासना करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
  2. हिमाचल प्रदेश के कुछ शक्तिपीठों में स्कन्द माता के स्वरूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
  3. कार्तिकेय स्वामी मंदिर, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) – यहाँ भक्त माता और पुत्र दोनों के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।
    इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान विशेष आयोजन और भव्य मेले लगते हैं।
    नवरात्रि का पाँचवा दिन माँ दुर्गा के स्कन्द माता स्वरूप की भक्ति और साधना के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। इनके चरणों में की गई उपासना से भक्त जीवन की कठिनाइयों से उबर कर सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त करता है। स्कन्द माता का स्नेह मातृत्व और शक्ति का अद्वितीय संगम है।
    इस प्रकार पंचम नवरात्रि पर स्कन्द माता की आराधना हर भक्त के लिए कल्याणकारी और मंगलदायी होती है।

25 सितंबर का इतिहास

महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1340 – इंग्लैंड और फ्रांस ने निरस्त्रीकरण संधि पर हस्ताक्षर किये।

1524 – वास्कोडिगामा आखिरी बार वायसराय बनकर भारत आए।

1639 – अमेरिका में पहली प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत।

1654 – इंग्लैंड और डेनमार्क ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये।

1846 – अमेरिकी सेना ने मेक्सिको के मोंटेरी पर कब्जा किया।

1897 – ब्रिटेन में पहली बस सेवा की शुरुआत।

1911 – फ्रांसीसी युद्धपोत लिब्रीटे में टूलॉन हार्बर पर विस्फोट से 285 लोगों की मौत।

1981 – मध्य अमेरिकी देश बेलीज संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ।

1999 – आठवें सैफ खेलों का काठमांडू में उद्घाटन।

2000 – यमन में रिफ्ट वैली बुखार से 211 लोगों की मौत। सिडनी ओलम्पिक में 400 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक माइकल जॉनसन तथा केथी फ़्रीमेन ने जीता।

2001 – सऊदी अरब ने तालिबान मिलिशिया से संबंध तोड़ा।

2003 – गयूम छठी बार मालदीव के राष्ट्रपति बने।

2006 – पाकिस्तान के 60 वर्ष के इतिहास में पहली बार सिंध के थारपाकर ज़िले के निवासी हिन्दू युवक दानेश को पाक सेना में शामिल किया गया।

2006 – यमन के अली अब्दुल्ला सालेह पुनः राष्ट्रपति निर्वाचित।

2006 – ईरान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री अनुशेह अंसारी ने अंतरिक्ष की यात्रा की।

2006 – दलाई लामा को भारतीय नागरिकता देने की मांग उठी।

2007 – शेर बहादुर देउबा के नेतृत्‍व वाली नेपाली कांग्रेस (डेमोक्रेटिक) का कांग्रेस में विलय।

2008 – चीन ने अंतरिक्ष यान शेंझो 7 का प्रक्षेपण किया।

2009 – भारतीय प्रवर्तन निदेशालय ने लगभग पाँच हज़ार करोड़ रुपये के हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।

जन्म

1914 – चौधरी देवी लाल – भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री, किसानों के नेता।

1916 – पंडित दीनदयाल उपाध्याय – अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और महान चिंतक।

1920 – सतीश धवन – भारत के प्रसिद्ध रॉकेट वैज्ञानिक।

1925 – भाऊराव देवाजी खोब्रागड़े – रिपब्लिकन पार्टी के नेता।

1927 – जगमोहन मल्होत्रा – वरिष्ठ प्रशासक व भाजपा नेता।

1939 – फ़िरोज़ ख़ान – प्रसिद्ध अभिनेता और फ़िल्म निर्माता-निर्देशक।

1960 – अजय कुमार मिश्रा – भाजपा नेता, सांसद।

1969 – ब्रात्य बसु – अभिनेता, नाटककार, निर्देशक और राजनीतिज्ञ।

1977 – दिव्या दत्ता – फ़िल्म अभिनेत्री।

निधन

1955 – रुक्माबाई – भारत की प्रथम महिला चिकित्सक।

1989 – सुदर्शन सिंह चक्र – साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी।

1990 – प्रफुल्लचंद्र सेन – बंगाल के प्रमुख कांग्रेसी नेता।

1990 – एस. मुखर्जी – भारत के 20वें मुख्य न्यायाधीश।

2007 – जन कृष्णमूर्ति – भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (2001–2002)।

2010 – कन्हैया लाल नंदन – वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार।

2020 – एस. पी. बालासुब्रमण्यम – भारतीय सिनेमा के दिग्गज पार्श्वगायक।

गडचिरोली में बड़ी सफलता: 6 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, ₹62 लाख का इनाम था घोषित

गडचिरोली/महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र पुलिस को गडचिरोली जिले में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। यहां 6 वरिष्ठ नक्सली नेता डीजीपी रश्मि शुक्ला के सामने आत्मसमर्पण करने आए। इन नक्सलियों पर कुल ₹62 लाख का इनाम घोषित था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली पिछले कई वर्षों से अलग-अलग हिंसक घटनाओं में शामिल थे। इनके आत्मसमर्पण से नक्सलवाद पर राज्य में लगाम कसने में मदद मिलेगी।

डीजीपी रश्मि शुक्ला ने इस घटना को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि यह कदम गडचिरोली को नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

मुख्य बिंदु:

गडचिरोली में पुलिस की बड़ी कामयाबी

6 वरिष्ठ नक्सलियों का आत्मसमर्पण

कुल ₹62 लाख का घोषित इनाम

नक्सलवाद के खिलाफ राज्य की रणनीति में वृद्धि

गडचिरोली में बनेगा देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट, JSW का ₹1 लाख करोड़ का निवेश

गडचिरोली/महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) ने गडचिरोली जिले के चामोर्शी तहसील में भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्टील प्लांट लगाने के लिए 9,100 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। इस परियोजना में JSW Steel कंपनी लगभग ₹1 लाख करोड़ का निवेश करेगी।

यह स्टील प्लांट 25 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) उत्पादन क्षमता के साथ देश और दुनिया का सबसे बड़ा होगा। इस परियोजना से महाराष्ट्र में भारी आर्थिक विकास होगा और लाखों रोजगार सृजित होंगे।

MIDC के अधिकारियों के अनुसार, इस निवेश से गडचिरोली का औद्योगिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। इसके अलावा, यह परियोजना राज्य को स्टील उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी

मुख्य लाभ:

₹1 लाख करोड़ का बड़ा निवेश

25 MTPA क्षमता वाला स्टील प्लांट

गडचिरोली में रोजगार के नए अवसर

महाराष्ट्र की औद्योगिक प्रगति में बड़ा कदम

महाराष्ट्र सरकार ने दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए ₹5 लाख की सीमा हटाई, अब पूरे खर्च का करेगी वहन

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लेते हुए 9 गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर ₹5 लाख की वित्तीय सीमा हटा दी है। अब राज्य सरकार इन बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। इस योजना से हार्ट ट्रांसप्लांट, लीवर ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और अन्य गंभीर उपचार में आर्थिक बोझ कम होगा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस नई योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराना है। पहले मरीजों को ₹5 लाख तक का इलाज सरकारी योजना के तहत मिलता था, लेकिन अब इस सीमा को समाप्त कर दिया गया है।

इस योजना से हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा और यह महाराष्ट्र को स्वास्थ्य सेवाओं में एक अग्रणी राज्य बनाने में मदद करेगी।