Wednesday, July 8, 2026
Home Blog Page 620

ICC इवेंट में भी ‘नो-हैंडशेक’: IND vs PAK मैच से पहले महिला टीम का बड़ा फैसला

0

(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले एक बार फिर ‘नो-हैंडशेक विवाद’ सुर्खियों में है। इस बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी पुरुष टीम की तरह पाकिस्तान खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने का फैसला लिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

एशिया कप 2025 के ग्रुप स्टेज में यह मामला पहली बार सामने आया था, जब सूर्यकुमार यादव ने टॉस के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ी सलमान अली आगा से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मैच खत्म होने पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान टीम से हाथ नहीं मिलाया।

यह विवाद सुपर-4 और फाइनल तक जारी रहा। यहां तक कि फाइनल में जीत के बाद मोहसिन नकवी भारतीय टीम की ट्रॉफी अपने साथ लेकर चले गए, जिससे विवाद और गहरा गया।

बीसीसीआई का रुख

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि बोर्ड सरकार के निर्देशों के अनुसार ही काम करेगा।

टॉस के दौरान हाथ मिलाने की परंपरा नहीं होगी।

मैच रेफरी के साथ कोई औपचारिक फोटोशूट नहीं होगा।

खेल खत्म होने के बाद भी हाथ नहीं मिलाया जाएगा।

यानी, जो पॉलिसी पुरुष टीम ने अपनाई थी, अब वही महिला टीम भी अपनाएगी।

कहां होगा मुकाबला?

भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें 5 अक्टूबर 2025 को कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। पाकिस्तान अपने सभी मैच इसी मैदान पर खेलेगी और अगर टीम फाइनल में पहुंचती है, तो खिताबी भिड़ंत भी यहीं होगी।

फैंस की नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले के साथ-साथ खिलाड़ियों के मैदान पर व्यवहार पर भी रहेंगी।

एशिया कप 2025 का IND vs PAK मैच सिर्फ क्रिकेट मुकाबला नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव का भी प्रतीक बन गया है। अब देखना होगा कि महिला टीम की यह ‘नो-हैंडशेक पॉलिसी’ मैदान पर किस तरह असर डालती है।

सड़क के किनारे बने गड्ढे दे रहे दुर्घटनाओं को दावत, लोगों में आक्रोश

महराजगंज–ठूठीबारी मुख्य मार्ग पर खतरा,कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले की महराजगंज–ठूठीबारी मुख्य मार्ग आज अपनी बदहाल स्थिति के कारण मौत का जाल साबित हो रही है। जगह-जगह पड़े गहरे गड्ढे अब तक कई लोगों को घायल कर चुके हैं। खासतौर पर मिठौरा ब्लॉक के पास सुनील कुमार के मकान के पूरब स्थित नाले के पास और पश्चिम दिशा का हिस्सा हादसे का गढ़ बन चुका है। यहां किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
प्राप्त समाचार के अनुसार बीते कुछ महीनों में इन गड्ढों में गिरकर कम से कम पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। कई राहगीरों ने हाथ–पांव तुड़वा लिए, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और विभाग ने अब तक सुध लेने की जहमत तक नहीं उठाई। आमजन हर दिन भय और जोखिम के साए में सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर घोड़े बेचकर सो रहे हैं। यह मार्ग जिले का सबसे व्यस्ततम मार्ग है, बावजूद इसके यहां न तो चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई है। वाहन चालक हर दिन अपनी और सवारियों की जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि जिस सड़क को विकास की धुरी माना जाता है, उसकी ऐसी दुर्दशा पर जनप्रतिनिधि भी मौन साधे बैठे हैं। चुनावी दौर में विकास का वादा करने वाले नेता सड़क की इस खतरनाक स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर आमजन की जान से खिलवाड़ पर नेताओं की चुप्पी क्यों?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गड्ढों को भरकर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे। लोगों ने प्रशासन से साफ कहा है कि किसी भी संभावित अनहोनी या जनहानि की सीधी जिम्मेदारी शासन प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

लेह में बाजार खुले, LG बोले – “लद्दाख की हर उम्मीद पूरी करेगी केंद्र सरकार”

लेह (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लद्दाख के लेह शहर में गुरुवार को कर्फ्यू में ढील मिलने के बाद बाजारों में रौनक लौट आई। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दुकानों के खुलने से लोगों को बड़ी राहत मिली। एक सप्ताह से बंद बाजारों के खुलने के बाद सड़कों पर वाहनों और पैदल यात्रियों की भीड़ देखी गई।

स्थानीय लोग लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन हाल ही में पुलिस झड़पों में बदल गए थे।

LG कविंदर गुप्ता का आश्वासन

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख की हर उम्मीद को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एएनआई से कहा –
“विरोध कर रहे लद्दाखी नेता प्रशासन से बातचीत कर रहे हैं। माहौल अनुकूल होते ही वार्ता की मेज पर चर्चा शुरू की जाएगी। मैंने अब तक किसी भी बैठक को अस्वीकार नहीं किया है। हम मिलकर समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं।”

गुप्ता ने बताया कि प्रशासन रोजगार सृजन और युवाओं को अवसर देने पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में 1,000 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है और पर्यटन, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर बनाए जा रहे हैं।

MSME और रोजगार के अवसर

एलजी गुप्ता ने बताया कि लद्दाख में 18,000 से ज्यादा MSME इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनमें करीब 50,000 लोग रोजगार पा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि स्थानीय युवाओं को और ज्यादा अवसर दिए जाएं।

कानून-व्यवस्था पर समीक्षा बैठक

बुधवार को एलजी गुप्ता ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्य सचिव पवन कोतवाल, डीजीपी एसडी सिंह जामवाल, डीआईजी श्रीनगर दक्षिण पीके सिंह, लेह के डीसी, एसएसपी संजय कुमार और सेना-पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने एलजी को सुरक्षा परिदृश्य और शांति बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बता दें कि 24 सितंबर को हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जब प्रदर्शनकारियों ने एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय में आग लगा दी थी और पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी थी।

लेह में बाजारों के खुलने से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं, उपराज्यपाल का आश्वासन लद्दाखी नागरिकों को उम्मीद दे रहा है कि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस समाधान निकल सकता है।

राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को कड़ा संदेश: “सर क्रीक में दुस्साहस किया तो बदल जाएगा इतिहास और भूगोल”

कच्छ/गुजरात (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विजयादशमी के अवसर पर पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में किसी तरह का दुस्साहस किया, तो भारत की ओर से ऐसा करारा जवाब दिया जाएगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएँगे।

कच्छ के लक्की नाला सैन्य छावनी में आयोजित बहु-एजेंसी क्षमता अभ्यास और शस्त्र पूजन समारोह में भाग लेते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने हमेशा बातचीत के जरिए सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में खोट है।

पाकिस्तान के इरादों पर जताई चिंता

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी पाकिस्तान सर क्रीक विवाद को हवा दे रहा है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा से सटे क्षेत्रों में सैन्य ढाँचे का विस्तार उसकी नीयत पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा, “भारतीय सेना और बीएसएफ पूरी सतर्कता से सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। यदि पाकिस्तान ने सर क्रीक में कोई दुस्साहस करने की कोशिश की, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा।”

“कराची तक जाने का रास्ता इसी खाड़ी से”

रक्षा मंत्री ने 1965 के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने उस समय लाहौर तक पहुँचने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची तक जाने का रास्ता इसी खाड़ी से होकर गुजरता है।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राजनाथ सिंह ने हाल ही में संपन्न हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने साबित किया कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाली ताकतें चाहे कहीं भी छिपी हों, भारतीय सेना उन्हें ढूंढ़ निकालने और खत्म करने की क्षमता रखती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भारत किसी भी चुनौती के सामने चुप नहीं बैठेगा। चाहे आतंकवाद हो या सीमा पार की साजिशें, भारत हर खतरे का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार है।

राजनाथ सिंह का यह कड़ा बयान पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। सर क्रीक क्षेत्र में बढ़ती सैन्य हलचल के बीच उनका यह बयान भारत की रणनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

संदिग्ध परिस्थितियों में 8 वर्षीय मासूम को लगी गोली, गोरखपुर रेफर

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नदौली में दशहरे के मेले पर मामा के घर आए 8 वर्षीय मासूम को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लग गई। घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद सलेमपुर से देवरिया मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवांश उर्फ गुल्लू (8 वर्ष) पुत्र रंजन यादव, निवासी ग्राम गुदरी थाना भटनी, दो दिन पूर्व दशहरा मेला देखने के लिए अपने मामा के घर बड़ौली आया था। गुरूवार को अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर घर के लोग मौके पर पहुंचे तो शिवांश अचेत अवस्था में पड़ा मिला। परिजन आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने देवरिया मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां से हालत गंभीर होने पर गोरखपुर रेफर कर दिया गया।

इस मामले पर सलेमपुर कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मेंद्र मिश्र ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है, प्रकरण की जांच की जा रही है।

इसे भी पढ़ें –विजयादशमी और नीलकंठ पक्षी : शुभ संकेत की अनूठी कहानी

मोबाइल चोर, जेबकट और साइबर अपराधियों का दुस्साहस बढ़ा — केंद्रीय व राज्य गृह विभागों के लिए चुनौती

गोंदिया-भारत में अपराध का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बदल रहा है। पारंपरिक हिंसक, अपराधों में जहाँ कुछ गिरावट देखी जा रही है,वहीं तकनीक आधारित अपराध, विशेषकर साइबर अपराध, उभरकर सामने आ रहे हैं और आम नागरिकों के लिए नए-नए खतरे पैदा कर रहे हैं।30 सितंबर 2025 को जारी अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) रिपोर्ट 2023 के आँकड़ों ने इस बदलाव की भयावहता को स्पष्ट कर दिया है-पूरे देश में साइबर अपराधों की संख्या में एक वर्ष में लगभग 31फ़ीसदीं की लगाकर 86,420 मामले दर्ज किए गए हैं,यह केवल आँकड़ा नहीं,बल्कि डिजिटल युग में भरोसे की टूटन और संस्थागत तैयारियों की कमज़ोरी का प्रतीक भी है। यह भी देखा गया है कि राष्ट्रीय औसत के पीछे राज्यों की असमान भागीदारी है-कुछ राज्य (विशेषकर कर्नाटक और तेलंगाना) में केसों की भारी तादाद है।कर्नाटक में21,889 और तेलंगाना में 18,236 साइबर अपराध दर्ज किए गए; पाँच राज्यों,कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार,ने मिलकर लगभग तीन- चौथाई साइबर मामलों का बोझ उठाया। जनसंख्या के अनुपात में तेलंगाना शीर्ष पर है, जहाँ प्रति लाख आबादी पर 47.8 मामले दर्ज हुए, जबकि राष्ट्रीय दर 6.2 प्रति लाख तक पहुँच गई (2022 में 4.8 थी)। इन आँकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि समस्या न केवल संख्यात्मक है, बल्कि भौगोलिक रूप से भी केंद्रीकृत है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि शहरी और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले पारंपरिक चोरियों के तरीके आज अधिक परिष्कृत और नेटवर्केड बन गए हैं। मोबाइल-चोरी जेबक़ाट और भीड़ में हाथ साफ कर देने जैसे अपराध अब केवल एक व्यक्ति की चालाकी नहीं रहे; ये अक्सर रैकेट, तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग की मिली-जुली रणनीतियों पर आधारित होते हैं। मैंने स्वयं अनुभव किया कि जैसे हैदराबाद/सिकंदराबाद लोकल बसों में जेबकाट की घटनाएँ मेरे सामने हुई, इसी बदलते परिदृश्य का स्थानीय अनुभव हैं जहाँ अपराधी भीड़, ट्रैफ़िक और यात्रियों की निरक्षरता का लाभ उठाकर कम समय में बड़ी वारदात कर लेते हैं।तकनीक का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर आर्थिक नुक़सान के लिए हो रहा है, और इसका सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ रहा है जो डिजिटल सर्विसेज, नेट-बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट का उपयोग करते हैं।
साथियों बात अगर हम क्यों बढ़ रहे हैं मोबाइल-चोरी और साइबर अपराध? इसको समझने की करें तो (क) डिजिटल पैंठ इंटरनेट- बैंकिंग,यूपी-आई,मोबाइल-वॉलेट ई-कॉमर्स और रिमोट-वर्क में तेजी से वृद्धि ने अधिक लेन-देन और डिजिटल पहचान के टुकड़ों की उपलब्धता बढ़ा दी,जो क्रिमिनल्स के लिए फायदा है।(ख)सोशल इंजीनियरिंग और धोखाधड़ी- लोगों की भरोसेमंदी और डिजिटल साक्षरता में कमी का फायदा उठाकर फ़िशिंग, वॉइस-फिशिंग और नकली वेबसाइट/ऑप-ऐप के जरिए पैसे निकाल लिए जाते हैं। (ग) भीड़ और सार्वजनिक परिवहन का अवसर-लोकल बसों, ट्रेन प्लेटफार्मों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों में अपराधी हाथ की सफाई बड़ी तेज़ी से करते हैं,पीड़ित को महसूस होने पर तक़रीबन बहुत देर हो चुकी होती है।मेंरा हैदराबाद-लोकल अनुभव की तर्ज़ पर ऐसे कई स्थानों पर अपराधी एकदम चुपके से मोबाइल या नकद निकाल लेते हैं। (घ) लॉ इम्प्लीमेंटेशन – गैप-पुलिस और नियामक संस्थाओं की डिजिटल- विशेषज्ञता फास्ट-ट्रेसिंगक्षमता और क्रॉस-जुरिस्डिक्शनल समन्वय सीमित हैं, जिससे अपराधी अक्सर राज्यों के परे जाकर अलग-अलग तरीके अपनाकर बच निकलते हैं।(ङ) आर्थिक-सामाजिक कारण- बेरोज़गारी, असमानता और अपराध नेटवर्क की पेशेवर संरचना भी इस बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे है,अपराधी छोटे-छोटे व्यक्तिगत अपराध से संगठनात्मक नेटवर्क तक विकसित हो रहे हैं।
साथियों बात अगर हम क्या अपराधियों को ‘पब्लिक डोमेन’ में घुमाना चाहिए? नैतिक, कानूनी और व्यावहारिक विचार को समझने की करें तो,मोबाइल चोरों, जेबकाटों और साइबर अपराधियों को सार्वजनिक रूप से घुमाया जाए ताकि जनता उन्हें पहचान सके और सतर्क रहे। यह सुझाव भावनात्मक रूप से समझने योग्य है, पीड़ितों की पीड़ा और नाखुशी इस तरह के कड़े कदमों के पीछे प्रेरक हो सकती है। पर इस विचार को लागू करने से पहले कई कानूनी, मानवाधिकार और सुरक्षा- आधारित प्रश्नों का समाधान ज़रूरी है।(1) किसी भी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करने से पहले यह सैद्धान्तिक और कानूनी सिद्ध होना चाहिए कि वह अपराधी है,गिरफ्तारी, चार्जशीटिंग और अदालत द्वारा दोषसिद्धि से पहले सार्वजनिक पहचान करने से न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है और गलत गिरफ्तारियों से निर्दोष लोगों का जीवन तबाह हो सकता है। (2), सार्वजनिक लिंचिंग और सोशल-शेमिंग के खतरे हैं- प्रबंधन के बिना ऐसी नीतियाँ भीड़ द्वारा हिंसा को बढ़ावा दे सकती हैं।(3) निजता और मानवीय गरिमा के अधिकार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत संरक्षित हैं; राज्य को कानून के दायरे में ही कार्य करना चाहिए।फिर भी, ‘सार्वजनिक जानकारी’ और ‘जन-सुरक्षा सूचना’ के बीच संतुलन बनाना संभव है और ज़रूरी भी।कई लोकतांत्रिक देश और पुलिस-विभाग पीड़ित- सहायता और सार्वजनिक चेतावनी के लक्ष्य से सीमित, नियंत्रित और न्यायिक अनुमति पर अपराधियों/संदिग्धों की तस्वीरें जारी करते हैं,जैसे कि गिरफ्तारी के बाद ‘वांटेड’ सूचनाएँ, सीसीटीवी फुटेज, और सक्रिय चेतावनी संदेश। इस तरह के कदम पारदर्शिता, सावधानी और कानूनी मंज़ूरी से किए जाएँ तो वे उपयोगी साबित हो सकते हैं,पर उनके साथ कानून को शर्तें भी लागू हो सकती है।
साथियों बात अगर हम व्यावहारिक विकल्प जो केंद्र और राज्य गृह विभाग के स्तरपर तुरंत लागू किए जा सकते हैं इसको समझने की करें तो (1) स्मार्ट-वांटेड पोर्टल और मोबाइल अलर्ट्स- पुलिस को एक केंद्रीकृत पोर्टल और मोबाइल अलर्ट सिस्टम चाहिए, जहाँ गिरफ्तारी/जांच के बाद, और न्यायिक मंज़ूरी के अनुरूप, स्थानीय रूप से अपराधियों की तस्वीरें और विवरण अपलोड किए जाएँ,ताकि जनता सचेत रहे। यह सिस्टम जीपीएस -आधारित अलर्ट भेजेगा जब कोई ‘उच्च-जोखिम क्रिमिनल’ किसी नगर के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में दिखाई दे। (2) लोकल-गीत/ऑडियो-विजुअल जागरूकता अभियान: विशेषकर कम-शिक्षित और बुज़ुर्ग लोगों के लिए रेडियो, लोकल- बसों में पोस्टर और ऑडियो संदेश, जो जेबकाट से बचने, मोबाइल सुरक्षित रखने और नकद न दिखाने के व्यवहारिक उपाय बताते हों।(3) पुलिस-टेक स्किलिंग और साइबर- रैपिड- रिस्पॉन्स यूनिट- हर ज़िले में साइबर-विशेषज्ञों की टीम रखें जो धोखाधड़ी के डिजिटल निशानों को तुरंत ट्रेस कर सके और तत्काल कॉल/बैंक-फ्रीज़ जैसे कदम उठा सके।(4) रेल-और-बस सीसीटीवी- इंटीग्रेशन और पोर्टेबल-रैडार: भीड़-भाड़ वाले मार्गों पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी व एएनपीआर सिस्टम, और संदिग्ध पैटर्न का एआई -आधारित अलर्ट, जिससे जेबकाट गैंग्स पहले पकड़े जा सकें।(5) तेज़-प्रति-राज्य समन्वय,-गैंग -आधारित अपराध अक्सर राज्यों के पार होते हैं; इसलिए मेटा-डेटा एक्सचेंज, त्वरित गिरफ्तारियों के लिए समन्वय और साझा फोरेंसिक प्लेटफॉर्म अत्यंत आवश्यक हैँ।
साथियों बात अगर हम मेरा अनुभव,हैदराबाद- सिकंदराबाद बसों में मोबाइल चोरी,जेबकटों की घटनाएं हुई इसको समझने की करें तो,मेरा अनुभव दर्शाता है कि लोकल बसों में जेबकाट- घटनाएँ सक्रिय हैं। इस स्थानीय स्तरपर तत्काल उपायों मेंशामिल होना चाहिए कि बसों में यात्रियों के लिए सुरक्षा-माइक/सीनल (ड्राइवर/ कंडक्टर हटाने का बटन), सीसीटीवी का इंस्टॉल और नियमित मॉनिटरिंग, यात्री- जागरूकता पोस्टर, और बस स्टैंड पर पुलिस-नाके, साथ ही, बसों के दौरान यात्रियों को सलाह दी जानी चाहिए कि, मोबाइल को अग्रभाग के अंदर जेब में रखें, बैक-पॉकेट और खुले हाथ में नकद न रखें, और भीड़ में बैग को शरीर के सामने रखें। स्थानीय ट्रैवल-अथॉरिटीज को यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता बनाना चाहिए और पुलिस- कम्प्लाइंट- काउंटरों को हर मुख्य स्टॉप पर सक्रिय रखना चाहिए।
साथियों बात अगर हम पीड़ित केंद्रित सेवाओं को समझने की करें तो,अक्सर पीड़ितों में शर्म, अनभिज्ञता या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण करीब 50फ़ीसदी से अधिक शिकायत दर्ज नहीं कराते। इसीलिए पीड़ित- केन्द्रित सेवाएँ ज़रूरी हैं-एक-स्टॉप-पॉइंट जहाँ पीड़ित एफआईआर, बैंक-रिपोर्ट, फॉरेंसिक-हेल्प,और साइबर- लॉजिस्टिक्स (जैसे स्टेटमेंट रिट्रीवल, बैंक टेलीकॉम ट्रैस) एक-साथ मिलें। इसके अलावा पीड़ित-काउंसलिंग और फास्ट-रिपेयर (बैंकों के साथ समझौते: फ्रॉड में फंड रीकवरी-स्टैंडर्ड) भी लागू किए जाने चाहिए।
साथियों बात अगर हम नीति- निर्माण के लिए केंद्र एवं राज्य के लिए प्रस्तावित रोडमैप को समझने की करें तो (1)कानूनी स्पष्टताऔरमानक-ऑपरेशनल-प्रोसीजर-जब पुलिस किसी अपराधी की पहचान सार्वजनिक करे, तो किन शर्तों पर और किस समय पर जानकारी जारी होगी इसका संसद/स्टेट लॉ-विभाग द्वारा नियमावलियाँ तय हों।(2)साइबर-फास्ट-ट्रेसिंग नेटवर्क: बैंक, टेक कंपनियों और पुलिस के बीच रीयल-टाइम डेटा-शेयरिंग एमओयू और एपी आई.(3) जन-जागरूकता मिशन: विद्यालय, वृद्धाश्रम, रेलवे, बस स्टेशनों पर सुसंगठित अभियान(4)साइबर-रैपिड-रिस्पॉन्स-फण्ड: पीड़ितों के लिए तात्कालिक वित्तीय सहायता और बैंकों के साथ सहमति द्वारा फंड का आंशिक क्लेम।(5)इंटर-स्टेट गैंग-बस्टिंग यूनिट: जेबकाट/रैकेट-ऑपरेशन के विरुद्ध संयुक्त कार्यनीति।(6)राज्य के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। पड़ोस-निगरानी, सार्वजनिक- शिक्षा सेशन,और ‘सुरक्षित-यात्री’ स्वैच्छिक कार्यक्रम लोकल स्तर पर बहुत प्रभाव डाल सकते हैं। लोगों को सिखाना चाहिए कि वे किस तरह संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट करें, किस तरह बैंक/टेलीकॉम को तुरंत अलर्ट करें, और कैसे व्यक्तिगत डिजिटल- हैबिट्स बदलकर जोखिम कम कर सकते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मोबाइल चोरों, जेबकाटों और साइबर अपराधियों की बढ़ती दुस्साहसियत केवल पुलिस या सरकार का अकेला विषय नहीं है; यह समाज, टेक्नोलॉजी- कंपनियाँ, बैंकिंग-इंडस्ट्री और नागरिकों का संयुक्त संकट है। एनसीआरबी के हालिया आँकड़े 86,420 साइबर मामलों में 31फ़ीसदी की वृद्धि; राज्यवार असमानता; धोखाधड़ी का बढ़ता हिस्सा बतलाते हैं कि समस्या तेज़ी से गंभीर होती जा रही है और उसे बहु-आयामी नीतियों से ही रोका जा सकता है। ‘पब्लिक- डोमेन में घुमाना’ जैसा उपाय भावनात्मक समझदार हो सकता है पर उसे बिना सूचित कानूनी ढाँचे और सुरक्षा-गारंटी के लागू नहीं करना चाहिए,गलतियाँ और दमन दोनों का जोखिम वहाँ अधिक है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ये भी पढ़ें –बलरामपुर में भीषण सड़क हादसा: रामलीला से लौट रहे चार युवकों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल

ये भी पढ़ें –देवरिया PWD विभाग के दो पत्रों ने मचाई खलबली, प्रशासन से जांच की उठी मांग

ये भी पढ़ें –विजयादशमी और नीलकंठ पक्षी : शुभ संकेत की अनूठी कहानी

विजयादशमी और नीलकंठ पक्षी : शुभ संकेत की अनूठी कहानी

(उदय भान )

भारत की संस्कृति और परंपरा में प्रकृति के हर रूप को विशेष महत्व दिया गया है। पर्व-त्योहारों पर कई अनुष्ठान, मान्यताएँ और परंपराएँ हमारे जीवन में सुख-समृद्धि और शुभता के प्रतीक मानी जाती हैं। इन्हीं मान्यताओं में एक प्रमुख परंपरा है विजयादशमी (दशहरा) के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना। लोकमान्यता है कि इस दिन यदि किसी को नीलकंठ पक्षी दिखाई दे जाए, तो आने वाला वर्ष सुख, सफलता और विजय से भर जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी है बल्कि इसके पीछे प्रकृति के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की कहानी भी छिपी है।
नीलकंठ पक्षी की पहचान
नीलकंठ एक सुंदर पक्षी है जिसका वैज्ञानिक नाम Indian Roller है। इसके शरीर पर हरे, नीले और भूरापन लिए पंख होते हैं, जबकि उड़ान भरते समय पंखों में गहरा नीला और आसमानी रंग झलकता है। यह दृश्य इतना मनमोहक होता है कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है। भारत के अधिकांश हिस्सों में यह पक्षी पाया जाता है। नीलकंठ का नाम भगवान शिव के नीलकंठ अवतार से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने हलाहल विष पिया था तो उनका कंठ नीला हो गया था।
विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन की परंपरा
प्राचीन मान्यता है कि विजयादशमी के दिन नीलकंठ का दर्शन करना अत्यंत शुभ फलदायक माना जाता है। लोग इस दिन सुबह-सुबह घर से निकलकर मंदिरों, खेतों और बाग-बगीचों की ओर जाते हैं ताकि नीलकंठ का दर्शन कर सकें। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग दशहरे पर नीलकंठ देखने के लिए उत्सुक रहते हैं।

लोककथाओं में कहा गया है कि दशहरे के दिन नीलकंठ भगवान राम का दूत बनकर उनके साथ लंका विजय की यात्रा पर गया था। जब रामजी युद्ध के लिए निकले तो नीलकंठ मार्गदर्शन करता रहा और विजय की सूचना सबसे पहले उसी ने दी। तभी से इसे विजय और शुभता का प्रतीक माना जाने लगा।
रामायण से जुड़ी कथा
एक रोचक कथा यह भी प्रचलित है—
लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान श्रीराम ने विजय के संकेत के लिए देवताओं की प्रार्थना की थी। उसी समय आकाश में नीलकंठ पक्षी प्रकट हुआ और उसने मधुर स्वर में कलरव किया। इसे शुभ संकेत मानकर श्रीराम ने युद्ध की ओर प्रस्थान किया। युद्ध में विजय मिलने के बाद नीलकंठ को शुभता और विजय का प्रतीक मान लिया गया। तब से दशहरे पर नीलकंठ दर्शन की परंपरा शुरू हुई।
लोक परंपराओं में नीलकंठ
भारत के कई हिस्सों में ग्रामीण लोग नीलकंठ को भगवान शिव और भगवान विष्णु से जोड़ते हैं। कई जगह यह विश्वास है कि दशहरे पर नीलकंठ को देखने से घर-परिवार पर संकट नहीं आता और आने वाला वर्ष अच्छे परिणाम लेकर आता है।
राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में बच्चे दशहरे पर सुबह नीलकंठ को देखने के बाद ही नाश्ता करते हैं।

बिहार और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे घर की छत या मंदिर से देखने का विशेष आयोजन करते हैं।बंगाल और ओडिशा में भी इसे शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है।
नीलकंठ और पर्यावरण का संबंध
जहाँ एक ओर यह पक्षी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण की दृष्टि से भी इसकी अहम भूमिका है। नीलकंठ खेतों में पाए जाने वाले हानिकारक कीड़े-मकोड़ों को खाकर फसलों की रक्षा करता है। यही कारण है कि ग्रामीण किसान इसे शुभ और उपयोगी मानते हैं। दशहरे पर नीलकंठ का दर्शन केवल आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति भी है।
आधुनिक दौर में बदलती तस्वीर
आज शहरीकरण, प्रदूषण और पेड़ों की कटाई के कारण नीलकंठ पक्षी की संख्या में कमी आई है। जहाँ पहले दशहरे पर यह पक्षी आसानी से दिख जाता था, वहीं अब कई शहरों में इसे देख पाना कठिन हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में अब भी लोग इसे देखने का इंतजार करते हैं।
पर्यावरणविदों का मानना है कि नीलकंठ संरक्षण केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे प्रकृति की धरोहर मानकर सुरक्षित रखना जरूरी है।
कहानी : एक गाँव की परंपरा
पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की यह कहानी है। दशहरे की सुबह गाँव के बच्चे बड़ों के साथ पास के जंगल और खेतों में जाते थे। सभी की आँखें आसमान में नीलकंठ को खोजती रहतीं। जैसे ही कोई पक्षी उड़ता, सभी उत्साह से चिल्लाते—”नीलकंठ आया!”
गाँव के बुजुर्ग बताते कि नीलकंठ का दर्शन होते ही आने वाले वर्ष में खेती अच्छी होगी, घर में सुख-समृद्धि आएगी और बीमारियाँ दूर होंगी।
एक बार गाँव के एक गरीब किसान के बेटे ने दशहरे पर नीलकंठ का दर्शन किया। अगले ही वर्ष उस किसान की फसल इतनी अच्छी हुई कि उसका कर्ज उतर गया और घर में समृद्धि आ गई। यह कथा गाँव में आज भी सुनाई जाती है, और हर वर्ष बच्चे उसी उत्साह से नीलकंठ की प्रतीक्षा करते हैं।
विजयादशमी और नीलकंठ : संदेश
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसी दिन नीलकंठ दर्शन की परंपरा हमें यह संदेश देती है कि जीवन में सकारात्मक संकेतों को पहचानना और उन्हें आत्मबल में बदलना आवश्यक है। नीलकंठ का दर्शन केवल आस्था नहीं बल्कि विश्वास है कि कठिनाइयों के बाद भी विजय निश्चित है।
नीलकंठ पक्षी और विजयादशमी का रिश्ता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, संस्कृति और लोक परंपराओं का सुंदर संगम है। एक ओर यह हमें हमारे पौराणिक अतीत से जोड़ता है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है। विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन की परंपरा हमारी संस्कृति की जीवंतता को दर्शाती है और हमें याद दिलाती है कि जीवन में विजय उसी को मिलती है जो शुभ संकेतों को आत्मबल में बदलकर आगे बढ़ता है।

ये भी पढ़ें – विजय दशमी 2025: धर्म, विज्ञान और पौराणिक कथाओं का संगम

ये भी पढ़ें –यूपीएससी चयन प्रक्रिया होगी और अधिक समावेशी, राज्य आयोगों के साथ साझेदारी बढ़ाएगा आयोग

ये भी पढ़ें –लक्ष्य पाने के लिए जुनून को दौड़ाना पड़ेगा

देवरिया PWD विभाग के दो पत्रों ने मचाई खलबली, प्रशासन से जांच की उठी मांग

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने न केवल जनपद की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया बल्कि आम जनता और कार्यकर्ताओं में भी भारी भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी। विभाग द्वारा एक ही दिन में अलग-अलग तारीखों और भिन्न भाषा-भाव वाले दो पत्र जारी किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब विभाग की ओर से सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग पत्र तेजी से वायरल होने लगे। इन पत्रों में तिथियों और आशय में अंतर देखा गया, जिससे स्थानीय स्तर पर चर्चा, परिचर्चा और अखबारों की सुर्खियों का बड़ा विषय बन गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार एक ही विभाग एक ही दिन में अलग-अलग आदेश कैसे जारी कर सकता है।

जानकारों का कहना है कि PWD विभाग की इस चूक ने “जनपद के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को टकरा” दिया है, जिससे स्थिति भयंकर विस्फोट जैसी हो गई है। यदि विभाग ने सोशल मीडिया पर भ्रम पैदा करने वाले दोनों पत्र नहीं डाले होते तो हालात इतने गंभीर न बनते।

जनपद के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यह प्रकरण विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि उच्च स्तर पर जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिरकार यह चूक महज लापरवाही थी या फिर किसी और कारण से दो पत्र जारी किए गए।

जनता और कार्यकर्ताओं में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सही पत्र कौन-सा है और विभाग का वास्तविक निर्णय क्या है। इस कारण कार्यों की दिशा और भविष्य की योजनाओं पर भी अनिश्चितता छा गई है।

जनपद में यह पहली बार नहीं है जब विभागीय पत्रों को लेकर विवाद सामने आया हो, लेकिन इस बार मामला व्यापक स्तर पर सुर्खियों में है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि समय रहते इस भ्रम को दूर नहीं किया गया तो इसका असर सरकारी योजनाओं और जनता के विश्वास दोनों पर पड़ सकता है।

देवरिया PWD विभाग का यह “दो पत्रों का विवाद” अब महज प्रशासनिक भूल भर नहीं रहा, बल्कि जनपद की प्रतिष्ठा और पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

ये भी पढ़ें –लोनी: शराब के पैसे मांगने पर ठेका कर्मचारी पर चाकू से हमला, आरोपी पर मुकदमा दर्ज

ये भी पढ़ें –सिंगापुर में तैराकी के दौरान डूबे असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट

ये भी पढ़ें –“गांधी जयंती पर ज़हर नहीं, सत्य का संदेश:क्या सरकार विपक्ष संग मिलकर‘व्हाट्सएप ज़हर’ पर कसेगी नकेल?”

ये भी पढ़ें –लक्ष्य पाने के लिए जुनून को दौड़ाना पड़ेगा

बलरामपुर में भीषण सड़क हादसा: रामलीला से लौट रहे चार युवकों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल

बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। श्रीदत्तगंज क्षेत्र में रात करीब 12 बजे एक भयानक सड़क हादसा हुआ, जिसमें रामलीला देखकर लौट रहे चार युवकों की मौत हो गई। यह हादसा नगर क्षेत्र के उतरौला मार्ग पर कांदभारी गांव के पास हुआ।

घटना का विवरण
पुलिस के मुताबिक, दो मोटरसाइकिल पर तीन-तीन युवक सवार थे, जिनमें से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहन रखा था। तभी किसी बड़े वाहन ने इन मोटरसाइकिलों को टक्कर मार दी। हादसे में चार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी मौत की पुष्टि की।

मृतकों और घायल युवकों की जानकारी
मृतकों में संजय (25) और अंकित (21) दोनों सगे भाई थे, वहीं सीताराम (22) और गोलू उर्फ संतोष मौर्य (23) भी भाई थे। दोनों परिवारों के लिए यह हादसा भारी त्रासदी बन गया है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है।

गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र कुमार मौर्य (24) और दिनेश मौर्य (23) को क्रमशः लखनऊ और बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

पुलिस जांच
प्रभारी निरीक्षक सुधीर सिंह ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। आसपास के सीसीटीवी फुटेज जांच के लिए लिए गए हैं। फिलहाल, दोनों गंभीर रूप से घायल हैं, इसलिए उनसे पूछताछ नहीं की जा सकी है।

बरेली बवाल का सच: ड्रोन फुटेज से सामने आई धर्मस्थल से पुलिस तक भिड़ंत की पूरी घटना

बरेली (राष्ट्र की परम्परा)। शुक्रवार को मौलाना तौकीर रजा के बुलावे पर हुई हिंसा का वीडियो अब सार्वजनिक हो चुका है। पुलिस ने बुधवार को ड्रोन कैमरों से प्राप्त फुटेज जारी किया, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि किस तरह भीड़ ने धर्मस्थल से उतरकर पुलिस से भिड़ंत की और गलियों में पथराव किया।

वीडियो में क्या दिखा:
ड्रोन फुटेज में धर्मस्थल की छतों पर भीड़ का जमावड़ा, वहां से उतरकर सड़क की ओर भागते उपद्रवी, लाठी-डंडे लेकर भीड़ को रोकने की कोशिश करती पुलिस, और घटनास्थल के आसपास पथराव की झलक साफ नजर आ रही है।

पुलिस का बयान:
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि बवाल वाले दिन तीन सरकारी ड्रोन और कुछ निजी ड्रोन खलील स्कूल व संवेदनशील इलाकों के आसपास उड़ाए गए थे। भीड़ ने इन ड्रोन की उपस्थिति की परवाह नहीं की।

मौलाना तौकीर रजा का ‘किला’ दरक रहा:
मौलाना को फतेहगढ़ जेल भेजे जाने के बाद उसके करीबी साथी और गुर्गों की गिरफ्तारी जारी है। अब तक नौ प्रमुख आरोपियों को जेल भेजा गया है, जिनमें पार्टी प्रवक्ता डॉ. नफीस और उनका बेटा फरमान शामिल हैं। पुलिस ने उन पर दंगा भड़काने और नमाज के समय बदलने का आरोप लगाया है।

पुलिस की जांच में सामने आई बड़ी साजिश:
एसएसपी ने बताया कि मौलाना और उसके साथियों ने 26 सितंबर को बरेली में हिंसा कराने के लिए योजना बनाई थी। मस्जिदों में नमाज का समय बदलने और सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ संदेश फैलाने की जानकारी पुलिस को मिली।

बिहार और बंगाल से बुलाए गए उपद्रवी:
पुलिस जांच में पता चला है कि हिंसा में शामिल कुछ लोग बिहार और बंगाल से बुलाए गए थे। नफीस के बेटे फरमान ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो और संदेश साझा किए, जिससे स्थानीय और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग बरेली पहुंच गए।

अब तक की कार्रवाई:
पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए हैं, 125 नामजद और करीब 3,000 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 82 उपद्रवी गिरफ्तार हो चुके हैं।

लक्ष्य पाने के लिए जुनून को दौड़ाना पड़ेगा

(मिथलेश मिश्र)

छात्रों के लिए अगली सेमेस्टर बोर्ड परीक्षा की सफलता के टिप्स

छात्रों को बोर्ड परीक्षा में सफलता पाने के लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि रणनीति, समय प्रबंधन और मानसिक दृढ़ता की भी आवश्यकता है। जानिए कैसे आप अपने जुनून को सही दिशा में दौड़ा कर परीक्षा में बेहतरीन परिणाम ला सकते हैं।
भूमिका: सफलता की राह में जुनून और तैयारी का संगम
अगली सेमेस्टर बोर्ड परीक्षा छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होती है। यह न केवल अकादमिक योग्यता को परखती है, बल्कि छात्रों की मेहनत, धैर्य और मानसिक क्षमता को भी चुनौती देती है। केवल किताबें पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लक्ष्य तय करना और उसमें पूरी लगन के साथ जुटना ही सफलता की कुंजी है।
छात्रों को समझना होगा कि बोर्ड परीक्षा सिर्फ अंक पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर है। इस समय, सही रणनीति, समय प्रबंधन, आत्म-विश्वास और मानसिक संतुलन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  1. लक्ष्य निर्धारण: सफलता की दिशा
    बिना लक्ष्य के तैयारी मार्ग अधूरा रहता है। छात्रों को चाहिए कि वे पहले अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से पहचानें।
    लंबी अवधि का लक्ष्य: सेमेस्टर में टॉप करने या उच्च अंक प्राप्त करने का लक्ष्य।
    लघु अवधि का लक्ष्य: प्रत्येक विषय और टॉपिक को समय पर पूरा करना।
    टिप्स:
  2. हर दिन के लिए एक स्पष्ट अध्ययन योजना बनाएं।
  3. कठिन विषयों को पहले पढ़ें ताकि समय रहते उन्हें दोहरा सकें।
  4. लक्ष्य को लिख कर अपने अध्ययन क्षेत्र में लगाएं, ताकि वह हमेशा नजर में रहे।
  5. समय प्रबंधन: सफलता का अहम पहलू
    समय की सही योजना के बिना कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षा में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सकता।
    टिप्स: सुबह के समय कठिन विषयों को पढ़ें, क्योंकि दिमाग तरोताजा होता है।
    दोपहर और शाम में आसान और रिवीजन वाले विषय पढ़ें।
    रोजाना 5-10 मिनट का ब्रेक लें ताकि दिमाग थकान से मुक्त रहे।
    सप्ताह में एक दिन टेस्ट या मॉक परीक्षा के लिए निर्धारित करें।
    SEO Insight: समय प्रबंधन से छात्रों की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ती है।
  6. अध्ययन तकनीक: स्मार्ट पढ़ाई
    पढ़ाई का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पढ़ाई की मात्रा।
    स्मार्ट अध्ययन के तरीके:
  7. नोट बनाना: हर विषय के महत्वपूर्ण बिंदुओं को छोटे नोट्स में लिखें।
  8. माइंड मैप: कठिन टॉपिक को विजुअल तरीके से समझने के लिए।
  9. अक्टिव रिवीजन: केवल पढ़ना नहीं, खुद को प्रश्न पूछकर उत्तर देना।
  10. समूह अध्ययन: सहपाठियों के साथ चर्चा करने से समझ बेहतर होती है।
    टिप्स:
    पिछले वर्षों के बोर्ड पेपर हल करें।
    प्रत्येक टॉपिक के अंत में 5-10 प्रश्न स्वयं हल करें।
    कठिन विषय के लिए इंटरनेट या वीडियो ट्यूटोरियल का उपयोग करें।
  11. मानसिक तैयारी और आत्म-विश्वास
    परीक्षा में तनाव से निपटना भी सफलता का अहम हिस्सा है।
    टिप्स:
    रोजाना 10-15 मिनट ध्यान और योग करें।
    सकारात्मक सोच रखें और खुद को लगातार प्रेरित करें।
    गलतियों से घबराएं नहीं, बल्कि उनसे सीखें।
    माता-पिता और शिक्षकों से मार्गदर्शन लें।
    SEO Insight: मानसिक तैयारी से न केवल परीक्षा में प्रदर्शन बेहतर होता है, बल्कि छात्र की तनाव सहनशीलता भी बढ़ती है।
  12. भोजन, नींद और स्वास्थ्य का महत्व
    शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है।
    टिप्स:
    संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शामिल हों।
    पर्याप्त नींद (6-8 घंटे) लें, ताकि दिमाग तरोताजा रहे।
    मोबाइल और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय कम करें।
  13. परीक्षा की रणनीति
    सिर्फ तैयारी करना ही काफी नहीं है, परीक्षा में सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है।
    टिप्स:
  14. प्रश्नपत्र को पहले अच्छी तरह पढ़ें।
  15. आसान सवालों से शुरुआत करें।
  16. समय के अनुसार उत्तर लिखें।
  17. उत्तर पत्रक साफ और सटीक रखें।
  18. मुश्किल सवालों पर अधिक समय न बिताएं, बचा समय रिवीजन के लिए रखें
    छात्रों को चाहिए कि वे महान व्यक्तित्वों और सफल छात्रों की कहानियों से प्रेरणा लें। उदाहरण: महात्मा गांधी, एपीजे अब्दुल कलाम, स्टीव जॉब्स, और बोर्ड परीक्षा में टॉप करने वाले पूर्व छात्र।
    टिप्स:
    प्रेरक किताबें और वीडियो देखें।
    आत्म-विश्वास बढ़ाने वाले उद्धरण लिखकर अध्ययन क्षेत्र में लगाएं।
  19. डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग
    आज के डिजिटल युग में तकनीक का सही इस्तेमाल सफलता में मदद कर सकता है।
    टिप्स:
    ऑनलाइन टेस्ट सीरीज और क्विज़ लें।
    मोबाइल एप्स से विषयों के महत्वपूर्ण नोट्स पढ़ें।
    YouTube और अन्य प्लेटफॉर्म से कठिन विषय को सरल तरीके से सीखें।
  20. अंतिम समय में तैयारी: स्ट्रेटेजी और रिवीजन
    परीक्षा के अंतिम सप्ताह में रणनीति और रिवीजन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
    टिप्स:सभी नोट्स और महत्वपूर्ण फॉर्मूले को दोहराएं।
    मॉक टेस्ट हल करें और अपनी कमजोरी पहचानें।
    तनाव कम करने के लिए हल्की शारीरिक गतिविधि करें।
  21. सफलता का मंत्र: जुनून और निरंतरता
    अंत में, बोर्ड परीक्षा में सफलता पाने का सबसे बड़ा मंत्र है – जुनून और निरंतर प्रयास।
    जुनून: लक्ष्य को पाने की प्रबल इच्छा।
    निरंतरता: रोजाना मेहनत और पढ़ाई में नियमितता।
    आत्म-विश्वास: खुद पर विश्वास और सकारात्मक सोच।
    SEO Insight: जुनून और निरंतरता ही छात्रों को बेहतर परिणाम दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
    बोर्ड परीक्षा में सफलता सिर्फ पढ़ाई का परिणाम नहीं है, बल्कि सही योजना, मानसिक तैयारी, समय प्रबंधन और जुनून का परिणाम है। छात्रों को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें, स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करें और परीक्षा के दौरान आत्म-विश्वास बनाए रखें।

याद रखें, सफलता का मार्ग आसान नहीं होता, लेकिन सही मार्गदर्शन और सही जुनून के साथ हर छात्र अपनी मंजिल तक पहुँच सकता है।

ये भी पढ़ें –यूपीएससी चयन प्रक्रिया होगी और अधिक समावेशी, राज्य आयोगों के साथ साझेदारी बढ़ाएगा आयोग

ये भी पढ़ें –प्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों को दिवाली से पहले मिलेगा बोनस और बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (DA)

ये भी पढ़ें –“गांधी जयंती पर ज़हर नहीं, सत्य का संदेश:क्या सरकार विपक्ष संग मिलकर‘व्हाट्सएप ज़हर’ पर कसेगी नकेल?”

यूपीएससी चयन प्रक्रिया होगी और अधिक समावेशी, राज्य आयोगों के साथ साझेदारी बढ़ाएगा आयोग

0

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने घोषणा की है कि आयोग अब राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि चयन प्रक्रिया अधिक समावेशी, पारदर्शी और जिम्मेदार बन सके। इसके तहत श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों का आदान-प्रदान और फीडबैक तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी के लिए तीन मुख्य लक्ष्य होंगे — समावेशिता, डिजिटल बदलाव और नई पीढ़ी के अभ्यर्थियों से जुड़ाव। उन्होंने यह भी बताया कि अब यूपीएससी में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है।

यूपीएससी शताब्दी वर्ष में डिजिटल बदलाव और नवाचार

यूपीएससी शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोग ने डिजिटल जुड़ाव को मुख्य फोकस बनाया है। अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि यह वर्ष न केवल यूपीएससी की विरासत का उत्सव है, बल्कि संस्थागत सुधार और आउटरीच का अवसर भी है।

इस दिशा में आयोग ने “मेरा यूपीएससी इंटरव्यू” नामक डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है, जहाँ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। आयोग नए लोगो और डिजिटल पहचानों के माध्यम से उम्मीदवारों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करेगा।

समावेशी और आधुनिक चयन प्रक्रिया

अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी का ध्यान केवल परीक्षा प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के साथ मजबूत संबंध बनाने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर होगा।

इसके तहत आयोग राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगा और फीडबैक तंत्र को और मजबूत करेगा।

भविष्य की तैयारी: यूपीएससी शताब्दी वर्ष

यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार ने कहा कि शताब्दी वर्ष संस्थान की विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी का अवसर है।
1 अक्टूबर, 1926 को स्थापित यूपीएससी ने एक शताब्दी से भारत की योग्यता-आधारित सिविल सेवा प्रणाली को नेतृत्व प्रदान किया है।

अब शताब्दी वर्ष में आयोग नई चुनौतियों को अपनाते हुए समावेशी, डिजिटल और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।

विजय दशमी 2025: धर्म, विज्ञान और पौराणिक कथाओं का संगम

जानें इस महापर्व का रहस्य और महत्व

भारत के प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग ढंग से मनाई जाने वाली विजय दशमी, न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। आइए जानें इसकी पौराणिक कथाएं, महत्व और आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता।
विजय दशमी: परिचय
विजय दशमी, जिसे हम दशहरा भी कहते हैं, हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व असुरों पर धर्म की विजय और अच्छाई की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों से मनाया जाता है।
उत्तर भारत में इसे रामलीला और रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में यह दुर्गा पूजा और शस्त्र पूजन के साथ जुड़ा है।
विजय दशमी का धार्मिक महत्व जितना गहन है, उतना ही इसका वैज्ञानिक और सामाजिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
पौराणिक कथाएं और धार्मिक महत्व

  1. रामायण से जुड़ी कथा
    विजय दशमी का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संबंध भगवान राम और रावण के युद्ध से जुड़ा है। रावण ने सीता माता का अपहरण किया था, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए भगवान राम ने लंका पर आक्रमण किया।
    दशमी के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया और धर्म की विजय सुनिश्चित की। इस दिन को याद करते हुए रावण दहन की परंपरा आज भी प्रचलित है। यह संकेत देता है कि अधर्म पर धर्म की विजय अनिवार्य है।
  2. महिषासुर मर्दिनी – देवी दुर्गा की कथा
    दक्षिण और पूर्वी भारत में विजय दशमी दुर्गा पूजा के अंतिम दिन महिषासुर मर्दिनी के रूप में मनाई जाती है।देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया।यह कथा असुरों के अत्याचार और देवी की शक्ति का प्रतीक है।
  3. इस दिन पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा भी रहती है, जिससे जीवन में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  4. महाभारत और शस्त्र पूजन
    कई प्रांतों में विजय दशमी को शस्त्र पूजन के रूप में मनाया जाता है।
    पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने युद्ध से पूर्व अपने शस्त्र और अस्त्रों की पूजा की थी।
    यह परंपरा आज भी सैनिकों, छात्रों और व्यवसायियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण
    धार्मिक पर्व केवल आध्यात्मिक ही नहीं होते, उनका वैज्ञानिक आधार भी होता है। विजय दशमी के कुछ वैज्ञानिक पहलू इस प्रकार हैं:
  5. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
    रावण दहन और दुर्गा पूजा जैसे कार्यक्रम सकारात्मक मानसिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
    यह पर्व नकारात्मक भावनाओं जैसे तनाव, क्रोध और भय को दूर करने में मदद करता है।
  6. सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि
    सामूहिक आयोजन और पूजा सामाजिक एकता और सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
    हालांकि, आधुनिक समय में रावण दहन के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और रसायन पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, पर्यावरण-सम्मत सामग्री का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और टिकाऊ है।
  7. प्राकृतिक संकेत और स्वास्थ्य
    विजय दशमी आश्विन मास में आती है, जो फसल कटाई और मौसम परिवर्तन का समय है।
    इस समय हरे-भरे वातावरण और पौधों से मिलने वाली ताजगी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है।
    विजय दशमी के रीति-रिवाज
  8. रामलीला और रावण दहन – उत्तर भारत में परंपरा।
  9. दुर्गा पूजा और महिषासुर वध – बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में प्रचलित।
  10. शस्त्र पूजन – हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में।
  11. सरस्वती और लक्ष्मी पूजन – शिक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए।
  12. सामाजिक मेल-मिलाप – पर्व के अवसर पर लोग एक-दूसरे से मिलकर सकारात्मकता और भाईचारा बढ़ाते हैं।
    विजय दशमी का आधुनिक महत्व
    सांस्कृतिक पुनर्जागरण: यह पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा की याद दिलाता है।
    सकारात्मक जीवन दृष्टि: अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश समाज में नैतिकता और अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।
    व्यक्तिगत विकास: शस्त्र पूजन और पूजा के माध्यम से व्यक्ति ध्यान, आत्मशक्ति और आत्मविश्वास का विकास करता है।
    पर्यावरण चेतना: पर्यावरण-सम्मत रावण दहन और सामग्री उपयोग से हरित और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
    विजय दशमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति, धर्म, विज्ञान और सामाजिक चेतना का संगम है।
    यह हमें अधर्म पर धर्म की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की जीत और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की सीख देता है।
    धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह पर्व मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
    इस दिन किए गए कार्य, पूजा और मेल-मिलाप हमें सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन प्रदान करते हैं।
    विजय दशमी का संदेश आज के समय में और भी महत्वपूर्ण है – सहिष्णुता, नैतिकता और सामाजिक सामंजस्य।
  13. ये भी पढ़ें –करियर राशिफल 2 अक्टूबर 2025 :
  14. ये भी पढ़ें –साप्ताहिक राशिफल: 29 सितंबर – 5 अक्टूबर 2025
  15. ये भी पढ़ें –उत्तर प्रदेश में आज का मौसम: कई जिलों में बारिश, कुछ जगहों पर धूप
  16. ये भी पढ़ें –पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन: शास्त्रीय संगीत जगत में शोक

“गांधी जयंती पर ज़हर नहीं, सत्य का संदेश:क्या सरकार विपक्ष संग मिलकर‘व्हाट्सएप ज़हर’ पर कसेगी नकेल?”

(ओमकार मणि त्रिपाठी )

2 अक्टूबर पर करोड़ों खर्च कर गांधी स्मृति कार्यक्रम आयोजित होते हैं, परंतु डिजिटल मंचों पर गांधीजी को गाली देने वालों पर कब होगी सख्त कार्रवाई? क्या अब समय आ गया है कि पक्ष-विपक्ष मिलकर शपथ लें—‘गांधी का अपमान नहीं सहेंगे’?
परिचय
महात्मा गांधी—जिन्हें राष्ट्रपिता कहा जाता है, उनके नाम पर 2 अक्टूबर को हर वर्ष पूरा देश श्रद्धा अर्पित करता है। सरकारी खर्च से लेकर विपक्षी दलों की सभाओं तक, गांधी स्मरण के कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। परंतु विडंबना यह है कि उसी दिन और साल भर भरपूर सक्रिय रहने वाली “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” पर गांधीजी के खिलाफ गाली-गलौज, अपमानजनक संदेश और फर्जी कहानियाँ परोसी जाती हैं।
क्या गांधी की जयंती केवल राजनीतिक रस्मअदायगी बनकर रह जाएगी या वास्तव में सरकार और विपक्ष मिलकर जनता को संदेश देंगे कि गांधी का अपमान न शब्दों में होगा, न सोशल मीडिया पर? यही सवाल इस वर्ष की गांधी जयंती पर सबसे बड़ा विमर्श है।
गांधी और आज का समाज :
गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता के मार्ग पर चलते हुए पूरी दुनिया को संदेश दिया था। उनका जीवन संघर्ष सादगी का प्रतीक था। आज की पीढ़ी के लिए गांधी सिर्फ किताबों, सिक्कों और सरकारी भाषणों में सीमित हो गए हैं।
जहां एक ओर स्कूलों-कॉलेजों में गांधी के विचारों पर निबंध प्रतियोगिताएँ होती हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्हें अपमानित करने वाले पोस्ट ट्रेंड करने लगते हैं।
यह दोहरा चरित्र हमारे समाज और राजनीति दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और गांधी विरोधी नैरेटिव

  1. फर्जी किस्से और अफवाहें:
    गांधीजी के निजी जीवन को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले संदेश नियमित रूप से फॉरवर्ड किए जाते हैं।
  2. राजनीतिक स्वार्थ:
    कुछ संगठन और समूह गांधी को नीचा दिखाकर अपने वैचारिक एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।
  3. नफ़रत का कारोबार:
    डिजिटल मंचों पर गांधी-विरोधी कंटेंट से लाइक्स, शेयर और वोटों की राजनीति चमकाई जाती है।
    सरकार की भूमिका
    हर वर्ष 2 अक्टूबर को सरकारी स्तर पर क्लीन इंडिया मिशन से लेकर प्रार्थना सभाओं तक बड़े-बड़े आयोजन होते हैं।
    इन पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांधी विरोध को रोकने के लिए नीतिगत स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं दिखता।
    यदि सरकार सचमुच गांधी का सम्मान चाहती है तो IT एक्ट और सोशल मीडिया रेगुलेशन के तहत गांधी विरोधी कंटेंट फैलाने वालों पर कार्यवाही करनी होगी।
    विपक्ष की जिम्मेदारी
    विपक्ष भी गांधी को अपना नैतिक पूंजी मानता है, परंतु गांधी विरोध पर उसका रवैया भी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है।
    विपक्ष को चाहिए कि संसद से लेकर सड़कों तक सरकार पर दबाव बनाए कि गांधी का अपमान रोकने हेतु ठोस कानून बने।
    सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि गांधीवादी मूल्यों को अपनाकर जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाए।
    शपथ का प्रस्ताव : “गांधी का अपमान नहीं सहेंगे”
    कल्पना कीजिए यदि इस बार गांधी जयंती पर सरकार और विपक्ष एक साथ मंच साझा करें और पूरे देश को संदेश दें कि—
    👉 “गांधी के प्रति न मन में जहर रखेंगे, न सोशल मीडिया पर उगलेंगे।”
    👉 “आज से गांधी का अपमान करने वाले पर सख्त कार्यवाही होगी।”
    तो यह न केवल ऐतिहासिक कदम होगा बल्कि डिजिटल पीढ़ी के लिए भी गांधी की प्रासंगिकता बढ़ाएगा।
    सामाजिक स्तर पर पहल
    स्कूलों-कॉलेजों में “गांधी का डिजिटल सम्मान” अभियान चलाया जा सकता है।
    नागरिक समाज, एनजीओ और बुद्धिजीवी मिलकर फर्जी नैरेटिव का प्रतिकार करें।
    माता-पिता और शिक्षक बच्चों को गांधी के जीवन की वास्तविक कहानियाँ सुनाएं ताकि वे नफरत भरे कंटेंट का शिकार न हों।
    मीडिया की भूमिका
    मीडिया को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
    गांधी जयंती पर सिर्फ सरकारी आयोजन दिखाने से काम नहीं चलेगा।
    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांधी विरोध के असली चेहरे को उजागर करना और जनता को सही तथ्य बताना मीडिया का दायित्व है।
    गांधी जयंती पर करोड़ों रुपये खर्च कर फूल-मालाएँ चढ़ाना आसान है, लेकिन गांधी के सम्मान की रक्षा करना मुश्किल। आज जरूरत है कि सरकार, विपक्ष और समाज मिलकर यह शपथ लें कि—
    गांधी को गाली देने वालों पर न सिर्फ नैतिक दबाव होगा बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी।
    व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर फैल रहे ज़हर को खत्म कर गांधी के सत्य और अहिंसा का संदेश ही आगे बढ़ेगा।
    यह कदम न केवल गांधी की विरासत को बचाएगा बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र को भी मजबूत करेगा।
  4. ये भी पढ़ें –पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन: शास्त्रीय संगीत जगत में शोक
  5. ये भी पढ़ें –आज का इतिहास : 2 अक्टूबर
  6. ये भी पढ़ें –23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में गहरे होंगे द्विपक्षीय संबंध
  7. ये भी पढ़ें –2 अक्टूबर 2025 पंचांग: दशमी तिथि, विजयादशमी का पर्व, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और ग्रह नक्षत्र की संपूर्ण जानकारी

सिंगापुर में तैराकी के दौरान डूबे असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट

सिंगापुर/गुवाहाटी (राष्ट्र की परम्परा)असम के मशहूर गायक और म्यूजिक आइकॉन जुबीन गर्ग की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 19 सितंबर को सिंगापुर के सेंट जॉन्स आइलैंड के पास तैराकी के दौरान डूबने से उनका निधन हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनकी मौत स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई थी, लेकिन अब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हादसा स्विमिंग करते समय हुआ था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच

सिंगापुर पुलिस फोर्स (SPF) ने जुबीन गर्ग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच निष्कर्ष भारत के उच्चायोग को सौंप दिए हैं।

रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना (drowning) बताई गई है।

पुलिस ने साफ किया कि इस मामले में हत्या या किसी तरह की आपराधिक साजिश की आशंका नहीं है।

19 सितंबर को जुबीन गर्ग को पानी से बेहोशी की हालत में निकाला गया और उन्हें सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई।

दोस्तों के साथ यॉट पर थे मौजूद

गायक जुबीन गर्ग 19 सितंबर को एक यॉट पर दर्जनभर दोस्तों और परिचितों के साथ मौजूद थे।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वे लाइफ जैकेट पहनकर पानी में छलांग लगाते नजर आए।

बाद में उन्होंने जैकेट उतार दिया और दोबारा पानी में कूद गए, जिसके बाद यह हादसा हुआ।

यह वीडियो लाखों बार देखा जा चुका है।

असम में शोक और कार्यक्रम रद्द

जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत-सिंगापुर कूटनीतिक संबंधों के 60 वर्ष और इंडिया-आसियान वर्ष के जश्न के तहत आयोजित नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचे थे।

19 से 21 सितंबर तक होने वाला यह भव्य आयोजन उनकी मौत के कारण रद्द कर दिया गया।

असम समेत पूरे उत्तर-पूर्व भारत में शोक की लहर है और उनके चाहने वालों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मैनेजर और आयोजक गिरफ्तार

असम पुलिस ने गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंता को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।

दोनों पर गैर-इरादतन हत्या, आपराधिक साजिश और लापरवाही से मौत का कारण बनने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है।