Wednesday, July 8, 2026
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मिशन शक्ति-5.0 : एंटी रोमियो स्क्वॉड का बालिका सुरक्षा अभियान, शोहदों पर कसा शिकंजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मिशन शक्ति फेज-5.0 अभियान के तहत जनपद में एंटी रोमियो स्क्वॉड ने बालिका सुरक्षा अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देश पर महिला थाना प्रभारी पूनम मौर्या के नेतृत्व में महिला आरक्षियों एवं पीआरडी कर्मियों की टीम ने सिटी क्षेत्र में भ्रमण कर महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा एवं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया। अभियान के दौरान खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर हेल्पलाइन नंबर 1090, 181, 112, 1076, 1098, 108, 102 और 1930 (साइबर हेल्पलाइन) की जानकारी दी गई। टीम ने लगभग 50 पंपलेट वितरित किए। एंटी रोमियो चेकिंग के दौरान समय माता मंदिर, मेहदावल बाईपास और बैंक चौराहा पर 30 लोगों से पूछताछ की गई। इस दौरान दो युवकों से माफीनामा भरवाकर चेतावनी दी गई और उन्हें छोड़ दिया गया।

मां तरकुलहा देवी मंदिर में भव्य प्रसाद वितरण सम्पन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बुधवार को शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां तरकुलहा देवी मंदिर में भव्य प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मां तरकुलहा देवी धाम चैरिटेबल ट्रस्ट एवं व्यापार मंडल द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाजसेवी पंडित आनंद मिश्रा के साथ समाजसेवी कमलेश मौर्या उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण कार्यक्रम 22 सितंबर 2025 से 1 अक्टूबर 2025 तक चलाया गया। प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे माता रानी को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाता है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से अमरनाथ जयसवाल, सचिन पासवान, सोनू पासवान, धर्मेंद्र जायसवाल, डॉक्टर दिनेश यदुवंशी, व्यापार मंडल के महामंत्री मुन्नीलाल चौहान, बच्चा मिश्रा, सूरज पासवान, संतोष गुप्ता, हरीश राजभर, उज्जवल साहनी,दया शंकर पासवान, दीपक सिंह, राजेंद्र शर्मा, ऋषि कपूर साहनी, हिमाचल साहनी सहित दर्जनों अन्य लोग उपस्थित रहे। भव्य प्रसाद वितरण आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और माता रानी की कृपा का अनुभव किया। ट्रस्ट और व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सभी व्यवस्थाओं को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

“बेंगलुरु में कंजेशन टैक्स का सवाल ही नहीं, अफवाहों पर विराम: उपमुख्यमंत्री का बड़ा बयान

शहर की ट्रैफिक समस्या पर सरकार गंभीर, लेकिन किसी भी तरह का कर लगाने का प्रस्ताव नहीं – नागरिकों के सुझावों पर होगी समीक्षा

बेंगलुरु (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु विकास विभाग के प्रभारी डीके शिवकुमार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘कंजेशन टैक्स’ लगाने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैली खबरें पूरी तरह निराधार हैं और जनता को गुमराह करने वाली हैं।

पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने कहा – “ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार तक नहीं आया है। यह सिर्फ झूठी अफवाह है। कुछ उद्योगपतियों और नागरिकों ने ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर सुझाव जरूर दिए थे, लेकिन उन्हें स्वतः स्वीकार नहीं किया जाएगा। हर सुझाव की समीक्षा होगी।”

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से खबरें आ रही थीं कि शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को देखते हुए सरकार ‘कंजेशन टैक्स’ (Congestion Tax) लागू करने की योजना बना रही है। यहां तक कि आउटर रिंग रोड (ORR) पर पायलट प्रोजेक्ट चलाने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं।

हालांकि, उपमुख्यमंत्री के बयान के बाद स्थिति साफ हो गई है कि फिलहाल बेंगलुरु में कोई ‘भीड़भाड़ कर’ लागू नहीं होने जा रहा है।

अधिवक्ता की ट्रेन से कटकर मौत, भोजन के लिए मित्र के घर जा रहे थे

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। मंगलवार देर शाम एक अधिवक्ता की मुंबई एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसा बंद रेलवे क्रॉसिंग पार करने के दौरान हुआ।

जानकारी के अनुसार तहसील वार्ड नं. 9 निवासी रवि प्रकाश नारायण उपाध्याय (73 वर्ष) पुत्र स्व. उदय नारायण उपाध्याय अपने मित्र के घर भोजन करने नदावर जा रहे थे। उत्तरी ढाले पर बंद फाटक के बावजूद उन्होंने साइकिल से पैदल रेलवे ट्रैक पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान लार रोड की ओर से आ रही मुंबई एलटीटी एक्सप्रेस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे की सूचना गेटमैन ने तुरंत जीआरपी को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक रवि प्रकाश नारायण सलेमपुर तहसील में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे।

इसे पढ़ें –https://rkpnewsup.com/serious-allegations-against-daughter-in-law-father-in-law-files-fir-at-lar-police-station/

“राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी: कांग्रेस ने दर्ज कराई FIR, सियासत में भूचाल”

पटना में FIR दर्ज, कांग्रेस बोली– गनतंत्र थोपने की कोशिश
यूथ कांग्रेस का सवाल– क्या यह धमकी सत्ता की मौन स्वीकृति से दी गई?
असितनाथ तिवारी का तंज– लोकतंत्र नहीं, गनतंत्र में यकीन रखते हैं भाजपा प्रवक्ता

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार की सियासत में बड़ा हंगामा मच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी देने का मामला अब FIR तक पहुँच गया है।जानकारी के मुताबिक, 27 सितंबर 2025 को केरल के एक न्यूज चैनल पर लाइव डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता पिंटू महादेव ने कथित तौर पर राहुल गांधी की छाती में गोली मारने की धमकी दी थी। इसके खिलाफ बिहार प्रदेश यूथ कांग्रेस ने पटना के शास्त्री नगर थाने में मामला दर्ज कराया है।

यूथ कांग्रेस के लीगल सेल अध्यक्ष नंद कुमार सागर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो यह माना जाएगा कि इस तरह की धमकियों को सरकार की चुप्पी और मौन समर्थन प्राप्त है।कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन ने आरोप लगाया कि धमकी शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर दी गई है और यह आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक “सोची-समझी साजिश” हो सकती है।वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने तीखा हमला करते हुए कहा,
“जिन्होंने इंदिरा गांधी को गोलियों से छलनी किया, राजीव गांधी को बम से उड़ाया, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है? गोडसे के मानस पुत्र लोकतंत्र नहीं, बल्कि गनतंत्र में विश्वास रखते हैं। ये देश को बंदूक और तलवार से चलाना चाहते हैं।”

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक नेता पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवाज़ पर हमला है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो यह मान लिया जाएगा कि धमकी सत्ता के इशारे पर दी गई है।

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बहू पर गंभीर आरोप, ससुर ने लार थाने में दर्ज कराई एफआईआर

लार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। लार थाने में एक बहू के खिलाफ उसके ससुर ने गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 351(2) व 308(7) के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर संख्या 0337 वर्ष 2025 शिकायतकर्ता गोरख वर्मा (निवासी सलेमपुर वार्ड नं. 04, सलाहाबाद) की तहरीर पर लिखी गई।

शिकायत में गोरख वर्मा ने अपनी बहू सुषमा वर्मा (पत्नी धनन्जय उर्फ धन्नू वर्मा) पर परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने, प्रताड़ित करने और धन उगाही करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बहू की हरकतों से पूरा परिवार तनाव और भय में है तथा उन्हें अपना पैतृक मकान छोड़कर लार में किराए पर रहना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सुषमा वर्मा ने पहले अपने पति को एक मुकदमे (मु0अ0सं0 272/20, थाना सलेमपुर) में अभियुक्त बनवाकर 20 वर्ष की सजा दिलाई थी। इसके बाद हाल ही में 02 अगस्त 2025 को छोटे पुत्र सतेन्द्र वर्मा के खिलाफ भी फर्जी शिकायत देकर लार थाने में मुकदमा (मु0अ0सं0 276/25, धारा 115(2), 74 बीएनएस) पंजीकृत करा दिया।

लार थाने ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्यवाही कर रही है ।

गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी ने निभाई परंपरा, नौ कन्याओं व बटुकों का पूजन कर कराया प्रसाद

शारदीय नवरात्र की महानवमी पर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मातृ शक्ति का किया पूजन, स्वयं परोसा प्रसाद

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।शारदीय नवरात्र की महानवमी पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में मातृ शक्ति के सम्मान की परंपरा निभाई। गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री ने नौ दुर्गा स्वरूपा कन्याओं व बटुक भैरवों के पांव पखारे, पूजन किया, चुनरी ओढ़ाई, आरती उतारी और उपहार व दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया।

पूजन के दौरान सीएम योगी ने छह माह की एक बच्ची के भी पांव धोकर उसका पूजन किया। दुर्गा सप्तशती के मंत्रोच्चार के बीच कन्याओं को तिलक, माला व अभिषेक कर उन्हें ससम्मान भोजन कराया। वहीं हनुमानजी का वेश धारण किए एक नन्हे बालक को तिलक कर अंगवस्त्र व माला पहनाई।

भोजन कक्ष में मुख्यमंत्री ने स्वयं कन्याओं व बटुकों को मंदिर की रसोई में बना ताजा प्रसाद परोसा और बच्चों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उनकी थालियों में प्रसाद की कमी न रहे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उन्होंने मंदिर प्रबंधन को भी निर्देशित किया। अंत में सभी बालिकाओं और बटुकों को उपहार व दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

महाराज जी (सीएम योगी) का प्यार व स्नेह पाकर बालिकाओं और बटुकों के चेहरे खिल उठे। गोरखनाथ मंदिर का यह वार्षिक आयोजन परंपरा, आस्था और मातृशक्ति के सम्मान का जीवंत उदाहरण बन गया।

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मनमोहक झांकी एवं भक्ति गीतों पर रात भर झूमते रहे श्रद्धालु

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
विकास खंड पथरदेवा क्षेत्र के मलसी चौराहा पर जय मां भवानी क्लब द्वारा शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार की रात भगवती जागरण एवं झांकी का आयोजन किया गया।जिसमें शामिल कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने रात भर झूमते रहे। भगवती जागरण एवं झांकी का आगाज देवी पूजन करके किया।उसके बाद प्रेम झांकी देवरिया के प्रेम,दीपक, किरण,रिया की टीम के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से कार्यक्रम का आगाज किया।इस दौरान गायक प्रेम,दीपक, किरण,रिया द्वारा मां दुर्गा के भजन से आगाज तेरा जगराता है मां.., तूने मुझे बुलाया शेरावालीये.., भर दे झोली मैया भोली.., समेत अनेकों पारंपरिक भक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।इसके साथ ही कार्यक्रम के बीच-बीच में उक्त कलाकारों द्वारा राधा रानी,हनुमान जी,काली,शिव तांडव की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान जगराता में जुटे हजारों महिला पुरुष श्रद्धालूगण भाव विभोर हुए। कार्यक्रम का समापन उक्त कलाकारों ने मां दुर्गा की आरती जग जननी जय के साथ संपन्न किया।इस दौरान आयोजक राजेश जायसवाल एवं थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय,अंकित चौधरी,दुर्गेश कुमार,आकाश जी आरआरएस जिला प्रचारक,पंकज खंड करवा,मिठाई लाल तिवारी,विवेक राय,आयोजक समिति सदस्य राहुल शर्मा,बृजेश कुशवाहा,मनीष जायसवाल, गुड्डू गुप्ता,शंभू पासवान,उमेश कुमार,गणेश आदि मौजूद रहे।

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राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर NMO द्वारा भव्य शिविर का आयोजन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन (NMO) की ओर से विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल एवं CMS डॉ. एच.के. मिश्रा ने फीता काटकर किया।

शिविर की शुरुआत मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने रक्तदान से की, जिसके बाद आम नागरिक भी आगे आए।
रक्तदाताओं का स्वागत जलपान व सम्मान के साथ किया गया। चिकित्सकों ने रक्तदान के महत्व और सामाजिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया।

रक्तदाता: रवि शंकर यादव, अमरेन्द्र प्रताप सिंह, संतोष यादव, चन्दन प्रसाद, डॉ. आकर्ष प्रताप सिंह, आशुतोष अग्रवाल, डॉ. अभिषेक यादव, ऋषिकेश चंद्र कौशिक, अभय कीर्ति शुक्ला आदि।
प्रेरक वक्ता: डॉ. पवन त्रिवेदी (HOD पैथोलॉजी), डॉ. रणधीर सिंह (NMO उपाध्यक्ष),डॉ शालिनी गुप्ता (उपाध्यक्ष) डॉ. सी.पी. तिवारी (संगठन मंत्री), डॉ. अजीत पाल, डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता, डॉ. रमेश सिंह समेत कई चिकित्सक।
NMO सदस्यों का योगदान:
शुभम राव, राकेश यादव, शालिनी चौधरी, दीपक प्रजापति, ज्योत्सना शर्मा, उमा चौधरी, यशी राय सहित टीम ने शिविर को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

अमेरिका 7 साल बाद फिर शटडाउन की चपेट में, हर दिन 400 मिलियन डॉलर का नुकसान

कांग्रेस में गतिरोध, फंडिंग बिल 55-45 से खारिज

7.5 लाख सरकारी कर्मचारी फ़र्लो पर, सांसदों का वेतन जारी रहेगा
2018-19 की तरह फिर दोहराया इतिहास, अर्थव्यवस्था पर खतरा


वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लगभग सात साल बाद अमेरिका एक बार फिर सरकारी शटडाउन की स्थिति में पहुँच गया है। फंडिंग बिल पर मतदान में सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी बहुमत जुटाने में नाकाम रही। मंगलवार को सीनेट में हुआ मतदान 55-45 के अंतर से गिर गया। विधेयक पारित कराने के लिए कम से कम 60 वोटों की आवश्यकता थी।

इस गतिरोध के चलते अमेरिकी आवास एवं शहरी विकास विभाग ने शटडाउन के लिए “कट्टरपंथी वामपंथ” को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, ट्रम्प प्रशासन ने वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि “सरकार को बंद करके वामपंथ अमेरिकी जनता को कष्ट दे रहा है।” इस बयान को लेकर उपभोक्ता अधिकार समूह पब्लिक सिटीजन ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है।

कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुसार, शटडाउन के दौरान अमेरिका को प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा। अनुमान है कि करीब 7,50,000 कर्मचारियों को फ़र्लो पर भेजा जाएगा, हालांकि शटडाउन समाप्त होने के बाद उन्हें पिछला वेतन मिल जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के सांसदों का वेतन इस दौरान भी जारी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शटडाउन जारी रहने पर न केवल संघीय अनुबंध और भुगतान प्रभावित होंगे, बल्कि निजी क्षेत्र की मांग में भी भारी गिरावट आ सकती है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। याद दिला दें कि ट्रम्प के पिछले कार्यकाल (2018-19) में हुआ शटडाउन अमेरिका को लगभग 3 बिलियन डॉलर का नुकसान पहुँचा चुका है।

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शिवा क्लब चंदेल ऑपरेशन थीम पर भव्य पंडाल सजाया: डीएम ने मां दुर्गा की आरती कर पूजा अर्चना की

कन्हैया यादव
बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
आदर्श नगर पंचायत पथरदेवा कस्बा में शिवा क्लब चंदेल द्वारा ऑपरेशन थीम पर भव्य पंडाल सजाया गया है।इस भव्य पंडाल में मंगलवार रात जिलाधिकारी दिव्या मित्तल पहुंचकर पूजा अर्चना एवं भव्य पंडाल में स्थापित मां दुर्गे की प्रतिमाओं का दर्शन किया।इसके साथ ही मां की आरती किया।
पथरदेवा कस्बा में शिवा क्लब चंदेल द्वारा ऑपरेशन थीम पर भव्य पंडाल बनाया गया है ।जहां श्रद्धालु और दर्शकों की भारी भीड़ जुट रही है एवं क्षेत्र में इसकी भव्यता की जोर-जोर से चर्चाएं हो रही है। जिसे देखने के लिए सभी श्रद्धालु दर्शकों की जुट रही है। पंडाल में पहलगाम हमले एवं सेना के पराक्रम को बहुत ही मार्मिक ढंग से सजाया गया है। वही एक पेड़ मां के नाम को भी दर्शाया गया है। पंडाल में देवरिया जिला अधिकारी दिव्या मित्तल पहुंचकर मां दुर्गा प्रतिमाओं का पूजा अर्चना दर्शन एवं भव्य आरती किया। डीएम ने इस अनूठी पहल की प्रशंसा करते हुए समिति के कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया। डीएम ने मेले में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा को लेकर कमेटी द्वारा लगाए गए जगह-जगह सीसी कैमरे को देख प्रशंसा की। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से मेले में पुलिस प्रशासन मुस्तैद है।डीएम ने इस अनूठी पहल के लिए आयोजन एवं सभासद अजय सिंह समेत उनकी पूरी टीम की सराहना किया।इस दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य राणा प्रताप सिंह,सुनील सिंह,दिलीप मद्धेशिया,सुनील शर्मा,कुलदीप सिंह,चंदन गुप्ता,प्रीतम शर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

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IVF: शाप या वरदान? –आप को यह रखना हे ध्यान!?

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक ऐसी तकनीक है, जो बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए संतान सुख की उम्मीद जगाती है। लेकिन यह तकनीक जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही जोखिम भरी, महंगी और विवादास्पद भी है। इसके नकारात्मक पहलू, जैसे स्वास्थ्य जोखिम, आर्थिक बोझ, नैतिक सवाल और अप्राकृतिक हस्तक्षेप, इसे एक जटिल विकल्प बनाते हैं। इस लेख में हम IVF के विभिन्न नकारात्मक पहलुओं, एक वास्तविक असफलता के उदाहरण और ध्यान रखने योग्य बातों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

ट्विन बालक आने की शंका

IVF प्रक्रिया में गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए अक्सर एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थानांतरित किए जाते हैं। इससे एक से अधिक बच्चों (ट्विन्स, ट्रिपलेट्स या उससे अधिक) के जन्म की संभावना बढ़ जाती है। और यह अनुपात आज 25 से 30% हे जो नॉर्मल से ज्यादा हे। यह स्थिति माता और शिशुओं दोनों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। बहु-भ्रूण गर्भावस्था में समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी), कम वजन वाले शिशु, और जन्मजात असामान्यताओं का खतरा बढ़ जाता है। माता को गर्भावधि मधुमेह, उच्च रक्तचाप (प्रीक्लेम्पसिया), और प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, एक से अधिक बच्चों की देखभाल का मानसिक और आर्थिक दबाव दंपतियों के लिए भारी पड़ सकता है। क्या एक बच्चे की चाह में इतने जोखिम लेना वाकई उचित है?

माता का अप्राकृतिक रूप से हुआ गर्भ के साइड इफेक्ट्स

IVF एक अप्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन और दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं माता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) एक आम जटिलता है, जिसमें अंडाशय में सूजन, दर्द और कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक हार्मोनल उपचार से स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और थायरॉइड संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, IVF की प्रक्रिया भावनात्मक रूप से थकाऊ होती है। बार-बार असफल चक्र, चिकित्सा प्रक्रियाओं का दर्द और अनिश्चितता के कारण तनाव, चिंता और अवसाद की संभावना बढ़ जाती है। कई महिलाओं ने IVF के बाद अपने मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट की शिकायत की है। क्या संतान प्राप्ति के लिए माता के स्वास्थ्य को इस हद तक जोखिम में डालना उचित है?

कुदरत के नियम के बारे में

प्रकृति ने प्रजनन के लिए एक निश्चित प्रक्रिया बनाई है, और IVF इस प्राकृतिक चक्र को बाधित करता है। कई धार्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण इसे प्रकृति के नियमों के खिलाफ मानते हैं। IVF के जरिए गर्भधारण करने से न केवल नैतिक सवाल उठते हैं, बल्कि यह भी चिंता होती है कि क्या यह तकनीक लंबे समय में अप्रत्याशित परिणाम लाएगी। उदाहरण के लिए, कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि IVF से जन्मे बच्चों में जन्मजात हृदय दोष, आनुवंशिक असामान्यताएं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम सामान्य बच्चों की तुलना में थोड़ा अधिक हो सकता है। इसके अलावा, भ्रूण चयन और अतिरिक्त भ्रूणों को नष्ट करने की प्रक्रिया नैतिक रूप से कई लोगों के लिए अस्वीकार्य है। क्या हमें प्रकृति के नियमों को चुनौती देनी चाहिए, या इसे स्वीकार करना चाहिए?

खर्च: कम से कम और ज्यादा

IVF एक अत्यंत महंगी प्रक्रिया है। भारत में एक IVF चक्र की लागत औसतन 1 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है, और कई बार एक से अधिक चक्र की आवश्यकता पड़ती है। तो खर्च बढ़ भी शकता हे। कुछ मामलों में, विशेष उपचार या अतिरिक्त प्रक्रियाओं (जैसे ICSI या डोनर एग) के कारण यह लागत 5 लाख रुपये से भी अधिक हो सकती है। इसके बावजूद, IVF की सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। बार-बार असफलता से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि दंपतियों का भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह खर्च असहनीय हो सकता है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस सकते हैं। क्या इतना बड़ा आर्थिक जोखिम हर दंपति के लिए संभव है?

आज के मेडिकल साइंस का तर्क

मेडिकल साइंस IVF को बांझपन का एक क्रांतिकारी समाधान बताता है, लेकिन इसकी सफलता दर उतनी प्रभावशाली नहीं है। विश्व स्तर पर IVF की औसत सफलता दर 30-40% है, और यह माता की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और क्लिनिक की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में यह दर और भी कम हो सकती है। और वैसे भी ऑनलाइन साइट की माने तो भी यह सफलता दर 35 से कम उम्र मे 40-50%, 35 से 37 में 35 से 40%, 38 से 40 की उम्र में 20 से 30%
और 40 से ज्यादा में 15% ही हे।
इसके अलावा, IVF से जुड़ी जटिलताएं, जैसे भ्रूण स्थानांतरण की विफलता, गर्भपात का खतरा और एक्टोपिक प्रेगनेंसी (गर्भाशय के बाहर गर्भ), इसे जोखिम भरा बनाती हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि IVF से जन्मे बच्चों में कुछ दुर्लभ आनुवंशिक और विकासात्मक समस्याओं का जोखिम हो सकता है। मेडिकल साइंस स्वयं इस बात को स्वीकार करता है कि IVF हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। क्या इतनी अनिश्चितता और जोखिम के बावजूद इसे वरदान माना जा सकता है?

वास्तविक असफलता का उदाहरण

IVF की असफलता के कई मामले सामने आए हैं, जो इसकी जटिलता और जोखिमों को उजागर करते हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली की एक 38 वर्षीय महिला का है, जिसका नाम प्रिया (बदला हुआ नाम) है। प्रिया और उनके पति ने 2018 में IVF का सहारा लिया। तीन चक्रों के बाद, जिनमें उन्होंने लगभग 7 लाख रुपये खर्च किए, वह गर्भवती हुईं। लेकिन गर्भावस्था के छठे महीने में स्कैन से पता चला कि बच्चे में गंभीर हृदय दोष है। डॉक्टरों ने सलाह दी कि गर्भपात ही सुरक्षित विकल्प है। इस असफलता ने प्रिया को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया। हार्मोनल उपचार के कारण उनका वजन बढ़ गया, और वह अवसाद में चली गईं। उनके पति ने बताया कि इस प्रक्रिया ने उनके रिश्ते पर भी गहरा प्रभाव डाला। यह उदाहरण दर्शाता है कि IVF की असफलता केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दंपति के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है।

और क्या रखे ध्यान?IVF करवाने से पहले निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना जरूरी है

विश्वसनीय क्लिनिक का

कई क्लिनिक व्यावसायिक लाभ के लिए मरीजों को गलत जानकारी दे सकते हैं। केवल प्रमाणित और अनुभवी डॉक्टरों और क्लिनिकों पर भरोसा करें।

मानसिक तैयारी

IVF की प्रक्रिया लंबी, दर्दनाक और अनिश्चित हो सकती है। असफलता की स्थिति में दंपति को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। काउंसलिंग लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

वैकल्पिक विकल्पों पर विचार

गोद लेना, सरोगेसी या प्राकृतिक उपचार जैसे विकल्प कम जोखिम भरे और सस्ते हो सकते हैं। इन पर विचार करें।

स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी

हार्मोनल उपचार और प्रक्रिया के दीर्घकालिक प्रभावों को समझें। डॉक्टर से सभी संभावित जोखिमों पर खुलकर चर्चा करें।सिर्फ एक या दो सुझाव पे फैसला मत लो।

नैतिक और धार्मिक मूल्य
IVF की प्रक्रिया आपके धार्मिक या नैतिक विश्वासों के अनुरूप है या नहीं, इस पर विचार करें।और खास कर धर्म और कर्म के साथ विज्ञान को जोड़कर देखे।
आर्थिक योजना
IVF के लिए बजट बनाएं और बार-बार असफलता की स्थिति में होने वाले खर्च को ध्यान में रखें।
सामाजिक दबाव
परिवार या समाज के दबाव में आकर जल्दबाजी में निर्णय न लें। यह एक व्यक्तिगत और गंभीर फैसला है। जो की आपकी पूरी शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों को सामने रखकर आगे बढ़ना चाहिए।

अंत में एक सुझाव

IVF निस्संदेह चिकित्सा विज्ञान की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन इसके जोखिम, लागत और नैतिक सवाल इसे एक जटिल और विवादास्पद विकल्प बनाते हैं। यह प्रक्रिया माता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, आर्थिक बोझ डालती है और प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाकर अनिश्चित परिणाम ला सकती है। प्रिया जैसे वास्तविक मामलों से यह स्पष्ट होता है कि IVF की असफलता केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दंपति के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है। क्या एक बच्चे की चाह में इतने जोखिम, तनाव और अनिश्चितता को स्वीकार करना उचित है? IVF का निर्णय लेने से पहले इसके सभी पहलुओं – शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और नैतिक – पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। क्या यह वास्तव में वरदान है, या एक ऐसा शाप जो जीवन को और जटिल बना सकता है? यह सवाल हर दंपति को स्वयं से पूछना चाहिए।

प्रतीक संघवी-राजकोट गुजरात

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आलेखशिक्षा वह खजाना है जिसे कोई चुरा नहीं सकता यह जीवन को दिशा और सफलता को ऊँचाई देती

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“शिक्षा वह खजाना है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।”
इसका अर्थ है कि जो ज्ञान और शिक्षा हम अर्जित करते हैं, वह हमारी सबसे बड़ी पूँजी होती है। धन, वस्तुएँ या पद छीने जा सकते हैं, लेकिन शिक्षा हमेशा हमारे साथ रहती है और हमें जीवन भर सही दिशा दिखाती रहती है।
शिक्षा मानव जीवन का सबसे अनमोल रत्न है। यह ऐसा खजाना है, जिसे जितना बाँटा जाए उतना बढ़ता जाता है। धन-संपत्ति, आभूषण या अन्य भौतिक वस्तुएँ समय के साथ नष्ट हो सकती हैं या किसी के द्वारा छीनी जा सकती हैं, लेकिन शिक्षा ऐसा निवेश है जो जीवन भर साथ रहता है और हर परिस्थिति में व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत बनता है।
शिक्षा का उद्देश्य नौकरी प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं है।शिक्षा मानव का सर्वांगीण विकास करती है।यह व्यक्ति के विचारों, चरित्र और व्यक्तित्व को भी निखारने के साथ उसे सही-गलत का भेद करने,समस्या के कारण को समझने और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करती है।शिक्षा आस-पास के माहौल के साथ ही अपने भीतर के गूढ़ रहस्यों को समझने में मदद करती है। यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत बनाती है।
समाज में भी शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। शिक्षित नागरिक स्वयं की प्रगति के साथ-साथ समाज की प्रगति का आधार होते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक और सक्षम बनाने में योगदान देता है। यही कारण है कि शिक्षा को सबसे बड़ा धन कहा गया है।आज के प्रतिस्पर्धी युग में शिक्षा सफलता की कुंजी है। यह हमें बेहतर अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान करती है। शिक्षा से व्यक्ति में न केवल आर्थिक उन्नति होती है, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास भी संभव होता है।
अतः हमें शिक्षा के महत्व को समझते हुए इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। हमें शिक्षा को आत्मसात करने के साथ ही इसे भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने में अपना योगदान देना चाहिए।
अच्छी शिक्षा से बेहतर कैरियर और आय के अवसर मिलते हैं।शिक्षा सोचने-समझने और संवाद करने की क्षमता को निखारती है जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।यह सही आदर्श, संस्कार और मूल्यों की समझ देती है।
शिक्षित समाज में भेदभाव, अंधविश्वास और रूढ़िवादिता कम होते हैं। शिक्षा समाज में एकता और भाईचारे की भावना को प्रबल करती है।
शिक्षित लोग कानून, नियम और सामाजिक कर्तव्यों का पालन बेहतर तरीके से करते हैं।
शिक्षित मानव संसाधन देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देते हैं। शोध और नवाचार से देश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाते हैं।लोकतंत्र की मजबूती में शिक्षित नागरिक जागरूक मतदाता बनकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।
शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सहयोग दोनों में अहम भूमिका निभाती है।
यह विश्व शांति, स्थिरता और सतत विकास की दिशा में योगदान देती है।
शिक्षा प्राप्त करने के अनेक माध्यम है, जो समय, संसाधन, रुचि और उद्देश्य के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इन्हें मुख्य रूप से निम्न वर्गों में बाँटा जा सकता है:

औपचारिक शिक्षा (Formal Education)
यह संगठित और संस्थागत शिक्षा होती है, जिसमें तय पाठ्यक्रम और स्तर होते हैं।
विद्यालयी शिक्षा – प्राथमिक,उच्च प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक।
उच्च शिक्षा – कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रोफेशनल कोर्स (जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट)।
व्यावसायिक/तकनीकी शिक्षा – आईटीआई, पॉलिटेक्निक, डिप्लोमा कोर्स इत्यादि।

अनौपचारिक शिक्षा (Informal Education)
यह घर, समाज, कार्यस्थल और अनुभव से प्राप्त होती है।परिवार या समुदाय से सीखना।
जीवन के अनुभवों और सामाजिक मेलजोल से ज्ञान अर्जित करना।
सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से सीखना।

गैर-औपचारिक शिक्षा (Non-Formal Education)
यह औपचारिक प्रणाली से बाहर, लचीले तरीके से दी जाती है।
दूरस्थ शिक्षा (Distance Learning) – पत्राचार या ऑनलाइन माध्यम से।
प्रौढ़ शिक्षा (Adult Education) – बुजुर्गों या वयस्कों के लिए साक्षरता अभियान।
स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम – अल्पावधि प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ।

ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा (Online & Digital Learning)
आज के समय में शिक्षा का सबसे उभरता हुआ मार्ग:
ऑनलाइन कोर्स और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म – जैसे Coursera, Udemy, Byju’s, Khan Academy आदि।
वर्चुअल क्लासरूम और वेबिनार।
मोबाइल ऐप्स और डिजिटल पुस्तकालय।

स्व-अध्ययन (Self-learning)
जिसे व्यक्ति अपनी रुचि और प्रयास से करता है।
किताबें, शोध-पत्र और लेख पढ़ना।
यूट्यूब, पॉडकास्ट और ओपन-सोर्स सामग्री से सीखना।
प्रयोग और अभ्यास के माध्यम से कौशल विकसित करना।

व्यावहारिक या अनुभवात्म

शिक्षण
सीखने का यह तरीका “करके सीखना”के द्वारा अर्जित किया जाता है। (Learning by Doing) कहलाता है।इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण,रिसर्च प्रोजेक्ट्स, फील्ड वर्क,स्वयंसेवी कार्य और सामाजिक इसके अन्तर्गत आते है।

चंद्रकांत सी पुजारी -गुजरात

1 अक्टूबर से बदले बड़े नियम: एलपीजी सिलेंडर, यूपीआई ट्रांजैक्शन, रेलवे टिकट बुकिंग और NPS में आया बदलाव

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। अक्टूबर 2025 की शुरुआत के साथ ही कई बड़े नियम बदल गए हैं, जो सीधे आपकी जेब और रोजमर्रा की सुविधाओं पर असर डालेंगे। ये बदलाव रेलवे टिकट बुकिंग, यूपीआई ट्रांजैक्शन, एलपीजी गैस सिलेंडर और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े हैं। अगर आप समय रहते इन नियमों के बारे में जान जाएंगे तो न केवल फायदा उठा सकेंगे बल्कि अनावश्यक परेशानी से भी बचेंगे।

रेलवे टिकट बुकिंग के नियमों में बदलाव

आज से रेलवे रिजर्वेशन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है।

अब टिकट बुकिंग खुलने के पहले 15 मिनट तक केवल वही यात्री टिकट बुक कर सकेंगे, जिनका आधार वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है।

यह नियम आईआरसीटीसी वेबसाइट और मोबाइल ऐप दोनों पर लागू रहेगा।

NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में नया नियम

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नया मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क लागू किया है।

इसके तहत अब नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर के सब्सक्राइबर्स एक ही PAN या PRAN के तहत कई योजनाओं में निवेश कर सकेंगे।

इससे निवेशकों को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिलेगा।

यूपीआई (UPI) से जुड़े बदलाव

आज से UPI P2P (Person-to-Person) मनी रिक्वेस्ट फीचर बंद कर दिया गया है।

इसका मतलब है कि अब कोई भी सीधे किसी से UPI ऐप पर पैसे नहीं मांग सकेगा।

बढ़ती फ्रॉड और धोखाधड़ी को रोकने के लिए NPCI ने यह कदम उठाया है।

अच्छी खबर यह है कि अब UPI से आप 5 लाख रुपये तक का ट्रांजैक्शन कर पाएंगे, जबकि पहले लिमिट केवल 1 लाख रुपये थी।

एलपीजी सिलेंडर के दामों में बदलाव

अक्टूबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा हो गया है।

दिल्ली में पहले 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1580 रुपये का था, जिसकी कीमत बढ़कर 1595.50 रुपये हो गई है।

यानी इसमें 15.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्यों जरूरी है इन बदलावों की जानकारी?

हर महीने की पहली तारीख को होने वाले नियमों में बदलाव सीधे आपके घरेलू बजट, वित्तीय लेन-देन और यात्रा योजनाओं को प्रभावित करते हैं।
अगर आप इन अपडेट्स को समय पर जान लेंगे तो बचत और सुविधा दोनों सुनिश्चित कर सकते हैं।

आरएसएस के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी हुए शामिल, जारी किया स्मारक डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने संघ की 100 साल की गौरवमयी यात्रा को समर्पित एक विशेष स्मारक डाक टिकट और 100 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया।

पीएम मोदी का संबोधन

दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह सौभाग्य है कि हम संघ का शताब्दी वर्ष देख रहे हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं और संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना भी विजयादशमी के दिन ही हुई थी, जो हजारों साल पुरानी राष्ट्र चेतना की परंपरा का पुनरुत्थान है।

विशेष सिक्का और डाक टिकट की झलक

100 रुपये के स्मृति सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की छवि अंकित है।

स्मारक डाक टिकट पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा को दर्शाया गया है।

आरएसएस की 100 साल की यात्रा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. हेडगेवार ने की थी। संगठन का उद्देश्य अनुशासन, सेवा, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।

पिछले 100 वर्षों में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है। स्वयंसेवकों ने बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्यों में सक्रिय सहयोग दिया है। साथ ही, संघ के सहयोगी संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों के सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है।

राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक योगदान

शताब्दी समारोह केवल आरएसएस की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान ही नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा में इसके स्थायी योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी रेखांकित करता है।