Wednesday, July 8, 2026
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“मिशन शक्ति 5.0 के तहत एंटी रोमियो स्क्वॉड सक्रिय, बेटियों की सुरक्षा को लेकर चला विशेष अभियान”।

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के नेतृत्व में मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत एंटी रोमियो स्क्वॉड ने रविवार को जिले में महिला एवं बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों में आत्मरक्षा, सुरक्षा और हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा महिला थाना की उप निरीक्षक शंकर सिंह, श्रीराम यादव, महिला आरक्षी नेहा सिंह, पीआरडी माया, अंजली मौर्या, स्नेहा और लीलावती ने सिटी क्षेत्र, समय माता मंदिर, काशीराम आवास कॉलोनी तथा ग्राम सभा बनकटिया में भ्रमण कर महिलाओं से संवाद किया।

टीम ने मिशन शक्ति के उद्देश्यों, महिला सम्मान और आत्मरक्षा के महत्व पर चर्चा की। साथ ही हेल्पलाइन नंबर —
1090 (महिला शक्ति हेल्पलाइन), 181 (महिला सहायता), 112 (आपातकालीन सेवा), 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन), 1098 (बाल सहायता), 108 व 102 (स्वास्थ्य सेवा) तथा 1930 (साइबर हेल्पलाइन) — की जानकारी दी।

अभियान के दौरान 150 पंपलेट वितरित किए गए और एंटी रोमियो टीम ने मेहदावल बाईपास, बघौली व समय माता मंदिर क्षेत्र में चेकिंग अभियान भी चलाया। इस दौरान 25 युवकों से पूछताछ की गई, जबकि तीन युवकों से माफीनामा भरवाकर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

टीम ने कहा कि “महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। मिशन शक्ति का उद्देश्य समाज में सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का माहौल बनाना है।”

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टोक्यो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जापान की सियासत में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। कभी हेवी-मेटल ड्रम बजाने वाली साने ताकाइची अब देश की सबसे ताकतवर पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की नई प्रमुख बन गई हैं। दशकों से सत्ता में काबिज यह पार्टी अब पहली बार किसी महिला के नेतृत्व में आई है — और पूरा जापान इस सवाल से गूंज रहा है:
क्या ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं, या फिर यह बदलाव सिर्फ प्रतीकात्मक है?

64 वर्षीय साने ताकाइची ने पार्टी चुनाव के दूसरे दौर में शिंजिरो कोइज़ुमी को मात दी। अब 15 अक्टूबर को संसद में प्रधानमंत्री के लिए मतदान होना है, जो यह तय करेगा कि जापान अपने इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने जा रहा है या नहीं।
🌸 रूढ़िवादी सोच की प्रतिनिधि या महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल?
ताकाइची को जापानी राजनीति में एक सख्त, अनुशासित और राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाना जाता है। वह एलडीपी के दक्षिणपंथी धड़े से आती हैं, जिसे कभी शिंजो आबे जैसे नेताओं का समर्थन मिला था।
हालांकि, लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर उनकी नीतियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने समलैंगिक विवाह, विवाहित जोड़ों के अलग उपनाम रखने और महिलाओं के शाही उत्तराधिकार जैसे मुद्दों का विरोध किया है।
फिर भी, उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों से जुड़ा एक मानवीय पक्ष दिखाया है — जब उन्होंने रजोनिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात की और पुरुषों से महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील होने की अपील की।
⚙️ ड्रम से संसद तक का सफर
साने ताकाइची की यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं।
कभी वह हेवी-मेटल बैंड में ड्रम बजाया करती थीं और बाइक चलाने की शौकीन थीं।
1993 में नारा से सांसद चुनी जाने के बाद उन्होंने राजनीति में अपना ठोस स्थान बनाया।
उन्होंने आर्थिक सुरक्षा, आंतरिक मामलों और लैंगिक समानता मंत्रालय जैसे कई अहम पद संभाले हैं।
उनकी प्रेरणा ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर हैं, और शिंजो आबे के साथ उनका रिश्ता ‘राजनीतिक विश्वास’ पर आधारित रहा है।
🌏 विदेश नीति में सख्त और स्पष्ट रुख
विदेश नीति के मोर्चे पर ताकाइची का दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट और कठोर है।
वह चीन के खिलाफ आक्रामक नीति, दक्षिण कोरिया के प्रति सतर्कता, और अमेरिकी दबाव के खिलाफ दृढ़ रुख के लिए जानी जाती हैं।
वह यासुकुनी श्राइन की नियमित आगंतुक हैं — एक ऐसा मुद्दा जिसे लेकर चीन और दक्षिण कोरिया नाराज रहते हैं।
उनकी योजना में रक्षा बजट बढ़ाना, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, और न्यूक्लियर फ्यूजन अनुसंधान को प्राथमिकता देना शामिल है।
⚖️ बदलाव का प्रतीक या परंपरा का नया चेहरा?
साने ताकाइची का एलडीपी प्रमुख बनना निस्संदेह जापान के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि यह महिला नेतृत्व भले ही ऐतिहासिक हो, लेकिन विचारधारा के स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं लाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक युकी त्सुजी के शब्दों में —

“ताकाइची थैचर जैसी मजबूत नेता तो बन सकती हैं, लेकिन वह नारीवादी नहीं।”
अब 15 अक्टूबर का दिन तय करेगा कि क्या जापान सचमुच ‘महिला युग की शुरुआत’ की ओर बढ़ेगा या यह भी पुरानी राजनीतिक परंपराओं की वापसी भर साबित होगी।

“ससुर से पत्नी के संबंधों के शक में पगला पिता बना दरिंदा, एक वर्षीय मासूम की बेरहमी से हत्या”

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया थाना क्षेत्र के सुरेमनपुर गांव में रविवार की सुबह मानवता को झकझोर देने वाली वारदात ने हर किसी का दिल दहला दिया। पत्नी और ससुर के बीच अवैध संबंधों के शक में एक पिता ने अपने ही एक वर्षीय मासूम बेटे की गला रेतकर हत्या कर दी।

घटना रविवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपी रुपेश तिवारी (निवासी सुरेमनपुर) ने अपने घर में सो रहे बेटे कीनू तिवारी (1 वर्ष) पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी जान ले ली। घटना के वक्त मृतक की तीन वर्षीय बहन अनन्या मौके पर मौजूद थी, जिसने पुलिस को बताया कि “मेरे पापा ने ही मेरे भाई को मारा।”

जानकारी के अनुसार, आरोपी की शादी चार साल पहले रीना तिवारी (निवासी सूर्यभानपुर, थाना दोकटी) से हुई थी। प्रारंभ में सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे रुपेश को अपनी पत्नी और पिता कमलेश तिवारी के बीच अवैध संबंधों का शक होने लगा। इसी शक ने परिवार को बर्बाद कर दिया।

शनिवार की रात रुपेश नशे की हालत में घर पहुंचा और पत्नी तथा पिता से झगड़ा करने लगा। स्थिति बिगड़ने पर दोनों जान बचाकर पड़ोसी के घर चले गए, लेकिन बच्चे घर में ही रह गए। अगले दिन सुबह जब वे लौटे तो मासूम कीनू खून से लथपथ मृत पड़ा मिला।

परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मां रीना तिवारी के बयान पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।

सीओ बैरिया मोहम्मद फहीम कुरैशी ने बताया,

“आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है, पूछताछ जारी है। घटना बेहद अमानवीय है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मां रीना तिवारी ने पुलिस को दिए बयान में कहा —

“मेरे पति पहले भी निर्दयी हरकतें कर चुके हैं। 2023 में उन्होंने मेरे 15 दिन के बच्चे को दूध के बिना तड़पकर मर जाने दिया था। अब मेरे एक साल के बेटे की हत्या कर दी। मुझे इंसाफ चाहिए।

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देवरिया में हैवानियत: पिता ने खो दी इंसानियत, नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार”

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद देवरिया के कोतवाली क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध कर दिया। पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उसे हिरासत में ले लिया है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने पीड़िता को चिकित्सकीय परीक्षण हेतु भेज दिया है।

क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी ने बताया कि, “मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।”

इस घिनौनी वारदात ने समाज की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोग आरोपित को कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
सभी पहलुओं पर जॉच होनी चाहिए आज के समाज में स्वार्थ में घिनौनी आरोप लगा कर फसाने या समझौता की भी बाते आ रही है।

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“छठ जैसी श्रद्धा से मनाएं लोकतंत्र का पर्व: बिहार चुनाव 2025 पर बोले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार”

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर रविवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने राज्य में चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा रिपोर्ट साझा की। उन्होंने कहा कि आयोग का लक्ष्य निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।
ज्ञानेश कुमार ने इस अवसर पर BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर्स) की सराहना करते हुए उन्हें “लोकतंत्र की रीढ़” बताया। उन्होंने कहा कि “बिहार के 90,217 BLOs ने जिस समर्पण से मतदाता सूची को अपडेट किया है, वह देशभर के लिए मिसाल है।”
भोजपुरी और मैथिली में मतदाताओं को दिया संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार ने बिहार की बहुभाषिक संस्कृति को सम्मान देते हुए भोजपुरी में मतदाताओं का अभिनंदन किया—

“सभी के कोटि-कोटि आभार जतावत बानी।”
इसके बाद उन्होंने मैथिली में भी कहा—
“सभी का अभिवादन करै छी।”
इस पहल ने चुनावी माहौल को मानवीय स्पर्श दिया और बिहार की जनता से जुड़ाव दर्शाया।

100 प्रतिशत वेबकास्टिंग: पारदर्शिता का नया अध्याय
CEC ने घोषणा की कि बिहार देश का पहला राज्य होगा जहाँ सभी मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग की जाएगी।
इससे चुनाव प्रक्रिया पर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। मतदाता सूची में सीरियल नंबर बड़े फॉन्ट में और उम्मीदवारों के रंगीन फोटो होंगे ताकि पहचान में कोई भ्रम न रहे।
लोकतंत्र का उत्सव, छठ जैसी आस्था से मनाएं
ज्ञानेश कुमार ने जनता से अपील की—

“जिस तरह बिहारवासी छठ पूजा पूरे उत्साह और श्रद्धा से मनाते हैं, उसी भावना से लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लें। अपन भागीदारी निभाई, वोट के पक्का करी।”
उनका यह संदेश पूरे राज्य में लोकतांत्रिक जागरूकता का प्रतीक बन गया।
चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। उससे पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।
आयोग ने पहले ही राज्य के सभी जिलों में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा कर ली है।
CEC ने कहा कि डीएम, एसपी, मुख्य सचिव, डीजीपी, सीआरपीएफ और अन्य नोडल अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठकें हो चुकी हैं, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हों।

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बिहार में बड़ा ब्यूरोक्रेटिक फेरबदल: ADM से लेकर संयुक्त सचिव तक बदलें पद

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पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले बिहार सरकार ने प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने रविवार को एक बड़ा निर्णय लेते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के 102 अधिकारियों का तबादला कर दिया।
निर्देश दिया गया है कि सभी अधिकारी अविलंब अपने नए पदस्थापना स्थल पर योगदान करें। यह तबादला सूची चुनावी सत्र से पहले प्रशासनिक तैयारी और जिला स्तर पर कार्यकुशलता बढ़ाने के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

इस सूची में कई अपर समाहर्ता (ADM), संयुक्त सचिव, और विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
पटना के अपर जिला दंडाधिकारी (आपूर्ति) अमलेंदु कुमार सिंह को गृह विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है। वहीं रवींद्र कुमार दिवाकर, जो पटना में अपर समाहर्ता (विशेष कार्यक्रम) थे, को किशनगंज का उप विकास आयुक्त नियुक्त किया गया है।
अन्य प्रमुख तबादले:
मनोज कुमार को विशेष कार्य पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
संजीव कुमार को विशेष सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
शैलेश कुमार दास को अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन, नालंदा
राकेश रंजन को अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था), भागलपुर
राजेश रौशन को संयुक्त निदेशक, पर्यटन
सतीश रंजन सिन्हा को अपर सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग
मो. सफीक को अपर जिला दंडाधिकारी, विधि व्यवस्था, गया
सुधांशु शेखर को संयुक्त सचिव, योजना एवं विकास विभाग
राखी कुमारी केसरी को सचिव, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग
वसीम अहमद को विशेष कार्य पदाधिकारी, पंचायती राज विभाग
सत्यप्रकाश को जिला भू अर्जन पदाधिकारी, पटना
विकास कुमार को अपर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग एवं बिहार युवा आयोग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार
इसके अतिरिक्त बांका के परिवहन पदाधिकारी प्रेमकांत सूर्य को पटना का अपर समाहर्ता (विधि व्यवस्था),
अरवल के वरीय उप समाहर्ता देवज्योति कुमार को नगर दंडाधिकारी, पटना,
बक्सर के वरीय उप समाहर्ता आदित्य कुमार को जिला पंचायती राज पदाधिकारी, गया बनाया गया है।
विशाल आनंद, जो पूर्व में बियाडा के उप महाप्रबंधक थे, अब बेल्ट्रान में महाप्रबंधक (परियोजना) होंगे,
जबकि सुनील कुमार को संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग का दायित्व दिया गया है।
राज्य सरकार की यह तबादला सूची चुनावी तैयारी, प्रशासनिक पारदर्शिता और ज़मीनी स्तर पर शासन की मजबूती के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

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RRB NTPC Graduate Level 2025: रेलवे में स्नातक स्तर के 5800 पदों पर भर्ती, 21 अक्तूबर से करें आवेदन

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने युवाओं के लिए शानदार अवसर जारी किया है। आरआरबी ने NTPC Graduate Level 2025 के तहत 5800 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इच्छुक उम्मीदवार 21 अक्टूबर 2025 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 (रात 11:59 बजे) तक निर्धारित की गई है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

आरआरबी एनटीपीसी भर्ती 2025: रिक्त पदों का विवरण

इस भर्ती के तहत रेलवे में निम्नलिखित पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी –

स्टेशन मास्टर

मालगाड़ी प्रबंधक

यातायात सहायक (मेट्रो रेलवे)

मुख्य वाणिज्य सह टिकट पर्यवेक्षक (CCTS)

कनिष्ठ लेखा सहायक सह टंकक (JAA)

वरिष्ठ लिपिक सह टंकक

शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा

आरआरबी एनटीपीसी स्नातक स्तर की इस भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री या समकक्ष योग्यता होना आवश्यक है।
आवेदक की आयु 18 से 33 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

चयन प्रक्रिया

आरआरबी NTPC Graduate Level 2025 भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी:

  1. CBT 1 (कंप्यूटर आधारित परीक्षा – प्रथम चरण)
  2. CBT 2 (कंप्यूटर आधारित परीक्षा – द्वितीय चरण)
  3. टाइपिंग टेस्ट / कौशल परीक्षा या योग्यता परीक्षा
  4. दस्तावेज सत्यापन (Document Verification)
  5. चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination)

दस्तावेज़ सत्यापन में उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता, आयु, पहचान और अन्य प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। अंतिम चरण में उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट होगा, जिससे उनकी शारीरिक फिटनेस की पुष्टि की जाएगी।

महत्वपूर्ण तिथियां

आवेदन शुरू होने की तिथि: 21 अक्टूबर 2025

आवेदन की अंतिम तिथि: 20 नवंबर 2025

परीक्षा की संभावित तिथि: दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 (आधिकारिक अधिसूचना में पुष्टि होगी)

आधिकारिक सूचना

इस भर्ती से संबंधित संक्षिप्त नोटिस अक्टूबर के पहले सप्ताह में रोजगार समाचार (Employment Newspaper) में प्रकाशित किया गया है। विस्तृत अधिसूचना जल्द ही RRB की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जारी की जाएगी।

हरियाणा शिक्षक स्थानांतरण: नीति, प्रक्रिया और उलझन

(वित्त विभाग की मंजूरी, स्थानांतरण में देरी, दंपत्ति मामलों, मध्य-अवधि स्थानांतरण, ऑनलाइन प्रणाली, नई नियुक्तियाँ, प्रत्यायोजन और निष्पक्षता के बहाने।)
फाइनेंस विभाग से अतिरिक्त भत्ते की मंजूरी होने के बावजूद फ़ाइलों का बार-बार लंबित रहना कर्मचारियों में भ्रम पैदा करता है। दंपत्ति मामलों में पहले से चल रहे मामलों के बावजूद पुनः प्रक्रिया शुरू होना यह संकेत देता है कि नीति जानबूझकर जटिल बनाई जाती है, जिससे निर्णय बाधित हों। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मध्य-अवधि स्थानांतरण का कोई प्रभाव नहीं होगा, लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं दिखाई देता। इन सभी कारणों से शिक्षक असंतोष में हैं और वे चाहते हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया स्पष्ट, समयबद्ध और निष्पक्ष हो, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और संतुलन बनाए रखा जा सके। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि मध्य-अवधि स्थानांतरण का कोई प्रभाव नहीं होगा, लेकिन वास्तविकता में प्रशासन इसे अक्सर बहाना बनाने के तरीके के रूप में इस्तेमाल करता है। केवल पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष प्रक्रिया ही शिक्षक और छात्रों के हित में स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकती है।

डॉ. सत्यवान सौरभ

हरियाणा में शिक्षक स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया वर्षों से विवादों और असंतोष का कारण रही है। शिक्षक और कर्मचारी यह महसूस करते हैं कि नीतियाँ जितनी स्पष्ट घोषणाओं में दिखाई देती हैं, उतनी ही वास्तविकता में जटिल और उलझी हुई हैं। यह मामला केवल कर्मचारियों के हित का नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

जब वित्त विभाग से किसी पद की स्वीकृति मिल जाती है, तब भी कई बार स्थानांतरण प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो जाता है। ऐसा बजट संबंधी बाधाओं, दस्तावेजी प्रक्रियाओं या प्रशासनिक स्तर पर बार- बार अनुमोदन की अनावश्यकता के कारण होता है। इस विलंब से केवल प्रक्रिया धीमी नहीं होती, बल्कि नीति के उचित और समय पर पालन में बाधा आती है। कर्मचारी महीनों तक अनिश्चितता में रहते हैं, जिससे उनका मनोबल गिरता है और शिक्षा प्रणाली की दक्षता प्रभावित होती है।

दंपत्ति मामलों में, जहाँ शिक्षक अपने जीवनसाथी के साथ पदस्थापन चाहते हैं, पहले से लंबित मामलों के बावजूद पुनः जांच और अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इससे कर्मचारी अनावश्यक असुविधा में पड़ते हैं और यह नीति की जटिलता को स्पष्ट करता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्रशासन कई बार प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचता है।

स्थानांतरण रोकने वाले पक्षों की बात करें, तो इसमें कई स्तर शामिल हैं। लंबे समय से किसी स्थान पर तैनात कर्मचारी अपने स्थान से हटना नहीं चाहते। संघ और संगठन अपने सदस्यों के हित की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करते हैं। इसके अलावा, प्रशासन भी अनुभवी कर्मचारियों को संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक बनाए रखना पसंद करता है। इन सभी कारकों के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया अक्सर संतुलित और निष्पक्ष नहीं होती।

शिक्षा मंत्री ने प्रेस में कहा था कि मध्य-अवधि स्थानांतरण लागू होंगे, लेकिन वास्तविकता में इसका कोई प्रभाव नजर नहीं आता। यह विरोधाभास कर्मचारियों में भ्रम और असंतोष पैदा करता है। घोषणाओं और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच यह अंतर यह संदेश देता है कि केवल बयानों से नीति लागू नहीं होती।

अन्य विभागों में ऑनलाइन स्थानांतरण प्रणाली सहज रूप से लागू हो रही है, जबकि शिक्षा विभाग में यह प्रक्रिया धीमी और जटिल बनी हुई है। इसका कारण केवल तकनीकी कठिनाई नहीं है। प्रशासनिक प्रतिरोध, पारंपरिक कार्य संस्कृति और स्थानीय अधिकारियों की प्राथमिकताएँ इसमें योगदान करती हैं। जब तक सभी पक्ष पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित नहीं करेंगे, ऑनलाइन प्रणाली प्रभावी नहीं हो सकती।

नई नियुक्तियों के समय पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के बावजूद स्थानांतरण में देरी होती है। इससे प्रश्न उठता है कि क्या कर्मचारियों को जानबूझकर दूर भेजा जा रहा है या कुछ को सुविधा दी जा रही है। आने वाले वर्ष में जनगणना के कारण स्थानांतरण न होने की संभावना इस प्रश्न को और गंभीर बना देती है।

प्रत्यायोजन की प्रथा भी समस्या बनी हुई है। इसके तहत अपने कर्मचारियों को विशेष पदों या स्थानों पर समायोजित किया जाता है। यह न केवल पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठाता है, बल्कि पक्षपात और प्रशासनिक भेदभाव को भी बढ़ावा देता है। यदि समय रहते इसे रोका और सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ, तो शिक्षक और विभाग दोनों को लाभ होगा।

इन सभी जटिलताओं के बावजूद शिक्षक समुदाय चाहता है कि नीति स्पष्ट, समयबद्ध और निष्पक्ष हो। केवल घोषणाओं और प्रेस विज्ञप्तियों से समाधान नहीं होगा। आवश्यकता है कि प्रशासन ऑनलाइन प्रणाली को प्रभावी बनाए, पक्षपात और व्यक्तिगत लाभ पर आधारित निर्णयों को रोके। शिक्षक और छात्र यह विश्वास रखें कि स्थानांतरण प्रक्रिया शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और संतुलन बनाए रखने के लिए है, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए।

हरियाणा में शिक्षक स्थानांतरण नीति केवल जटिल और उलझी हुई नहीं है, बल्कि इसका कार्यान्वयन भी संतुलित और निष्पक्ष नहीं है। प्रशासनिक देरी, अनावश्यक अनुमोदन, पक्षपात और तकनीकी बाधाओं के कारण शिक्षक असंतोष में हैं। इसके परिणामस्वरूप शिक्षा प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सरकार को चाहिए कि वह स्पष्ट नियमावली और नीति लागू करे, समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करे, ऑनलाइन प्रणाली को प्रभावी बनाए, और पक्षपात तथा व्यक्तिगत लाभ पर आधारित निर्णयों को रोके। तभी शिक्षक अपने कार्य में संतुष्ट रह पाएँगे और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। अन्यथा यह प्रक्रिया केवल विवाद, असंतोष और भ्रम का स्रोत बनी रहेगी।

हरियाणा सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में स्थिरता, न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करे। तभी शिक्षा प्रणाली का वास्तविक उद्देश्य – गुणवत्ता, संतुलन और विद्यार्थियों के हित – पूरा हो सकेगा।

हरियाणा में शिक्षक स्थानांतरण नीति केवल जटिल और उलझी हुई नहीं है, बल्कि इसका कार्यान्वयन भी संतुलित और निष्पक्ष नहीं है। वित्त विभाग से अनुमोदन मिलने के बावजूद विलंब, दंपत्ति मामलों में पुनः प्रक्रिया, और प्रत्यायोजन के माध्यम से पक्षपात जैसी समस्याएँ लगातार बनी हुई हैं। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि मध्य-अवधि स्थानांतरण का कोई प्रभाव नहीं होगा, लेकिन वास्तविकता में प्रशासन इसे अक्सर बहाना बनाने के तरीके के रूप में इस्तेमाल करता है। केवल पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष प्रक्रिया ही शिक्षक और छात्रों के हित में स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकती है।

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“सीतामढ़ी में जलप्रलय: सोनबरसा- सुरसंड बने टापू, चार फीट पानी में डूबा हनुमान चौक”

सीतामढ़ी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जिले की स्थिति गंभीर बना दी है। शहर के कई मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में लोगों की जिंदगी थम-सी गई है।
सोनबरसा और सुरसंड प्रखंडों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है। सोनबरसा बाजार स्थित हनुमान चौक पर करीब चार फीट पानी बह रहा है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। बाजार की कई दुकानें पानी में डूब गई हैं और सैकड़ों परिवारों को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।

सुरसंड क्षेत्र में भिटठामोड़-चोरौत राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज जलधारा बहने से आवागमन बाधित है। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन द्वारा राहत कार्य जारी है, लेकिन जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। वहीं, स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और लोगों से ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की अपील की गई है।

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गुरुग्राम: महिला टीचर से सामूहिक दुष्कर्म, जिम ट्रेनर समेत चार आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

गुरुग्राम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गुरुग्राम में एक नामी स्कूल की महिला टीचर से सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 29 वर्षीय पीड़िता की शिकायत पर महिला थाना ईस्ट पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। शनिवार को चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, सितंबर महीने में पीड़िता की मुलाकात एक पार्टी में एक जिम ट्रेनर युवक से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और एक अक्टूबर की रात आरोपी युवक ने महिला को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद आरोपी महिला टीचर को सुशांत लोक स्थित अपने एक दोस्त के कमरे पर ले गया, जहां उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया।

इसी दौरान आरोपी ने अपने तीन दोस्तों को भी वहां बुला लिया, जिन्होंने मिलकर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद दो अक्टूबर को पीड़िता अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी आपबीती बताई।

शिकायत के आधार पर महिला थाना ईस्ट पुलिस ने मामला दर्ज कर चारों आरोपितों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि सभी आरोपी जिम में ट्रेनर के तौर पर काम करते हैं और जुबा डांस की कोचिंग भी देते हैं।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सीडीओ प्रत्यूष पाण्डेय ने रविंद्र किशोर शाही स्टेडियम से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) प्रत्यूष पाण्डेय ने रविंद्र किशोर शाही स्टेडियम के पूर्वी द्वार से जागरूकता प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया।

इस अवसर पर सीडीओ पाण्डेय ने कहा कि संचारी रोगों के उन्मूलन में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। लोगों के जागरूक होने से डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया जैसी बीमारियों को पनपने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि स्वच्छता बनाए रखें, जलजमाव न होने दें और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करें।

सीडीओ ने कहा कि शासन की मंशा है कि रोगों की रोकथाम में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग, नगर निकाय, पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास, पशुपालन, वन और कृषि विभाग सहित दर्जनभर विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि

5 से 31 अक्टूबर तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान

11 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा।

इस अवधि में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार, इंफ्लुएंजा, फाइलेरिया, काला-आजार, कुष्ठ रोग एवं कुपोषण के मामलों की जानकारी एकत्र करेंगी। सभी डेटा ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाएगी। साथ ही, कार्यकर्ता प्रत्येक परिवार का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) सृजन करेंगे और उन्हें इसके लाभों से अवगत कराएंगे।

कार्यक्रम में नोडल अधिकारी डॉ. हरेंद्र, डॉ. आर.पी. यादव, डॉ. कार्तिक पाण्डेय, डॉ. अश्विनी पाण्डेय, डीएमओ सी.पी. मिश्रा, डीसीपीएम राजेश कुमार गुप्ता, सीफार संस्था के प्रतिनिधि, सीवीओ डॉ. ए.के. वैश्य, रविजीत बहादुर सिंह, उपेंद्र तिवारी, सफाई निरीक्षक श्रद्धानंद सहित कई अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण खनुआ नदी पुल के पास सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। यह पुल देवरिया-कुशीनगर की सीमा पर स्थित है और बघौचघाट कस्बा को फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र (कुशीनगर) से जोड़ता है।

जानकारी के अनुसार, बारिश के तेज बहाव से पुल के एप्रोच रोड का किनारा टूटकर बह गया है। इससे मार्ग पर जलजमाव और मिट्टी धंसने की समस्या उत्पन्न हो गई है। स्थानीय लोगों ने खतरे को देखते हुए पेड़ की डालियां रखकर आने-जाने वालों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।

खनुआ नदी पर बना यह पुल देवरिया और कुशीनगर दोनों जनपदों के बीच संपर्क का प्रमुख मार्ग है। इस रास्ते से प्रतिदिन दोनों जिलों के छात्र-छात्राएं स्कूल-कॉलेज, कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्रों के लिए आते-जाते हैं। साथ ही ग्रामीण बाजार करने और मरीजों के इलाज के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कर मार्ग को सुचारु किया जाए, ताकि आमजन को परेशानी से राहत मिल सके।

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सर्प का कहर: खेत लौटते छात्र और सोती महिला की डसने से मौत, संतकबीरनगर में मातम पसरा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।जिले के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार की रात सर्पदंश की दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। अलग-अलग गांवों में जहरीले सर्प के डंसने से दसवीं के छात्र और एक नवविवाहिता महिला की मौत हो गई। दोनों को जिला अस्पताल से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही दोनों की सांसें थम गईं।
🌾 खेत लौटते समय छात्र को डंसा सर्प
खलीलाबाद क्षेत्र के रसूलपुर गांव निवासी अंश प्रताप सिंह (15), पुत्र स्वर्गीय देवेंद्र प्रताप सिंह, दसवीं के छात्र थे। शुक्रवार की शाम वह खेत में खाद डालने गए थे, तभी अचानक उनके दाहिने हाथ की उंगली पर जहरीले सर्प ने काट लिया।
रात करीब 11 बजे जब अंश की तबीयत बिगड़ने लगी, तब उन्होंने घटना की जानकारी घरवालों को दी। घबराए परिजन तत्काल उन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताते हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया — रास्ते में ही अंश ने दम तोड़ दिया।
तीन माह पहले ही पिता के निधन के बाद अब बेटे की मौत से मां शकुंतला सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम थीं, वातावरण शोकाकुल हो उठा।
🏠 नींद में सर्पदंश की शिकार बनी महिला
दूसरी घटना राउतपार गांव की है। यहां के देवेंद्र पांडेय की पत्नी नेहा पांडेय (24) शुक्रवार रात घर में सो रही थीं, तभी उन्हें सर्प ने डंस लिया।
परिजन घबराकर उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत में उन्हें भी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
दुर्भाग्य से, रास्ते में ही नेहा की भी मौत हो गई।
एक ही रात में दो परिवारों के उजड़ जाने से पूरे इलाके में मातम और भय का माहौल है।

⚠️ ग्रामीणों में भय, प्रशासन से सर्पदंश उपचार केंद्र की मांग
लगातार बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे एंटी-स्नेक वेनम और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

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⚡ “बागापार फीडर बना खतरे का जाल — लटकते तार और झुके पोल से मंडरा रहा मौत का साया”

रिपोर्ट: सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। चौक विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाला बागापार फीडर इन दिनों लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्रभर में झुके हुए बिजली के पोल और नीचे लटकते तार किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग की लापरवाही चरम पर है और बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

बागापार से रामपुर महराजगंज मार्ग पर स्थित बागापार चौराहे के पास, महज सौ मीटर की दूरी पर तालाब किनारे लगा खंभा पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पोल में गहरी दरारें हैं और तार लगभग जमीन से सट गए हैं। यह खतरनाक दृश्य पूरे फीडर क्षेत्र में आम बात हो चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि “अगर विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो किसी दिन कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।”
स्थानीय समाजसेवी उमेश चन्द्र मिश्र ने बताया कि उन्होंने बार-बार इस समस्या की शिकायत विद्युत विभाग से की, लेकिन कागजों में ही कार्रवाई सीमित रही। उन्होंने कहा कि हाल ही में झुगवा क्षेत्र में बिजली करंट से हुई दुर्घटना की पुनरावृत्ति यहां कभी भी हो सकती है।

वहीं बागापार के युवा ग्राम प्रधान विवेक प्रताप सिंह उर्फ निक्कू सिंह ने भी विभागीय उदासीनता पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब मैं सीधे जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराऊंगा, और यदि सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाने में देर नहीं की जाएगी।”

ग्रामीणों की मांग है कि पूरे बागापार फीडर की विद्युत लाइन की तत्काल जांच व मरम्मत की जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान न जाए।

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काशी में आफत की बारिश: 136 साल का रिकॉर्ड टूटा, BHU में जलभराव से ऑक्सीजन वाहन फंसा, इमरजेंसी में घुसा पानी

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। वाराणसी में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने 136 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। 24 घंटे में 180 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई — जो अक्टूबर महीने में अब तक की सबसे अधिक बारिश है। बीएचयू मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 1889 से अब तक इतनी बारिश कभी नहीं हुई थी।

BHU अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर लदा वाहन फंसा

भारी बारिश के कारण बीएचयू अस्पताल परिसर में कमर तक पानी भर गया। इमरजेंसी, ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में जलभराव से मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बाल रोग विभाग के सामने खड़ी ऑक्सीजन सिलिंडर से लदी गाड़ी पानी में फंस गई। कई एंबुलेंस और निजी वाहन बंद हो गए। पार्किंग में ही बाल रोग विभाग की ओपीडी चलानी पड़ी।

बारिश ने तोड़ा 1900 और 2013 का रिकॉर्ड

9 अक्टूबर 1900 में 24 घंटे में 138.9 मिमी बारिश हुई थी।

2013 में पूरे अक्टूबर में कुल 153.5 मिमी बारिश हुई थी।

इस बार सिर्फ एक दिन में 180 मिमी बारिश दर्ज की गई।

बीएचयू के मौसम विभाग के मुताबिक, अक्टूबर की औसत बारिश से 2000 गुना अधिक बारिश हुई। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल रविवार से बारिश में राहत मिलेगी।

तापमान में 5.6 डिग्री की गिरावट

लगातार बारिश के कारण वाराणसी का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया। हवा में नमी 87 से 100 प्रतिशत के बीच रही, जबकि 15-20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।

यातायात व्यवस्था चरमराई

भारी जलभराव के चलते शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक जाम लग गया।

बरेका अंडरपास जलभराव से बंद किया गया।

सुंदरपुर-नरिया मार्ग पर कैंसर अस्पताल के सामने पेड़ गिरने से जाम लगा रहा।

लंका-मालवीय चौराहा, सामनेघाट और भगवानपुर में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

स्कूल बंद, ऑनलाइन पढ़ाई का आदेश

लगातार बारिश के कारण शनिवार को जिले के स्कूल नहीं खुले। डीआईओएस ने सभी बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन क्लास संचालित करने का निर्देश जारी किया।

ड्रेनेज सिस्टम फेल, निगम ने लगाए 24 पंप

नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बताया कि BHU का ड्रेनेज सिस्टम फेल होने की वजह से मालवीय चौराहे और ट्रॉमा सेंटर के पास जलभराव हुआ। नगर निगम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 24 पंप लगाए हैं।