Friday, July 10, 2026
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अपनी जमीनों और मकानों पर किसी कीमत पर पीलर नहीं लगने देंगे- नागरिक

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गोरखपुर (राष्ट्र क़ी परम्परा)
रविवार को एक आवश्यक बैठक महादेव झारखंडी मंदिर पर जिला अधिकारी के बेतुके फरमान के विरोध में हुआ। लोगों को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के अध्यक्ष बृजपाल सिंह ने कहा कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर 1 और ताल रामगढ़ रेवेन्यू विलेज के निवासी हैं हम सभी लोग यहां के मकान मालिक और काश्तकार है, पिछले दिनों अखबार के माध्यम से यह सूचना मिली कि जिला अधिकारी रामगढ़ ताल के किनारे 50 मीटर के दायरे में जो राज्यपाल के द्वारा जारी अधिसूचना दिसंबर 2020 के क्रम में है, का सीमांकन करके पिलर लगाने के संबंध में गोरखपुर विकास प्राधिकरण को आदेशित किए है। प्राधिकरण उसके लिए बजट जारी करने की बात कहा है और पिलर लगाने के लिए एजेंसी नामित करने की बात कहा है , यह जमीन हम लोगों की है और हम लोग
इसका निदान होने से पूर्व अपने जमीनों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण गोरखपुर विकास प्राधिकरण को नहीं करने देंगे। जैसा की बटलैंड को लेकर राज्यपाल का अधिसूचना जारी हुआ था, उस संबंध में स्पष्ट है कि हमारी जमीन वेटलैंड के दायरे में नहीं आती। 2009 में उत्तर प्रदेश सरकार की एजेंसी जल निगम द्वारा लाल के किनारे बांध बनाकर उसके किनारे ताल के तरफ से बोल्डर पिचिंग का काम कराया जा चुका है तो जब बंधा और सड़क बन गया तो फिर उसके बाहर बैट लैंड से प्रभावित एरिया कैसे कहा जा सकता है, दूसरी बात चाहे वह वेटलैंड से प्रभावित है चाहे वह ग्रीनलैंड है चाहे वह
प्रखंडी पार्क है लेकिन उस जमीन के मालिक हम लोग हैं फिर उस जमीन पर बिना अधिग्रहण किये पिलरअपनी जमीनों और मकानों पर किसी कीमत पर नहीं लगने देंगे नागरिक।

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बैठक में मुख्य रूप से राघवेन्द्र प्रताप सिंह, विनोद यादव, विशाल चंद, मैनेजर सिंह, अंजली चंद, विक्रम सिंह, पप्पू निषाद, सत्यदेव साहनी, रमेश श्रीवास्तव,समेत कई लोग थे।

यूपी सिंह पंचतत्व में विलीन शिक्षा जगत में शोक की लहर

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प्रो. सिंह का जीवन शिक्षा और समाज के लिए आदर्श-सीएम

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के पूर्व कुलपति प्रो. उदय प्रताप सिंह (प्रो. यूपी सिंह) का शनिवार सुबह 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे प्रो. सिंह का निधन होते ही शिक्षा जगत, समाज और गोरक्षपीठ परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।
रविवार को राजेन्द्र नगर स्थित आवास पर उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आवास पर पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित कर प्रो. सिंह को नमन किया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार से भेंट कर ढांढस भी बंधाया। इस अवसर पर एडीजी जोन, डीआईजी रेंज, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एसएसपी, महापौर, विधायक, सांसद, एमएलसी, संपादक, प्रधानाचार्य, पूर्व प्रधानाचार्य सहित बड़ी संख्या में लोग आवास पर पहुंचकर अंतिम दर्शन किए।
आवास पर सुबह से ही जनसमूह उमड़ पड़ा था। श्रद्धालुओं, शुभचिंतकों और विद्यार्थियों की आंखें नम थीं। हर कोई अपने प्रिय गुरु, मार्गदर्शक और समाजसेवी को अंतिम बार निहार लेना चाहता था।
इसके बाद दोपहर में भव्य अंतिम यात्रा निकली। फूलों से सजे वाहन पर प्रो. सिंह का पार्थिव शरीर रखा गया। रास्ते भर लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते रहे। गोरखपुर शहर की गलियां “प्रो. यूपी सिंह अमर रहें” और “प्रो. सिंह को श्रद्धांजलि” जैसे नारों से गूंज उठीं।

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राप्ती नदी के तट स्थित नगर निगम के मुक्ति धाम पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. वी.के. सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। घाट पर उमड़े जनसैलाब में सांसद, विधायक, एमएलसी, शिक्षक, संपादक, शुभचिंतक सहित भारी संख्या में लोग शामिल हुए। लोगों ने गमगीन माहौल में नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा। आवास से घाट तक पुलिस बल की तैनाती की गई थी। एसएसपी व अन्य अधिकारियों ने स्वयं मोर्चा संभाला। ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग बनाकर जुलूस मार्ग पर सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की। इससे अंतिम यात्रा बिना किसी अव्यवस्था के शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
मूल रूप से गाजीपुर जिले के निवासी प्रो. यूपी सिंह का जन्म 1 सितंबर 1933 को हुआ था। गणित विषय के विद्वान रहे प्रो. सिंह को गोरक्षपीठ के लगातार तीन पीठाधीश्वरों—महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ और वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ—के सानिध्य में कार्य करने का सौभाग्य मिला।
गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के समय महंत दिग्विजयनाथ द्वारा दान में दिए गए महाराणा प्रताप महाविद्यालय में उनकी पहली नियुक्ति हुई। बाद में वे विश्वविद्यालय में गणित विभाग के आचार्य एवं अध्यक्ष बने। शैक्षिक जीवन में वे पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के कुलपति भी रहे।
वर्ष 2018 में वे महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष नियुक्त हुए और जीवन की अंतिम सांस तक इस पद पर बने रहे। 2021 में परिषद द्वारा स्थापित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में उन्हें प्रति कुलाधिपति की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक और विद्या भारती में भी उन्होंने महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रो. यूपी सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित किए। उनका जीवन विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

कैबिनेट मंत्री एड.आशीष शेलार का रामलीला उत्सव समिति, विक्रोली द्वारा भव्य स्वागत

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मुंबई(राष्ट्र की परम्परा): श्री रामलीला उत्सव समिति, विक्रोली पार्कसाईट द्वारा आयोजित रामलीला मंचन कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री एड. आशीष शेलार का भव्य स्वागत किया गया। यह रामलीला मंचन 22 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक श्रद्धा और भक्ति भाव से किया जा रहा है।प्रमुख अतिथियों का सम्मानमुख्य अतिथि के तौर पर मंच पर उपस्थित एड. आशीष शेलार का स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रभाकर चंद्रशेखर शुक्ल ने शाल, रामनामी शाल, स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ और संकल्प पत्रिका भेंट कर किया।इस अवसर पर मंच पर मौजूद अन्य गणमान्य व्यक्तियों का भी समिति द्वारा सम्मान किया गया। इनमें मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम, श्री सिद्धिविनायक मंदिर के कोषाध्यक्ष एवं मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, आमदार महाराष्ट्र विधान परिषद भाई जगताप, पूर्व कस्टम कमिश्नर के एस मिश्रा, पूर्व आयुक्त सीजीएसटी वी के सुमन, कांग्रेसी नेता चरण सिंह सप्रा, नवभारत के स्थानीय संपादक बृजमोहन पांडेय, पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री महाराष्ट्र सरकार एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा, पूर्व नगरसेवक मोहन तिवारी, शिवसेना नेता जयप्रकाश सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता शिक्षाविद प्रोफेसर डॉ दयानंद तिवारी, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर पांडेय, हमारा महानगर के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार मिश्रा, डॉ अश्विनी पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार एशियन एज सोनू, कांग्रेसी नेता रामगोविन्द यादव, बृजमोहन शर्मा, खलील खोत, नासिर खान, अनिल यादव, आई पी पांडेय, और विजय मिश्रा शामिल थे।लीला मंचन और आगामी कार्यक्रमकार्यक्रम के दौरान दशरथ विलाप, निषाद भेंट, और श्रीराम कैकेई संवाद जैसी प्रमुख लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से देखा।समिति द्वारा रामलीला के अंतिम दिन, 3 अक्टूबर को विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इस दिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक विरहा का जंगी मुकाबला होगा, और शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक नामचीन कवियों व कवियत्रियों द्वारा अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का काव्य पाठ किया जाएगा।समिति ने सभी श्रद्धालु भक्तगणों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएँ।इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष प्रभाकर चंद्रशेखर शुक्ल के साथ दिवाकर मिश्र, सर्वदेव पांडेय, दलजीत पांडेय, आदेश मिश्र, अनिल सिंह, दिव्यप्रकाश तिवारी, भोलानाथ मिश्रा, राजेश सिंह, विमलेश मिश्रा, एड पंकज मिश्रा, रत्नेश शुक्ल, बृजेश शुक्ला, दिनेश पी सिंह, अरविंद शुक्ल, चंद्रमणि सिंह, राजन सिंह, प्रशांत शुक्ल, प्रमुख राहुल शुक्ल, आशीष तिवारी, शुभम सिंह, प्रदीप मिश्रा, आकाश दुबे, ब्रह्मदेव दुबे, एड सुमित पाल, रमापति यादव, तपस्वी चौरसिया, संदीप दुबे, नीरज शुक्ला, अवधेश तिवारी, मोहन श्रीवास्तव, अशोक गुप्ता, राज मिश्रा, प्रेम सिंह, प्रथम शुक्ल, प्रेम तिवारी, हीरा यादव सहित तमाम आम जनमानस श्रद्धालु श्रोतागण उपस्थित रहे।

साहस और बलिदान की जीवंत मिसाल: भगत सिंह की जयंती पर श्रद्धांजलि समारोह

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक और क्रांतिकारी विचारधारा के प्रतीक शहीद भगत सिंह की जयंती पर रविवार को देवरिया नगर के न्यू कॉलोनी स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भाजपा किसान मोर्चा नगर मण्डल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर शहीद-ए-आजम को नमन किया।

इस अवसर पर किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने कहा कि “भगत सिंह साहस और बलिदान के पर्याय हैं। उन्होंने न सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर आज भी हर पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम का संदेश दे रहे हैं।”

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उन्होंने आगे कहा कि “किसान परिवार में जन्मे भगत सिंह मात्र 12 वर्ष की उम्र से आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे और उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। उनका ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा आज भी हर भारतीय के हृदय में जोश भर देता है।”

कार्यक्रम में मुख्य रूप से अम्बिकेश पाण्डेय, सूरज पटेल, अरुण मिश्र, प्रभुनाथ पाण्डेय, विजेंद्र चौहान, वीरेंद्र पाठक, गुलाब यादव, सूरज और राजन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

दशहरा पर्व को लेकर थाना पर चौकीदारों की बैठक

कोपागंज/मऊ(राष्ट्र क़ी परम्परा)
पुलिस अधीक्षक के आदेश के अनुपालन में रविवार को कोपागंज थाना परिसर में चौकीदारों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभारी निरीक्षक ने दशहरा पर्व के मद्देनज़र चौकीदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
प्रभारी निरीक्षक ने सभी चौकीदारों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमणशील रहते हुए दुर्गा पंडालों की सतत निगरानी करेंगे और शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। किसी भी प्रकार की घटना या अप्रिय स्थिति की सूचना तत्काल थाना प्रभारी, संबंधित बीट उप निरीक्षक तथा थाना कार्यालय को तत्काल सूचना देंगे।

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कोपागंज थाना प्रभारी रविंद्र नाथ राय ने स्पष्ट किया कि त्यौहार के दौरान कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा सभी चौकीदारों की जिम्मेदारी है कि वे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

कपिलवस्तु से श्रावस्ती तक: शिक्षकों के हितों की लड़ाई में जुटे डॉ. शरदेन्दु त्रिपाठी

श्रावस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के असिस्टेंट प्रोफेसर और भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक डॉ. शरदेन्दु कुमार त्रिपाठी इन दिनों मिशन गोरखपुर-फैज़ाबाद शिक्षक एमएलसी 2026 को लेकर सक्रिय हैं।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि भगवान बुद्ध को महानतम शिक्षक मानते हुए उनकी प्रेरणा से उन्होंने कपिलवस्तु स्थित पिपरहवा स्तूप से प्राप्त रत्नों की नीलामी रोकवाने की लड़ाई लड़ी थी। इस संघर्ष ने उन्हें लोगों का आशीर्वाद और सहयोग दिलाया, जिसने आगे बढ़ने का साहस दिया।
इसी कड़ी में वे लगातार 17 जिलों का दौरा कर रहे हैं। शिक्षकों, भाजपा पदाधिकारियों और समर्थकों से मिलते हुए उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। हाल ही में श्रावस्ती प्रवास के दौरान एक बौद्ध भिक्षु ने उनके संघर्ष को पहचानते हुए उन्हें आशीर्वाद और मिशन के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. त्रिपाठी का कहना है कि यह उनके लिए तथागत के आशीर्वाद के समान है। उन्होंने विश्वास जताया कि साथियों के सहयोग से सफलता अवश्य मिलेगी।

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भगत सिंह: “इंकलाब से आज तक”

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“क्रांति बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि विचारों की ताकत से आती है।”

भगत सिंह का जीवन केवल एक क्रांतिकारी गाथा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक है। उनकी शहादत से पहले उनके विचारों की ताकत थी, और उनकी शहादत के बाद भी उनका प्रभाव अमर है। आज जब हम आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार से जूझ रहे हैं, तो भगत सिंह के विचार पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उनका सपना केवल ब्रिटिश शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं था; वे एक ऐसे भारत की कल्पना कर रहे थे, जहाँ सबको समान अधिकार और अवसर मिले।

23 मार्च 1931—लाहौर की जेल में तीन नौजवानों के कदमों की आहट सुनाई देती है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव मुस्कुराते हुए फांसीघर की ओर बढ़ रहे हैं। मौत का कोई खौफ नहीं, बल्कि आंखों में एक चमक है—क्रांति की, बदलाव की। वे जानते हैं कि उनके विचार कभी नहीं मरेंगे। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई। लेकिन क्या सच में एक क्रांतिकारी मर सकता है? उनके विचार, उनकी सोच और उनकी प्रेरणा आज भी जीवंत हैं। वे केवल ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नहीं लड़े, बल्कि एक ऐसे भारत के लिए संघर्ष किया, जो समानता, न्याय और स्वतंत्रता पर आधारित हो।

एक विचारक का जन्म

28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह का बचपन किताबों और क्रांतिकारी चर्चाओं के बीच बीता। उनके परिवार में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। लेकिन 1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। उन्होंने महसूस किया कि आजादी केवल एक सपना नहीं, बल्कि संघर्ष की हकीकत बननी चाहिए। भगत सिंह बचपन से ही विद्रोही और जिज्ञासु थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) ने उनके दिल को झकझोर दिया और यह तय कर दिया कि वे केवल दर्शक नहीं बने रह सकते।

क्रांति की राह पर पहला कदम

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़कर भगत सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनी लड़ाई को दिशा दी। सॉन्डर्स हत्याकांड (1928) – लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या की। यह एक क्रांतिकारी संदेश था कि अत्याचार का प्रतिरोध किया जाएगा। असेंबली बम कांड (1929) – भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश संसद में बम फेंका, लेकिन यह किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं था। वे गिरफ्तार होने के लिए आए थे ताकि अपने विचारों को अदालत के मंच से पूरे देश तक पहुंचा सकें। नका मकसद केवल हिंसा नहीं था। उनका इरादा लोगों को जगाना था, उन्हें यह दिखाना था कि आजादी केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी होनी चाहिए।

जेल में विचारों की क्रांति

भगत सिंह केवल बंदूक के क्रांतिकारी नहीं थे, वे विचारों की ताकत में विश्वास रखते थे। जेल में रहते हुए उन्होंने 64 दिनों तक भूख हड़ताल की, जिससे ब्रिटिश सरकार को झुकने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कई लेख लिखे, जिनमें समाजवाद, धर्म और स्वतंत्रता पर उनके विचार साफ दिखाई देते हैं। उनका मानना था कि असली क्रांति तब होगी जब समाज में बदलाव की लहर आएगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि भगत सिंह की असली ताकत उनकी कलम और उनकी सोच थी। जेल में रहते हुए उन्होंने कई लेख लिखे, जिनमें उन्होंने समाजवाद, धर्म, स्वतंत्रता और क्रांति के बारे में अपनी गहरी सोच व्यक्त की। उन्होंने कहा था – “अगर बहरों को सुनाना है, तो आवाज़ को बहुत ऊँचा करना होगा।”

शहादत और अमरता

23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई। लेकिन उनकी मौत केवल एक घटना नहीं थी, यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए ईंधन बन गई। उनकी विचारधारा, उनका साहस और उनकी क्रांतिकारी भावना आज भी जीवंत है। भगत सिंह की विचारधारा केवल ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह एक शोषणविहीन, न्यायसंगत और वैज्ञानिक सोच पर आधारित समाज की वकालत करती थी। उनकी विचारधारा आज भी हमें एक नई दिशा देने में सक्षम है।

आज के समय में भगत सिंह की विचारधारा की प्रासंगिकता

आज जब हम आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव और सांप्रदायिकता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, भगत सिंह की विचारधारा पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि शोषणमुक्त और समानता पर आधारित समाज की कल्पना भी की। भगत सिंह का मानना था कि असली आज़ादी तभी मिलेगी जब जनता शिक्षित और जागरूक होगी। आज भी, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और तर्कशील सोच की जरूरत बनी हुई है। उन्होंने जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव से मुक्त समाज की वकालत की थी। आज भी हमें सामाजिक समरसता और समान अवसरों की दिशा में काम करने की जरूरत है। भगत सिंह ने युवाओं को बदलाव का वाहक माना था। आज, जब देश के युवा विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं, भगत सिंह की विचारधारा उन्हें मार्गदर्शन दे सकती है। भगत सिंह ने एक ऐसी शासन व्यवस्था की कल्पना की थी जो जनता की सेवा करे, न कि अपने स्वार्थ के लिए सत्ता का दुरुपयोग करे। आज के समय में भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग बनी हुई है।

क्या हम उनके सपनों का भारत बना सके?

आज जब हम सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता से लड़ रहे हैं, भगत सिंह के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने केवल राजनीतिक आज़ादी की नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक समानता की भी बात की थी। भगत सिंह केवल एक नाम नहीं, एक विचारधारा हैं
भगत सिंह की क्रांति बंदूक से नहीं, बल्कि विचारों से थी। उन्होंने हमें सिखाया कि वास्तविक बदलाव संघर्ष और बलिदान से आता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है सोचने और सवाल करने की शक्ति। आज, जब हम उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने की बात करते हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि हम उनके सपनों के भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

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“इंकलाब जिंदाबाद!”

डॉo सत्यवान सौरभ,
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार

सड़क और शिक्षा किसी भी राष्ट्र की मज़बूत नींव होती है इसमें भ्रष्टाचार होना दुर्भाग्यपूर्ण है

आलेख

“सड़क और शिक्षा किसी भी राष्ट्र की मज़बूत नींव होती हैं। इनका कमजोर होना केवल विकास की गति को नहीं रोकता, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए दुर्भाग्य साबित होता है।”
राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि उसकी बुनियादी संरचनाओं पर टिकी होती है। इनमें से सड़क और शिक्षा दो ऐसे स्तंभ हैं, जो किसी भी देश की नींव को मज़बूत बनाते हैं। जिस राष्ट्र के पास अच्छी सड़क व्यवस्था और सुदृढ़ शिक्षा तंत्र होता है, वह विकास की दौड़ में सबसे आगे निकलता है।
सड़कें केवल यात्रा और परिवहन का साधन नहीं हैं, बल्कि आर्थिक विकास की धड़कन हैं। एक अच्छी सड़क ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी बाज़ारों से जोड़ती है, व्यापार को गति देती है और उद्योगों को फलने-फूलने का अवसर प्रदान करती है। सड़कें स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक त्वरित पहुँच सुनिश्चित करती हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़क सुविधा होने से किसान अपनी उपज सही समय पर बाज़ार तक पहुँचा सकते हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर सुधरता है
शिक्षा राष्ट्र की आत्मा है। शिक्षित नागरिक न केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति सुनिश्चित करते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी उपयोगी सिद्ध होते हैं। शिक्षा लोगों को जागरूक, कुशल और आत्मनिर्भर बनाती है। यह सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी हथियार है और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन देती है। एक शिक्षित समाज ही लोकतंत्र की मज़बूत नींव रख सकता है।
सड़क और शिक्षा दोनों का आपस में गहरा संबंध है। सड़कें विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुँच आसान बनाती हैं, जिससे शिक्षा का प्रसार होता है। वहीं शिक्षा से प्रशिक्षित लोग सड़क निर्माण, यातायात प्रबंधन और नई तकनीकों के विकास में योगदान देते हैं। इस प्रकार सड़क और शिक्षा एक-दूसरे को पूरक हैं और मिलकर राष्ट्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाते हैं।
किसी भी राष्ट्र के लिए सड़क और शिक्षा नींव के समान हैं। मज़बूत सड़कें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उस राष्ट्र को वैश्विक पटल पर पहचान दिला सकती हैं। इसलिए सरकार और समाज दोनों का दायित्व है कि इन दोनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ एक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का सपना साकार कर सकें।

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लेकिन हमारा दुर्भाग्य है की हमारे देश की शिक्षातंत्र विकसित नही है ।अंग्रेजो के द्वारा स्थापित की गई शिक्षा नीति पूर्णरूपेण कारगर साबित नही हुई, आजादी के बाद की शिक्षा नीति भी अबतक सटीक और कारगर साबित नही हुई है ,प्राइवेट सेक्टर में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है मोटी मोटी फीस गार्जियन दे नही पा रहे है और सरकारी शिक्षातंत्र की बात करे तो सरकारी शिक्षातंत्र की कमर ही टूटी हुई है।अरबो रूपए शिक्षा के नाम पर प्रत्येक राज्य में प्रतिवर्ष जारी होते है मगर परिणाम कुछ नही निकलता।देश की शिक्षातंत्र में भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
देश में जो हाल शिक्षा का है वही हाल सड़क का भी है। देश में सड़के बनती है और दो साल से ज्यादा नही चलती। देखते देखते सड़को में गड्डे पड़ जाते है।ऐसा लगता है कि सारे भ्रष्टाचारी सड़क विभाग में ही जमा है।
शिक्षा और सड़क – दोनों ही समाज और देश की प्रगति की रीढ़ हैं। इन्हें सुधारने के लिए कुछ ठोस कदम ज़रूरी हैं:
शिक्षा व्यवस्था सुधारने के उपाय
शिक्षकों की गुणवत्ता: योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति हो, नियमित प्रशिक्षण मिले।
बुनियादी ढांचा: हर विद्यालय में पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान और डिजिटल साधन हों।
समान शिक्षा: सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच की खाई कम हो।
व्यावहारिक शिक्षा: केवल किताबों तक सीमित न होकर, तकनीकी व कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
जवाबदेही: विद्यालयों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो कि शिक्षा की गुणवत्ता पर समझौता न हो।
सड़क व्यवस्था सुधारने के उपाय
गुणवत्तापूर्ण निर्माण: सस्ती सामग्री से काम न होकर, मानक सामग्री और तकनीक का प्रयोग हो।
निगरानी और जवाबदेही: सड़क बनाने वाली एजेंसियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो।
नियमित मरम्मत: गड्ढों और खराब हिस्सों की समय पर मरम्मत हो।
यातायात प्रबंधन: ट्रैफिक सिग्नल, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फुटपाथ और ओवरब्रिज जैसी सुविधाओं का विस्तार हो।
जनभागीदारी: स्थानीय लोग और पंचायतें सड़क की स्थिति पर सरकार को रिपोर्ट कर सकें।
निष्कर्ष यह है कि ईमानदार नीति, जवाबदेही और जनभागीदारी से ही शिक्षा और सड़क दोनों व्यवस्थाएँ सुधर सकती हैं।

सुनीता कुमारी
बिहार

छठ महापर्व: सूर्य देव की आराधना और भारतीय संस्कृति की पहचान

मन की बात में पीएम मोदी की श्रद्धांजलि: भगत सिंह और लता मंगेशकर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 28 सितंबर को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 126वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए छठ महापर्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर छठ महापर्व को यह वैश्विक मंच मिलता है, तो पूरी दुनिया इसकी भव्यता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समृद्धि को महसूस कर सकेगी।

प्रधानमंत्री ने छठ पूजा की अनूठी परंपराओं को उजागर करते हुए कहा कि यह पर्व सूर्य देव को समर्पित है और इसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की जाती है। यह न केवल हमारे जीवन में संयम और श्रद्धा का संदेश देता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और समृद्धि को भी दर्शाता है।

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पीएम मोदी ने कोलकाता की दुर्गा पूजा के उदाहरण का जिक्र करते हुए बताया कि भारत सरकार के प्रयासों से इसे पहले ही यूनेस्को की वैश्विक सूची में शामिल किया जा चुका है। इसी तरह, छठ महापर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने से दुनिया इसके महत्व को समझ सकेगी और इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित होगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शहीद भगत सिंह और ‘लता दीदी’ को याद करने का भी आग्रह किया, जिनकी जीवनगाथा और योगदान आज भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। साथ ही, यह एपिसोड नए जीएसटी टैक्स स्लैब के लागू होने के बाद पहला कार्यक्रम भी था।

MP IAS Transfer 2025: मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 18 IAS और 8 SAS अफसरों के तबादले

भोपाल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य प्रदेश सरकार ने लंबे इंतजार के बाद देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया। जारी आदेश में 18 IAS और 8 SAS अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इन अफसरों को जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, अपर संचालक और एसडीएम जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई जिलों में अधिकारियों को सीईओ जिला पंचायत के साथ-साथ अपर कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

IAS अफसरों के प्रमुख तबादले

संजना जैन, सीईओ जिला पंचायत सतना → अपर कलेक्टर मैहर

जगदीश कुमार गोमे, उप सचिव संस्कृति विभाग → सीईओ जिला पंचायत सिंगरौली

हरसिमरन प्रीत कौर, अपर मिशन संचालक राज्य शिक्षा केंद्र → सीईओ जिला पंचायत कटनी

अंजली जोसेफ, उप सचिव तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग → सीईओ जिला पंचायत हरदा

सोजान सिंह रावत, नर्मदापुरम → सीईओ जिला पंचायत ग्वालियर

सृष्टि देशमुख गौड़ा → अपर कलेक्टर खंडवा

निधि सिंह → अपर श्रम आयुक्त

हिमांशु जैन, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी → सीईओ जिला पंचायत नर्मदापुरम

सर्जना यादव, अपर कलेक्टर जबलपुर → सीईओ जिला पंचायत सीहोर

वैशाली जैन, एसडीएम रीवा → सीईओ जिला पंचायत रतलाम

दिव्यांशु चौधरी, एसडीएम ग्वालियर डबरा → अपर कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत डिंडोरी

सृजन वर्मा, एसडीएम सिंगरौली → अपर कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत बुरहानपुर

अर्चना कुमारी, एसडीएम शाजापुर → अपर कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत अनूपपुर

शिवम प्रजापति, एसडीएम खंडवा पुनासा → अपर कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत शहडोल

सौम्या आनंद, सहायक कलेक्टर शहडोल → अपर कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत श्योपुर

आकिप खान, सहायक कलेक्टर मंडला → एसडीएम नर्मदापुरम पिपरिया

पंकज वर्मा, सहायक कलेक्टर सिवनी → एसडीएम खंडवा पुनासा

सपना अनुराग जैन, अपर कलेक्टर बुरहानपुर → अपर संचालक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, इंदौर

SAS अफसरों के प्रमुख तबादले

शैलेंद्र सिंह सोलंकी → सीईओ जिला पंचायत सीधी

डॉ. इच्छित गढ़पाले → सीईओ जिला पंचायत राजगढ़

विजय राज → सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी

शैलेंद्र सिंह → सीईओ जिला पंचायत सतना

अनुपमा चौहान → सीईओ जिला पंचायत शाजापुर

नम: शिवाय अरजरिया → सीईओ जिला पंचायत छतरपुर

शाश्वत सिंह मीना → सीईओ जिला पंचायत मंडला

अंजली शाह → सीईओ जिला पंचायत सिवनी

प्रशासनिक फेरबदल का असर

इस बड़े IAS और SAS ट्रांसफर लिस्ट से कई जिलों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर जिला पंचायतों और विकास कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

Jharkhand ACB Raid: अवैध जमीन जमाबंदी मामले में विनय सिंह के 6 ठिकानों पर छापेमारी, अहम दस्तावेज बरामद

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। झारखंड में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने जेल में बंद आईएएस विनय चौबे के करीबी विनय सिंह के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी हजारीबाग में जमीन की अवैध जमाबंदी और अनियमित खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई।

तीन दिन पहले हुई थी गिरफ्तारी

सूत्रों के मुताबिक, एसीबी ने तीन दिन पहले ही विनय सिंह को गिरफ्तार किया था। रविवार सुबह से ही छापेमारी शुरू हुई, जिसमें स्थानीय पुलिस बल भी मौजूद था। छापेमारी के दौरान जमीन से संबंधित कागजात, रजिस्टर और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए।

2013 का मामला

यह मामला साल 2013 का है। उस समय डीसी कार्यालय ने पांच प्लॉट की जमाबंदी रद्द कर दी थी, क्योंकि यह क्षेत्र वन क्षेत्र (Forest Land) में आता था। कानून के मुताबिक वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का गैर-वानिकी कार्य या अतिक्रमण करना सख्त वर्जित है।

लंबे समय से लगे थे आरोप

सूत्रों के अनुसार, विनय सिंह, उनकी पत्नी और नेटवर्क पर लंबे समय से जमीन के अवैध कारोबार और फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। एसीबी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दबंगई के बल पर अवैध प्लॉटिंग और जमाबंदी की जा रही है।

जांच में खुल सकते हैं बड़े राज

एसीबी की इस कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह दस्तावेज जमीन से जुड़े अवैध कारोबार और प्लॉटिंग के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकते हैं।

Rudranath Temple Closing Date 2025: 17 अक्तूबर को बंद होंगे रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, गोपीनाथ मंदिर में होंगे शीतकालीन दर्शन

चमोली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आगामी 17 अक्तूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ के दर्शन शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर (गोपेश्वर) में कर सकेंगे। यहां छह माह तक भगवान की विशेष पूजा-अर्चना होगी।

डोली प्रस्थान करेगी गोपीनाथ मंदिर के लिए

पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी ने जानकारी दी कि 17 अक्तूबर की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजा-अर्चना के बाद रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली गोपीनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी।

बरसात से प्रभावित रही यात्रा

इस वर्ष अधिक बारिश के कारण रुद्रनाथ धाम की यात्रा पर असर पड़ा। हालांकि, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की ओर से हक-हकूकधारी गांवों में इको-टूरिज्म कमेटी (EDC) का गठन करने से तीर्थयात्रियों को बुग्याल क्षेत्रों में रहने और खाने की बेहतर सुविधाएं मिल सकीं।

शीतकाल में होंगे दर्शन

कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु छह माह तक गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर पाएंगे।

BJP की चुनावी तैयारी तेज, राज्यभर में अभियान की रणनीति तैयार

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते कदमों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी तैयारी पूरी तरह से पुख्ता कर दी है। चुनाव आयोग की संभावित तारीखों की घोषणा से पहले ही पार्टी ने 45 नेताओं की चुनाव अभियान समिति का गठन कर दिया है। यह कदम बीजेपी के लिए राज्य में चुनावी रणनीति को सशक्त करने और मतदाताओं तक सीधे संदेश पहुंचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व से लेकर राज्य के वरिष्ठ नेताओं तक की इस समिति का उद्देश्य क्षेत्रीय संगठन मजबूत करना और आगामी चुनाव में पार्टी की पकड़ को और दृढ़ बनाना है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार दौरे के दौरान पटना में कई रणनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया। उन्होंने चुनाव अभियान समिति के नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और पार्टी की ताकत व कमजोरियों का विस्तृत मूल्यांकन किया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिति का गठन बीजेपी के चुनावी प्रयासों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
बीजेपी की 45 नेताओं वाली समिति में शामिल हैं: दिलीप जायसवाल, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, रविशंकर प्रसाद, मंगल पांडेय, अश्विनी कुमार चौबे और शाहनवाज हुसैन।
समिति का उद्देश्य: चुनावी रणनीति बनाना, मतदाताओं तक संदेश पहुंचाना और संगठनात्मक तालमेल बनाए रखना।
अमित शाह की निगरानी में चुनाव अभियान की समीक्षा और पार्टी की ताकत व कमजोरियों का मूल्यांकन।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, समिति का गठन बीजेपी की चुनावी तैयारियों में रणनीतिक मोड़ साबित होगा।

NHIDCL Recruitment 2025: सिविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए 34 पदों पर भर्ती, GATE स्कोर से होगा चयन

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सिविल इंजीनियरिंग पास उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) ने उप प्रबंधक (तकनीकी) के 34 रिक्त पदों पर भर्ती अधिसूचना जारी की है। इच्छुक उम्मीदवार 4 अक्तूबर 2025 से 3 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कुल रिक्तियां और श्रेणीवार विवरण

इस भर्ती अभियान के तहत कुल 34 पदों को भरा जाएगा। इनमें शामिल हैं:

सामान्य (UR): 16 पद, अनुसूचित जाति (SC): 4 पद, अनुसूचित जनजाति (ST): 2 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 9 पद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 3 पद

शैक्षणिक योग्यता

उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री होना जरूरी है।

उम्मीदवार के पास GATE (सिविल इंजीनियरिंग) 2023, 2024 या 2025 का स्कोर होना चाहिए।

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आयु सीमा और छूट

सामान्य उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 34 वर्ष निर्धारित है।

आरक्षित श्रेणियों को नियमानुसार छूट मिलेगी:

SC/ST: 5 वर्ष, OBC (NCL): 3 वर्ष, दिव्यांग (PwBD): UR/EWS के लिए 10 वर्ष, OBC (NCL) के लिए 13 वर्ष, SC/ST के लिए 15 वर्ष

भूतपूर्व सैनिक: 5 वर्ष

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन सिविल इंजीनियरिंग GATE स्कोर के आधार पर किया जाएगा।

उम्मीदवार के 2023, 2024 या 2025 में मिले सर्वोत्तम अंक को माना जाएगा।

यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान हों तो उम्र में बड़े उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर जन्मतिथि भी समान हो, तो नाम के अल्फाबेटिकल क्रम के अनुसार चयन होगा।

IND vs PAK Final: गावस्कर की चेतावनी – “भारत के कई बल्लेबाजों की बड़ी पारी अभी बाकी”

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। एशिया कप 2025 का महामुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को खेला जाएगा। फाइनल से पहले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। उनका मानना है कि अब तक भारतीय टीम की बल्लेबाजी में सिर्फ ओपनर अभिषेक शर्मा ने बड़ी पारियां खेली हैं, लेकिन फाइनल में शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पांड्या जैसे बल्लेबाज भी धमाका कर सकते हैं।

गावस्कर ने कहा – “सूर्यकुमार यादव के बड़े रन आना बाकी हैं। तिलक वर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पांड्या भी फाइनल में मैच का पासा पलट सकते हैं। शुभमन गिल अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं, लेकिन उनसे अब भी एक बड़ी पारी की उम्मीद है। टीम इंडिया की बल्लेबाजी लाइन-अप बेहद मजबूत है और ज्यादा चिंता की बात नहीं है।”

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अभिषेक शर्मा पर गावस्कर का विश्वास

गावस्कर ने फॉर्म में चल रहे अभिषेक शर्मा की जमकर तारीफ की और कहा कि वह फाइनल में शतक जड़ सकते हैं। उन्होंने कहा – “अभिषेक शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने सुपर-4 में तीन अर्धशतक लगाए हैं और पिछली बार शतक से रन आउट होकर चूक गए थे। मुझे यकीन है कि फाइनल में वह बड़ा स्कोर करेंगे और शायद शतक भी लगाएं।”

गौरतलब है कि अभिषेक शर्मा ने सुपर-4 स्टेज में पाकिस्तान (74 रन), बांग्लादेश (75 रन) और श्रीलंका (61 रन) के खिलाफ आक्रामक पारियां खेली थीं।

IND vs PAK Final में हाई-वोल्टेज मुकाबला तय

भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल हमेशा हाई-वोल्टेज होता है। इस बार भी टीम इंडिया की बल्लेबाजी में गहराई और गेंदबाजी में विविधता दोनों हैं। गावस्कर की चेतावनी पाकिस्तान के लिए साफ संकेत है कि फाइनल में उन्हें भारत के हर बल्लेबाज से सतर्क रहना होगा।

शाहीन अफरीदी बनाम अभिषेक शर्मा – मोर्ने मोर्कल का बयान

टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने भी फाइनल से पहले रोमांच बढ़ाते हुए कहा कि एक बार फिर फैंस को अभिषेक शर्मा और शाहीन अफरीदी के बीच दिलचस्प जंग देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा – “शाहीन एक आक्रामक गेंदबाज हैं और अभिषेक भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब भी ये दोनों आमने-सामने आते हैं, दर्शकों का रोमांच बढ़ जाता है। यह क्रिकेट के लिए शानदार है।”

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