Wednesday, July 8, 2026
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बरेली बवाल का सच: ड्रोन फुटेज से सामने आई धर्मस्थल से पुलिस तक भिड़ंत की पूरी घटना

बरेली (राष्ट्र की परम्परा)। शुक्रवार को मौलाना तौकीर रजा के बुलावे पर हुई हिंसा का वीडियो अब सार्वजनिक हो चुका है। पुलिस ने बुधवार को ड्रोन कैमरों से प्राप्त फुटेज जारी किया, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि किस तरह भीड़ ने धर्मस्थल से उतरकर पुलिस से भिड़ंत की और गलियों में पथराव किया।

वीडियो में क्या दिखा:
ड्रोन फुटेज में धर्मस्थल की छतों पर भीड़ का जमावड़ा, वहां से उतरकर सड़क की ओर भागते उपद्रवी, लाठी-डंडे लेकर भीड़ को रोकने की कोशिश करती पुलिस, और घटनास्थल के आसपास पथराव की झलक साफ नजर आ रही है।

पुलिस का बयान:
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि बवाल वाले दिन तीन सरकारी ड्रोन और कुछ निजी ड्रोन खलील स्कूल व संवेदनशील इलाकों के आसपास उड़ाए गए थे। भीड़ ने इन ड्रोन की उपस्थिति की परवाह नहीं की।

मौलाना तौकीर रजा का ‘किला’ दरक रहा:
मौलाना को फतेहगढ़ जेल भेजे जाने के बाद उसके करीबी साथी और गुर्गों की गिरफ्तारी जारी है। अब तक नौ प्रमुख आरोपियों को जेल भेजा गया है, जिनमें पार्टी प्रवक्ता डॉ. नफीस और उनका बेटा फरमान शामिल हैं। पुलिस ने उन पर दंगा भड़काने और नमाज के समय बदलने का आरोप लगाया है।

पुलिस की जांच में सामने आई बड़ी साजिश:
एसएसपी ने बताया कि मौलाना और उसके साथियों ने 26 सितंबर को बरेली में हिंसा कराने के लिए योजना बनाई थी। मस्जिदों में नमाज का समय बदलने और सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ संदेश फैलाने की जानकारी पुलिस को मिली।

बिहार और बंगाल से बुलाए गए उपद्रवी:
पुलिस जांच में पता चला है कि हिंसा में शामिल कुछ लोग बिहार और बंगाल से बुलाए गए थे। नफीस के बेटे फरमान ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो और संदेश साझा किए, जिससे स्थानीय और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग बरेली पहुंच गए।

अब तक की कार्रवाई:
पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए हैं, 125 नामजद और करीब 3,000 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 82 उपद्रवी गिरफ्तार हो चुके हैं।

लक्ष्य पाने के लिए जुनून को दौड़ाना पड़ेगा

(मिथलेश मिश्र)

छात्रों के लिए अगली सेमेस्टर बोर्ड परीक्षा की सफलता के टिप्स

छात्रों को बोर्ड परीक्षा में सफलता पाने के लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि रणनीति, समय प्रबंधन और मानसिक दृढ़ता की भी आवश्यकता है। जानिए कैसे आप अपने जुनून को सही दिशा में दौड़ा कर परीक्षा में बेहतरीन परिणाम ला सकते हैं।
भूमिका: सफलता की राह में जुनून और तैयारी का संगम
अगली सेमेस्टर बोर्ड परीक्षा छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होती है। यह न केवल अकादमिक योग्यता को परखती है, बल्कि छात्रों की मेहनत, धैर्य और मानसिक क्षमता को भी चुनौती देती है। केवल किताबें पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लक्ष्य तय करना और उसमें पूरी लगन के साथ जुटना ही सफलता की कुंजी है।
छात्रों को समझना होगा कि बोर्ड परीक्षा सिर्फ अंक पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर है। इस समय, सही रणनीति, समय प्रबंधन, आत्म-विश्वास और मानसिक संतुलन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  1. लक्ष्य निर्धारण: सफलता की दिशा
    बिना लक्ष्य के तैयारी मार्ग अधूरा रहता है। छात्रों को चाहिए कि वे पहले अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से पहचानें।
    लंबी अवधि का लक्ष्य: सेमेस्टर में टॉप करने या उच्च अंक प्राप्त करने का लक्ष्य।
    लघु अवधि का लक्ष्य: प्रत्येक विषय और टॉपिक को समय पर पूरा करना।
    टिप्स:
  2. हर दिन के लिए एक स्पष्ट अध्ययन योजना बनाएं।
  3. कठिन विषयों को पहले पढ़ें ताकि समय रहते उन्हें दोहरा सकें।
  4. लक्ष्य को लिख कर अपने अध्ययन क्षेत्र में लगाएं, ताकि वह हमेशा नजर में रहे।
  5. समय प्रबंधन: सफलता का अहम पहलू
    समय की सही योजना के बिना कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षा में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सकता।
    टिप्स: सुबह के समय कठिन विषयों को पढ़ें, क्योंकि दिमाग तरोताजा होता है।
    दोपहर और शाम में आसान और रिवीजन वाले विषय पढ़ें।
    रोजाना 5-10 मिनट का ब्रेक लें ताकि दिमाग थकान से मुक्त रहे।
    सप्ताह में एक दिन टेस्ट या मॉक परीक्षा के लिए निर्धारित करें।
    SEO Insight: समय प्रबंधन से छात्रों की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ती है।
  6. अध्ययन तकनीक: स्मार्ट पढ़ाई
    पढ़ाई का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पढ़ाई की मात्रा।
    स्मार्ट अध्ययन के तरीके:
  7. नोट बनाना: हर विषय के महत्वपूर्ण बिंदुओं को छोटे नोट्स में लिखें।
  8. माइंड मैप: कठिन टॉपिक को विजुअल तरीके से समझने के लिए।
  9. अक्टिव रिवीजन: केवल पढ़ना नहीं, खुद को प्रश्न पूछकर उत्तर देना।
  10. समूह अध्ययन: सहपाठियों के साथ चर्चा करने से समझ बेहतर होती है।
    टिप्स:
    पिछले वर्षों के बोर्ड पेपर हल करें।
    प्रत्येक टॉपिक के अंत में 5-10 प्रश्न स्वयं हल करें।
    कठिन विषय के लिए इंटरनेट या वीडियो ट्यूटोरियल का उपयोग करें।
  11. मानसिक तैयारी और आत्म-विश्वास
    परीक्षा में तनाव से निपटना भी सफलता का अहम हिस्सा है।
    टिप्स:
    रोजाना 10-15 मिनट ध्यान और योग करें।
    सकारात्मक सोच रखें और खुद को लगातार प्रेरित करें।
    गलतियों से घबराएं नहीं, बल्कि उनसे सीखें।
    माता-पिता और शिक्षकों से मार्गदर्शन लें।
    SEO Insight: मानसिक तैयारी से न केवल परीक्षा में प्रदर्शन बेहतर होता है, बल्कि छात्र की तनाव सहनशीलता भी बढ़ती है।
  12. भोजन, नींद और स्वास्थ्य का महत्व
    शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है।
    टिप्स:
    संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शामिल हों।
    पर्याप्त नींद (6-8 घंटे) लें, ताकि दिमाग तरोताजा रहे।
    मोबाइल और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय कम करें।
  13. परीक्षा की रणनीति
    सिर्फ तैयारी करना ही काफी नहीं है, परीक्षा में सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है।
    टिप्स:
  14. प्रश्नपत्र को पहले अच्छी तरह पढ़ें।
  15. आसान सवालों से शुरुआत करें।
  16. समय के अनुसार उत्तर लिखें।
  17. उत्तर पत्रक साफ और सटीक रखें।
  18. मुश्किल सवालों पर अधिक समय न बिताएं, बचा समय रिवीजन के लिए रखें
    छात्रों को चाहिए कि वे महान व्यक्तित्वों और सफल छात्रों की कहानियों से प्रेरणा लें। उदाहरण: महात्मा गांधी, एपीजे अब्दुल कलाम, स्टीव जॉब्स, और बोर्ड परीक्षा में टॉप करने वाले पूर्व छात्र।
    टिप्स:
    प्रेरक किताबें और वीडियो देखें।
    आत्म-विश्वास बढ़ाने वाले उद्धरण लिखकर अध्ययन क्षेत्र में लगाएं।
  19. डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग
    आज के डिजिटल युग में तकनीक का सही इस्तेमाल सफलता में मदद कर सकता है।
    टिप्स:
    ऑनलाइन टेस्ट सीरीज और क्विज़ लें।
    मोबाइल एप्स से विषयों के महत्वपूर्ण नोट्स पढ़ें।
    YouTube और अन्य प्लेटफॉर्म से कठिन विषय को सरल तरीके से सीखें।
  20. अंतिम समय में तैयारी: स्ट्रेटेजी और रिवीजन
    परीक्षा के अंतिम सप्ताह में रणनीति और रिवीजन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
    टिप्स:सभी नोट्स और महत्वपूर्ण फॉर्मूले को दोहराएं।
    मॉक टेस्ट हल करें और अपनी कमजोरी पहचानें।
    तनाव कम करने के लिए हल्की शारीरिक गतिविधि करें।
  21. सफलता का मंत्र: जुनून और निरंतरता
    अंत में, बोर्ड परीक्षा में सफलता पाने का सबसे बड़ा मंत्र है – जुनून और निरंतर प्रयास।
    जुनून: लक्ष्य को पाने की प्रबल इच्छा।
    निरंतरता: रोजाना मेहनत और पढ़ाई में नियमितता।
    आत्म-विश्वास: खुद पर विश्वास और सकारात्मक सोच।
    SEO Insight: जुनून और निरंतरता ही छात्रों को बेहतर परिणाम दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
    बोर्ड परीक्षा में सफलता सिर्फ पढ़ाई का परिणाम नहीं है, बल्कि सही योजना, मानसिक तैयारी, समय प्रबंधन और जुनून का परिणाम है। छात्रों को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें, स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करें और परीक्षा के दौरान आत्म-विश्वास बनाए रखें।

याद रखें, सफलता का मार्ग आसान नहीं होता, लेकिन सही मार्गदर्शन और सही जुनून के साथ हर छात्र अपनी मंजिल तक पहुँच सकता है।

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यूपीएससी चयन प्रक्रिया होगी और अधिक समावेशी, राज्य आयोगों के साथ साझेदारी बढ़ाएगा आयोग

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने घोषणा की है कि आयोग अब राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि चयन प्रक्रिया अधिक समावेशी, पारदर्शी और जिम्मेदार बन सके। इसके तहत श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों का आदान-प्रदान और फीडबैक तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी के लिए तीन मुख्य लक्ष्य होंगे — समावेशिता, डिजिटल बदलाव और नई पीढ़ी के अभ्यर्थियों से जुड़ाव। उन्होंने यह भी बताया कि अब यूपीएससी में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है।

यूपीएससी शताब्दी वर्ष में डिजिटल बदलाव और नवाचार

यूपीएससी शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोग ने डिजिटल जुड़ाव को मुख्य फोकस बनाया है। अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि यह वर्ष न केवल यूपीएससी की विरासत का उत्सव है, बल्कि संस्थागत सुधार और आउटरीच का अवसर भी है।

इस दिशा में आयोग ने “मेरा यूपीएससी इंटरव्यू” नामक डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है, जहाँ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। आयोग नए लोगो और डिजिटल पहचानों के माध्यम से उम्मीदवारों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करेगा।

समावेशी और आधुनिक चयन प्रक्रिया

अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी का ध्यान केवल परीक्षा प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के साथ मजबूत संबंध बनाने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर होगा।

इसके तहत आयोग राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगा और फीडबैक तंत्र को और मजबूत करेगा।

भविष्य की तैयारी: यूपीएससी शताब्दी वर्ष

यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार ने कहा कि शताब्दी वर्ष संस्थान की विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी का अवसर है।
1 अक्टूबर, 1926 को स्थापित यूपीएससी ने एक शताब्दी से भारत की योग्यता-आधारित सिविल सेवा प्रणाली को नेतृत्व प्रदान किया है।

अब शताब्दी वर्ष में आयोग नई चुनौतियों को अपनाते हुए समावेशी, डिजिटल और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।

विजय दशमी 2025: धर्म, विज्ञान और पौराणिक कथाओं का संगम

जानें इस महापर्व का रहस्य और महत्व

भारत के प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग ढंग से मनाई जाने वाली विजय दशमी, न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। आइए जानें इसकी पौराणिक कथाएं, महत्व और आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता।
विजय दशमी: परिचय
विजय दशमी, जिसे हम दशहरा भी कहते हैं, हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व असुरों पर धर्म की विजय और अच्छाई की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों से मनाया जाता है।
उत्तर भारत में इसे रामलीला और रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में यह दुर्गा पूजा और शस्त्र पूजन के साथ जुड़ा है।
विजय दशमी का धार्मिक महत्व जितना गहन है, उतना ही इसका वैज्ञानिक और सामाजिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
पौराणिक कथाएं और धार्मिक महत्व

  1. रामायण से जुड़ी कथा
    विजय दशमी का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संबंध भगवान राम और रावण के युद्ध से जुड़ा है। रावण ने सीता माता का अपहरण किया था, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए भगवान राम ने लंका पर आक्रमण किया।
    दशमी के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया और धर्म की विजय सुनिश्चित की। इस दिन को याद करते हुए रावण दहन की परंपरा आज भी प्रचलित है। यह संकेत देता है कि अधर्म पर धर्म की विजय अनिवार्य है।
  2. महिषासुर मर्दिनी – देवी दुर्गा की कथा
    दक्षिण और पूर्वी भारत में विजय दशमी दुर्गा पूजा के अंतिम दिन महिषासुर मर्दिनी के रूप में मनाई जाती है।देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया।यह कथा असुरों के अत्याचार और देवी की शक्ति का प्रतीक है।
  3. इस दिन पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा भी रहती है, जिससे जीवन में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  4. महाभारत और शस्त्र पूजन
    कई प्रांतों में विजय दशमी को शस्त्र पूजन के रूप में मनाया जाता है।
    पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने युद्ध से पूर्व अपने शस्त्र और अस्त्रों की पूजा की थी।
    यह परंपरा आज भी सैनिकों, छात्रों और व्यवसायियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण
    धार्मिक पर्व केवल आध्यात्मिक ही नहीं होते, उनका वैज्ञानिक आधार भी होता है। विजय दशमी के कुछ वैज्ञानिक पहलू इस प्रकार हैं:
  5. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
    रावण दहन और दुर्गा पूजा जैसे कार्यक्रम सकारात्मक मानसिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
    यह पर्व नकारात्मक भावनाओं जैसे तनाव, क्रोध और भय को दूर करने में मदद करता है।
  6. सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि
    सामूहिक आयोजन और पूजा सामाजिक एकता और सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
    हालांकि, आधुनिक समय में रावण दहन के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और रसायन पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, पर्यावरण-सम्मत सामग्री का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और टिकाऊ है।
  7. प्राकृतिक संकेत और स्वास्थ्य
    विजय दशमी आश्विन मास में आती है, जो फसल कटाई और मौसम परिवर्तन का समय है।
    इस समय हरे-भरे वातावरण और पौधों से मिलने वाली ताजगी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है।
    विजय दशमी के रीति-रिवाज
  8. रामलीला और रावण दहन – उत्तर भारत में परंपरा।
  9. दुर्गा पूजा और महिषासुर वध – बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में प्रचलित।
  10. शस्त्र पूजन – हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में।
  11. सरस्वती और लक्ष्मी पूजन – शिक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए।
  12. सामाजिक मेल-मिलाप – पर्व के अवसर पर लोग एक-दूसरे से मिलकर सकारात्मकता और भाईचारा बढ़ाते हैं।
    विजय दशमी का आधुनिक महत्व
    सांस्कृतिक पुनर्जागरण: यह पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा की याद दिलाता है।
    सकारात्मक जीवन दृष्टि: अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश समाज में नैतिकता और अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।
    व्यक्तिगत विकास: शस्त्र पूजन और पूजा के माध्यम से व्यक्ति ध्यान, आत्मशक्ति और आत्मविश्वास का विकास करता है।
    पर्यावरण चेतना: पर्यावरण-सम्मत रावण दहन और सामग्री उपयोग से हरित और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
    विजय दशमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति, धर्म, विज्ञान और सामाजिक चेतना का संगम है।
    यह हमें अधर्म पर धर्म की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की जीत और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की सीख देता है।
    धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह पर्व मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
    इस दिन किए गए कार्य, पूजा और मेल-मिलाप हमें सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन प्रदान करते हैं।
    विजय दशमी का संदेश आज के समय में और भी महत्वपूर्ण है – सहिष्णुता, नैतिकता और सामाजिक सामंजस्य।
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“गांधी जयंती पर ज़हर नहीं, सत्य का संदेश:क्या सरकार विपक्ष संग मिलकर‘व्हाट्सएप ज़हर’ पर कसेगी नकेल?”

(ओमकार मणि त्रिपाठी )

2 अक्टूबर पर करोड़ों खर्च कर गांधी स्मृति कार्यक्रम आयोजित होते हैं, परंतु डिजिटल मंचों पर गांधीजी को गाली देने वालों पर कब होगी सख्त कार्रवाई? क्या अब समय आ गया है कि पक्ष-विपक्ष मिलकर शपथ लें—‘गांधी का अपमान नहीं सहेंगे’?
परिचय
महात्मा गांधी—जिन्हें राष्ट्रपिता कहा जाता है, उनके नाम पर 2 अक्टूबर को हर वर्ष पूरा देश श्रद्धा अर्पित करता है। सरकारी खर्च से लेकर विपक्षी दलों की सभाओं तक, गांधी स्मरण के कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। परंतु विडंबना यह है कि उसी दिन और साल भर भरपूर सक्रिय रहने वाली “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” पर गांधीजी के खिलाफ गाली-गलौज, अपमानजनक संदेश और फर्जी कहानियाँ परोसी जाती हैं।
क्या गांधी की जयंती केवल राजनीतिक रस्मअदायगी बनकर रह जाएगी या वास्तव में सरकार और विपक्ष मिलकर जनता को संदेश देंगे कि गांधी का अपमान न शब्दों में होगा, न सोशल मीडिया पर? यही सवाल इस वर्ष की गांधी जयंती पर सबसे बड़ा विमर्श है।
गांधी और आज का समाज :
गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता के मार्ग पर चलते हुए पूरी दुनिया को संदेश दिया था। उनका जीवन संघर्ष सादगी का प्रतीक था। आज की पीढ़ी के लिए गांधी सिर्फ किताबों, सिक्कों और सरकारी भाषणों में सीमित हो गए हैं।
जहां एक ओर स्कूलों-कॉलेजों में गांधी के विचारों पर निबंध प्रतियोगिताएँ होती हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्हें अपमानित करने वाले पोस्ट ट्रेंड करने लगते हैं।
यह दोहरा चरित्र हमारे समाज और राजनीति दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और गांधी विरोधी नैरेटिव

  1. फर्जी किस्से और अफवाहें:
    गांधीजी के निजी जीवन को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले संदेश नियमित रूप से फॉरवर्ड किए जाते हैं।
  2. राजनीतिक स्वार्थ:
    कुछ संगठन और समूह गांधी को नीचा दिखाकर अपने वैचारिक एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।
  3. नफ़रत का कारोबार:
    डिजिटल मंचों पर गांधी-विरोधी कंटेंट से लाइक्स, शेयर और वोटों की राजनीति चमकाई जाती है।
    सरकार की भूमिका
    हर वर्ष 2 अक्टूबर को सरकारी स्तर पर क्लीन इंडिया मिशन से लेकर प्रार्थना सभाओं तक बड़े-बड़े आयोजन होते हैं।
    इन पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांधी विरोध को रोकने के लिए नीतिगत स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं दिखता।
    यदि सरकार सचमुच गांधी का सम्मान चाहती है तो IT एक्ट और सोशल मीडिया रेगुलेशन के तहत गांधी विरोधी कंटेंट फैलाने वालों पर कार्यवाही करनी होगी।
    विपक्ष की जिम्मेदारी
    विपक्ष भी गांधी को अपना नैतिक पूंजी मानता है, परंतु गांधी विरोध पर उसका रवैया भी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है।
    विपक्ष को चाहिए कि संसद से लेकर सड़कों तक सरकार पर दबाव बनाए कि गांधी का अपमान रोकने हेतु ठोस कानून बने।
    सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि गांधीवादी मूल्यों को अपनाकर जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाए।
    शपथ का प्रस्ताव : “गांधी का अपमान नहीं सहेंगे”
    कल्पना कीजिए यदि इस बार गांधी जयंती पर सरकार और विपक्ष एक साथ मंच साझा करें और पूरे देश को संदेश दें कि—
    👉 “गांधी के प्रति न मन में जहर रखेंगे, न सोशल मीडिया पर उगलेंगे।”
    👉 “आज से गांधी का अपमान करने वाले पर सख्त कार्यवाही होगी।”
    तो यह न केवल ऐतिहासिक कदम होगा बल्कि डिजिटल पीढ़ी के लिए भी गांधी की प्रासंगिकता बढ़ाएगा।
    सामाजिक स्तर पर पहल
    स्कूलों-कॉलेजों में “गांधी का डिजिटल सम्मान” अभियान चलाया जा सकता है।
    नागरिक समाज, एनजीओ और बुद्धिजीवी मिलकर फर्जी नैरेटिव का प्रतिकार करें।
    माता-पिता और शिक्षक बच्चों को गांधी के जीवन की वास्तविक कहानियाँ सुनाएं ताकि वे नफरत भरे कंटेंट का शिकार न हों।
    मीडिया की भूमिका
    मीडिया को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
    गांधी जयंती पर सिर्फ सरकारी आयोजन दिखाने से काम नहीं चलेगा।
    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांधी विरोध के असली चेहरे को उजागर करना और जनता को सही तथ्य बताना मीडिया का दायित्व है।
    गांधी जयंती पर करोड़ों रुपये खर्च कर फूल-मालाएँ चढ़ाना आसान है, लेकिन गांधी के सम्मान की रक्षा करना मुश्किल। आज जरूरत है कि सरकार, विपक्ष और समाज मिलकर यह शपथ लें कि—
    गांधी को गाली देने वालों पर न सिर्फ नैतिक दबाव होगा बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी।
    व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर फैल रहे ज़हर को खत्म कर गांधी के सत्य और अहिंसा का संदेश ही आगे बढ़ेगा।
    यह कदम न केवल गांधी की विरासत को बचाएगा बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र को भी मजबूत करेगा।
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सिंगापुर में तैराकी के दौरान डूबे असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट

सिंगापुर/गुवाहाटी (राष्ट्र की परम्परा)असम के मशहूर गायक और म्यूजिक आइकॉन जुबीन गर्ग की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 19 सितंबर को सिंगापुर के सेंट जॉन्स आइलैंड के पास तैराकी के दौरान डूबने से उनका निधन हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनकी मौत स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई थी, लेकिन अब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हादसा स्विमिंग करते समय हुआ था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच

सिंगापुर पुलिस फोर्स (SPF) ने जुबीन गर्ग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच निष्कर्ष भारत के उच्चायोग को सौंप दिए हैं।

रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना (drowning) बताई गई है।

पुलिस ने साफ किया कि इस मामले में हत्या या किसी तरह की आपराधिक साजिश की आशंका नहीं है।

19 सितंबर को जुबीन गर्ग को पानी से बेहोशी की हालत में निकाला गया और उन्हें सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई।

दोस्तों के साथ यॉट पर थे मौजूद

गायक जुबीन गर्ग 19 सितंबर को एक यॉट पर दर्जनभर दोस्तों और परिचितों के साथ मौजूद थे।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वे लाइफ जैकेट पहनकर पानी में छलांग लगाते नजर आए।

बाद में उन्होंने जैकेट उतार दिया और दोबारा पानी में कूद गए, जिसके बाद यह हादसा हुआ।

यह वीडियो लाखों बार देखा जा चुका है।

असम में शोक और कार्यक्रम रद्द

जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत-सिंगापुर कूटनीतिक संबंधों के 60 वर्ष और इंडिया-आसियान वर्ष के जश्न के तहत आयोजित नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचे थे।

19 से 21 सितंबर तक होने वाला यह भव्य आयोजन उनकी मौत के कारण रद्द कर दिया गया।

असम समेत पूरे उत्तर-पूर्व भारत में शोक की लहर है और उनके चाहने वालों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मैनेजर और आयोजक गिरफ्तार

असम पुलिस ने गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंता को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।

दोनों पर गैर-इरादतन हत्या, आपराधिक साजिश और लापरवाही से मौत का कारण बनने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

लोनी: शराब के पैसे मांगने पर ठेका कर्मचारी पर चाकू से हमला, आरोपी पर मुकदमा दर्ज

लोनी/गाजियाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी इलाके में शराब के पैसे मांगना एक कर्मचारी को भारी पड़ गया। राम विहार कॉलोनी स्थित शराब के ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी पर आरोपी ने चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।

घटना कैसे हुई

पीड़ित सागर, डगरपुर निवासी हैं और राम विहार कॉलोनी के शराब ठेके पर नौकरी करते हैं।

मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे शेखर नामक युवक (निवासी मंडोला गांव) शराब लेने ठेके पर पहुंचा।

शराब की बोतल देने के बाद जब कर्मचारी ने पैसे मांगे तो आरोपी गाली-गलौज करने लगा।

विरोध करने पर शेखर ने चाकू से हमला कर दिया, जिससे कर्मचारी घायल हो गया।

पुलिस की कार्रवाई

एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है।

क्षेत्र में तनाव

इस वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से ठेकों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की मांग की है।

प्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों को दिवाली से पहले मिलेगा बोनस और बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (DA)

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों को दिवाली से पहले बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार की घोषणा के बाद अब राज्य सरकार भी बोनस और महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी करने जा रही है। इसका सीधा फायदा करीब 15 लाख अराजपत्रित कर्मचारियों और 12 लाख पेंशनरों को मिलेगा।

बोनस की घोषणा

राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी, वर्कचार्ज और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा।बोनस की अधिकतम राशि 7,000 रुपये हो सकती है।इस निर्णय से सरकार के खजाने पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा।

महंगाई भत्ता (DA) में 3% की बढ़ोतरी

सातवें वेतनमान वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 55% से बढ़कर 58% किया जाएगा।

इसका लाभ लगभग 16 लाख कर्मचारियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मियों को मिलेगा।

पेंशनरों को भी महंगाई राहत (Dearness Relief) की बढ़ी हुई दर का फायदा मिलेगा।

पांचवें और छठवें वेतनमान वाले कर्मचारियों के डीए में बढ़ोतरी की घोषणा बाद में होगी।

दिवाली से पहले तोहफा

राज्य सरकार दीपावली से पहले ही इस घोषणा को लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे प्रदेशभर के कर्मचारियों और पेंशनरों के घरों में त्योहार की खुशियां और बढ़ेंगी।

पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन: शास्त्रीय संगीत जगत में शोक

मिर्जापुर/वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया है। वे 89 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें मिर्जापुर के ओझला स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज सुबह 5 बजे उन्होंने अपने मिर्जापुर आवास पर अंतिम सांस ली।

लंबे समय से बीमार थे पंडित जी

परिवार के अनुसार पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत पिछले कई महीनों से खराब थी। उन्हें बेड सोर और खून की कमी की समस्या थी। बीते शनिवार को अचानक हार्ट अटैक आने के बाद उनका इलाज जारी था। डॉक्टरों ने उन्हें रक्त चढ़ाया, लेकिन स्थिति गंभीर बनी रही।

परिजनों की पुष्टि

उनकी पुत्री और केबी कॉलेज की प्रोफेसर नम्रता मिश्रा ने बताया कि सुबह पिता का निधन हो गया। उन्होंने कहा, “बाबूजी लंबे समय से बीमार थे, डॉक्टर लगातार इलाज कर रहे थे, लेकिन आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।”

संगीत जगत में शोक की लहर

पंडित छन्नूलाल मिश्र बनारस घराने के विख्यात शास्त्रीय गायक थे। उन्हें ठुमरी, दादरा और भजन गायन में महारत हासिल थी। उनके निधन की खबर से पूरे संगीत जगत और उनके शिष्यों में शोक की लहर दौड़ गई है।

सम्मान और योगदान

भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।

वाराणसी से उनका गहरा नाता रहा और वे भक्ति संगीत और लोक धुनों के प्रचार-प्रसार में हमेशा अग्रणी रहे।

अंतिम संस्कार

परिवार ने बताया कि अंतिम संस्कार की तैयारी मिर्जापुर/वाराणसी में की जा रही है। संगीत प्रेमी और शिष्य बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश में आज का मौसम: कई जिलों में बारिश, कुछ जगहों पर धूप

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उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश का मौसम आज बदलता हुआ नज़र आ रहा है। सुबह से ही कई जिलों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों तक पूर्वी यूपी में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश

गोरखपुर, देवरिया, वाराणसी और बलिया जिलों में सुबह से ही हल्की बारिश और बूंदाबांदी दर्ज की गई। दोपहर बाद आसमान साफ होने के आसार हैं, लेकिन शाम तक फिर बादल लौट सकते हैं।

पश्चिमी यूपी में धूप और उमस

लखनऊ, कानपुर, मेरठ और आगरा में मौसम अपेक्षाकृत साफ है। दिन में 32–34 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच सकता है और उमस बढ़ सकती है।

मौसम अलर्ट

पूर्वी यूपी में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा।

पश्चिमी और मध्य यूपी में आंशिक बादल और हल्की बारिश की संभावना।

मानसून की वापसी में देरी, अक्टूबर की शुरुआत में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

शहरन्यूनतम तापमानअधिकतम तापमानस्थिति
लखनऊ25°C33°Cआंशिक बादल
वाराणसी26°C31°Cसुबह बारिश, दोपहर धूप
गोरखपुर25°C30°Cहल्की बारिश
प्रयागराज27°C34°Cउमस और बादल
कानपुर26°C33°Cआंशिक बादल
आगरा27°C34°Cधूप और उमस

जनता के लिए सुझाव

पूर्वी यूपी के लोग छाता या रेनकोट साथ रखें।

उमस से बचने के लिए हल्के कपड़े पहनें और पर्याप्त पानी पिएं।

खेतों में काम करने वाले किसान गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों से बचें।दशहरा और नवरात्रि के आयोजनों में मौसम का ध्यान रखें।

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आज का इतिहास : 2 अक्टूबर

2 अक्टूबर का दिन भारत और विश्व इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह तिथि भारत को दो महान नेता—महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री—के जन्मदिन के रूप में गौरवान्वित करती है। साथ ही दुनिया में कई ऐसी घटनाएँ घटीं, जिन्होंने इतिहास की धारा को नई दिशा दी।

🇮🇳 भारत

1869 – पोरबंदर (गुजरात) में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ, जिन्हें पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाई।

1904 – उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ। उनका नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजता है।

1924 – केरल में जन्मीं वैज्ञानिक अन्ना मणि ने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें “Weather Woman of India” कहा जाता है।

1928 – इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई, जो आगे चलकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) बना।

🌍 विश्व

1836 – वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन HMS Beagle की पाँच वर्षीय यात्रा पूरी कर इंग्लैंड लौटे। इसी यात्रा से उनकी प्रसिद्ध “विकासवाद की थ्योरी” का आधार तैयार हुआ।

1835 – टेक्सास की स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई गोंज़ालेस में लड़ी गई।

1958 – पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी ने फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त की।

1967 – थर्गूड मार्शल अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में पहले अफ्रीकी-अमेरिकी न्यायाधीश बने।

1990 – चीन की ज़ियामेन एयरलाइंस की फ़्लाइट 8301 हाइजैकिंग हादसे में 128 लोगों की मौत।

2002 – अमेरिका में “बेल्टवे स्नाइपर अटैक” शुरू हुए, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई।

🎂 जन्म

1847 – पॉल वॉन बेनेडेन, बेल्जियम के प्रसिद्ध जीवविज्ञानी।

1890 – ग्राउचो मार्क्स, अमेरिकी हास्य अभिनेता।

1911 – वाल्टर हंटिंगटन, अमेरिकी गणितज्ञ।

🕯️ पुण्यतिथि

1535 – गुरु अंगद देव जी, सिखों के दूसरे गुरु।

1985 – रॉक हडसन, प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेता।

🗓️ दिवस और महत्व

गांधी जयंती – भारत में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है।

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस – संयुक्त राष्ट्र ने गांधी जी की जयंती को पूरी दुनिया में International Day of Non-Violence के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

जन्मतिथि बदलकर बढ़ाई नौकरी, एसीएमओ पर मुकदमा

चार साल तक अतिरिक्त सेवा, विभागीय जांच में हुआ खुलासा

रायबरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के स्वास्थ्य विभाग में तैनात रहे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डॉ. दशरथ यादव पर जन्मतिथि में हेरफेर कर अतिरिक्त नौकरी करने का मामला दर्ज हुआ है। शहर कोतवाली में उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक अंबेडकर नगर निवासी डॉ. यादव ने अभिलेखों में अपनी जन्मतिथि 1 नवंबर 1963 दर्ज कराई, जबकि वास्तविक तिथि 1 नवंबर 1959 है। इस हेरफेर से उन्होंने चार साल तक अतिरिक्त सेवा की और लाभ उठाया।
विभागीय जांच में मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीनचन्द्रा ने अपर पुलिस अधीक्षक संजीव सिन्हा को पत्र भेजकर मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की। एएसपी के आदेश पर शहर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन एसीएमओ के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया।
एएसपी संजीव सिन्हा ने बताया कि सीएमओ की संस्तुति पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

करियर राशिफल 2 अक्टूबर 2025 :

धन लक्ष्मी योग से मेष, मिथुन, कर्क समेत पलटेगी इन 5 राशियों की किस्मत

पंडित प्रमोद मिश्र

2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को विशेष धन लक्ष्मी योग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा मकर राशि में गोचर कर रहे हैं और उन पर मंगल की दृष्टि पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह संयोग आर्थिक लाभ, पद-प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र में तरक्की के नए अवसर देने वाला है। नौकरीपेशा और व्यापारियों दोनों के लिए यह समय शुभ रहेगा।

आइए विस्तार से जानते हैं सभी 12 राशियों का करियर और धन संबंधी राशिफल—

मेष (Aries)
आज का दिन कार्यक्षेत्र में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। प्रशासनिक दबाव या कानूनी उलझन की संभावना है। पलायन से बेहतर है कि संयम और धैर्य से परिस्थितियों का सामना करें। साहस बनाए रखें, सफलता मिलेगी।
वृषभ (Taurus)
आज दूसरों पर निर्भर रहने की आदत त्यागनी होगी। परिश्रम और आत्मनिर्भरता ही आपको लाभ दिलाएगी। व्यापार और नौकरी में अपने प्रयासों से सफलता प्राप्त होगी। यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने का है।
मिथुन (Gemini)
दिन शुभ है। छिटपुट आर्थिक लाभ की संभावना है। पुराने काम पूरे होंगे और मानसिक शांति मिलेगी। कार्यक्षेत्र में समर्पण और सकारात्मक दृष्टिकोण सफलता का मार्ग खोलेंगे। रात का समय परिजनों संग सुखद बीतेगा।
कर्क (Cancer)
दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की का समय है। सामाजिक कार्यों में प्रगति होगी। किसी संस्था से जुड़ने पर प्रतिष्ठा बढ़ेगी। समाज सेवा में योगदान आपके मान-सम्मान में वृद्धि करेगा।
सिंह (Leo)
लंबे समय से किए गए प्रयास रंग लाएंगे। कार्यक्षेत्र में मेहनत का उचित फल मिलेगा। आय में बढ़ोतरी होगी और नए स्रोत खुल सकते हैं। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें, सफलता पक्की है।
कन्या (Virgo)
आज का दिन साधारण है। मित्रों या प्रियजनों के लिए जिम्मेदारियां भूलना नुकसानदेह हो सकता है। फालतू कार्यों से दूर रहें और प्राथमिकताओं पर ध्यान दें। कार्यक्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी।
तुला (Libra)
आज अपनी क्षमता पर भरोसा करें। दूसरों पर निर्भर रहने से प्रगति धीमी होगी। आत्मविश्वास और समय पर निर्णय लेने से तनाव कम होगा। व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखना लाभदायक रहेगा।
वृश्चिक (Scorpio)
भावनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। कानूनी मामलों या प्रशासनिक मुद्दों से जुड़ाव संभव है। उदार स्वभाव आपको चुनौती में डाल सकता है। सोच-समझकर ही कदम बढ़ाएं।
धनु (Sagittarius)
भाग्य का साथ मिलेगा। किसी रुके हुए कार्य के पूरा होने से लाभ होगा। शाम तक रुका धन प्राप्त हो सकता है। लंबे समय बाद कोई शुभ समाचार आपके उत्साह को बढ़ाएगा।
मकर (Capricorn)
दिन चुनौतीपूर्ण है। कार्यक्षेत्र में दबाव अधिक रहेगा। निजी जीवन में जल्दबाजी परेशानी ला सकती है। वाहन या साधन संबंधी अड़चन संभव है। सूझबूझ और धैर्य ही आज आपके सहायक रहेंगे।
कुंभ (Aquarius)
लक्ष्य के करीब पहुंचकर भी खुद को पीछे महसूस करेंगे। अंतिम प्रयास ही सफलता दिलाएगा। मेहनत और आत्मविश्वास बनाए रखें। करियर में सफलता कदम चूमेगी।
मीन (Pisces)
दिन अनुकूल रहेगा। किसी महात्मा या गुरु के विचारों से प्रेरणा मिलेगी। बाधाओं को शांति और गंभीरता से पार करेंगे। यह धैर्य आपके बड़े निर्णयों में सकारात्मक असर डालेगा।

2 अक्टूबर 2025 का दिन विशेष है। धनु, कर्क, मिथुन, सिंह और मेष राशि के लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। वहीं मकर और कुंभ राशि को संयम और धैर्य से परिस्थितियों का सामना करना होगा

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2 अक्टूबर 2025 पंचांग: दशमी तिथि, विजयादशमी का पर्व, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और ग्रह नक्षत्र की संपूर्ण जानकारी

🌸 आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी पर आज विजयादशमी और सरस्वती विसर्जन, जानें 2 अक्टूबर 2025 का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रह नक्षत्र

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 के अनुसार आज का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन विजयादशमी (दशहरा) तथा सरस्वती विसर्जन का पर्व मनाया जाएगा।

पंचांग अनुसार तिथि और योग
👉 दशमी तिथि आज शाम 7:11 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा।
👉 नक्षत्र आज सुबह 9:13 बजे तक उत्तराषाढ़ा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र रहेगा।
👉 योग की बात करें तो रात 11:28 बजे तक सुकर्मा योग और उसके बाद धृति योग प्रभावी रहेगा।
👉 करण में सुबह 7:12 बजे तक तैतिल, शाम 7:11 बजे तक गर, इसके बाद वणिज करण रहेगा।

सूर्य और चंद्र का संचार
🌞 सूर्योदय – 6:22 AM
🌇 सूर्यास्त – 6:09 PM
🌙 चंद्रोदय – 3:04 PM
🌘 चंद्रास्त – 2:11 AM (3 अक्टूबर)
आज चंद्रमा मकर राशि में संचार करेगा जबकि सूर्य कन्या राशि में रहेंगे।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
शुभ काल: अभिजीत मुहूर्त 11:52 AM से 12:39 PM तक रहेगा।
⚠️ राहुकाल: दोपहर 1:44 PM से 3:12 PM तक रहेगा।
⚠️ यमगंड: सुबह 6:22 AM से 7:51 AM तक।
⚠️ दुर्मुहूर्त: 10:18 AM से 11:05 AM और 3:01 PM से 3:48 PM।
त्यौहार और व्रत
विजयादशमी (दशहरा) – बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व।
सरस्वती विसर्जन – मां सरस्वती की प्रतिमाओं का विसर्जन।
विशेष योग और फलदायक समय
👉 आज ध्वांक्ष और ध्वजा आनंदादि योग रहेगा।
👉 चंद्रबल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के जातकों के लिए दिन शुभ रहेगा।
👉 कल यानी 3 अक्टूबर को प्रातः 6:23 बजे से सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है।

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23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में गहरे होंगे द्विपक्षीय संबंध

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली नई दिल्ली यात्रा, बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की रणनीति पर पड़ेगा असर। अमेरिका की चेतावनी के बीच तेल व्यापार जारी रखने का संकेत।


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
।रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संभावित रूप से 5-6 दिसंबर को भारत आ सकते हैं, जहां वे 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पुतिन की पहली नई दिल्ली यात्रा होगी।

क्रेमलिन ने पहले ही पुष्टि की थी कि पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई में भेजे गए निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, हालांकि दोनों देशों ने अभी तक यात्रा की अंतिम तारीख का ऐलान नहीं किया है। पुतिन की यह यात्रा चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद सामने आई है।

विश्लेषकों के अनुसार, बदलती वैश्विक राजनीति और बढ़ती चीन-रूस भारत निकटता के बीच यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिका-भारत संबंधों पर प्रभाव
हाल ही में, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ भारत के व्यापार पर 50 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात करके यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित कर रहा है।

हॉवर्ड लुटनिक, अमेरिकी वाणिज्य सचिव, ने चेतावनी दी कि यदि भारत अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचना चाहता है, तो उसे राष्ट्रपति के निर्णयों के अनुरूप कदम उठाने होंगे।

भारत सरकार ने अमेरिका के इस रुख को पाखंडी और अनुचित बताते हुए कड़ी निंदा की है। अधिकारियों ने कहा कि कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बाज़ार की मांग और राष्ट्रीय हितों के अनुसार किया जा रहा है।

भारत-रूस ऊर्जा सहयोग जारी
पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति और रूस के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के साथ व्यापार और रणनीतिक साझेदारी, भारत की वैश्विक भू-राजनीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।

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